एआर रहमान ने अब क्या कहा और जावेद अख़्तर क्यों आए महबूबा मुफ़्ती के निशाने पर

बीबीसी को दिए इंटरव्यू को लेकर शुरू हुए विवाद पर संगीतकार एआर रहमान ने एक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय होने पर गर्व की बात कही है.

एआर रहमान ने कहा, "संगीत हमेशा से मेरे लिए संस्कृति से जुड़ने, उसे सेलिब्रेट करने और सम्मान देने का ज़रिया रहा है. भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा गुरु है और मेरा घर है."

इससे पहले एआर रहमान ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में फ़िल्म इंडस्ट्री में काम न मिलने और भेदभाव पर टिप्पणियां की थीं. उनके इस बयान पर फ़िल्म, साहित्य और राजनीति जगत के गलियारों से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं.

इतना ही नहीं एआर रहमान की बातों का विरोध करने पर अब जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने जावेद अख़्तर पर निशाना साधा है.

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एआर रहमान ने जारी किया बयान

इंटरव्यू में कही गई बातों पर आ रही प्रतिक्रिया के बाद एआर रहमान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश में अपना पक्ष रखा है.

उन्होंने इसमें कहा है, "मैं समझता हूं कि कभी-कभार किसी की नीयत को ग़लत समझा जा सकता है. लेकिन मेरा मक़सद हमेशा से ही संगीत के ज़रिए सम्मान देने और सेवाभाव का रहा है. मेरी इच्छा कभी भी किसी को दु:ख पहुंचाने की नहीं रही है और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी महसूस की जाएगी."

उन्होंने कहा, "मुझे भारतीय होने पर गर्व है, क्योंकि यह पहचान मुझे अपनी बात रखने की जगह देती है, अभिव्यक्ति की आज़ादी देती है और विभिन्न संस्कृतियों की आवाज़ों को सुनती है."

एआर रहमान ने अलग-अलग संस्कृतियों से जुड़े अपने संगीत के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन सभी ने उनके लक्ष्य को मज़बूत किया है.

उन्होंने कहा, "मैं इस देश का आभारी हूं और संगीत को लेकर प्रतिबद्ध हूं, जो बीते कल को सम्मान देता है, वर्तमान को जीता है और भविष्य को प्रेरणा देता है."

एआर रहमान ने अंत में कहा, "जय हिन्द, जय हो."

महबूबा मुफ़्ती ने जावेद अख़्तर को कौन सी बात याद दिलाई

बीबीसी के साथ एक ख़ास इंटरव्यू में संगीतकार एआर रहमान ने कहा था कि 'बीते आठ सालों में बॉलीवुड में उन्हें काम मिलना बंद हो गया है.'

इस इंटरव्यू में एआर रहमान ने फ़िल्म इंडस्ट्री में भेदभाव को लेकर बयान दिया था.

उन्होंने कहा, "...अब उन लोगों के हाथों में फ़ैसले लेने की ताक़त है जो क्रिएटिव नहीं हैं और यह सांप्रदायिक चीज़ भी हो सकती है, लेकिन मेरे साथ सीधे तौर पर ऐसा नहीं कहा गया. मैंने बस इधर-उधर से बातें सुनीं...."

संगीतकार एआर रहमान के बीबीसी को दिए इंटरव्यू के बाद हुए विवाद पर गीतकार जावेद अख़्तर ने टिप्पणी की थी.

उन्होंने कहा, "मुझे कभी ऐसा नहीं लगा. मैं मुंबई में सभी लोगों से मिलता हूँ. लोग उनका (एआर रहमान का) बहुत सम्मान करते हैं. हो सकता है कि लोग ये समझते हों कि अभी वो वेस्ट में ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं. हो सकता है लोग समझते हों कि उनके प्रोग्राम बहुत बड़े-बड़े होते हैं, उसमें ज़्यादा समय जाता है."

जावेद अख़्तर ने आगे कहा, "रहमान इतने बड़े आदमी हैं कि छोटे-मोटे प्रोड्यूसर उनके पास जाने से भी डरते हैं. लेकिन मैं नहीं समझता कि इसमें कोई भी कम्यूनल एलिमेंट है."

जावेद अख़्तर के इस बयान पर अब जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.

महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "जब जावेद अख़्तर बॉलीवुड में बढ़ती सांप्रदायिकता को लेकर एआर रहमान के बयान को ख़ारिज करते हैं तो वह भारतीय मुसलमानों की जीती हक़ीक़तों और साझा अनुभवों का भी खंडन करते हैं."

"इनमें उनकी पत्नी शबाना आज़मी के अनुभव भी शामिल हैं, जिन्होंने खुले तौर पर बताया कि मुंबई जैसे महानगर में सिर्फ़ मुसलमान होने की वजह से उन्हें घर देने से इनकार किया गया था."

महबूबा मुफ़्ती ने कहा, "बॉलीवुड हमेशा से देश की सामाजिक हक़ीक़तों को दर्शाने वाला एक जीता जागता मिनी इंडिया रहा है. ऐसे अनुभवों को नज़रअंदाज़ कर देना आज के भारत की सच्चाई को नहीं बदलता."

क्या शबाना आज़मी को मुसलमान होने की वजह से घर नहीं मिला?

दरअसल महबूबा मुफ़्ती ने जिस घटना का ज़िक्र किया है, उसके बारे में जावेद अख़्तर ने यूट्यूब चैनल लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में विस्तार से बताया था.

जावेद अख़्तर ने पिछले साल इस इंटरव्यू में बताया, "ये घटना 20-25 साल पुरानी है. शबाना आज़मी निवेश के लिहाज़ से एक फ़्लैट लेना चाहती थीं. लेकिन ब्रॉकर ने कहा कि 'आप मुस्लिम हैं, इसलिए आपको' फ़्लैट नहीं देंगे."

जावेद अख़्तर ने बताया दरअसल फ़्लैट देने से मना करने वाले लोग मूल रूप से सिंध (अब पाकिस्तान में) के थे और उन्हें जबरन सिंध से निकाला गया था.

जावेद अख़्तर के मुताबिक़, "इन्हें अपना घर-द्वार, सम्मान, प्रतिष्ठा, दौलत सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा था. इन्हें एक गठरी लेकर भारत आना पड़ा था. इनमें से कुछ लोगों ने कड़ी मेहनत से अपने आप को फिर से खड़ा किया."

जावेद अख़्तर ने इस इंटरव्यू में बताया कि सिंध से आए इन लोगों के साथ पाकिस्तान के मुसलमानों ने जो किया, उसका दर्द अब भी बना हुआ था, इसलिए उन्होंने फ़्लैट देने से मना किया और इसमें उनकी कोई ग़लती नहीं है.

कंगना रनौत का एआर रहमान पर निशाना

अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने मौजूदा विवाद के बीच एआर रहमान पर निशाना साधा है.

रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में कहा, "डिअर एआर रहमान मुझे फ़िल्म इंडस्ट्री में बहुज ज़्यादा भेदभाव और पक्षपात का सामना करना पड़ा है, क्योंकि मैं भगवा पार्टी से हूँ. फिर भी मुझे कहना होगा कि मैंने आपसे ज़्यादा पक्षपाती और नफ़रत करने वाला इंसान नहीं देखा है."

"मैं आपको अपनी निर्देशित फ़िल्म इमरजेंसी की कहानी सुनाना चाहती थी.. लेकिन आपने मुझसे मिलने से भी इनकार कर दिया था. मुझे बताया गया कि आप किसी प्रोपेगेंडा फ़िल्म का हिस्सा नहीं बनना चाहते. वहीं मज़े की बात है कि 'इमरजेंसी' को सभी क्रिटिक्स ने मास्टरपीस कहा था."

हालाँकि कंगना रनौत के इन दावों पर एआर रहमान का कोई पक्ष सामने नहीं आया है.

कंगना रनौत की फ़िल्म 'इमरजेंसी' पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर बनाई गई थी. इस फ़िल्म में इंदिरा गांधी के बचपन से लेकर उनके राजनीतिक जीवन तक का ज़िक्र है.

कई समीक्षकों का मानना है कि फ़िल्म में इंदिरा गांधी के पारिवारिक रिश्तों पर टिप्पणी की गई है, इसमें कई मौक़ों पर इंदिरा गांधी को कमज़ोर प्रधानमंत्री के तौर पर दिखाया गया है, जबकि उनके दौर के विपक्षी नेताओं को ज़्यादा प्रभावशाली दिखाया गया है.

यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर भी बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी.

एआर रहमान के इस बयान पर गायक शान ने भी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था, "मुझे नहीं लगता कि संगीत में कोई सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक पहलू होता है. अगर ऐसी बात होती तो हमारे जो तीनों सुपरस्टार तीस साल से हैं, वे भी अल्पसंख्यक हैं लेकिन क्या उनके फैंस किसी से कम हैं? वे तो बढ़ते ही जा रहे हैं."

वहीं उपन्यासकार शोभा डे ने कहा, "ये बहुत ख़तरनाक कमेंट है.. मैं पचास साल से बॉलीवुड को देख रही हूँ. अगर मैंने कोई ऐसी जगह देखी है जो सांप्रदायिकता से मुक्त है, तो वो बॉलीवुड है. आप में टैलेंट हो तो आपको चांस मिलेगा."

भजन गायक अनूप जलोटा ने एआर रहमान के दावे पर कहा, "ऐसा बिल्कुल नहीं है. सच ये है कि उन्होंने पाँच साल में पच्चीस साल का काम कर लिया. अब क्या किया जाए. बहुत काम किया है उन्होंने और बहुत अच्छा काम किया है. उनके लिए लोगों के दिल में बहुत इज़्ज़त है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.