इंदौर में 'तीन मकान और तीन ऑटो के मालिक' मांगीलाल ने भिखारी होने से किया इनकार, प्रशासन क्या बोला

    • Author, समीर ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी के लिए, इंदौर से

लकड़ी के तख़्ते पर बेयरिंग लगी हुई एक छोटी सी गाड़ी, पीठ पर बस्ता और हाथ में जूते के सहारे सरकते मांगीलाल चौहान को भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत इंदौर से रेस्क्यू किया गया है.

इंदौर के सर्राफ़ा बाज़ार में बीते कई साल से मांगीलाल कथित तौर पर भीख मांग रहे थे, जबकि मांगीलाल का दावा है कि वो ब्याज पर पैसे देने का काम करते हैं.

महिला एवं बाल विकास विभाग के भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान के तहत उन्हें रेस्क्यू करके कुष्ठ रोगियों के उज्जैन स्थित एक आश्रम में भेज दिया गया है.

नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि 17 जनवरी को रेस्क्यू दल को सूचना मिली थी कि एक कुष्ठ रोगी हैं, जो हर हफ़्ते यहां भीख मांगने आते हैं. वहीं मांगीलाल चौहान ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा है कि उनका ट्रैवल्स और ब्याज पर पैसे देने का काम है.

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तीन मकान और ऑटो-कार के मालिक

दिनेश मिश्रा ने बताया कि जब जानकरी निकाली गई तो पता चला कि भीख मांगने वाले व्यक्ति का नाम मांगीलाल है, जो काफ़ी संपन्न व्यक्ति हैं.

वहीं मीडिया रिपोर्टों में ये दावा किया जा रहा है कि उनके तीन मकान हैं जिनमें से एक मकान तीन मंज़िला है, जबकि दो अन्य एक मंज़िला हैं. इसके अलावा इनके पास तीन ऑटो भी हैं, जो किराए पर चलते हैं. साथ ही एक मारुति डिज़ायर कार भी है, जिससे वो आते-जाते थे.

दिनेश मिश्रा ने बताया कि मांगीलाल के मुताबिक़ वो बीते आठ सालों से भीख मांग रहे हैं लेकिन इसके साथ ही सर्राफ़ा बाज़ार में ब्याज पर पैसा भी उधार देते हैं.

रेस्क्यू के बाद मांगीलाल को कुष्ठ रोगियों के उज्जैन आश्रम में रखा गया है और उनसे जुड़ी बाकी जानकारी निकाली जा रही है. इस बारे में रिपोर्ट तैयार कर इंदौर के कलेक्टर को सौंपी जानी है.

मकानों की बात करें तो इंदौर के भगत सिंह नगर में मांगीलाल का 16 बाई 45 फ़ुट का तीन मंज़िला मकान है. इसके अलावा शिवनगर में 600 वर्ग फ़ुट और अलवास में 10 बाय 20 फ़ुट का एक कमरे का मकान भी उनके नाम पर है.

अलवास का मकान उन्हें सरकार की तरफ़ से और रेड क्रॉस की मदद से विकलांगता के आधार पर दिया गया था. मांगीलाल अविवाहित हैं और शिवनगर में अपनी मां और दो भतीजों के साथ रहते हैं, जबकि उनके दो भाई अलग रहते हैं.

भीख मांगने से मांगीलाल का इनकार

मांगीलाल चौहान ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में बताया है, "मैंने कभी भी भीख नहीं मांगी मैं ट्रेवल्स का काम करता हूं. मैं ब्याज पर भी पैसा देता हूं और मैंने जिन्हें पैसा नहीं दिया वह ऐसी बातें बोलते हैं और वही मीडिया में छपवा रहे हैं."

"मैं रोज़ाना में कर्ज़ दिए गए पैसे का ब्याज वसूलने सर्राफ़ा बाज़ार जाता था. शनिवार (17 जनवरी) की रात में ब्याज की वसूली करने के लिए पहुंचा तो मुझे गाड़ी में उठा लिया गया. मैंने बोला मैं भीख नहीं मांगता हूं, भिखारी नहीं हूं. लेकिन मेरी नही सुनी गई और मुझे यहां आश्रम में ले आया गया."

"यहां मुझे अच्छा नहीं लग रहा है और मेरे बारे में झूठी बातें छप रही हैं. मैंने अपनी मेहनत और अपने पैसों से घर बनाया है."

पड़ोसियों ने क्या बताया

भगत सिंह नगर में मांगीलाल के पड़ोस में रहने वाली शांता बाई ने बताया कि वहां बना तीन मंज़िला मकान उन्हीं का है और वो पिछले कुछ सालों से भीख मांग रहे हैं.

वो मकान में सबसे नीचे की मंज़िल पर रहते थे. स्थानीय मीडिया ने भीतर जाकर देखा तो मांगीलाल के घर में कूलर, फ्रिज, टीवी, पलंग, गैस का चूल्हा, दो गैस सिलेंडर सहित ज़रूरत की चीज़ें दिखाई दीं.

इंदौर में भीख मांगने पर पाबंदी है, और प्रशासन ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की बात कहता है. यहां पुनर्वास केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां भिखारियों को भिक्षावृत्ति से दूर कर उनका पुनर्वास किया जाता है.

इंदौर में भिक्षु पुर्नवास केंद्र चलाने वाली रूपाली जैन ने बताया, "मांगीलाल को पहले भी रेस्क्यू किया जा चुका है. वो कुष्ठ रोगी हैं, इसलिए उन्हें कुष्ठ रोगी केंद्र में रखा गया था. इनकी काउंसलिंग की गई थी, तो पता चला था कि वो पहले मिस्त्री का काम करते है थे और तभी से इनके पास मकान थे."

रूपाली जैन ने बताया, "उनके भाई भी हैं, लेकिन उस समय उन्हें कुष्ठ रोग की वजह से परिवार से दूर होना पड़ा था. मांगीलाल के हाथ और पैर की उंगलियां कुष्ठ रोग से ख़राब हो गई थीं, जिसके बाद वो दो साल तक कहीं भी भीख मांगते हुए नहीं दिखे थे. लेकिन फिर उन्होंने दोबारा भीख मांगनी शुरू कर दी."

उन्होंने बताया कि अभियान में कई ऐसे लोग पाए गए थे जो पूरे परिवार के साथ मिलकर एक दिन में क़रीब बीस हज़ार रुपये की भीख मांग लेते थे.

भतीजे का दावा- मकान मांगीलाल के नाम पर नहीं

वहीं मांगीलाल के भतीजे भीम सिंह चौहान ने एएनआई से कहा है कि तीन मंज़िला मकान उनकी मां के नाम पर है.

भीम सिंह चौहान ने कहा, "उनके (मांगीलाल) नाम पर फ़िलहाल कुछ भी नहीं है, यह तीन मंज़िला मकान मेरा है. मेरी मम्मी के नाम पर रजिस्ट्री है. तीन ऑटो रिक्शा में से दो मेरे नाम पर हैं और मैं उसका सबूत दे सकता हूं. जहां तक गाड़ी की बात है तो वो मेरी बहन की है. उनके ससुर के नाम पर गाड़ी थी वह किस्त नहीं भर पा रहे थे इसलिए उन्होंने यह गाड़ी दे दी और कहा तुम किस्त भर देना और आगे जाकर गाड़ी रख लेना."

भीम सिंह ने कहा कि बीते छह महीने से मांगीलाल चौहान उनके साथ रहते हैं, वह उनकी सेवा कर रहे हैं और आगे भी उनकी सेवा करेंगे.

भीख मांगने के सवाल पर भीम सिंह कहते हैं कि उनके चाचा का काम पैसा ब्याज पर देना है और उसे लेने के लिए वो सर्राफ़ा बाज़ार जाते थे.

इंदौर में कैसा अभियान जारी है?

इंदौर में बीते चार साल के दौरान 5500 लोगों को भिक्षा से दूर कर उनका पुनर्वास किया गया है, जिसमें 900 बच्चे भी शामिल हैं.

इंदौर के एक पुनर्वास भिक्षु केंद्र पर 63 ऐसे लोगों का पुनर्वास चल रहा है, जो पहले भीख मांगने का काम करते थे. भिक्षु केंद्र पर आने वाले लोगों के परिवार उनसे मिलने आते हैं, लेकिन जब तक उनके पुनर्वास का काम पूरा नहीं होता, परिवार को उन्हें सौंपा नहीं जाता.

जो लोग यहां लाए जाते हैं, उनमें से कई भीख मांगकर नशा करते थे. 27 साल के इंदौर के नीरज भार्गव एक महीने पहले रेस्क्यू किए गए थे.

नीरज की बहन अनुराधा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया कि वो अब अपने भाई से मिलकर ख़ुश हैं, क्योंकि पहले तो भाई उन्हें पहचानता भी नहीं था. जब वो पूरी तरह से ठीक हो जाएंगे तो वो उन्हें घर ले जाएंगी.

इंदौर के ही रहने वाले 27 साल के रवि यादव को क़रीब एक साल पहले यहां लाया गया था. पुनर्वास केंद्र में आने के बाद उन्होंने भगवानों की मूर्तियां बनानी सीखी हैं.

रवि ने बीबीसी को बताया कि वो यहां काम कर हर महीने नौ हज़ार रुपये कमा रहे हैं. पूरी तरह से ठीक होने के बाद वो भी अब घर जाकर परिवार के साथ रहना चाहते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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