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ईरान में उथल-पुथल का भारत और दुनिया पर हो सकता है ये असर- द लेंस
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों ने मध्य-पूर्व में उथल-पुथल का माहौल बना दिया है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वो महंगाई, बेरोज़गारी और अर्थव्यवस्था की ख़स्ता हालत से परेशान हैं.
वहीं ईरान के सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की और उसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत की ख़बरें सामने आईं, जबकि बहुत से लोग गिरफ़्तार भी हुए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान से जुड़े बयान दे रहे हैं, जिससे विश्लेषक इस सोच में हैं कि क्या वो वास्तव में ईरान में किसी सैन्य हस्तक्षेप तक जा सकते हैं.
ईरान ने अमेरिका और इसराइल पर आरोप लगाए हैं कि वे देश में लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य हस्तक्षेप हुआ तो क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया होगी.
बात मध्य-पूर्व की है तो भारत के लिए भी अहम है क्योंकि भारत के लिए ईरान सिर्फ़ एक पड़ोसी देश नहीं बल्कि व्यापार साझेदार भी है.
ख़ासकर चाबहार बंदरगाह जैसी परियोजनाएं भारत को मध्य-पूर्व और अफ़ग़ानिस्तान तक पहुंच देती हैं.
ऐसे में सवाल कई हैं. ईरान में इस बार के विरोध प्रदर्शन क्या पिछले प्रदर्शनों से अलग हैं?
इस मामले में सख़्त कार्रवाई से जुड़ी बयानबाज़ी से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का असल उद्देश्य क्या है?
क्या अमेरिका ईरान में सैन्य कार्रवाई कर सकता है? भारत के लिए ये अस्थिरता अच्छी है या बुरी?
द लेंस के आज के एपिसोड में इन सभी सवालों पर चर्चा हुई.
इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए भारत के पूर्व राजनयिक महेश सचदेव, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में सेंटर फ़ॉर वेस्ट एशियन स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर सुजाता ऐश्वर्य और ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन में मध्य पूर्व मामलों के डिप्टी डायरेक्टर कबीर तनेजा.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर / सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः जमशैद अली
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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