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निशानेबाज़ी कोचों के इस्तीफ़े का भारतीय प्रदर्शन पर कितना पड़ सकता है असर
मनोज चतुर्वेदी
वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
एशियाई खेल और पेरिस ओलंपिक के लिए मुख्य कोटा वाली विश्व चैंपियनशिप सिर पर है और इस मौके पर तीन महत्वपूर्ण कोचों का इस्तीफ़ा देना भारतीय निशानेबाज़ी की तैयारियों को एक झटका है.
आइए समझते हैं कि ओलंपिक की तैयारियों में भारतीय प्रदर्शन पर इसका क्या असर पड़ सकता है.
पहले ट्रैप कोच रसेल मार्क और उनकी पत्नी स्कीट कोच लॉरिन मार्क ने 28 मई को इस्तीफ़ा दिया. भारतीय दल इस झटके से उभर पाती, इससे पहले ही पिछले माह 10 जून को रॉष्ट्रीय राइफ़ल कोच जयदीप कर्माकर ने इस्तीफ़ा दे दिया.
इन इस्तीफ़ों के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. लॉरिन ने अनुबंध की दिक़्क़तों की बात की, तो कर्माकर टीम में ख़राबा माहौल को अपने इस्तीफ़े का कारण बता रहे हैं. एक वजह हाई परफॉरमेंस डायरेक्टर पियरे व्यूचैंप्स से इन कोचों की नहीं बन पाने को भी माना जा रहा है.
पियरे से तालमेल नहीं होने से संकट
पियरे असल में विश्व विद्यालय स्तर पर हॉकी खिलाड़ी रहे हैं और वह स्पोर्ट्स साइंस से जुड़े व्यक्ति हैं और उनका निशानेबाज़ी से कोई खास नाता नहीं है. वह भारतीय खेल मंत्रालय में 2012 से 2019 तक मेंटल टफ़नेस के लिए जुड़े रहे. उनका डाटा एकत्रित करने पर ज़ोर रहता है, जबकि कोच इससे कोई ख़ास नाता नहीं रखते हैं, क्योंकि उनका निशानेबाज़ की तकनीक सुधारने पर ज़ोर रहता है.
पियरे व्यूचैंप्स थोड़े सख़्त मिजाज के भी माने जाते हैं और इस कारण उनके ऊपर कई बार आपा खोने के आरोप भी लगे हैं.
कर्माकर ने भी इस्तीफ़ा देने के बाद कहा था, ‘पियरे ने पिछले साल काहिरा विश्व चैंपियनशिप के दौरान मुझे अपशब्द कहे थे. पर मैंने उस समय इसलिए कुछ नहीं कहा था, क्योंकि मैं विदेशी धरती पर देश का नाम ख़राब नहीं करना चाहता था.’
कर्माकर ने इस्तीफ़ा देने के बाद कहा कि ‘मैंने 19 अप्रैल को भारतीय राष्ट्रीय राइफ़ल एसोसिएशन को लिखा था कि मैं सम्मान के साथ इस्तीफ़ा देना चाहता हूं. इसके बाद मैंने एक मेल में अपने साथ काहिरा में हुई घटना का ज़िक्र भी किया और उन्हें इस बारे में याद भी दिलाया पर एसोसिएशन की तरफ़ से कोई जवाब ही नहीं आया. ख़राब माहौल होने की वजह से मैंने इस्तीफ़ा दिया है.’
असल में कर्माकर ने 2022 में कोच की ज़िम्मेदारी संभाली थी और उन्हें तीन साल के लिए रखा गया था पर अनुबंध हर साल रिन्यू होना था.
कर्माकर कहते हैं, “यह सही है कि मेरा एक साल का अनुबंध 31 मार्च को ख़त्म हो गया था. एसोसिएशन को मुझसे कोई दिक़्क़त थी तो कारण बताओ नोटिस दिया जा सकता था पर कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिलने पर मैंने इस्तीफ़ा दे दिया.”
कर्माकर का योगदान
एयर राइफ़ल कोच कर्माकर के एक साल के योगदान पर नजर डालें तो इस दौरान हुई छह आईएसएसएफ प्रतियोगिताओं में भारत ने 11 पदक जीते हैं, जिसमें एक ओलंपिक कोटा शामिल है.
यह कोटा रुद्राक्ष पाटिल ने पिछले साल विश्व चैंपियनशिप 10 मीटर एयर राइफ़ल में हासिल किया था. भारत को यह सफलता करीब पौने दो दशक बाद इस स्पर्धा में मिली, क्योंकि अभिनव बिंद्रा ने 2006 में आख़िरी बार स्वर्ण पदक जीता था.
जयदीप कर्माकर खुद अच्छे निशानेबाज़ रहे हैं. उन्होंने 2012 के लंदन ओलंपिक में 50 मीटर राइफ़ल प्रोन स्पर्धा में भाग लिया था और वह चौथे स्थान पर रहकर पदक से चूक गए थे.
वैसे तो वह 2014 के बाद प्रतियोगिताओं से अलग हो गए थे पर उन्होंने 2022 में कोच बनने से पहले ही संन्यास लेने की घोषणा की थी.
रसेल मार्क और लॉरिन मार्क के बारे में भी यही कहा जा रहा है कि उनके अनुबंध को आगे बढ़ाने में देरी करने की वजह से उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया.
इसके अलावा लॉरिन स्कीट में हाई परफोरमेंस मैनेजर भी थीं, उनसे कहा गया था कि वह अपनी इस भूमिका का सही ठहराएं, जिससे विवाद बन गया था.
इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन के चुनावों में एनआरएआई लुसियोनो रोसी का विरोध कर रहा था. इस दौरान ही कर्माकर की रोसी के साथ बात करते एक फोटो सामने आई, जिसका यह अर्थ लगाया गया कि वह रोसी का समर्थन कर रहे हैं और इस कारण एसोसिएशन के वह विश्वास पात्र नहीं रहे.
इस संबंध में कर्माकर का कहना था कि ‘मेरा फोटो सामने आने पर यह माना गया कि मैं रोसी के साथ राजनीति पर बात कर रहा हूं. पर यह पूरी तरह से शिष्टाचार वाली मुलाकात थी. वैसे भी मैं उनसे पहली बार मिला था और यह मुलाकात कुछ ही मिनटों में ख़त्म हो गई थी.’
शूटिंग के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह समय
अब तक ओलंपिक खेलों में भारतीय निशानेबाज़ अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं और वह 2003 के एथेंस ओलंपिक से लेकर 2016 के रियो ओलंपिक तक कोई ना कोई पदक लाते रहे हैं.
इस कारण 2020 के टोक्यो ओलंपिक में भाग लेने वाले 15 सदस्यीय दल से भी पदक की उम्मीदें लगाई जा रहीं थीं. लेकिन भारत का शो फ्लॉप रहा और भारतीय दल को कई ओलंपिक के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा था.
भारतीय निशानेबाज़ इन ओलंपिक में 20 पदकों पर हाथ आजमा रहे थे. भारतीय दल से सिर्फ सौरभ चौधरी ही 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में फाइनल तक स्थान बना सके.
यह प्रदर्शन एनआरएआई के लिए ज़बर्दस्त धक्का था और उसने इस प्रदर्शन के बाद देश की निशानेबाज़ी को ढर्रे पर लाने के लिए सभी 24 कोचों का अनुबंध ख़त्म कर दिया था. इसके बाद ही कर्माकर, रसेल और लॉरिन सहित तमाम नए कोचों को हांगजू एशियाई खेलों और फिर 2024 के पेरिस ओलंपिक में पोडियम पर चढ़ाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई.
लेकिन एकाएक एक माह में तीन कोचों के जाने की कैसे भरपाई की जाएगी, यह तो आने वाला समय ही बताएगा. दिक्कत वाली बात यह है कि एक और कोच की पियरे से नहीं बन रही है और उनका भी इस्तीफ़ा आ जाए तो हैरत नहीं होगी.
मुश्किल से दो माह बाद बाकू विश्व चैंपियनशिप का आयोजन होना है. इसमें पेरिस ओलंपिक के 48 कोटा स्थान दांव पर होंगे. भारत कम से कम 15 कोटा स्थान प्राप्त करना चाहता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कोचों के इस्तीफ़े के रूप में लगे झटकों का भारतीय प्रदर्शन पर कितना असर होता है.
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