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दुती चंद का परिवार स्वीकार कर पाया है उनका समलैंगिक रिश्ता?
- Author, सूर्यांशी पांडेय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'मैं समलैंगिक रिश्ते में हूं'.
इस बात को समाज के सामने स्वीकार करना दुती चंद के लिए कितना मुश्किल रहा होगा?
19 मई को इसी साल उन्होंने अपना यह सच दुनिया को बताया.
तब उनका सबसे कड़ा विरोध परिवार की उस सदस्य ने किया जिससे कभी प्रेरणा लेकर दुती चंद ने दौड़ना शुरू किया था. कभी कबड्डी की खिलाड़ी रहीं, बड़ी बहन सरस्वती चंद खुलकर अपनी बहन के समलैंगिक रिश्ते के ख़िलाफ़ बोलती नज़र आईं.
इस बात को अब चार महीने बीत चुके हैं. जुलाई के महीने में नपोली में आयोजित हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में दुती चंद ने गोल्ड मेडल जीता.
अब वह ओलंपिक में क्वालीफ़ाई करने के लिए दोहा में 27 सितंबर को आयोजित होने जा रहे वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेने जा रही हैं.
उनकी ज़िंदगी खेल के मैदान पर तो रफ़्तार लेती दिखाई दे रही है लेकिन क्या निजी रिश्तों की समस्या वहीं ठहरी हुई है?
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने अपनी ज़िंदगी से जुड़ी कई बातें साझा कीं.
समैंलिंगक रिश्ते के सामने आने के चार महीने बाद अब परिवार में क्या हालात हैं? क्या अब भी बहन आपसे नाराज़ हैं?
इसमें कोई शक नहीं कि मेरी बहन ने मेरे धावक बनने के सफ़र में अहम भूमिका निभाई. वह मुझे दौड़ने की प्रेरणा देती रही़. लेकिन, हर इंसान अलग होता है और उसकी इच्छाएं भी अलग-अलग होती हैं. काश की मेरी बहन ये समझ पाती.
अब मैं क्या करूं अगर मुझे एक लड़की से प्यार है. सरस्वती (बड़ी बहन) अब तक मुझे समझ नहीं पाई है. उसके साथ रिश्तों में थोड़ी दरार आ गई है लेकिन मुझे उम्मीद है कि घर के छोटे-मोटे झगड़ों की तरह एक दिन ये दरार भी शायद भर जाए.
हाल ही में जब आप वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में गोल्ड मेडल जीतीं थीं तो ख़बरें आईं कि आपके परिवार ने मिठाइयां बांटी हैं, इससे तो यही लगा कि अब दरारें भर चुकी हैं?
आपने सही कहा. दरअसल, मेरे खेल की जब बात आती है तो मेरा परिवार मेरी ढाल बनता है, मुझे समझता है, मेरी परेशानियों को दूर करने की कोशिश करता है. लेकिन, जब निजी ज़िंदगी में विश्वास और साथ की उम्मीद करती हूं तो वह कोना परिवार की ओर से ख़ाली दिखाई देता है.
ख़ासतौर पर बड़ी बहन तो बिल्कुल नहीं समझतीं. मेरे समलैंगिक रिश्ते को आज भी मेरा परिवार, मेरी बहन कोई भी अपनाना नहीं चाहता. उस कारण से रिश्तों में खिंचाव ज़रूर है.
दुनिया से आपको ख़ूब समर्थन मिला. न्यूयॉर्क टाइम्स से लेकर वॉशिंग्टन पोस्ट में ख़बरें छपीं. दुनिया आपकी बेबाकी की तब भी दीवानी हुई थी जब 2014 में आपने इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ एथलेटिक्स फ़ेडरेशन के एक नियम के ख़िलाफ़ कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था और वो केस जीता भी था. क्या हुआ था आपके साथ?
आईएएफ़ का एक नियम था जो अब संशोधित किया गया है. नियम के मुताबिक़, जिस महिला धावक में मेल सेक्स हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरॉन की मात्रा ज़्यादा पाई जाती थी तो उसे हार्मोन ट्रीटमेंट के लिए कहा जाता था.
उनके मुताबिक़ टेस्टोस्टेरॉन की ज़्यादा मात्रा से इस खेल में बेहतर धावक होने की क्षमता बढ़ जाती है. इस टेस्ट को फ़ीमेल हाइपरएंड्रोजेनिज्म कहते हैं.
पहले तो आपको बता दूं कि ये टेस्ट तभी होते हैं जब कोई आपकी शिकायत करे या फिर आपको जानबूझ कर खेलने से रोकने की कोशिश करे.
जब मेरे ख़ून की जांच हुई तो मैं इस टेस्ट में फ़ेल हो गई और मुझ में मेल सेक्स हार्मोन की मात्रा ज़्यादा पाई गई. तो आईएएएफ ने मुझे ट्रीटमेंट कराने की सलाह दी और मैं 2014 के राष्ट्रमंडल खेल और एशियन गेम्स में नहीं खेल पाई.
इसके बाद मैंने अदालत में लड़ने का फ़ैसला किया. स्वीट्ज़रलैंड के कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स में अपनी वकील की मदद से मैंने केस किया. मैंने 2015 में ये केस जीता और अब 100 मीटर रेस पर ये नियम लागू नहीं होता.
वो इस बात को साबित नहीं कर पाए कि 100 मीटर रेस के लिए महिला धावक में मेल सेक्स हार्मोन की ज़्यादा होने से खेल में फ़ायदा मिलता है.
केस जीतने से पहले तक मैंने बहुत अपमान झेला. गांव में लोगों को लगने लगा था कि मैं लड़का हूं क्योंकि उन्हें ये सब बातें समझ नहीं आतीं.
जब मैंने समलैंगिक रिश्ते में होने की बात बताई तब मुझे लगा कि लोग अब सोचेंगे कि 2014 में मेरे बारे में उनका अंदाज़ा सही था. जबकि ऐसा नहीं है. मैं लड़की हूं और एक लड़की को पसंद करती हूं.
निजी ज़िंदगी से आगे बढ़ें तो खेल की दुनिया में अब आपकी नज़र ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई करने पर है. क्या लगता है वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दुती की रफ़्तार ओलंपिक के क्वालीफ़ाइंग मार्क को छू पाएगी?
देखिए, 100 मीटर में मेरा नेशनल रिकॉर्ड 11.24 सेकेंड का है, जबकि ओलंपिक का क्वालीफ़ाइंग मार्क 11.15 सैकेंड है. तो मुश्किल तो बहुत है लेकिन मैं 11.10 सेकेंड के हिसाब से तैयारी कर रही हूं. मेरी कोशिश पूरी रहेगी बाक़ी देखते हैं क्या होता है.
दोहा में 27 सितंबर से आयोजित हो रहे वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दुती चंद का इवेंट रात को होगा. इसके लिए दुती चंद रात में प्रैक्टिस कर रही हैं.
राजनीति में आने के कयास
खेल के इतर दुती चंद की चर्चा राजनीति में भी हो रही है.
हाल ही में उन्होंने ट्वीट किया है कि वह बचपन से राजनीति में आना चाहती हैं, उनकी मां भी उनके गांव में कभी सरपंच रहा करती थीं.
अब इस ट्वीट के कई मायने निकाले जा रहे हैं. लोग उनके राजनीति में क़दम रखने के क़यास लगा रहे हैं.
हालांकि, उनके ट्वीट के पीछे क्या वजह है ये वो ही बेहतर बता सकती हैं. मगर लोगों कि दिलचस्पी ये जानने में ज़रूर रहेगी कि ओलंपिक की दौड़ या राजनीति में क़दम, दुती चंद कहां अपनी रफ़्तार पड़कती हैं.
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