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नवनीत, सलीमा और लालरेमसेमी ने ऐसे भारत को सेमीफ़ाइनल में पहुंचाया
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने उतार-चढ़ावों से भरपूर कॉमनवेल्थ गेम्स की महिला हॉकी के ग्रुप ए में कनाडा को 3-2 से हराकर पांचवीं बार सेमीफाइनल में स्थान बना लिया. भारत इस जीत से ग्रुप में इंग्लैंड के बाद दूसरे स्थान पर रहा.
भारतीय टीम इंग्लैंड से हारने की वजह से दूसरे स्थान पर रही है. दूसरे स्थान पर रहने के कारण भारत को पांच अगस्त को खेले जाने वाले सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया की दिग्गज टीम का सामना करना पड़ेगा.
भारत की इस जीत की हीरोइन निश्चय ही फारवर्ड नवनीत कौर रहीं. उन्होंने अपने अनुभव का भरपूर फ़ायदा उठाया. वह लगातार हमलों की अगुआई कर रहीं थीं. उन्हें इस प्रयास में शर्मिला और संगीता कुमारी का भी भरपूर सहयोग मिला. यह दोनों ही खिलाड़ी फ़र्राटा लगाने वाली हैं. उनकी गति की वजह से उन्हें पकड़ना आसान नहीं था. इस कारण कनाडा का डिफ़ेंस कई बार ख़तरे में पड़ा.
कनाडा के बराबरी पर आने के बाद भारत पर जब दवाब हावी होने लगा तो इस स्थिति में टीम काफ़ी संयमित रही और हमलों को पैनापन देने का प्रयास करती रही. वंदना कटारिया, सलीमा टेटे और नेहा के प्रयास से दाएं फ्लैंक से बने हमले पर भारत ने गोल जमा दिया. लेकिन अंपायर के रेफ़रल पर मालूम पड़ा कि सलीमा के गेंद लेकर सर्किल में घुसने के समय बैक स्टिक हो गई थी और इस गोल को नकार दिया गया.
कनाडा के डिफ़ेंस ने किया कमाल का प्रदर्शन
कप्तान सारा मैकमानुस की अगुआई वाली कनाडा के डिफ़ेंस की जितनी तारीफ़ की जाए, वह कम है, उन्होंने भारतीय हमलावरों को बहुत ही सफाई से टैकिल करके उन्हें पेनल्टी कॉर्नर लेने से रोके रखा. भारत ने दूसरे मिनट में पहला पेनल्टी कॉर्नर प्राप्त किया और इसके बाद दूसरे पेनल्टी कॉर्नर के लिए 49 वें मिनट तक इंतज़ार करना पड़ा. यही नहीं मैकमानुस के साथ जोहांसेन बचाव करते समय की आपा खोते नहीं दिखे. इस खूबी की वजह से उन्होंने भारत के कई हमलों को विफल किया. भारतीय डिफ़ेंस ने कनाडा को चार पेनल्टी कॉर्नर दिए.
भारत ने शुरुआत में अच्छे प्रदर्शन से 2-0 की बढ़त बनाई पर कनाडा ने संघर्ष क्षमता प्रदर्शन करके 2-2 की बराबरी करके भारत पर दवाब बना दिया. लेकिन भारतीय टीम ने धड़कनों पर क़ाबू रखकर आख़िरी क्वार्टर में हमलावर रुख़ अपनाकर खेल समाप्ति से नौ मिनट पहले विजयी गोल जमाकर अपनी पदक उम्मीदों को बनाए रखा. इस मौके पर पेनल्टी कॉर्नर पर गुरजीत शॉट पर गेंद रिबाउंड हुई और लालरेमसेमी ने गिरते हुए भी गेंद को गोल में सरका दिया और यह गोल भारत को जीत दिलाने वाला साबित हुआ.
भारत ने की आक्रामक शुरुआत
भारतीय टीम पर हर हाल में जीत पाने का दवाब था, क्योंकि गोल अंतर के मामले में कनाडा बेहतर स्थिति में थी, इसलिए मैच ड्रा होने पर कनाडा का ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहता. इसलिए भारत ने दवाब को बेहतर खेल में बदला और खेल शुरू होते ही हमलावर रुख़ अपनाया और दूसरे मिनट में मिले पहले पेनल्टी कॉर्नर पर गोल जमाकर बढ़त बना ली. इस मौके पर गुरजीत की ड्रेग फ्लिक पर गेंद गोलकीपर से रिबाउंड हुई, इस पर सलीमा टेटे ने गोल के सामने से पुश करके गेंद को गोल में डाल दिया.
पहला गोल जमाने के बाद खेल पर भारत का दबदबा बना रहा. उन्होंने बढ़त पाने के बाद रुख़ को रक्षात्मक करने के बजाय हमलावर रुख बनाए रखा. इससे पूरे क्वार्टर में गेंद कनाडा के सर्किल के आसपास ही मंडराते रही . इस दौरान भारत ने कम से कम गोल जमाने के दो मौके बर्बाद किए. एक मौके पर तो संगीता तीन डिफेंडरों को छकाकर गोल के सामने पहुंची पर उनके प्रयास पर भारतीय खिलाड़ी के पैर में लगने से मौक़ा बर्बाद हो गया.
पहले क्वार्टर में एक गोल से पिछड़ी कनाडा ने दूसरे क्वार्टर में हमलावर रुख़ अपनाने की रणनीति अपनाई. इससे भारतीय डिफ़ेंस कुछ समय के लिए बचाव में व्यस्त भी हुआ. लेकिन भारतीय टीम इस क्वार्टर के सातवें मिनट में एक और गोल जमाकर बढ़त को 2-0 कर दिया. इसमें लालरेमसैमी ने दाहिने फ्लैंक से हमला बनाकर सर्किल के सेंटर में खड़ी नवनीत को पास दिया और उन्होंने समय बर्बाद किए बगैर गोल भेदकर बढ़त दोगुनी कर दी.
कनाडा ने की ज़ोरदार वापसी
कनाडा टीम ने जिस तरह से वापसी की, उससे लगा कि वह आसानी से समर्पण करने वाली नहीं है. भारत के दूसरा गोल जमाने के अगले ही मिनट एक जबावी हमले में वह पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने में सफल रही. इस पर ब्रेनी स्टेयर्स ने गोल जमाकर स्कोर को 1-2 कर दिया.
कनाडा टीम की तारीफ़ करनी होगी, क्योंकि उन्होंने दो गोल से पिछड़ने के बाद वापसी ही नहीं बल्कि स्टेयर्स के गोल से 2-2 की बराबरी करने के बाद तीसरे क्वार्टर के आख़िरी क्षणों में दो पेनल्टी कॉर्नर मिले और दूसरे पर तो जोहांनसेन ने ड्रेग फ्लिक से गोल जमाने का प्रयास किया पर भारतीय डिफेंडर ख़तरा टालने में सफल हो गई.
भारत के लिए यह करो या मरो का मैच होने की वजह से उन्होंने विश्व कप में जिस तरह मौक़े गंवाकर अपने ऊपर हार का ख़तरा बना लिया था, उसमें वह यहां सुधार करती दिखी. भारतीय टीम विश्व कप में खेल समाप्ति से दो मिनट पहले तक एक गोल से पिछड़ी हुई थी.
लेकिन आख़िरी समय में सलीमा टेटे ने गोल करके भारत को बराबरी दिलाकर मैच को पेनल्टी शूट आउट में खींच दिया था. शूटआउट में गोलकीपर सविता पूनिया के शानदार बचाव की कहानी तो सभी जानते हैं. सविता के इस प्रदर्शन ने भारत को जीत दिला दी थी. पर इस मैच में भारत ने कभी कनाडा को बढ़त लेने का मौका नहीं दिया.
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