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महाराष्ट्र: मुंबई में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी लेकिन मेयर के चुनाव में शिंदे फ़ैक्टर से नया पेंच
- Author, संदीप राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत के बाद देश की सबसे समृद्ध महानगर पालिका बीएमसी (बृहन्मुंबई महानगर पालिका) के मेयर को लेकर चर्चा तेज़ हो गई है.
चुनाव में महायुति की निर्णायक जीत के एक दिन बाद, मेयर के अहम पद को लेकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच खींचतान सामने आ गई है.
बीएमसी चुनावों में बीजेपी को 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है. हालांकि उसकी सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं.
227 सीटों वाली बीएमसी में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 सीटें मिली हैं. स्पष्ट बहुमत के बावजूद मेयर के पद पर सहमति बनना आसान नहीं दिख रहा.
दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना यूबीटी (65) है. कांग्रेस के 24 पार्षद जीते हैं.
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शनिवार को शिंदे ने पार्टी के 29 नवनिर्वाचित पार्षदों को शहर के एक पांच सितारा होटल में ठहराया.
मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक पार्टी नेताओं ने इसे प्रतिद्वंद्वी दलों की ओर से कथित तोड़फोड़ की कोशिशों से बचाव का क़दम बताया.
उधर, शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने होटल को जेल बनाने के आरोप लगाए हैं.
उन्होंने कहा, "एकनाथ शिंदे ने होटल को जेल बना दिया है. ताज होटल में चुनाव जीतकर जिन पार्षदों को रखा गया है, उन्हें रिहा किया जाना चाहिए. उन्हें डर के मारे वहां रखा गया है. कई लोग हमारे संपर्क में हैं. मुंबई में बीजेपी का मेयर कौन चाहता है? यहां तक कि एकनाथ शिंदे भी यह नहीं चाहते."
बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) के बीच तनाव के संकेत शनिवार को उस समय भी मिले जब शिंदे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से बुलाई गई कैबिनेट बैठक में हिस्सा नहीं लिया.
इससे पहले भी शिंदे कई बार कैबिनेट बैठकों से दूरी बनाकर फडणवीस सरकार के फैसलों पर अपनी नाराजगी जताते रहे हैं.
ढाई दशक के शिवसेना की सत्ता का अंत
बीएमसी पर ठाकरे परिवार का दो दशक से भी अधिक समय तक कब्ज़ा रहा है लेकिन 2017 में शिवसेना में विभाजन के बाद कई पार्षदों ने एकनाथ शिंदे का हाथ पकड़ लिया और इससे ठाकरे परिवार की पकड़ कमज़ोर हुई.
इस चुनाव में शिवसेना यूबीटी और राज ठाकरे के एमएनएस (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के बीच गठबंधन था. एमएनएस को छह सीटें आईं.
शिवसेना में विभाजन के बाद से यह उद्धव ठाकरे के लिए यह बहुत अहम चुनाव था. निकाय चुनावों में शिवसेना(यूबीटी), एनसीपी (एससीपी) और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव लड़ा. ये पार्टियां विधानसभा चुनावों में एक साथ थीं.
मौजूदा बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन के मुकाबले बाकी विपक्ष की सीटें मिलकर 106 पहुंचती हैं जो बहुमत से पांच कम है.
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका एनसीपी के दोनों धड़ों को लगा है. एनसीपी (शरद पवार) सिर्फ़ एक सीट जीत पाई है और एनसीपी (अजीत पवार) को महज़ तीन सीटें मिलीं हैं. ओवैसी की पार्टी के आठ पार्षद जीते हैं.
नतीजे आने के बाद शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने एक्स पर लिखा, "अगर एकनाथ शिंदे शिवसेना का जयचंद नही बनते तो मुंबई में बीजेपी का मेयर कभी नही बनता!"
बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, "सबसे बड़ी लड़ाई मुंबई में थी. हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि मुंबई में भाजपा जीत गई. मुकाबला बराबरी का है. एमएनएस को कम सीटें मिलीं. मेरे ख्याल से उन्हें करीब 15 सीटें मिलनी चाहिए थीं. हम बहुत कम अंतर से 10 से 15 सीटें हार गए. लेकिन बीएमसी में विपक्ष की ताकत सत्ताधारी दल के बराबर है. हमारे 105 लोग अंदर हैं. ये लोग क्या करेंगे? ये मुंबई को बेच नहीं सकते. हम वहां डटे हुए हैं."
इन नतीजों पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि हालांकि 25 सालों बाद उनका मेयर नहीं बनेगा लेकिन एक बात साबित हुई है कि जनता का विश्वास बरकरार है.
उन्होंने कहा, "बीते 25 सालों में हमने जो भी काम किया, ख़ासकर कोविड के समय में, तो हमें अपेक्षा थी कि मुंबई से मतदाता हमारे साथ रहेंगे और वे रहे भी. हमें और सीटें आने की अपेक्षा थी."
लेकिन सत्तापक्ष की स्पष्ट जीत के बावजूद बीएमसी के मेयर के चुनाव में अभी वक़्त है.
इंडियन एक्सप्रेस ने मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के हवाले से कहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में हिस्सा लेने 17 से 24 जनवरी के बीच दावोस में जा रहे हैं.
अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा कि, "उनकी वापसी के बाद शिंदे के साथ औपचारिक बैठक होगी," और यह भी जोड़ा कि "बीएमसी मेयर के लिए लॉटरी के जरिए श्रेणी तय करने की प्रक्रिया भी तब तक पूरी हो जाएगी. उससे पहले मेयरशिप पर चर्चा करना बेकार है."
शिंदे क्या चाहते हैं?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ये घटनाक्रम शिवसेना की राजनीतिक अहमियत दिखाने और मेयर पद पर समझौता न करने के संकेत हैं. नवनिर्वाचित पार्षदों को होटल में ले जाने के पीछे शायद यह एक कारण है.
हालांकि शिवसेना के एक नवनिर्वाचित पार्षद अमोल घोले ने कहा, "किसी को भी ज़बरदस्ती वहां नहीं रखा गया है. हमें आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बुलाया गया है. शिवसेना प्रमुख शिंदे साहब सभी पार्षदों को मार्गदर्शन देंगे. इनमें से कई पहली बार पार्षद बने हैं और उनके लिए दो दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया है...यहां 29 पार्षद मौजूद हैं."
उन्होंने कहा कि मेयर का पद बीजेपी के साथ मिलकर तय किया जाएगा और उनकी पार्टी ने 'मेयर पद के लिए कोई मांग नहीं रखी' है.
महाराष्ट्र के वरिष्ठ पत्रकार विजय चोरमारे ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मुंबई मे शिंदे की पार्टी का परफॉर्मेंस निराशाजनक रहा है. इसलिए बार्गेनिंग के माध्यम से शिंदे सत्ता मे कुछ सम्मानजनक हिस्सा चाहते हैं."
हालांकि अभी मेयर के चुनाव की प्रक्रिया में वक्त लगेगा इसलिए इस बीच कई उतार चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं. मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है.
राज्य का शहरी विकास विभाग श्रेणी तय करने के लिए लॉटरी की प्रक्रिया कराता है. औपचारिक प्रक्रिया अगले हफ्ते शुरू होने की संभावना है.
चोरमारे कहते हैं, "मेयर पद के लिए आरक्षण चुनाव के पहले निकाले जाने चाहिए थे, मगर वो नहीं निकाले. इसी कारण किस महापालिका मे कौन सी जाति या वर्ग का मेयर होगा ये अभी तक तय नहीं हुआ है. पुरुष, महिला, ओबीसी, अनुसूचित जाति के आधार पर रोटेशन अभी तय होना है. शिंदे का अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट वो आरक्षण निकालता है. 22 जनवरी को आरक्षण तय होने की संभावना है. उसके बाद नाम पर चर्चा हो सकती है."
क्या शिंदे ने 2.5 साल का कार्यकाल चाहते हैं?
बीएमसी मेयर को लेकर खींचतान के बीच मुंबई बीजेपी प्रेसीडेंट अमीत साटम ने कहा, "मुंबई का मेयर महायुति से होगा. मेयर हिंदू और मराठी होगा. ऐस व्यक्ति जो पीएम नरेंद्र मोदी के विज़न में भरोसा करता है और सीएम देवेंद्र फडणवीस के दिशानिर्देश के तहत काम करेगा."
ऐसी ख़बरें भी हैं कि शिवसेना शिंदे गुट ने मेयर के लिए 2.5 साल का कार्यकाल मांगा है, इस पर अमीत साटम ने कहा, "इस तरह की कोई बात नहीं हुई है. देवेंद्र जी और एकनाथ जी के बीच अच्छा तालमेल है. वे साथ बैठकर चर्चा करेंगे और मेयर महायुति का बनेगा. मेयर कौन होगा और कितने साल के लिए होगा, ये महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कि बीएमसी को भ्रष्टाचार मुक्त किया जाए. मुंबई का विकास अहम है."
विजय चोरमारे कहते हैं, "मुंबई मे बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिव सेना ने मिलकर चुनाव लड़े थे. दोनों को बहुमत मिला है. मेयर बीजेपी का होगा इसमे कोई संदेह नहीं क्योंकि उनके पास ज़्यादा सीटें हैं. मगर एकनाथ शिंदे की पार्टी के समर्थन के बिना मेयर नहीं बन सकता."
"और ऐसी स्थिति मे एकनाथ शिंदे बार्गेनिंग कर रहे हैं कि 2.5 साल मेयर शिवसेना का हो. बीजेपी नहीं मानेगी. मगर शिंदे स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन पद की मांग करेंगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.