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एशियन गेम्सः पांच साल पहले गोल्ड जीतने वाले रोहन बोपन्ना अब कितने तैयार
- Author, तारुका श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, लखनऊ से
एटीपी टूर में 24 बार के विजेता और ग्रैंड स्लैम चैंपियन भारतीय टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना ने उम्र की बाधा को पीछे छोड़ दिया है. उन्होंने 2002 में भारत के लिए खेलना शुरू किया था.
चीन में हो रहे एशियन गेम्स में वो भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. रोहन ने 2018 के एशियन गेम्स में मेंस डबल्स में स्वर्ण पदक जीता था.
बीबीसी से ख़ास बातचीत में रोहन ने कहा कि उनका मकसद एशियन गेम्स में अच्छा प्रदर्शन करना है.
वो कहते हैं, “ये बड़ा आयोजन है. कोविड और महामारी की वजह से एक साल के लिए इसे टाल दिया गया था. इसका सब पर असर पड़ा है, लेकिन हम इसमें बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रहे हैं.”
सानिया मिर्ज़ा, महेश भूपति और लिएंडर पेस की तरह रोहन बोपन्ना भारत के शीर्ष टेनिस खिलाड़ियों में से एक रहे हैं. हाल ही में उन्होंने लखनऊ में भारत की ओर से अपना आखिरी डेविस कप मैच खेला.
रोहन पिछले 21 साल से भारत के लिए डेविस कप खेल रहे हैं.
वो कहते हैं, “2002 से 2023 के इतने लंबे अंतराल तक भारत के लिए खेलने पर वाकई एक गर्व का अहसास होता है. भारत के लिए खेलना वास्तव में ख़ास है. मुझे इतने लंबे करियर का हिस्सा बनने और इसे बनाए रखने की वाकई खुशी है.”
साल 2010 में रोहन पाकिस्तानी खिलाड़ी ऐसाम उल हक़ की पार्टनरशिप में यूएस ओपन के फ़ाइनल तक पहुंचे थे.
और अब 43 साल की उम्र में रोहन जब 2023 में यूएस ओपन के फ़ाइनल में पहुंचे तो मेंस डबल्स के ग्रैंड स्लैम फ़ाइनल में पहुंचने वाले वो सबसे उम्रदराज़ पुरुष खिलाड़ी बन गए.
उनकी ऐसाम उल हक़ के साथ बहुत सफल साझीदारी रही है और उन्हें 'भारत पाकिस्तान एक्सप्रेस' कहा जाता था, जिसने पांच पदक एक साथ जीते थे.
रोहन का करियर
फ़्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स-2017
यूएस ओपन फ़ाइनल्स (मेंस डबल्स)- 2010, 2023
पेरिस मास्टर्स (मेंस डबल्स)- 2011
क़तर ओपन (मेंस डबल्स)- 2023
लंबे समय तक खेलने का राज़
साल 2017 में फ़्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स में मिली जीत उनकी बड़ी ग्रैंड स्लैम कामयाबी में से एक है.
इतने लंबे समय तक खेलने के लिए फ़िट रहने के बारे में रोहन ने बताया, “मुझे लगता है कि मुझमें जो मजबूती है उसका एक बड़ा पहलू मानसिक शक्ति, खुद में सुधार करने के लगातार तरीके ढूंढना और शीर्ष स्तर पर खेलना है.”
“पिछले कुछ सालों से मैं इस बात पर ध्यान केंद्रित करता रहा हूं कि कैसे रिकवर करूं और साथ ही कैसे अपने वर्कआउट रुटीन को बदलूं. मैंने खुद को फिट रखने के लिए इस बात को सुनिश्चित किया कि अधिकांश हफ़्तों में कोच से अधिक फ़ीजियो साथ रहे, क्योंकि मुझे लगा कि अच्छे खेल और ग्रैंड स्लैम के फ़ाइनल में पहुंचने के लिए रिकवरी एक कुंजी है.”
रियो ओलंपिक में रोहन और सानिया मिर्ज़ा पदक के बिल्कुल क़रीब पहुंच गए थे, हालांकि वो चौथे स्थान पर रहे.
वो सानिया को प्रेरणादायी खिलाड़ी बताते हैं.
वो कहते हैं, “मैं समझता हूं कि वो खेल की असली लीजेंड हैं. पूरी दुनिया में उन्होंने केवल महिलाओँ को ही नहीं बल्कि बहुत से खिलाड़ियों और हर किसी को प्रेरित किया है. मुझे लगता है कि ये सबसे बड़ी बात रही कि हमारी दोस्ती बहुत पहले ही शुरू हो गई.”
“मुझे लगता है कि जब वो 14 साल की थीं, मैं पहली बार उनसे मिला और दिल्ली में एक मिक्स डबल्स मैच टूर्नामेंट में हम साथ खेले और हमने वो मैच जीता. इसलिए इतने लंबे समय तक दोस्त बने रहने से काफी फर्क पड़ा. और मैं सोचता हूं कि कोर्ट के बाहर दोस्ती ने कोर्ट पर हमारे खेल को बेहतर ही किया और सानिया जैसे किसी का करीबी दोस्त होने का मुझे गर्व है. मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है.”
भारतीय टेनिस का भविष्य
हालांकि कुछ भारतीय टेनिस खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है लेकिन भारत को अभी भी टेनिस के पावरहाउस के रूप में नहीं देखा जाता.
हाल ही में पीटीआई के साथ एक साक्षात्कार में भारत के शीर्ष रैंक वाले खिलाड़ी सुमित नागल ने कहा था कि उनके बैंक खाते में केवल 80 हज़ार रुपये हैं.
रोहन कहते हैं कि भारतीय टेनिस के बढ़ने की मूल बात है कि देश में टूर्नामेंट हो.
उनके मुताबिक, “फिलहाल, खिलाड़ियों के लिए भारत में कोई बड़े टूर्नामेंट नहीं हैं. इस समय सबसे बड़ी ज़रूरत है कि इन खिलाड़ियों के लिए अवसर पैदा किये जाएं. अगर भारत में अधिक टूर्नामेंट होंगे, इससे खर्चों को कम करने में मदद मिलेगी और जब ये होगा तो हम देखेंगे कि अधिक से अधिक खिलाड़ियों की रैंकिंग सुधरेगी. और फिर वे ग्रैंड स्लैम के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दिखेंगे.”
रोहन ने अपने डेविस कप करियर को अलविदा बोल दिया है लेकिन वो दूसरे टूर्नामेंट में खेलते रहेंगे.
मेंस डबल्स के अलावा, रोहन चीन के होंगज़ो में होने वाले एशियन गेम्स में मिक्सड डबल्स भी खेल रहे हैं.
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