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कॉमनवेल्थ खेल 2022: हॉकी में तीन गोल की बढ़त, फिर भी भारत को नहीं मिली जीत
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की पुरुष हॉकी के पूल बी मेंआख़िरी क्वार्टर में ख़राब प्रदर्शन से जीत को हाथ से निकलते देखा. इससे इंग्लैंड मैच 4-4 से ड्रा कराने में सफल हो गई.
इस ड्ऱ़ॉ से यह ग्रुप अभी खुला हुआ है और आगे के परिणामों से ही तय होगा कि टॉप पर कौन सी टीम रहती है.
मौजूदा हॉकी में किसी भी टीम की बड़ी बढ़त भी मायने नहीं रखती है, क्योंकि मैच को कभी पलटा जा सकता है.
इंग्लैंड की टीम एक समय 1-4 से पिछड़ी हुई थी पर उन्होंने आख़िरी क्वार्टर में शानदार प्रदर्शन करके मैच का रुख एकदम से बदल दिया.
अंतिम कुछ मिनट में तो भारत पर हार का खतरा मंडराता नजर आया. पर भारतीय किसी तरह मैच ड्रॉ कराकर अंक बांटने में सफल हो गई.
एक्शन से भरपूर रहा आख़िरी क्वार्टर
इंग्लैंड ने तीसरे क्वार्टर में लियम एनसेल के गोल से यह संकेत तो दिया कि वह खेल में वापसी का इरादा रखती है.
लेकिन चौथा क्वार्टर शुरू होते ही भारतीय टीम के तारनहार माने जाने वाले हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रेग फ्लिक से गोल भेदकर भारत को 4-1 की बढ़त दिलाकर टीम को जीत की तरफ बढ़ाने का संकेत दिया.
पर इंग्लैंड टीम के इरादे कुछ और थे और उन्होंने इस हाफ में ताबड़तोड़ हमले बनाकर अब तक जो भारतीय डिफेंस अभेद्य नजर आ रहा था, उसमें दरारें नजर आने लगीं.
इंग्लैंड की वापसी में उनकी बदली हुई रणनीति ने भी अहम भूमिका निभाई. पहले वह सीधे शॉटों से गोल भेदने का प्रयास कर रह थे.
लेकिन इस क्वार्टर में उन्होंने गेंद के डिफलेक्शन से गोल भेदने का प्रयास किया, इससे वह तीन गोल जमाकर 4-4 की बराबरी करने में सफल रहे.
भारत की निश्चित नजर आ रही जीत को ड्रॉ में बदलने में खिलाड़ियों के टैकलिंग में संयम नहीं दिखाने ने भी अहम भूमिका निभाई.
जिस समय इंग्लैंड की टीम आख़िरी क्वार्टर में वापसी के लिए ज़ोर बांध रही थी, उस समय हमारे दो खिलाड़ी वरुण कुमार और गुरजंत गलत टैकलिंग करके पीला कार्ड लेकर बाहर बैठ गए थे.
खेल समाप्ति से नौ मिनट पहले भारतीय टीम नौ खिलाड़ियों के साथ खेल रही थी। इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय हमलों की तो जान निकल ही गई. साथ ही बचाव की संरचना भी बिखरती दिखी.
इंग्लैंड के प्रदर्शन में दिखा सोच का असर
हम सभी जानते हैं कि इंग्लैंड की टीम ओलंपिक में ग्रेट ब्रिटेन के नाम से खेलती है. पर दोनों टीमों में खिलाड़ी लगभग एक से ही खेलते हैं.
ओलंपिक हॉकी में भारतीय बादशाहत बनने से पहले ब्रिटेन का दबदबा था.
ब्रिटेन 1908 और 1920 के ओलंपिक में विजेता बन चुका था. लेकिन 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक तक भारतीय टीम चमक बिखेर चुकी थी. ब्रिटेन चाहता था कि उसका जिन देशों पर साम्राज्य रहा है, उनसे हारे नहीं.
इस कारण वह 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक की हॉकी में खेला ही नहीं.
इसके बाद 1940 और 1944 में द्वितीय विश्व युद्ध की वजह से ओलंपिक आयोजित नहीं हुए.
यही वजह है कि1948 के ओलंपिक में भाग लेने तक ब्रिटेन अजेय रहा.
इस ओलंपिक में उसके भाग लेने पर भारत के हाथों पहली बार 0-4 से हार मिली. पर तब तक भारत स्वतंत्र हो चुका था.
इंग्लैंड आज भी हार नहीं मानने के जज़्बे से खेलता दिखा.
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तीसरे क्वार्टर में मिले इंग्लैंड की वापसी के संकेत
इंग्लैंड ने हाफ टाइम तक तीन गोल से पिछड़ने के बाद तीसरे क्वार्टर में वापसी का प्रयास किया. इस क्वार्टर की शुरुआत में तो लगा कि इंग्लैंड हमलों को पैनापन नहीं दे पा रही है.
लेकिन वह इस क्वार्टर में वह लियम एनसेल के गोल से बढ़त अंतर कम करके 1-3 करने में सफल रहा. असल में इस गोल से इंग्लैंड का खेल में वापसी करने का भरोसा बना.
इससे पहले तक लग रहा था कि उनके फारवर्डों के लिए भारतीय डिफेंस को भेदना आसान नहीं है. इंग्लैंड ने जब भी हमला बोला भी तो डिफेंडर उन्हें शॉट लेने के लिए जिस स्पेस की जरूरत होती है, वह नहीं नहीं दे रहे थे.
लेकिन आखिरी क्वार्टर में उन्होंने दिखाया कि उनमें मुश्किल हालात में धड़कनों पर काबू रखकर बाजी पलटना आता है.
भारत ने की अच्छी शुरुआत
भारतीय टीम इस मुकाबले में जिस तरह शुरुआत में खेली, उससे लगा कि वह टोक्यो ओलंपिक से आगे खेल रही हो. टोक्यो में भारत ने क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड को 3-1 से हराया था.
भारत ने आक्रामक अंदाज में खेल की शुरुआत करके खेल पर दबदबा बनाने की रणनीति अपनाई. इसका फायदा उसे पहले क्वार्टर में दो गोल जमाने के रूप में मिला.
ललित उपाध्याय ने भारत को दूसरे मिनट में पहला पेनल्टी कॉर्नर दिलाया. इस पर हरमनप्रीत सिंह की ड्रैग फ्लिक पर गेंद गोलकीपर से रिबाउंड होने पर गोल के सामने खड़े ललित ने गेंद को गोल में डाल दिया.
एक गोल से पिछड़ने के बाद इंग्लैंड के हमलावर रुख अपनाने से लगा कि खेल रोमांचक होने जा रहा है। लेकिन भारत ने क्वार्टर खत्म होने से दो मिनट पहले मनदीप ने सर्किल के टॉप से रिवर्स शॉट से शानदार गोल करके स्कोर 2-0 कर दिया.
भारत ने दूसरे क्वार्टर में भी बढ़त का बचाने के लिए डिफेंसिव रुख अपनाने की गलती नहीं की और हमलों का सिलसिला बनाए रखा. इस क्वार्टर के सातवें मिनट में नीलकांत शर्मा और मनदीप के बीच अच्छा हमला बना और आखिर में मनदीप ने गेंद को गोल में डालने में कोई गलती नहीं की.
हरमनप्रीत ने दिलाई परगट की याद
परगट सिंह भारत के ज़बरदस्त फुल बैक रहे हैं. वह कई बार भारत के लिए खेलते समय खुद ही गेंद पर कब्ज़ा जमाकर अकेले ही विपक्षी खिलाड़ियों को चीरते हुए गोल जमाने को निकल जाते थे.
यही काम इस मैच में हरमनप्रीत सिंह दूसरे क्वार्टर में करते नजर आए. वह अकेले ही गेंद को सर्किल तक तो ले जाने में सफल रहे पर वह गोल पर निशाना साधते, इससे पहले ही गेंद उनसे छिन गई.
हरमनप्रीत की आदत के पीछे उनका युवा दिनों में फारवर्ड के रूप में खेलना है. वह बाद में फुल बैक की ज़िम्मेदारी संभालने लगे.
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