सीरिया में अपनों की तलाश में क़ब्रों और बॉडी बैग्स को खंगालते लोग

- Author, लुसी विलियम्सन
- पदनाम, दमिश्क से, बीबीसी मध्य-पूर्व संवाददाता
अद्रा एक अजीब तरह का पड़ोसी क़ब्रिस्तान है, जहाँ ऊबड़-खाबड़ ज़मीन पर दो अकेली क़ब्रें हैं, जो घास से ढकी हुई हैं.
कई साल तक यह क्षेत्र राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना के नियंत्रण में रहा था.
अब असद के भागने के एक सप्ताह बाद, इस ख़ाली क़ब्रिस्तान के एक कोने में कंक्रीट की स्लैब को हटाया गया है, जिससे एक उथली क़ब्र नज़र आई है.
इसमें कम से कम आधा दर्जन सफ़ेद बॉडी बैग्स (बड़े थैले) हैं, जिन पर नाम और जेल के नंबर लिखे हुए हैं.

जब हम वहां पहुंचे तो पास में रहने वाले ख़ालिद अल हमद बड़ी मुश्किल से बैगों को बाहर निकाल रहे थे.
उन्होंने हमें वो तीन बैग दिखाए, जिन्हें पहले ही खोल लिया था. हर बैग में एक इंसानी खोपड़ी और हड्डियाँ हैं. बैग पर लिखे शब्दों से पता चलता है कि वे दो महिला क़ैदियों और एक पुरुष क़ैदी के अवशेष हैं.
असद शासन में ग़ायब हुए लोगों की तलाश
यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत कैसे हुई या क्या यह असद शासन के दौर में आपराधिक दुर्व्यवहार का सबूत है.
लेकिन ख़ालिद को किसी समझाने की ज़रूरत नहीं है. वो अपने दो भाइयों जिहाद और हुसैन की तलाश कर रहे हैं, जिन्हें एक दशक पहले असद की बदनाम वायु सेना की ख़ुफिया एजेंसियों ने पकड़ लिया था.
उसके बाद से इन दो भाइयों का कुछ पता नहीं चला है.
ख़ालिद का कहना है, "कुछ लोगों को 'ड्राइविंग स्कूल' नाम के इलाक़े में ले जाया गया और वहीं उनकी हत्या कर दी गई. मुझे लगता है कि मेरे भाइयों के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा. हो सकता है कि वो यहाँ दफ़नाए गए किसी बैग में हों."
बीबीसी ने यह जानकारी सीरिया में ह्यूमन राइट्स वॉच के साथ साझा की. उनका कहना कि वो अन्य जगहों पर भी क़ैदियों के अवशेषों को ऐसे ही थैलों में भरकर फेंके जाने की ख़बरों की जांच कर रहे हैं.
असद के पतन ने उन परिवारों में उम्मीद की किरण ला दी है, जो दशकों से अपने प्रियजनों के बारे में जानने के लिए किसी सुविधा की तलाश में थे.
ख़ालिद ने कहा, "अगर आप असद के समय में पहले कभी यहां से गुज़रते, तो आप रुक नहीं सकते थे, आप ऊपर नहीं देख सकते थे."
"इस इलाक़े से गाड़ियाँ तेज़ रफ़्तार से निकल जाती थीं. अगर आप रुकते तो वो आपके पास आते, आपके सिर पर प्लास्टिक का थैला रख देते और आपको ले जाते."
ख़ालिद की तरह हज़ारों परिवार अब सीरिया में अपने रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं जो असद की कुख्यात जेल व्यवस्था या उसके सैन्य पूछताछ केंद्रों में ग़ायब हो गए हैं.
इनमें से कुछ को दमिश्क के माज़ेह सैन्य हवाई अड्डे पर ले जाया गया था.
'400 महिलाओं के साथ नियमित तौर पर रेप'

यह जगह कभी असद और विद्रोही बलों के बीच एक महत्वपूर्ण बफ़र ज़ोन हुआ करती थी, जो अब वीरान हो चुकी है. यहां रनवे पर फेंके गए सैनिकों के जूते बिखरे पड़े हैं और ज़मीन पर एक ज़िंदा रॉकेट पड़ा है.
इस जगह ज़िंदगी की एकमात्र निशानी इसके गेट पर नए गार्ड हैं. ये हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के युवा मिलिशिया पुरुष हैं. इसी गुट ने पिछले हफ़्ते सीरिया पर कब्ज़ा कर लिया था.
उन्होंने हमें असद की सेना का यातना कक्ष दिखाया, जिसमें क़ैदियों की पिटाई के लिए उनके पैरों को बांधने के लिए एक खंभा था और इसके ठीक बिजली के स्विचबोर्ड के पास तार भी पड़े हुए थे.
गार्ड के कमांडर अबू जर्राह ने हमें बताया, "यहां उन्होंने क़ैदियों को बिजली का झटका दिया. ये बिजली के तार हैं. पूछताछ करने वाला यहां बैठता था. इन्हीं तारों से क़ैदी को बिजली का झटका दिया जाता था."
"यहां क़ैदियों के दिमाग़ पर ऐसा असर पड़ता था कि वो सबकुछ कबूल कर लेते थे. वो पूछताछ कर्ता से कहते थे कि वो जो चाहे लिख दे, इस उम्मीद में कि उनको दी जाने वाली यातना बंद हो जाएगी."
अबू जर्राह ने यह भी कहा कि यहां बंद 400 महिलाओं के साथ नियमित रूप से बलात्कार किया जाता था और जेल में ही उनके बच्चों का जन्म होता था.
यहां मौजूद रिकॉर्ड में अपने माता-पिता या बच्चे को ढूंढना काफ़ी तकलीफ़ों से भरा है, इससे ज़्यादा तकलीफ़ केवल इस बात से हो सकती है कि उन्हें ढूंढना ही नहीं है.
इसी के बगल की इमारत में पीड़ित परिवार कंक्रीट के फ़र्श पर ढेर में बिखरी हुई तस्वीरों को हताश होकर खंगाल रहे हैं. एक के बाद एक चेहरे में अपनों की तलाश में उनके ख़ुद के चेहरे पर गंभीरता और ख़ालीपन दिखता है जो असद के शासन के दौर के ख़ामोश गवाह हैं.
'हमें जो दर्द मिला है, असद को भी मिले'

इन्हीं में से एक रोती हुई महिला अल-कामिशली के कुर्द महमूद सईद हुसैन की मां भी थीं.
उनका कहना है, "कल हमने देखा कि उसका नाम एयरबेस जेल के रिकॉर्ड में है. हम यहां आए लेकिन उसे नहीं ढूंढ पाए. मैं उसे 11 साल से एक जेल से दूसरी जेल में खोज रही हूं."
फ़र्श पर पड़ी तस्वीरों के ढेर की ओर इशारा करते हुए वह रो पड़ीं, "ये सब मेरे बेटे जैसे हैं. ईश्वर असद को भी ऐसा ही दर्द दे, जैसा उसने हमें दिया है."
उनके पीछे तीन कमरे हैं, जिनमें एक के बाद एक फ़ाइलें खुली हुई हैं. कई लोग फ़र्श पर कई फ़ीट ऊंचे दस्तावेज़ों के ढेर पर दुबके हुए बैठे हैं.
एक महिला ने गुस्से में कहा, "ये नोट क्या हैं?"
"कोई भी हमारी मदद नहीं कर रहा है. हम चाहते हैं कि कोई हमारे पास आकर इन दस्तावेज़ों की जांच करे. मैं जेल की इतनी सारी फ़ाइलों में से उसे कैसे ढूंढ सकती हूं?"
यहां किसी भी सुचारू व्यवस्था के अभाव का मतलब है कि कि सीरिया में हर रोज़ महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट हो रहे हैं.
इनमें लापता लोगों के बारे में जानकारी और संभावित रूप से असद शासन और अमेरिका या ब्रिटेन जैसी विदेशी सरकारों के बीच किसी भी तरह के संबंध की जानकारी शामिल है.
उन पर अमेरिका की असाधारण प्रत्यावर्तन नीति से लाभ उठाने का आरोप लगाया गया है, जिसके तहत संदिग्ध आतंकवादियों को पूछताछ के लिए उन देशों में भेजा जाता था, जहां उन्हें यातनाएं दी जाती थीं.
मानवाधिकार समूहों ने ब्रिटेन की सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने आतंकवाद के ख़िलाफ़ तथाकथित युद्ध के दौरान अमेरिकी कार्यप्रणाली पर आंखें मूंद लीं, जब अमेरिका ने सीरिया सहित मध्य पूर्व के कई देशों में बंदियों को भेजा था.
नष्ट होते दस्तावेज़

यहां बाहर की तरफ एयरबेस के शांत हैंगरों में रूस में बने विमानों और राडार के जले हुए अवशेष बिखरे पड़े हैं, जो पिछले सप्ताह के दौरान बार-बार इसराइली हवाई हमलों में क्षतिग्रस्त हुए थे.
असद के जाने से सीरिया में संघर्ष कर रहे गुटों और तुर्की, ईरान और अमेरिका सहित उनके विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समर्थकों के बीच इलाक़े में शक्ति का नाज़ुक संतुलन बदल गया है.
यह केवल सीरिया का युद्ध नहीं था. यहां जो कुछ भी हो रहा है उसमें अन्य देशों के अपने हित भी शामिल हैं.
सीरियाई लोग इस बात पर अड़े हुए हैं कि अब समय आ गया है कि वो बिना किसी के निर्देश के ख़ुद देश पर शासन करें.
जब हम वहां से निकल रहे थे तभी एक युवा एचटीएस लड़ाकू पूछताछ भवन के ऊपर टंगे असद की तस्वीर पर हमला करने के लिए छत पर चढ़ गया.
वह नीचे अपने साथियों की ओर देखकर मुस्कुराया, जबकि असद शासन की सैन्य फाइलों से तस्वीरें और दस्तावेज़ उनके जूतों के चारों ओर फड़फड़ा रहे थे.
असद के पतन ने न केवल सीरिया के भविष्य के बारे में कई सवाल ख़ड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब नहीं मिला है, बल्कि इसने कई पुराने सवाल भी खड़े किए हैं जिनके जवाब तलाशे जा रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

















