You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
कॉमनवेल्थ खेल 2022: हरमनप्रीत बने संकटमोचक, हैट्रिक से भारत पहुंचा हॉकी के सेमीफ़ाइनल में
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
हरमनप्रीत सिंह की हैट्रिक के कमाल से भारत ने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ खेलों की पुरुष हॉकी के सेमीफाइनल में जगह बना ली है.
हरमनप्रीत सिंह की इस खेल आयोजन में यह दूसरी हैट्रिक है. भारत के ग्रुप बी में इंग्लैंड के बराबर 10 अंक ही हैं पर टीम बेहतर गोल अंतर के आधार पर ग्रुप में टॉप पर रही.
ग्रुप में पहला स्थान पाने से भारतीय टीम, सेमीफाइनल में ग्रुप ए की शीर्ष टीम ऑस्ट्रलिया के साथ खेलने से बच गई है. अब उनका ग्रुप ए की दूसरे नंबर की टीम से मुक़ाबला होगा. भारत के ख़िलाफ़ खेलने वाली टीम न्यूज़ीलैंड, दक्षिण अफ्ऱीका और पाकिस्तान में से कोई हो सकती है.
भारत ने पूल में खेले चार मैचों में 27 गोल जमाए और पांच गोल खाए थे, इससे भारत का गोल अंतर प्लस 22 होने से इंग्लैंड को ग्रुप बी में पहला स्थान बनाने के लिए कनाडा के ख़िलाफ़ 15 गोल के अंतर से विजय पानी थी. पर वह 11-2 से विजय पाने के कारण दूसरे स्थान पर पिछड़ गई.
ग्रुप में पहला स्थान पाने का इंग्लैंड पर दबाव साफ दिखा. कनाडा के ख़िलाफ़ खेलते समय इस दबाव की वजह से दूसरे क्वार्टर में इंग्लैंड के क्रिस्टोफर ग्रिफिथ और कनाडा के पनेसर एकदम से भिड़ गए और एक-दूसरे के कॉलर पकड़ लिए. इस पर पनेसर को रेड और ग्रिफिथ को पीला कार्ड दिखाया गया.
हरमनप्रीत सिंह ने पिछले कुछ सालों में संकट मोचक की छवि बनाई है. पहले क्वार्टर में जब वेल्स ने भारत को गोल जमाने से रोके रखा, तो एक बार को लगा कि वेल्स चार साल पहले गोल्ड कोस्ट में किए संघर्ष की कहानी को दोहराने जा रहा है.
उस समय भारत ने कड़े संघर्ष के बाद 4-3 से विजय प्राप्त की थी. लेकिन हरमनप्रीत सिंह ने दूसरे क्वार्टर में दो पेनल्टी कॉर्नरों पर गोल भेदकर मैच को भारत के पक्ष में मोड़ दिया.
दूसरे क्वार्टर की शुरुआत से ही भारतीय हमलों में पैनापन दिखने लगा. विवेक सागर प्रसाद और कप्तान मनप्रीत सिंह मिडफील्ड में खेल का संचालन अच्छे से करके गेंद को लगातार आगे रखने का प्रयास कर रहे थे.
वहीं, मनदीप सिंह, आकाशदीप सिंह और ललित उपाध्याय अच्छा तालमेल दिखाकर वेल्स की सर्किल में लगातार दबाव बनाने में सफल हो रहे थे. भारतीय फारवर्डों के इस प्रयास से दूसरे क्वार्टर से वेल्स के डिफेंस में दरारें साफ़ नजर आने लगीं.
भारत खेल के 18वें मिनट में एक के बाद एक लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर पाने में सफल हो गया. तीसरे पेनल्टी कॉनर पर हरमनप्रीत ने सर्किल के बाएं पर खड़े होने के बजाय अपने को सेंटर में खड़ा किया और वहां से लगाई ड्रेग फ्लिक पर गोल करके भारत को 1-0 की बढ़त दिला दी. हरमनप्रीत ने अगले ही मिनट में चौथे पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करके भारत की बढ़त को 2-0 कर दिया.
ऐसे बनी हरमनप्रीत की हैट्रिक
खेल के तीसरे क्वार्टर के दूसरे ही मिनट में ललित उपाध्याय और आकाशदीप ने अच्छे तालमेल से बाएं फ्लैंक से हमला बनाया और आकाशदीप के गोल पर निशाना साधने पर डिफेंडर से कैरिड होने पर भारत को छठा पेनल्टी कॉर्नर मिला.
इस मौके पर भारत ने वेरिएशन से गोल जमाने का प्रयास किया. हरमनप्रीत के शॉट पर जब ललित उपाध्याय ने पुश से गेंद को गोल में डालने का प्रयास किया, तो डिफेंडर के पैर से गेंद टकराने पर अंपायर ने पेनल्टी स्ट्रोक दिया.
वेल्स ने इस फ़ैसले पर रेफरल मांगा. इस बारे में नियम यह है कि खिलाड़ी के गोल पर निशाना साधने पर बचाव करने वाले खिलाड़ी के गोल के सामने पैर में गेंद लगने के समय यदि उसके पीछे गोलकीपर होता है तो पेनल्टी कॉर्नर मिलता है और यदि गोलकीपर नहीं होता है तो पेनल्टी स्ट्रोक दिया जाता है. इस मौके पर पीछे गोलकीपर नहीं होने पर पेनल्टी स्ट्रोक दे दिया गया. इस स्ट्रोक को हरमनप्रीत सिंह ने गोल में बदलकर अपनी हैट्रिक पूरी कर ली.
हरमनप्रीत सिंह के इस मैच में जमाए तीन गोलों से उनके इन गेम्स में उनके नौ गोल हो गए और वह गोल जमाने के मामले में नंबर वन पर आ गए थे.
बाद में इंग्लैंड के ड्रेग फ्लिकर और निकोलस बांडुराक ने् हैट्रिक सहित चार गोल जमाकर अपने 11 गोल करके हरमनप्रीत को पीछे छोड़ दिया. इस मैच से पहले तक वेल्स के ड्रेग फ्लिकर और गेरिथ फुरलोंग सात गोलों से पहले स्थान पर थे. हालांकि, फुरलोंग ने वेल्स के एकमात्र गोल को जमाकर अपने गोलों की संख्या 8 कर ली है.
हरमनप्रीत कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सबसे ज़्यादा गोल जमाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. उन्होंने गोल्ड कोस्ट में छह गोल जमाए थे और इस बार नौ गोल जमाकर उन्होंने अपने 15 गोल कर लिए हैं.
उन्होंने संदीप सिंह के 11 गोलों के रिकॉर्ड को तोड़ा है. हरमनप्रीत के लिए इस रिकॉर्ड को और आगे तक ले जाने का मौका है, क्योंकि उन्हें अभी दो मैच और खेलने का मौका मिलेगा.
दूसरे क्वार्टर से भारत के खेल में आया निखार
पहले क्वार्टर में अच्छी शुरुआत नहीं करने वाली भारतीय टीम दूसरे क्वार्टर में एकदम से बदली हुई टीम नजर आई. भारतीय कप्तान मनप्रीत सिंह की अगुआई में मिडफील्ड ने हमलों में अच्छा योगदान देना शुरू किया.
भारतीय फारवर्डों के लय में खेलने से वेल्स का डिफेंस छितराने लगा. पर गोल पर टोबियस रेनोल्डस कोटरेल की मुस्तैदी से हमलों को गोल की शक्ल तो नहीं मिल पा रही थी पर पेनल्टी कॉर्नर लगाते मिलते रहे, जिससे मैच भारत के पक्ष में मुड़ता गया.
भारतीय टीम की खेल की शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप नहीं हो सकी, क्योंकि वेल्स ने बेहतरीन बचाव का प्रदर्शन करते हुए पहले क्वार्टर में उसे गोलरहित रोकने में सफल रही.
भारत ने हमलावर रुख अपनाकर मौके तो बनाए पर वेल्स के बेहतरीन डिफेंस की वजह से हमलों को गोल में नहीं बदला जा सका. इस क्वार्टर में वेल्स के जेम्स फुरलोंग और हावेल जोंस की जितनी तारीफ़ की जाए, वह कम है.
इसके अलावा भारतीय फारवर्ड मनदीप, ललित और अभिषेक भी सर्किल में अच्छे तालमेल का प्रदर्शन नहीं कर सके. वेल्स के गोलकीपर टोबियास रोनाल्डस कोटरेल की भी तारीफ़ करनी होगी क्योंकि जब भी उनके डिफेंडर गच्चा खा गए तो वह गोल पर चट्टान की तरह डटे नजर आए.
भारत के चार गोल जमाने से लगने लगा कि मुक़ाबला एकतरफ़ा हो जाएगा। पर वेल्स खेल समाप्ति से पांच मिनट पहले पेनल्टी कॉर्नर पर गेरिथ फुरलोंग की ड्रेग फ्लिक से एक गोल उतारने में सफल हो गया.
वेल्स भले ये मुक़ाबला हार गई हो पर टीम ने अपने प्रदर्शन से यह तो दिखाया है कि वह पहली बार विश्व कप के लिए क्यों क्वालिफाई हुई है. वह अगले साल भारत में होने वाले हॉकी विश्व कप में खेलती नज़र आएगी. उन्होंने आयरलैंड को हराकर यह पात्रता हासिल की थी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)