एशियन गेम्स 2023: हॉकी में गोल्ड जीतते ही मिलेगी पेरिस ओलंपिक में एंट्री, कितनी तैयार भारतीय टीम?

    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

पेरिस में अगले साल होने जा रहे ओलंपिक खेलों ने इस साल चीन के हांगजोऊ एशियाई खेलों के हॉकी गोल्ड की अहमियत को बढ़ा दिया है.

इसकी वजह ये है कि गोल्ड मेडल जीतने वाली टीम को ओलंपिक में सीधा प्रवेश मिल जाएगा. भारतीय टीम गोल्ड पर निशाना साधने को एकदम तैयार नज़र आ रही है.

हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम आजकल बेंगलुरु स्थित साई सेंटर पर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में व्यस्त है.

ये टीम पिछले दिनों चेन्नई में हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में उन सभी प्रमुख टीमों को हरा चुकी है, जिनसे उसका एशियाई खेलों में मुकाबला होने वाला है.

कोच के सिस्टम की परीक्षा

क्रेग फुलटोन ने कोच बनने के बाद मानो भारतीय टीम के डीएनए को ही बदल दिया है. उन्होंने टीम को जीत के लिए डिफेंस का नया मंत्र दिया है.

इससे पहले भारतीय टीम को आक्रामक हॉकी खेलने के लिए जाना जाता था और यह सिलसिला ग्राहम रीड के कोच रहने तक जारी रहा.

पर फुलटोन ने भारतीय टीम के खेलने की स्टाइल को ही बदल दिया. अब डिफेंस पर ज्यादा जोर दिया गया है और खिलाड़ी जवाबी हमले बोलकर मैच अपने पक्ष में करने का प्रयास करते हैं.

इस स्टाइल में इंडियन टीम डिफेंस करते वक़्त आधे मैदान पर ही फोकस करती है, जिससे बचाव में ज़्यादा खिलाड़ी रहते हैं. वहीं, हमला बोलने के समय फोकस पूरे मैदान पर किया जाता है.

पूरे मैदान पर फोकस करने के समय हाफ़ लाइन से हमले की शुरुआत की जाती है और कोशिश की जाती है कि गेंद विपक्षी टीम के लिए ख़तरे वाले क्षेत्र में ही रहे.

भारतीय टीम ने इस स्टाइल को पहली बार एफआईएच प्रो लीग के आख़िरी चार मैचों में आजमाया था.

उस दौरान कुछ मौकों पर लगा कि टीम इस स्टाइल में पूरी तरह से अभ्यस्त नजर नहीं आ रही है. लेकिन पिछले महीने आयोजित हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भारतीय टीम इस स्टाइल से खेलने में पारंगत नजर आई.

इस स्टाइल का एक फायदा यह हुआ है कि टीम पर अब गोल पड़ने कम हो गए हैं. इस बात को हम एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में किए गए प्रदर्शन से समझ सकते हैं. इस चैंपियनशिप में भारत ने 29 गोल किए और उसके ख़िलाफ़ सिर्फ आठ गोल हुए.

इन गोलों में कमी आने की प्रमुख वजह डिफेंस करते वक़्त आधे ही मैदान पर फोकस करने से वहां ज़्यादा खिलाड़ियों का मौजूद होना है.

इसका एक फायदा इस रूप में देखने को मिला कि भारतीय डिफेंडर ज़्यादातर हमलों को सर्किल के बाहर ही रोकने में सफल रहे, जिससे पेनल्टी कॉर्नर देने के मामले में भी कमी आई है.

बदला माहौल डाल सकता है प्रदर्शन पर असर

भारतीय टीम ने पिछले दिनों एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भले ही दक्षिण कोरिया, जापान, मलेशिया, चीन और पाकिस्तान समेत सभी दिग्गज टीमों को सहज अंदाज में हराया है लेकिन उसने यह काम अपने चहेते दर्शकों के बीच किया था.

वहीं, हांगजोऊ में उसे बदले माहौल में खेलना होगा. वहां उत्साह बढ़ाने के लिए चहेते दर्शक भी नहीं होंगे.

जकार्ता में हुए 2018 के एशियाई खेलों में भारत को सेमीफाइनल में मलेशिया के हाथों हार मिली थी और बाद में उसने पाकिस्तान को हराकर कांस्य पदक हासिल किया था.

मलेशिया ने पिछले दिनों एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत के ख़िलाफ़ हाफ़ टाइम तक 3-1 की बढ़त बना ली थी. पर बाद में वह हार गई थी. पर इससे यह संकेत ज़रूर मिलता है कि वह किस्मत साथ होने पर पासा पलटने का माद्दा रखती है.

पूल मुकाबलों में ज़्यादा ख़तरा नहीं

भारत को पूल ए में पिछले खेलों की चैंपियन जापान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और उज्बेकिस्तान के साथ रखा गया है.

वहीं, पूल बी में मलेशिया, दक्षिण कोरिया, चीन, ओमान, थाईलैंड और इंडोनेशिया की टीमें शामिल हैं.

भारत के ग्रुप में भले ही पाकिस्तान और जापान की दो अच्छी टीमें हैं. भारतीय टीम अपनी क्षमता से खेले तो दोनों में ही उसे हराने का माद्दा नहीं है.

भारतीय टीम यह बात पिछले दिनों आयोजित हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में दिखा भी चुकी है. इसके बावजूद जापान टीम ख़तरा बनने की क्षमता रखती है.

भारतीय टीम के खेलने की नई स्टाइल के बाद जापान हो या मलेशिया दोनों के लिए गोल के मौके निकालना थोड़ा मुश्किल हुआ है. भारत ने इस स्टाइल में और पारंगता दिखाई तो उसे गोल्ड तक जाने से शायद ही कोई रोक पाए.

टीम की तैयारियों से संतुष्ट हैं कप्तान

हरमनप्रीत सिंह अपनी कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर संतुष्ट हैं.

उन्होंने कहा, "हम अपने पूल की कुछ मजबूत टीमों के साथ एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में खेल चुके हैं और हांगजोऊ में हम इस अनुभव का फायदा उठाने का प्रयास करेंगे. हमने सभी प्रतिद्वंद्वियों को ध्यान में रखकर तैयारी की है. हमने सभी टीमों के प्रदर्शन के वीडियो देखकर उनकी कमजोरियों और ताक़त के हिसाब से अपनी तैयारी की है."

मनप्रीत सिंह को भारतीय टीम का अहम खिलाड़ी माना जा रहा है. वह कहते हैं कि भले ही पूर्व कोच ग्राहम रीड और मौजूदा कोच फुलटोन की सोच भिन्न है. पर दोनों में एक चीज़ समान है कि वे खिलाड़ियों के कौशल में इजाफा करने में विश्वास रखते हैं.

मानसिक तौर पर मजबूत है भारतीय टीम

आधुनिक हॉकी में खिलाड़ियों के कौशल में पारंगत होने के साथ मानसिक तौर पर मजबूत होने की भी बहुत अहमियत है.

भारतीय टीम इस मामले में एशियाई खेलों में भाग लेने वाली ज़्यादातर टीमों से थोड़ी बेहतर स्थिति में नज़र आती है. भारतीय टीम के साथ पैडी अप्टन के जुड़ने से खिलाड़ियों में इस क्षेत्र में सुधार साफ नज़र आने लगता है.

भारतीय खिलाड़ियों की यह मानसिक मजबूती का ही कमाल था कि वह चेन्नई में खेले गए फाइनल के दौरान पहले हाफ़ में 1-3 से पिछड़ने के बाद भी मैच को अपने पक्ष में पलटने में सफल हो गई.

भारत ने आखिरी क्वार्टर में शानदार प्रदर्शन करके यह जता दिया कि वह इतनी फिट है कि चारों क्वार्टर में एक ही रफ़्तार से खेलने का माद्दा रखती है.

यह माना जाता है कि एक फिट और मानसिक रूप से मजबूत खिलाड़ी को फैसले लेने में आसानी होती है.

कई बार तेजी से लिया फैसला मैच का रुख तय करने में सहायक होता है.

हमें याद है कि भारत 2010 और 2018 के एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में थकान के कारण तेजी से फैसले नहीं ले पाने की कमजोरी की वजह से हार गया था.

लेकिन अब बेहतर फिटनेस और मानसिक मजबूती की वजह से यह कमजोरी नजर नहीं आती है.

टीम का ट्रंप कार्ड

आजकल हॉकी मैचों के परिणामों में पेनल्टी कॉर्नरों पर जमाए गोल की ख़ासी अहमियत रहती है. इस मामले में भारतीय टीम के पेनल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ हरमनप्रीत सिंह का कोई सानी नहीं है. वह अकेले दम पर मैचों का परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं.

पिछले दिनों हुई एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में भी वह सर्वाधिक नौ गोल जमाने में सफल रहे. हम यदि भारत के पिछले कुछ मुकाबलों पर नजर दौड़ाएं तो हरमनप्रीत जिन मैचों में लय में नहीं रहे हैं, वहां भारत का प्रदर्शन डगमगा गया है.

हम भारत में हुए पिछले विश्व कप में हरमनप्रीत के रंगत में नहीं होने की वजह से ही क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सके थे. इसलिए एशियाई खेलों में हरमनप्रीत ही ट्रंप कार्ड रहने वाले हैं.

भारतीय हाफ़ लाइन टीम की जान है तो फारवर्ड लाइन भी दमदार है. हाफ़ लाइन में हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह और विवेक सागर प्रसाद की ऐसी तिकड़ी है, जो बेहतरीन हमले करने का माद्दा रखती है.

वहीं, फारवर्ड लाइन में चाहे मनदीप सिंह हों या सुखजीत या ललित उपाध्याय सभी गोल जमाने वाले खिलाड़ी हैं. साथ इन सभी में तालमेल भी बहुत अच्छा है, जो किसी भी डिफेंस को छितराने की ताकत रखते हैं.

कब कब खेलेगी टीम इंडिया

भारत 24 सितम्बर को उज्बेकिस्तान के साथ खेलकर अपना अभियान शुरु करेगा.

भारत 26 सितम्बर को सिंगापुर से, 28 सितम्बर को जापान से, 30 सितम्बर को पाकिस्तान से और दो अक्टूबर को बांग्लादेश से खेलेगा.

पुरुष हॉकी का सेमीफाइनल चार अक्टूबर और फाइनल छह अक्टूबर को खेला जाएगा.

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