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दिल्ली-एनसीआर में क्यों पड़ रही है शिमला, देहरादून से भी ज़्यादा ठंड?
हिमाचल प्रदेश के शिमला और उत्तराखंड के देहरादून की गिनती भारत के प्रमुख हिल स्टेशनों में होती है, जहां आमतौर पर सर्दियों में कड़ाके की ठंड पड़ती है.
लेकिन बीते कुछ दिनों का न्यूनतम तापमान देखें तो दिल्ली या उससे सटे एनसीआर के इलाक़े जैसे गुड़गांव, नोएडा में इन प्रमुख हिल स्टेशन की तुलना में ज़्यादा ठंड पड़ रही है.
भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक़, 13 जनवरी को दिल्ली का न्यूनतम तापमान जहां 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, हरियाणा में कुछ जगह न्यूनतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस, पंजाब में शून्य, गुड़गांव में शून्य तो वहीं शिमला का न्यूनतम तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस और देहरादून का 6.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है.
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब मैदानी इलाक़ों और पहाड़ी इलाक़ों के तापमान में ये फ़र्क देखने को मिला हो.
मौसम वैज्ञानिक भी इसे सामान्य बताते हैं.
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भारतीय मौसम विभाग में वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बीबीसी हिन्दी से कहा, ''इस मौसम में शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं हिमालय की तरफ़ से भारत के उत्तरपूर्वी मैदानी इलाक़ों की तरफ़ बढ़ती हैं और तापमान तेज़ी से गिरता है.''
नरेश कुमार का कहना है कि इस बार एक्टिव वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण पहाड़ी इलाक़ों में बादल छाए रहे और हीट ट्रैप रही, जिसकी वजह से रात में तापमान तेज़ी से नहीं गिरा. वहीं मैदानी इलाक़ों में आसमान बिल्कुल साफ़ रहा और ठंडी हवाएं चलती रहीं. ऐसे में शाम होते ही गर्मी उड़ गई, तापमान तेज़ी से नीचे गिर गया, इसलिए वहां ज़्यादा ठंड महसूस हुई.
इसे आसान भाषा में समझें तो शिमला, देहरादून जैसे पहाड़ी इलाक़ों की तुलना में मैदानी क्षेत्रों में अधिक ठंड पड़ने की सबसे बड़ी वजह है रात के समय ज़मीन का तेज़ी से ठंडा होना.
दिल्ली-एनसीआर में कई रातों से आसमान साफ़ है. जब बादल नहीं होते, तो दिन की जमा हुई गर्मी रात में सीधे वातावरण में निकल जाती है. इससे ज़मीन और उसके पास की हवा बहुत तेज़ी से ठंडी हो जाती है. इसे वैज्ञानिक भाषा में 'रेडिएशनल कूलिंग' कहा जाता है, लेकिन आसान शब्दों में कहें तो गर्मी टिक नहीं पाती और ठंड बढ़ जाती है.
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में बादल बने हुए हैं. ये बादल एक कंबल की तरह काम करते हैं. वे ज़मीन से निकलने वाली गर्मी को वापस रोक लेते हैं, जिससे रात का तापमान बहुत ज़्यादा नीचे नहीं गिरता. यही वजह है कि पहाड़ों में ठंड होते हुए भी तापमान मैदानों जितना नहीं गिर रहा.
क्यों पड़ रही है इतनी ठंड?
भारतीय मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले 48 घंटे में भारत के उत्तर-पूर्वी इलाक़ों के तापमान में कोई ख़ास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. यानी तापमान ऐसा ही बना रहेगा.
पर विभाग की चेतावनी है कि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा में अगले दो-तीन दिनों के दौरान शीतलहर से भीषण शीतलहर की स्थिति बनी रहने की बहुत संभावना है.
मौसम वैज्ञानिक नरेश कुमार कहते हैं, ''पिछले दो दिनों से उत्तर-पूर्वी भारत, ख़ासकर पंजाब-हरियाणा में काफ़ी ठंड पड़ रही है. इसके लिए विभाग ने रेड अलर्ट भी जारी किया हुआ है. इन इलाक़ों में सुबह का तापमान सामान्य से बहुत कम यानी दो डिग्री से भी कम है.
दिल्ली में अगले दो दिन भीषण ठंड का अनुमान है. चौदह जनवरी की सुबह दिल्ली-एनसीआर के इलाक़ों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. वहीं तापमान चार डिग्री से नीचे रहने का अनुमान है.
हालांकि वो कहते हैं कि 48 घंटों के बाद एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस आ रहा है, जिसके प्रभाव से हवाओं की दिशा बदलती है और तापमान बढ़ने लगता है. नतीजतन 16 जनवरी तक इन मैदानी इलाक़ों में तापमान बढ़ जाएगा.
वहीं अगले चार दिन यानी 16 से 20 तक पश्चिमी हिमालय के इलाक़ों में बर्फ़बारी और बारिश होगी, वहीं मैदानी इलाक़ों जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान और उत्तर प्रदेश में भी 18 जनवरी के बाद बारिश की संभावना बनी रहेगी.
आमतौर पर भारत के राज्य पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख़, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना में शीतलहर का प्रभाव सबसे अधिक रहता है.
मौसम विभाग के मुताबिक़ जब कभी किसी मैदानी इलाक़े में न्यूनतम तापमान दस डिग्री सेल्सियस या उससे कम रिकॉर्ड किया जाता है और पहाड़ी इलाक़ों में शून्य और उससे कम, तब उस स्थिति को शीतलहर कहते हैं.
वहीं अगर अधिकतम तापमान 10 डिग्री से कम और सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री कम हो तो यह 'कोल्ड डे' कहलाता है. और अधिकतम तापमान सामान्य से 6.5 डिग्री से अधिक कम हो तो इसे 'सीवियर कोल्ड' कहते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित