संदीप लामिछानेः नेपाली क्रिकेट के सुपरस्टार के पतन की कहानी

- Author, निरंजन राजबंशी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज नेपाली
नेपाल क्रिकेट संघ (सीएएन) ने संदीप लामिछाने को बलात्कार का दोषी ठहराए जाने और उन्हें कारावास की सज़ा सुनाए जाने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने से निलंबित कर दिया है. काठमांडू ज़िला अदालत के लामिछाने के ख़िलाफ़ सज़ा सुनाई थी.
यह घटनाक्रम नेपाल क्रिकेट के एक सुपरस्टार के ‘अंत’ की तरह है.
संदीप लामिछाने के क्रिकेट करियर की शुरुआत और कम समय में उन्हें मिली सफलता किसी फ़िल्म की नाटकीय कहानी की तरह है.
नेपाल के 70 साल से भी ज्यादा के खेल इतिहास में कई ऐसे एथलीट पैदा हुए जिन्होंने बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय मेडल भी जीते. लेकिन संदीप जैसा 'ग्लोबल स्टारडम' अब तक किसी को नहीं मिल पाया है.
सिर्फ़ स्टारडम ही नहीं, पेशेवर स्तर पर संदीप जितना पैसा भी कोई और खिलाड़ी नहीं कमा पाया है.
अगर उनका क्रिकेट करियर अपने रास्ते पर आगे बढ़ रहा होता, तो ये सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है कि वह क्रिकेट की दुनिया में क्या और धमाके कर सकते थे.
किशोरावस्था में ही अंतरराष्ट्रीय ख्याति अर्जित करने वाले लामिछाने इस मुकाम तक कैसे पहुंचे?
भारत में बचपन

संदीप के पिता चंद्र नारायण भारतीय रेलवे में काम करते थे. संदीप जब कक्षा चार तक वहां पढ़ाई करके लौटे तो क्रिकेट का भूत जाग चुका था.
संदीप लामिछाने पूर्वी नवलपरासी के रजहर में अपनी बहन के घर पर रहकर पढ़ाई करते थे.
इसी दौरान क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को पूरा करने के लिए वह चितवन क्रिकेट अकादमी के छात्र भी बने.
संदीप के अद्भुत कौशल के साथ 'लेग स्पिन' करते थे और बहुत धैर्य के साथ उन्होंने अपनी गेंदबाज़ी को रफ़्तार भी दी.
क्रिकेट के प्रति उनका जुनून ही था कि उन्होंने घर से 18 किमी दूर अकादमी तक पैदल जाने में कभी थकान महसूस नहीं की.
चितवन क्रिकेट अकादमी के कोच और राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राजू खड़का को संदीप की प्रतिभा को पहचानने देर नहीं लगी.
राजू उन्हें अंडर-19 राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के लिए काठमांडू ले गए. लेकिन राजू की उन्हें राष्ट्रीय टीम में बनाए रखने की पहली कोशिश नाकाम ही रही.
यह 2015 की बात है.
वहीं, इसी समय, नेपाल क्रिकेट टीम के कनाडाई मूल के श्रीलंकाई कोच पबुडू दशनायके राष्ट्रीय टीम के स्पिनर बसंत रेग्मी की शादी में शामिल होने के लिए चितवन पहुंचे थे.
वहां उन्होंने 'लेग स्पिनर संदीप' की प्रतिभा देखी और उन्हें सीधे राष्ट्रीय टीम की क्लोज़्ड ट्रेनिंग के लिए बुलाया.
यह संदीप लामिछाने के क्रिकेट करियर का पहला क़दम था.
प्रतिभावान खिलाड़ी

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संदीप लामिछाने की लेग स्पिन का अलग ही जादू चला. संदीप को ऐसी जगह पर अपनी गेंदबाज़ी के कौशल को दिखाने का मौका मिला जहां इसका मूल्यांकन हो सकता था और इस मूल्यांकन के मायने भी बहुत थे.
खेल के मैदान में सफलता और क़िस्मत दोनों ने ही उनका साथ दिया.
संदीप मौकों की तलाश में थे, उन्हें जब भी मौका मिला उन्होंने अपनी प्रतिभा को दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
जनवरी 2016 में बांग्लादेश में अंडर-19 क्रिकेट का वर्ल्ड कप था. इस टूर्नामेंट में नेपाल का सफ़र क्वार्टर फ़ाइनल में समाप्त हो गया.
लेकिन जितने मैच खेलने मिले, वे नवलपरासी के 15 साल के संदीप के लिए अपनी प्रतिभा को साबित करने के लिए काफ़ी थे.
उन्होंने टूर्नामेंट में आयरलैंड के ख़िलाफ़ हैट्रिक सहित पांच विकेट लिए और पूरे छह मैचों में 14 विकेट के साथ नेपाल के लिए सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बन गए.
यह प्रदर्शन संदीप के लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाज़े खोलने के लिए काफी था.
इसके तीन महीने बाद कीर्तिपुर मैदान पर आयोजित आईसीसी विश्व कप लीग चैंपियनशिप में वह राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर उतरे. उन्होंने 16 अप्रैल को नामीबिया के ख़िलाफ़ पदार्पण किया था.
इस मैच में उन्होंने पूरे 10 ओवर गेंदबाज़ी की और एक विकेट लिया. उसके बाद उन्हें कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा.
उन्हें 'सैंडी' के नाम से जाना जाने लगा, जिसने राष्ट्रीय टीम के 'विकेट लेने वाले' गेंदबाज़ में अपना स्थायी स्थान बना लिया था.

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राष्ट्रीय टीम में शामिल होने से पहले हांगकांग की यात्रा संदीप के क्रिकेट करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी.
2015 में, उन्हें दुनिया के सबसे पुराने क्रिकेट क्लबों में से एक मैरीलबोर्न क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के ख़िलाफ़ नेपाली टीम के लिए खेलने का मौका मिला.
उस समय उन्होंने एमसीसी के लिए खेल रहे हांगकांग के विकेटकीपर बल्लेबाज़ स्कॉट मैकेनी को दो बार आउट किया था.
इससे प्रभावित होकर मैकनेनी ने संदीप को अगले साल हांगकांग में टी-20 ब्लिट्ज़ में कूलन कैंटन्स टीम के साथ खेलने का मौका दिया.
वहां कोच की भूमिका में रहे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क की नज़र संदीप की प्रतिभा पर थी.
क्लार्क ने उन्हें सिडनी में ऑस्ट्रेलिया में खेलने के लिए आमंत्रित किया.
यह संदीप के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आगे बढ़ने का एक और अवसर था.
आईपीएल ने खोले दरवाज़े

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संदीप के इंडियन फ्रेंचाइजी क्रिकेट लीग (आईपीएल) में शामिल होने की चर्चा ने नेपाली क्रिकेट में एक अलग लहर ला दी थी.
उस चर्चा को तत्कालीन दिल्ली कैपिटल्स ने पूरा किया था. वह आईपीएल में खेलने वाले नेपाल के पहले खिलाड़ी बने, जब दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 32 लाख रुपये में ख़रीदा.
आईपीएल में 11 मैचों में बेंच पर बैठने के बाद उन्हें तीन मैच खेलने का मौका मिला, जहां 5 विकेट लेने के बाद वह वैश्विक क्रिकेट में एक लेग स्पिनर के रूप में उभरे.
उसके बाद ग्लोबल फ्रेंचाइजी क्रिकेट में संदीप के प्रदर्शन ने तहलका मचा दिया था.
उन्होंने वैश्विक क्रिकेट के सभी प्रकार के बड़े फ्रेंचाइजी क्रिकेट में दुनिया के सबसे बड़े सितारों के साथ खेला.
उन्होंने कई बड़े स्टार बल्लेबाज़ों को अपनी फिरकी के जाल में फंसा लिया.
उन्होंने एक टूर्नामेंट में 1 करोड़ रुपये तक कमाए.
कैरेबियन प्रीमियर लीग (सीपीएल), होवार्ट हरिकेन्स, केरल नाइट्स, लाहौर कलंदर्स, मॉन्ट्रियल टाइगर्स, सरे जगर्स, कोच्चि स्मगलर्स केरल, नंगरहार लेपर्ड्स, सिलहट सिक्सर्स, बारबाडोस ट्राइडेंट्स, जमैका तल्लावाह, मेलबर्न स्टार्स, सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स, टोरंटो नेशनल्स वे फ्रेंचाइजी टूर्नामेंट हैं जो उन्होंने खेले हैं.
संदीप राष्ट्रीय टीम के लिए विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बनने वाले थे.
2016 से अब तक उन्होंने राष्ट्रीय टीम के लिए 50 पारियों में 112 विकेट लिए हैं.
उन्होंने टी-20 में 52 पारियों में 98 विकेट भी लिए हैं. उन्होंने वनडे में 376 और टी-20 में 64 रन बनाए. अब बात करते हैं उनके नाम पर बने रिकॉर्ड्स की.

कप्तान ज्ञानेंद्र मल्ला और उपकप्तान दीपेंद्र सिंह ऐरी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद सीएएन ने अचानक संदीप को राष्ट्रीय टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया.
उस समय उनकी उम्र 21 साल 226 दिन थी. इसका मतलब था कि वह राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करने वाले दुनिया के आठवें सबसे कम उम्र के कप्तान बन गए.
विश्व क्रिकेट में सबसे कम खेलकर 100 विकेट लेने का रिकॉर्ड उनकी सबसे अनोखी उपलब्धियों में से एक माना जाता है.
उन्होंने 42 मैचों में 100 विकेट का कीर्तिमान पूरा किया है.
उन्होंने 44 मौचों में 100 विकेट लेने वाले अफ़ग़गानिस्ता के राशिद ख़ान को पीछे छोड़ दिया.
उन्होंने पिछले साल अप्रैल में काठमांडू में ओमान के ख़िलाफ़ एसीसी प्रीमियर कप मैच में आदिल शफ़ीक़ का विकेट लेकर यह उपलब्धि हासिल की थी.
वह टी-20 में 29 मैचों में 50 विकेट लेने वाले खिलाड़ियों की सूची में भी विश्व में छठे स्थान पर हैं.
उनके नाम और भी कई रिकॉर्ड हैं.
संदीप के क्रिकेट सफर का तब बुरा अंत हुआ जब 26 सितंबर, 2019 को एक नाबालिग लड़की ने गौशाला पुलिस कार्यालय में बलात्कार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई. इस लड़की को अदालती दस्तावेज़ों में ‘गौशाला 26’ नाम दिया गया है
यहीं से उसका पतन शुरू हुआ.

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पतन
संदीप उस समय कैरेबियाई प्रीमियर लीग में खेलने के लिए जमैका में थे, करीब एक महीने के लिए वो विदेश में लापता हो गए थे. हालांकि, 1 अक्टूबर, 2019 को नेपाल लौटने के बाद उन्हें हवाई अड्डे पर ग़िरफ़्तार कर लिया गया था.
उन्हें पहले सीएएन से निलंबित कर दिया गया था. उसके बाद फ्रेंचाइज़ी क्रिकेट खेलने के लिए अंतरराष्ट्रीय दरवाज़े उनके लिए बंद कर दिए गए.
ज़मानत पर रिहा होने के बाद क्रिकेट में इस बात को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई थी कि वह राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए खेलने के योग्य होंगे या नहीं. इसके पक्ष और विपक्ष में कई लोग थे.
इन तर्कों के बीच, सीएएन ने अपना निलंबन रद्द कर दिया. इस क़दम से ये संदीप को अपने क्रिकेट करियर के फिर से पटरी पर लौटने की उम्मीद भी पैदा हुई.
इस बीच नेपाल ने भी कमाल की क्रिकेट खेली.
उन्होंने विश्व कप लीग-2 में 12 में से 11 मैच जीते और एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दर्जा हासिल किया. एशिया कप के लिए क्वालीफाई करने के बाद, नेपाल ने विश्व क्रिकेट के दिग्गजों भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ क्रिकेट खेली. नेपाल ने टी-20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया.
इन कामयाबियों में संदीप की अहम भूमिका रही. वहीं, संदीप ने 100 विकेट का मुकाम भी पूरा किया.
हालांकि, काठमांडू ज़िला अदालत ने 15 दिसंबर को उन्हें बलात्कार का दोषी ठहरा दिया. यहीं से उनका क्रिकेट करियर रुक गया
नेपाल क्रिकेट बोर्ड ने अदालत के फ़ैसले के बाद उन्हें निलंबित कर दिया.

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'जीत कर भी हार गया'
संदीप ने अपने आप को निर्दोष बताया है और कहा है कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ उच्च अदालत में अपील करेंगे.
अगर वह अंतिम फैसले में बरी हो जाते हैं तो वह उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय पहुंचकर क्रिकेट में वापसी कर सकते हैं.
तब तक, संदीप की वर्तमान क्षमता बनीं रहेगी या नहीं, ये एक और अलग मसला है.
लेकिन कम से कम जब तक यह फैसला नहीं हो जाता, वह क्रिकेट से दूर रहेंगे.
अगर उनके ख़िलाफ़ फैसला पलटा नहीं गया तो उनका क्रिकेट करियर हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगा.
भारत के ख़िलाफ़ एशिया कप उनका आख़िरी एक दिवसीय मैच था और ओमान के ख़िलाफ़ एसीसी प्रीमियर कप मैच उनका आख़िरी टी 20 मैच था.
संदीप एक गायक भी हैं. मई 2019 में उन्होंने जो गीत गाया था, उसका एक बोल उनके साथ मिलता दिख रहा है.
"उदासियों से मेरा दिल भारी था, मैं जीत कर भी हार गया”
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