भारतीय महिला हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के टिकट से एक जीत दूर

भारतीय महिला हॉकी टीम

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय महिला हॉकी टीम लगातार तीसरा ओलंपिक खेलने की उम्मीदों को बनाए रखने में सफल रही है. भारत ने एफ़आईएच ओलंपिक हॉकी क्वालिफ़ायर (महिला) में पूल-बी के अपने अंतिम मुक़ाबले में इटली को 5-1 से हराकर सेमीफ़ाइनल में स्थान बना लिया.

अब सेमीफ़ाइनल में भारत का मुक़ाबला पूल-ए की नंबर एक टीम जर्मनी से होगा. भारत को अगर जर्मनी जैसी मज़बूत टीम को फतह करना है, तो पूल मुक़ाबलों के दौरान किए प्रदर्शन में सुधार करना होगा.

अगर सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला भारतीय टीम जीत जाती है, तो उसके लिए पेरिस ओलंपिक में भाग लेना पक्का हो जाएगा.

लेकिन अगर वह सेमीफ़ाइनल में खरी नहीं उतर पाती है तो उसे जापान और अमेरिका के बीच खेले जाने वाले दूसरे सेमीफ़ाइनल में हारने वाली टीम के साथ खेलना होगा और इस मैच की विजेता टीम भी ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई करेगी.

भारत ने 2020 के टोक्यो ओलंपिक में बहुत ही शानदार प्रदर्शन करके चौथा स्थान प्राप्त किया था. पर मौजूदा टीम उस तरह के खेल की झलक दिखाने में अब तक सफल नहीं हो सकी है. भारत के लिए इस मैच में एक गोल खाना भी सही नहीं है.

बड़े अंतर से जीत, सही तस्वीर पेश नहीं करती

हॉकी मैच

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इमेज कैप्शन, मंगलवार को भारत ने इटली को पांच-शून्य से मात दी.

भारत ने भले ही इटली पर बड़े अंतर जील हासिल की हो, पर मैच का यह अंतर सही तस्वीर पेश नहीं करती.

खेल के 40वें मिनट में दीपिका के पेनल्टी स्ट्रोक पर गोल जमाने से पहले भारत पर इटली बराबरी करने की तलबार लटकाने में सफल रही.

यह सही है कि इटली हॉकी में बहुत दमदार टीमों में शुमार नहीं रखती है. पर वह बीच-बीच में हमले बनाकर भारतीय डिफेंस में खलबली मचाने में सफल रही. वह तो भला हो उदिता, निक्की प्रधान जैसी डिफेंडरों का, जिन्होंने मुस्तैदी दिखाकर इटली को बराबरी पाने से रोके रखा.

इटली के बराबरी के लिए संघर्ष करते रहने की वजह भारत ने तीसरे क्वार्टर के दसवें मिनट के खेल तक सिर्फ एक गोल की बढ़त को बनाए रखा था. लेकिन भारतीय टीम के दूसरा गोल जमाते ही इटली का खेल बिखर गया और भारत खेल पर पूरा दबदबा बनाने में सफल हो गया.

भारत को इससे सबक लेने की ज़रूरत है कि प्रतिद्वंद्वी टीम पर बढ़त को जल्द से जल्द मज़बूत किया जाए.

उदिता ने सौवें मैच को बनाया यादगार

भारतीय डिफेंडर उदिता

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इमेज कैप्शन, भारतीय डिफेंडर उदिता का यह सौवां अंतरराष्ट्रीय मैच था और उन्होंने पेनल्टी कॉर्नरों पर दो गोल जमाकर भारत की इस जीत में अहम भूमिका निभाई.
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भारतीय डिफेंडर उदिता का यह सौवां अंतरराष्ट्रीय मैच था और उन्होंने पेनल्टी कॉर्नरों पर दो गोल जमाकर भारत की इस जीत में अहम भूमिका निभाई.

इससे पहले मैच के दौरान पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में नहीं बदल पाने की कमज़ोरी पर टीम पार पाती भी दिखी. मौजूदा समय में मैचों में पेनल्टी कॉर्नरों की भूमिका बहुत अहम रहती है.

इस मैच में भारतीय डिफेंस में काफी कसावट भी नज़र आई. उदिता, निक्की प्रधान और मोनिका बहुत ही होशियारी के साथ डिफेंस करतीं दिखीं.

उदिता ने बाद में भारतीय डिफेंस में आई कसावट के बारे में कहा कि पहले मैच में डिफेंस में दिखीं खामियों पर हम सभी ने काम किया और उसका असर न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ और इस मैच में देखने को मिला है.

हमें यह ध्यान रखना होगा कि इटली की टीम बहुत तेजी से हमले बनाने वाली नहीं है, लेकिन जर्मनी के सामने टीम को और बेहतर डिफेंस रखने की ज़रूरत होगी.

हां, इतना ज़रूर है कि जिस तरह से आज सलीमा टेटे, संगीता कुमारी और नवनीत कौर ने आख़िरी 20 मिनट में हमलावर रुख़ अपनाया और फिनिश को भी सही रखा, उसी तरह का प्रदर्शन जर्मनी के ख़िलाफ़ नैया पार लगा सकता है.

गोल जमाने की क्षमता बढ़ानी होगी

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यह सही है कि भारत के सामने इटली पर सामान्य जीत का लक्ष्य था, इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं थी. पर भारत के सामने बड़े अंतर से जीत पाने की ज़रूरत होती, तो टीम इस मैच में दिखाई फिनिशिंग से पार नहीं पा सकती थी.

भारतीय टीम ने गेंद पर ज्यादातर समय नियंत्रण तो रखा पर टीम गोल जमाने के मामले में थोड़ी कमज़ोर साबित हो रही है. भारत को सेमीफ़ाइनल में जर्मनी के ख़िलाफ़ उतरते समय इस कमज़ोरी का ख़ामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

असल में दिक्कत यह हो रही है कि भारतीय खिलाड़ी लगातार हमले तो बनाते रहे पर इन हमलों को गोल में इसलिए नहीं बदला जा सका, क्योंकि सर्किल में पहुंचने के बाद जिस होशियारी की ज़रूरत होती है, उसे हमारी खिलाड़ी दिखाने में कामयाब नहीं हो सकीं.

सही मायनों में भारत ने हमलों का सही इस्तेमाल किया होता तो हाफ टाइम तक उसकी जो एक गोल की बढ़त थी, वह कम से कम तीन गोल की तो हो ही सकती थी.

मुश्किल पैदा करने वाले ने ही बनाई राह आसान

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भारतीय महिला हॉकी टीम ने पूल-बी के आख़िरी मैच में उतरने से पहले ही अपनी सेमीफ़ाइनल की राह को थोड़ा आसान बना लिया.

भारत की राह आसान करने वाली वही अमेरिकी टीम है, जिसने पहले मैच में अप्रत्याशित जीत पाकर मुश्किलें ढ़ाई थीं. अमेरिका ने अपने आख़िरी मैच में न्यूज़ीलैंड को 1-0 से हराकर, उसे सेमीफ़ाइनल की दौड़ से लगभग बाहर कर दिया.

अमेरिका की लगातार तीसरी जीत के बाद भारत को सेमीफ़ाइनल में स्थान बनाने के लिए इटली से आख़िरी मैच सिर्फ ड्रा खेलने की ज़रूरत थी.

अमेरिका ने एक तरफ भारत की सेमीफ़ाइनल की राह आसान की, वहीं पूल-बी में शिखर पर रहकर भारत की दिक्कतों को भी बढ़ाया है. अमेरिका के 9 अंकों के साथ टॉप पर रहने का मतलब है कि भारत को सेमीफ़ाइनल में इस टूर्नामेंट की सबसे ऊंची रैंकिंग वाली टीम जर्मनी के साथ सेमीफाइनल खेलना पक्का हुआ.

पासिंग में भी थोड़े सुधार की ज़रूरत

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यह सही है कि भारत ने इटली के ख़िलाफ़ बड़े अंतर से जीत हासिल कर ली. पर कई बार यह देखने में आया कि भारत के हमले बनाते समय कई बार भारतीय खिलाड़ियों के हमले के समय ग़लत पास की वजह से गेंद प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के हाथों में चली गई.

यही नहीं कई बार उनके पास को इटली के खिलाड़ी बीच में पकड़ने में सफल रहे.

इटली टीम ऐसी नहीं थी, जो ऐसी ग़लतियों का फायदा उठा सकती. पर जर्मनी और जापान दोनों ऐसी टीमें हैं, जो इस तरह की ग़लतियों का फायदा उठाकर बाजी पलटने में महारत रखती हैं. इसलिए इस दिशा में भी काम करने की ज़रूरत है.

पर इस मैच में एक अच्छी बात यह देखने को मिली कि टीम ने ग़लत टैकलिंग से अपने को बचाया, जिसकी वजह से मैच में खिलाड़ियों को सिर्फ दो ग्रीन कार्ड देखने को मिले. पर दवाब वाले मैच में भी ऐसा प्रदर्शन करना टीम को सफल बना सकता है.

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