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यूएई के राष्ट्रपति ने सिर्फ़ साढ़े तीन घंटे के अपने भारत दौरे में क्या-क्या समझौते किए
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख़ मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान सोमवार को भारत के साढ़े तीन घंटे के दौरे पर आए.
इस दौरान ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई के राष्ट्रपति को रिसीव करने हवाई अड्डे पर पहुंचे. इससे पहले भारत के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में ये बताया था कि मोहम्मद बिन ज़ाएद अल नाह्यान पीएम मोदी के आमंत्रण पर भारत आ रहे हैं.
भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि ये दौरा क़रीब तीन से साढ़े तीन घंटे का था लेकिन दोनों देशों के नेताओं के बीच ट्रेड, टैरिफ़, ग़ज़ा पीस बोर्ड, ईरान में बदली स्थिति समेत कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई.
विक्रम मिसरी ने बताया, "भारत और यूएई के बीच एक स्ट्रैटेजिक डिफ़ेंस पार्टनरशिप के लिए समझौते का फ़्रेमवर्क तैयार करने की दिशा में काम करने की ख़ातिर एक लेटर ऑफ़ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए."
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डिफ़ेंस, न्यूक्लियर, स्पेस तक... इन सेक्टर पर बात
यूएई के राष्ट्रपति के भारत दौरे पर जानकारी देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, "यह यात्रा भले ही छोटी थी लेकिन अहम थी. "
उन्होंने कहा, "अल नाह्यान का खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया, जो दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी और निकट संबंधों को दर्शाने वाला एक ख़ास संकेत था. इसके बाद दोनों नेता साथ-साथ हवाई अड्डे से प्रधानमंत्री आवास पहुंचे, जहां कुछ विस्तृत और सीमित दोनों तरह की चर्चाएं हुईं. दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों ने भी आपस में बातचीत की."
विक्रम मिसरी ने बताया कि डिफ़ेंस के अलावा स्पेस सेक्टर में भी इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइज़ेशन सेंटर और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच स्पेस इन्फ़्रास्ट्रक्चर के विकास और उसके व्यावसायिकरण को लेकर भी लेटर ऑफ़ इंटेंट (आशय पत्र) साइन किया गया.
इसके तहत प्रक्षेपण के लिए नए कॉम्पलेक्स, सैटेलाइट बनाने वाली इकाइयों, संयुक्त मिशन, स्पेस एकेडमी और ट्रेनिंग सेंटर्स की स्थापना पर काम किया जाएगा.
विक्रम मिसरी ने बताया कि गुजरात के धोलेरा में यूएई की भागीदारी से एक स्पेशल इनवेस्टमेंट रीजन बनाने को लेकर भी लेटर ऑफ़ इंटेंट साइन किया गया.
विदेश सचिव ने बताया कि यह एक मेगा पार्टनरशिप वाली पहल है, जिसके तहत एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) फ़ैसिलिटी, एक ग्रीनफ़ील्ड पोर्ट, एक स्मार्ट शहरी टाउनशिप और रेलवे कनेक्टिविटी, एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट पर ध्यान दिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि भारत और यूएई ने शांति अधिनियम (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ़ न्यूक्लियर एनर्जी) के पारित होने के मद्देनज़र नागरिक परमाणु सहयोग पर भी चर्चा की.
विक्रम मिसरी के मुताबिक़, दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत यूएई सालाना भारत को पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी (लिक्विफ़ाइड नैचुरल गैस) सप्लाई करेगा. उन्होंने बताया कि यूएई अब भारत को एलएनजी सप्लाई करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है.
इसके अलावा भारत के हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस (ADNOC GAS) के बीच सेल्स एंड पर्चेज़ अग्रीमेंट हुआ है, भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर बनाने पर सहमति बनी है.
छोटे से दौरे के मायने क्या?
विक्रम मिसरी ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच यमन में तनाव, ग़ज़ा पीस बोर्ड, ईरान के हालात और टैरिफ़ समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि बैठक मुख्यतौर पर द्विपक्षीय मुद्दों पर ही केंद्रित रही. अल-नाह्यान के दौरे के बाद भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से ये भी बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच साल 2032 तक द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ाकर 200 अरब डॉलर तक ले जाने पर भी सहमति बनी है.
साथ में अबू धाबी में एक 'हाउस ऑफ़ इंडिया' बनाने पर भी बात हुई, जो एक सांस्कृतिक जगह होगी और यहां भारतीय कला, धरोहर और पुरातत्व विशेष का म्यूज़ियम होगा.
हालांकि, जानकार इस दौरे को मध्य पूर्व में उथल-पुथल भरे हालात से भी जोड़ रहे हैं.
सऊदी अरब, ओमान और यूएई में भारत के राजदूत रह चुके तलमीज़ अहमद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "हमारे पड़ोस, हमारे क्षेत्र में जो मुश्किल भरे हालात हैं वही यूएई के राष्ट्रपति को भारत लेकर आ रहे हैं. पश्चिम एशिया हमारे पड़ोस का अभिन्न हिस्सा है और वहां जो भी होता है, वह हम पर सीधा असर करता है. हमारे रिश्तों की करीबी को देखते हुए, यूएई के नेता अपने भारतीय समकक्ष के साथ उन विभिन्न मसलों पर बात करना चाहते हैं, जो इस क्षेत्र में तनाव फैला रहे हैं."
उन्होंने कहा, "सबसे अहम ईरान के हालात हैं. फिलहाल के लिए अमेरिकी जिस कार्रवाई की योजना बना रहे हैं, वह टली है लेकिन ईरान की स्थिति के असर के बारे में हमें बात करने की ज़रूरत है. दूसरा ये कि ग़ज़ा में क्या होने वाला है. क्षेत्र की सुरक्षा और मानवीय पहलुओं के संबंध में ग़ज़ा की स्थिति को संभालने के लिए कुछ बंदोबस्त किए जा रहे हैं. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग एक सम्मानजनक जीवन जिएं."
वहीं, पश्चिम एशिया से जुड़े मामलों के जानकार मुद्दसर क़मर ने पीटीआई से कहा, "यूएई भारत का अहम साझेदार है, ख़ासकर के खाड़ी और मध्यपूर्व क्षेत्र में. हम जानते हैं कि खाड़ी क्षेत्र और मध्यपूर्व इस समय बहुत ही उठापटक से जूझ रहा है. इसलिए राष्ट्रपति नाह्यान का दौरा और भी अहम हो जाता है."
"अगर हम पिछले 10-15 सालों में देखें तो खाड़ी में यूएई भारत का अहम पार्टनर बनकर सामने आया है. सिर्फ़ इसलिए नहीं कि वहां करीब 35 लाख भारतीय रहते हैं, बल्कि हमारे ऊर्जा कारोबार और अन्य कारोबार के लिहाज़ से भी. भारत और यूएई में कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप अग्रीमेंट भी है. 2024-25 में पहली बार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार गया."
उन्होंने कहा, "कारोबार, सिक्योरिटी और एनर्जी के साथ ही स्ट्रैटेजिक मामलों तक देखें तो इस दौरे की टाइमिंग बहुत ही अहम हो जाती है."
वहीं, आईडीडीएफ़ रिसर्च फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर (रिसर्च) ओमैर अनस ने पीटीआई से कहा, "यूएई और भारत ईरान के बड़े ट्रेड पार्टनर रहे हैं. ख़ासतौर पर यूएई और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिबंध ख़ासतौर पर यूएई के ईरान को निर्यात को प्रभावित करने वाले हैं."
विक्रम मिसरी ने एक सवाल के जवाब में बताया कि दोनों नेताओं के बीच ईरान, यमन में सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव और ग़ज़ा पीस बोर्ड जैसे सभी मुद्दों पर बात हुई. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि इस बारे में वह ज़्यादा कुछ नहीं बता सकते.
दरअसल, हाल ही में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में एक हवाई हमला किया था, जिसमें यूएई से आए कथित हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया गया. इसके बाद सऊदी अरब ने मांग की थी कि यूएई यमन सरकार के अनुरोध पर अमल करते हुए 24 घंटे के भीतर अपनी सेना वापस बुलाए.
इस मांग की प्रतिक्रिया में यूएई ने सभी आरोपों का खंडन तो किया, लेकिन अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा भी की थी. लेकिन दोनों देशों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया.
वहीं, ग़ज़ा में शांति के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक 'बोर्ड ऑफ़ पीस' बनाने का एलान किया, जिसमें शामिल होने का न्योता भारत को भी दिया गया है. हालांकि, भारत की ओर से अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.