ईरान में दस भारतीयों को जेल भेजने और छह को नज़रबंद किए जाने का पूरा मामला क्या है?

    • Author, मोहम्मद सरताज आलम
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

ईरान की मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ हाल ही में लोग सड़कों पर उतरे थे और अमेरिका वैश्विक मंच पर ईरान पर कार्रवाई करने के संकेत दे रहा था.

ऐसे दौर में ईरान में भारत के 16 लोग नज़रबंद कर रखे गए हैं, इनमें से दस लोगों को जेल में डाल दिया गया है.

ईरान के मौजूदा संकट को देखते हुए इन लोगों के परिवार वाले भी अनिश्चितता के भंवर में फंसे हुए हैं.

दरअसल, बीते साल आठ दिसंबर को अवैध डीज़ल रखने के आरोप में ईरानी अधिकारियों ने 18 क्रू मेंबर सहित समुद्री जहाज़ 'एमटी वैलेंट रोर' को डिब्बा बंदरगाह के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से अपने कब्ज़े में ले लिया था.

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ईरानी अधिकारियों ने इनमें से दस भारतीय क्रू को छह जनवरी के दिन जेल भेज दिया है. 'प्राइम टैंकर्स एलएलसी' कंपनी के इस जहाज़ पर 16 भारतीय, एक बांग्लादेशी और एक श्रीलंकाई क्रू सदस्य थे.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से इस मामले की पुष्टि भारतीय विदेश मंत्रालय में पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान डेस्क पर कार्यरत भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी एम आनंद प्रकाश ने की है.

एम आनंद प्रकाश ने कहा, "मामला वहां के न्यायालय में विचाराधीन है. इसलिए ईरानी अदालत आरोपों पर फ़ैसला करेगी. लेकिन तेहरान स्थित भारतीय दूतावास क्रू मेंबर्स के लिए कॉन्सुलर एक्सेस हासिल करने की कोशिश कर रही है."

उन्होंने आगे बताया कि "दस जनवरी को कॉन्सुलर एक्सेस मिलने की उम्मीद थी लेकिन ईरान में हुई अफ़रा-तफ़री के कारण सफलता नहीं मिली. लेकिन हम प्रयासरत हैं."

इन बातों की पुष्टि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भी अपने प्रेस नोट में की थी. इस मामले में तेहरान स्थित भारतीय दूतावास.. 'डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग' के अलावा कंपनी 'प्राइम टैंकर्स एलएलसी' के संपर्क में है.

हालांकि इस पूरे मामले में ईरान सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का अब तक इंतज़ार है.

वहीं 'प्राइम टैंकर्स एलएलसी' कंपनी के मालिक जोगिंदर बराड़ ने शिप पर मौजूद छह हज़ार मीट्रिक टन अवैध डीज़ल के आरोप को निराधार बताया.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से उन्होंने कहा, "शिप पर डीज़ल नहीं बल्कि 'वेरी लो सल्फ़र फ़्यूल ऑयल' मौजूद है, जो हमारे अन्य शिप की फ़्यूलिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद रहता है, ये सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है."

जोगिंदर बराड़ ने यह भी कहा, "लेकिन शिप के ईंधन को डीज़ल समझ कर हमारे क्रू के साथ ईरान ने दुर्व्यवहार किया, जो निंदनीय है. ऐसे में हमारी पहली प्राथमिकता अपने सभी क्रू को सही सलामत भारत वापस लाने की है."

जहाज़ पर गुज़ारे के लिए नमक चावल खा रहे

उत्तर प्रदेश निवासी जहाज़ के कप्तान विजय कुमार और ऑइलर आकाश गुप्ता, आंध्र प्रदेश के निवासी सेकंड ऑफिसर डूंगा राजशेखर, डेक फ़िटर नंदकी वेंकटेश और रसोइया दिवाकर पुथी के अलावा पंजाब के सीमैन-1 विशाल कुमार को ईरानी सुरक्षाबलों ने पिछले 45 दिनों से अपनी सख्त निगरानी में जहाज़ पर रखा है.

इन छह भारतीयों के अलावा बांग्लादेशी चीफ़ इंजीनियर मोहम्मद लुकमान और श्रीलंकाई विद्युत-तकनीकी अधिकारी प्रिया मनाथूंगा भी जहाज़ पर छह भारतीयों के साथ नज़रबंद हैं.

बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को शिप पर मौजूद क्रू मेंबरों से जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक़ जहाज़ पर मौजूद इन सभी आठ कर्मचारियों की हालत दयनीय है. सभी को मेस के चौदह बाई दस के कमरे में रखा गया है, जहां रात होने पर वे सोते हैं.

हर सुबह वे एक उम्मीद के साथ उठते हैं कि भारतीय दूतावास और कंपनी उन्हें ज़रूर रिहा करवाएगी. इसी उम्मीद में दिन उसी मेस में गुज़र जाता है लेकिन राहत नहीं मिलती. ऐसे हालात पिछले डेढ़ महीने से बने हुए हैं.

दिसंबर के तीसरे हफ्ते में जहाज़ पर मौजूद सारा राशन ख़त्म होने पर 25 दिसंबर को जहाज़ के मालिक जोगिंदर बराड़ ने राशन भेजा. लेकिन एक हफ्ते बाद केवल चावल बचे हैं.

ऐसे हालात में जहाज़ पर मौजूद कंपनी के भारतीय कुक पुथी दिवाकर दिन में दो बार चावल पकाते हैं, जिसे सभी आठ लोग नमक के साथ खाकर गुज़ारा कर रहे हैं.

जहाज़ पर बंधक बनाए क्रू मेंबरों का दावा है कि पानी ख़त्म हुए लगभग दस दिन हो चुके हैं. ऐसे में जहाज़ के लिए मौजूद इंडस्ट्रियल वॉटर जिसके रैपर पर सख्त निर्देश 'नॉट फॉर ड्रिंकिंग' दर्ज है, उसे उबालकर पीने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.

जहाज़ पर मौजूद डीज़ल ख़त्म होने के बाद से वे जेनरेटर का इस्तेमाल सिर्फ़ रात में कर रहे हैं. इन कोशिशों के बावजूद डीज़ल कब तक चल पाएगा, इसको लेकर आशंका बनी हुई है.

जबकि कैप्टन विजय के भाई विनोद पंवार के अनुसार जहाज़ का ईंधन भी ख़त्म होने के कगार पर है.

कर्मियों के सामान ईरानी सुरक्षाबलों के क़ब्ज़े में

आठ दिसंबर को ईरानी सुरक्षा बल टी. वैलेंट रोर के सभी कर्मियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और उनके कपड़ों से भरे बैग जबरन कब्ज़े में लेकर चले गए थे.

काफ़ी निवेदन के बाद ईरानी सुरक्षाबल ने एक मोबाइल उनको दिया, जिसकी मदद से ये छह भारतीय एक-दो दिन में व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से अपने परिवारों से बातचीत करते हैं.

लेकिन जहाज़ के कैप्टन विजय कुमार के भाई विनोद पंवार का मनना है कि इस प्रकार से कॉल भी लम्बी नहीं चलने वाली, क्योंकि 31 जनवरी तक के लिए मात्र 5 जीबी डेटा ही मौजूद है.

शुरुआत में सभी को फ़ोन के इस्तेमाल करने की सख़्त मनाही थी. पिछले कुछ दिनों से मोबाइल फ़ोन से सभी को अपने परिवारों से बातचीत करने की इजाज़त मिली है.

लेकिन जहाज़ पर ख़त्म होते राशन और पानी सहित अन्य बाधित सुविधाओं पर जोगिंदर बराड़ कहते हैं, "हमारी पूरी कोशिश है कि जल्द से जल्द उन्हें सुविधा पहुंचाई जाए."

जबकि सभी परिजन कंपनी से निराशा ज़ाहिर करते हैं.

जहाज़ के थर्ड इंजीनियर केतन मेहता के पिता मुकेश मेहता कहते हैं, "आठ दिसंबर को जब घटना घटी तब ही कंपनी इस मामले को प्राथमिकता देते हुए सक्रियता से लेती तो आज मेरे बेटे सहित दस लोग जेल में न होते."

ईद के बाद शादी होनी थी, अब हैं जेल में

उत्तर प्रदेश के निवासी चीफ़ ऑफ़िसर अनिल कुमार सिंह, सीमैन आकाश कुमार सिंह, गोपाल चौहान और शोएब अख्तर, आंध्र प्रदेश निवासी थर्ड ऑफ़िसर जम्मू वेंकट, हरियाणा निवासी सेकंड इंजीनियर सतीश कुमार, दिल्ली निवासी थर्ड इंजीनियर केतन मेहता, तमिलनाडु निवासी डेक कैडेट ऐरो डेरीश, बिहार निवासी ऑइलर मसूद आलम और मुंबई निवासी ऑइलर अंसारी मंज़ूर अहमद को छह जनवरी को ईरानी सुरक्षाबलों ने जेल भेज दिया.

इन 16 क्रू में कई ऐसे हैं, जिनका सफ़र इस जनवरी में पूरा होने वाला था.

विशाल कुमार, नंदकी वेंकटेश और मसूद आलम का नौ महीने का सफ़र इसी जनवरी में समाप्त होने वाला था.

बिहार के मसूद आलम के पिता इबरार अंसारी कहते हैं कि "बेटे ने पांच जनवरी को आख़िरी बार कॉल किया लेकिन बहुत छोटी बातचीत हुई. तब से आज तक उससे बात नहीं हो सकी."

बेटे के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित इबरार अंसारी बताते हैं, "आठ दिसंबर को जब सभी हिरासत में लिए गए तब मसूद आलम को बुख़ार आ रहा था. अब वह कैसा है ये जानकारी नहीं मिल रही."

ईद के बाद मसूद की शादी होने वाली थी लेकिन उनके परिवार में आने वाली खुशियों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.

मसूद की तरह आंध्र प्रदेश के डुंगा राजशेखर की इकलौती बहन की शादी मार्च में है.

इन हालात पर मुकेश मेहता कहते हैं, "मेरे घर में कोई शादी तो नहीं है, लेकिन बेटे केतन के जेल जाने की जानकारी मिलने के बाद से उनकी मां का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिर रहा है."

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "ये कोई मेरे घर की समस्या नहीं बल्कि सभी 16 परिवारों की है, हमने शायद ही कोई महकमा हो, जिनको मेल न किया हो, लेकिन किसी का कोई जवाब आजतक नहीं आया."

परिजनों के आरोप

मुकेश मेहता की तरह असहाय अनिल सिंह की पत्नी गायित्री सिंह का मानना है कि ईरान उनके पति सहित सभी जहाज़ कर्मियों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.

गायित्री सिंह ने बताया, "ईरान को जहाज़ की कंपनी या उस पर ले जाए जा रहे कार्गो से कोई समस्या है तो वह डायरेक्ट कंपनी से बात करे न कि कर्मचारियों को प्रताड़ित करे."

उनकी बात से सहमत सेलर्स यूनियन ऑफ़ इंडिया के महासचिव प्रदीप सिंह ने बताया, "कंपनी जहाज़ की ऑपरेटर है, जहाज़ पर क्या जाएगा ये कंपनी तय करती है, न कि जहाज़ का क्रू. तो ईरान का क्रू को जेल भेजना पूरी तरह से अमानवीय है."

दुबई स्थित 'प्राइम टैंकर्स एलएलसी' पर कंपनी के मालिक जोगिंदर बराड़ कहते हैं कि "कंपनी प्रयास कर रही है लेकिन ईरान बात करने को राज़ी नहीं है."

जोगिंदर बराड़ बताते हैं कि "ये पहली बार नहीं बल्कि दूसरी बार हुआ है. जब हमारे जहाज़ को ईरान ने कब्ज़े में ले लिया है"

दरअसल 5 दिसंबर 2023 को बराड़ का एक अन्य जहाज़ अवैध डीज़ल के आरोप में ईरान ने पकड़ा था. जोगिंदर बराड़ कहते हैं कि तब उनके शिप में "21 क्रू थे. इनमें से 18 क्रू को नौ महीने बाद ईरान ने रिहा कर दिया. जबकि आज भी तीन क्रू जेल में हैं."

उन्होंने यह बताया, "हम तभी से कोशिश में लगे हैं. अब दूसरा जहाज़ उन्होंने पकड़ लिया है. जबकि दोनों जहाज़ पर वेरी लो सलफ़र फ़्यूल ऑयल के दस्तावेज़ भी मैजूद थे. लेकिन ईरान में कोई सुनवाई नहीं होती."

यूनियन के महासचिव प्रदीप सिंह भी स्वीकार करते हैं कि 'प्राइम टैंकर्स एलएलसी' कंपनी के कई मामले संज्ञान में आए हैं. जिसे लेकर पहले से शिपिंग विभाग के डायरेक्टर जनरल को अवगत कराया गया है.

लेकिन कैप्टन विजय कुमार की पत्नी सोनिया के चेहरे पर ग़म के साथ ग़ुस्सा है. वह कहती हैं, "इन 42 दिनों में हम हताश हो चुके हैं, इसलिए इन हालात से निपटने के लिए हम सभी परिजनों ने हाईकोर्ट का रुख़ किया है."

परिजनों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया

विजय सिंह सहित सभी परिजनों के द्वारा दिल्ली उच्च न्यायलय में यूनियन ऑफ़ इंडिया के विरुद्ध दायर याचिका के बाद 15 जनवरी को सुनवाई हुई.

जिसमें न्यायालय में प्रतिवादी की ओर से उपस्थित सीजीएससी निधि रमन ने नोटिस स्वीकार करते हुए बताया कि "सरकार द्वारा उचित कदम उठाए जा चुके हैं और आगे भी याचिकाकर्ताओं को उनकी शिकायत के निवारण हेतु हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी. "

अब न्यायालय में अगली सुनवाई 21 जनवरी को है.

जबकि कंपनी के मालिक ने कहा, "हमने एक अधिवक्ता को मामले के निपटान के लिए मनोनीत किया है. लेकिन ईरान के अंदरूनी बदतर हालात के कारण अधिवक्ता से क्रू की मुलाक़ात नहीं हो पा रही है."

लेकिन यूनियन महासचिव प्रदीप सिंह कहते हैं कि जिस कंपनी का कार्गो (ऑयल वेसेल) है, उसको ही ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए. क्रू पर किसी तरह का कोई एक्शन नहीं होना चाहिए. इसलिए हम मामले के अध्ययन के बाद सभी क्रू की तत्काल वतन वापसी की मांग के लिए डीजी शिपिंग से मिलेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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