सीरिया में असद सरकार का पतन दुनिया के लिए क्या मायने रखता है?

सीरिया में सत्ता परिवर्तन पर जश्न मनाता शख़्स

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इमेज कैप्शन, रविवार को सीरिया की सेना की ओर से राष्ट्रपति बशर अल-असद के 24 साल के शासन के समाप्त होने के ऐलान के बाद विपक्ष का झंडा थामे जश्न मनाता शख़्स

सीरिया मध्य पूर्व के केंद्र में है और असद सरकार के पतन से इस इलाक़े और दुनिया के एक बड़े हिस्से में शक्ति संतुलन बदल जाएगा.

सीरिया में 14 साल तक चले गृहयुद्ध में रूस, तुर्की, ईरान, सऊदी अरब और अमेरिका ने भी दख़ल दिया.

साथ ही इसमें लेबनान की सेना ने भी हस्तक्षेप किया, तो अब उनके लिए सीरिया के नए हालात का क्या मतलब है?

रूस सीरिया की बशर अल-असद सरकार का एक प्रमुख सहयोगी रहा है और रूसी मीडिया के मुताबिक़ असद और उनका परिवार मॉस्को पहुंच गए हैं और उन्हें "मानवीय आधार पर" शरण दी गई है.

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रूस

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने निजी तौर पर बशर अल-असद को शरण देने का फ़ैसला किया है.

उन्होंने बताया कि सीरिया में रूसी सैन्य अड्डे "हाई अलर्ट" पर हैं, लेकिन एक अनाम क्रेमलिन स्रोत ने रूसी मीडिया को बताया है कि विद्रोहियों ने उन सैन्य अड्डों की सुरक्षा की गारंटी दी है.

रूस ने साल 2015 में सीरिया के संघर्ष में सीधे दखल दिया था, जब उसने विपक्ष के कब्जे वाले क्षेत्रों पर अपना पहला हवाई हमला किया था.

रूस की मदद को उन प्रमुख वजहों में एक माना जाता है, जिनसे असद सरकार साल 2015 और 2016 के बीच देश के ज़्यादातर हिस्से पर विद्रोही गुटों से अपना नियंत्रण वापस लेने में सफल रही.

रूस अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुला रहा है ताकि इस बात पर चर्चा की जा सके कि आगे क्या होगा.

पुतिन और असद (साल 2020) की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, रूस को सीरिया की असद सरकार का सबसे ख़ास सहयोगी माना जाता था (फ़ाइल फ़ोटो).

बीबीसी के रूस संपादक स्टीव रोजेनबर्ग का कहना है, "रूस की बड़ी चिंता दोनों तटों पर मौजूद उसके दो सैन्य ठिकानों - हमीमिम एयर बेस और टार्टस में एक नौसैनिक केंद्र को लेकर है, जिनकी बदौलत पिछले कुछ साल में रूस को पूर्वी भूमध्य सागर में पैर जमाने का मौका मिला है.''

उन्होंने कहा "भले ही रूस ने नौ साल तक बशर अल-असद का समर्थन किया था और उन्हें सत्ता में बनाए रखने के लिए सैन्य सहायता भेजी थी, लेकिन अब असद को हटा दिया गया है, तो रूस सीरिया में नए नेतृत्व के साथ बातचीत करने की कोशिश कर रहा है."

स्टीव रोजेनबर्ग कहते हैं, "रूस अब इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि वो हमेशा से इस संकट का राजनीतिक समाधान चाहता रहा है. दिलचस्प बात यह है कि हाल के समय तक रूसी मीडिया 'सीरिया में हथियारबंद विपक्ष' को 'आतंकवादी' कह रहा था. लेकिन अब 'यह शब्द' रूसी रिपोर्टिंग से बाहर हो गया है और उन्हें 'सशस्त्र विपक्ष' या केवल 'विपक्ष' कहा जा रहा है."

ईरान

ईरानी अख़बार

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इमेज कैप्शन, सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की तस्वीर के साथ उनकी सरकार के पतन की ख़बरों को ईरान के अख़बारों में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया.
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ईरान ने भी असद के शासन का भी समर्थन किया था. ईरान ने कहा है कि उसे सीरिया के साथ "दोस्ताना" संबंध जारी रहने की उम्मीद है.

ईरान ने असद सरकार के दौरान सरकारी सेना को महत्वपूर्ण सैन्य सहायता मुहैया कराई थी. उसने सीरियाई युद्ध के चरम पर होने के दौरान हथियारबंद गुटों के ख़िलाफ़ लड़ने वाले कुछ सीरियाई अर्द्धसैनिक बलों को ट्रेनिंग दी.

हालांकि, बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता ह्यूगो बशेगा कहते हैं, "असद की सत्ता के पतन को ईरान अपने प्रभाव को लगे बड़े झटके के तौर पर देख रहा है."

वो कहते हैं, "असद शासन के दौरान सीरिया; ईरान और हिज़्बुल्लाह के बीच संबंध की कड़ी था. ईरान हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों और उनके राजनीतिक आंदोलन का लेबनान में समर्थन करता है.

उन्होंने कहा, "इसराइल के साथ युद्ध के बाद हिज़्बुल्लाह ख़ुद भी काफ़ी कमज़ोर हो गया है. सीरिया में गृह युद्ध के सबसे हिंसक दौर में ईरान ने सीरिया में अपने सलाहकार भेजे और हिज़्बुल्लाह ने असद के विरोधियों को कुचलने में मदद करने के लिए अपने लड़ाकों को तैनात किया.''

"ईरान ने यमन में हूती विद्रोहियों को हवाई हमलों में निशाना बनते हुए भी देखा है. ये सभी गुट और इनके साथ ही इराक़ में मौजूद लड़ाके और ग़ज़ा में हमास को मिलाकर उस संगठन का निर्माण करते हैं जिसे ईरान 'प्रतिरोध की धुरी' (एक्सिस ऑफ़ रेसिस्टेंस) कहता है.

'' इसे अब गंभीर रूप से कमज़ोर कर दिया गया है."

बशेगा कहते हैं, "सीरिया की इस नई तस्वीर का इसराइल में जश्न मनाया जाएगा, जहां ईरान को अपने अस्तित्व के लिए ख़तरा माना जाता है."

अमेरिका और पश्चिमी देश

अमेरिका में रह रहे सीरियाई

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इमेज कैप्शन, वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति भवन के सामने जुटे असद सरकार के विरोधी सीरियाई लोग

बीबीसी के रक्षा संवाददाता फ्रैंक गार्डनर कहते हैं, "जब एक युवा, ब्रिटेन में ट्रेनिंग पाए नेत्र रोग विशेषज्ञ असद को साल 2000 में सीरिया का राष्ट्रपति पद मिला था, तो पश्चिमी देशों को उनसे बहुत उम्मीदें थीं.

"लोगों को लगा कि तीन दशकों तक दमघोंटू, निरंकुश शासन के बाद असद का शासन ताज़ी हवा की सांस की तरह होगा. उनके दिवंगत पिता हाफ़िज़ को साल 1982 में हमा में दस हज़ार से ज़्यादा लोगों के नरसंहार का आदेश देने के लिए याद किया जाता है.''

गार्डनर कहते हैं, "उसी साल सत्ता संभालने वाले अन्य युवा अरब शासकों जॉर्डन में किंग अब्दुल्ला द्वितीय और मोरक्को में किंग मोहम्मद-VI की तरह बशर को सीरिया को डिजिटल युग में लाने के लिए उत्सुक एक आधुनिक विचारों वाला युवा कहा जाता था.''

'' लेकिन पश्चिमी देशों का उनसे मोहभंग साल 2001 में उस वक़्त शुरू हुआ, जब सीरियाई राष्ट्रपति ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर साथ सभी चरमपंथी समूहों की निंदा करने से इनकार कर दिया.''

बशर अल-असद ने अपने देश में मौजूद सशस्त्र फ़लस्तीनी समूहों को कुछ इस तरह से संबोधित किया, ''आप उन्हें 'आतंकवादी' कहते हैं, हम उन्हें स्वतंत्रता सेनानी कहते हैं.''

"असद ने जल्द ही साबित कर दिया कि वह कोई सुधारक नहीं है. और जब उनके लोगों ने बदलाव की मांग की तो उन्हें गोलियों, बमों, सरीन गैस के ज़रिए बड़े पैमाने पर यातना दी गई."

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि सीरिया "ऐतिहासिक अवसर " के दौर से गुज़र रहा है, लेकिन अमेरिका वहां की सत्ता में संभावित खालीपन को लेकर भी चिंतित है.

सीरियाई युद्ध की शुरुआत से ही अमेरिका ने कुछ विद्रोही गुटों का समर्थन किया है. लेकिन मौजूदा समय में वह मुख्य रूप से कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) का समर्थन करता है, जिसका सीरिया के उत्तर-पूर्व पर कब्ज़ा है.

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी डैनियल शापिरो ने कहा कि तथाकथित 'इस्लामिक स्टेट' (आईएस) समूह से लड़ने के लिए अमेरिकी सेना पूर्वी सीरिया में रहेगी.

अमेरिका को आशंका है कि तथाकथित आईएस अपने अभियानों को आगे बढ़ाने के लिए "अराजक और बदलते हालात" का फ़ायदा उठा सकता है.

तुर्की

इस्तांबुल में सीरियाई लोगों का जश्न

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इमेज कैप्शन, असद सरकार के पतन के बाद जश्न मनाते हुए तुर्की में रहने वाले सीरियाई

बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता ह्यूगो बशेगा कहते हैं, "बहुत से लोगों का मानना ​​है कि सीरिया में विपक्षी गुटों का यह हमला तुर्की के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था.''

"कुछ समय से तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप्प अर्दोआन असद पर दबाव डाल रहे थे कि वो संघर्ष का कूटनीतिक समाधान तलाशने के लिए बातचीत करें, जिससे सीरियाई शरणार्थियों की वापसी हो सके.''

सीरिया के कम से कम तीस लाख़ शरणार्थी तुर्की में हैं, और यह स्थानीय स्तर पर एक संवेदनशील मुद्दा है. लेकिन असद ने विरोधियों से बातचीत करने से इनकार कर दिया था.

"तुर्की, जो सीरिया में कुछ विद्रोहियों का समर्थन करता है, उसने विद्रोह का नेतृत्व करने वाले इस्लाम समर्थक समूह एचटीएस का समर्थन करने से इनकार किया है."

हालाँकि तुर्की ने सीरिया के उत्तर में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़ों पर शासन करने वाली कुछ संस्थाओं का समर्थन किया है. अब उसका कहना है कि वह आने वाले दिनों में सीरिया के शांतिपूर्ण और स्थायी भविष्य को सुरक्षित करने में मदद को "तेज़" करेगा.

तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान का कहना है कि इसमें गृहयुद्ध के दौरान भागे सीरियाई लोगों को वापस लाने का तरीका तलाशना शामिल है.

लेबनान

बच्ची के साथ खड़ी सीरियाई महिला

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इमेज कैप्शन, सीमा पार करने के इंतज़ार में सीरिया और लेबनान की सीमा पर खड़ी एक महिला

बीबीसी अरबी सेवा के संवाददाता कैरिन टोरबे का कहना है कि लेबनान में विभिन्न राजनीतिक समूहों के बीच मतभेद में असद सरकार के लिए समर्थन का मुद्दा अहम रहा है.

कई लोगों का मानना ​​है कि सीरिया ने लेबनान पर लंबे समय तक कब्ज़ा किया था, जब तक कि साल 2005 में असद की सेना की लेबनान से वापसी नहीं हो गई.

इसलिए सीरिया में असद सरकार का विरोध करने वाले कुछ राजनीतिक गुट उसके पतन को सकारात्मक नतीजे के तौर पर देखते हैं.

लेकिन लेबनान में असद का समर्थन करने वाले राजनीतिक समूह इसे एक चिंताजनक घटनाक्रम के रूप में देखते हैं.

बशर अल-असद की सरकार का पतन ख़ास तौर पर डूबते हिज़्बुल्लाह के लिए अंतिम तिनके में से एक की तरह देखा जाता है.

कैरिन टोरबे कहती हैं," लेबनान में असद समर्थकों का कहना है "सीरिया हिज़्बुल्लाह की रीढ़ और मुख्य आपूर्ति का ज़रिया रहा है, जो अब कट गया है."

वो कहती हैं, "न केवल अभी के लिए, बल्कि गुटों के ख़ुद को फिर से खड़ा करने की संभावनाओं के लिए भी यह एक और झटका है."

लेकिन लेबनान की संसद में हिज़्बुल्लाह के राजनीतिक गुट के एक सदस्य ने कहा है कि इसराइल के ख़िलाफ़ "प्रतिरोध का आंदोलन" प्रभावित नहीं होगा.

हसन फदलल्लाह कहते हैं, "सीरिया में जो कुछ भी हो रहा है, भले ही वह ख़तरनाक हो लेकिन वह हमें कमज़ोर नहीं कर सकता."

लेबनान में सीरिया से आए नए शरणार्थियों के आगमन के बारे में भी चिंताएँ हैं, जिनमें से ज़्यादातर शिया समुदायों के हैं. ऐसे कई लोग पहले ही लेबनान में प्रवेश कर चुके हैं.

कैरिन टोरबे कहती हैं, "यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि कैसे चीजें पूरी तरह से उलट गई हैं. हम जानते हैं कि शिया लोग लेबनान से सीरिया में तब आते थे, जब सीरिया में असद का शासन था."

"लेबनान में आने वाले लोग बीबीसी को बता रहे हैं कि उन्हें अभी तक देश पर नियंत्रण करने वाले गुटों से किसी भी तरह की प्रतिक्रिया का सामना नहीं करना पड़ा है. लेकिन वो इस डर से आए हैं कि उनसे निजी तौर पर बदला लिया जा सकता है."

इसराइल

गोलान हाइट्स

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इमेज कैप्शन, इसराइल के क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स में मौजूद इसराइली सैनिक और सीरिया के साथ लगे बफ़र ज़ोन की तरफ से आ रहे इसराइली फौजी

इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने असद सरकार के पतन के बाद सेना को इसराइल के कब्ज़े वाले गोलान हाइट्स और सीरिया के बीच बफ़र ज़ोन पर "नियंत्रण" करने का आदेश दिया.

उन्होंने कहा कि सीरिया के साथ सैन्य वापसी समझौता, जिसके तहत साल 1974 में ग़ैर सैनिक इलाक़ा बनाया गया था, अब "ख़त्म" हो गया है.

इसराइल ने साल 1967 के छह दिनों तक चले युद्ध के अंतिम दौर में सीरिया के गोलान पर कब्जे को छीन लिया था. साल 1981 में उसने इस पर एकतरफा कब्जा कर लिया था. इसराइल के इस कदम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली, हालाँकि अमेरिका ने साल 2019 में इसे एकतरफा मान्यता दे दी.

इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने बफ़र ज़ोन के सैन्य अधिग्रहण को इसराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक "सीमित और अस्थायी कदम" बताया है.

यरूशलम में बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता योलांद नेल का कहना है, "गिदोन सार ने यह भी पुष्टि की कि इसराइल ने सीरिया में संदिग्ध रासायनिक हथियारों और मिसाइल भंडारों पर हमला किया और कहा कि ऐसा उन्हें चरमपंथी गुटों के हाथों में पड़ने से रोकने के लिए किया गया था."

उन्होंने बताया "मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि सीरिया में पिछले एक-दो दिनों में दर्जनों इसराइली हवाई हमले हुए हैं, जिसमें दमिश्क की एक जगह भी शामिल है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका इस्तेमाल ईरानी वैज्ञानिकों ने रॉकेट बनाने के लिए किया था."

मध्य पूर्व के अन्य देश

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इमेज कैप्शन, इसराइल के कब्ज़े वाले गोलान हाइट्स में असद सरकार के पतन के बाद जश्न मनाते लोग

बीबीसी मध्य पूर्व के क्षेत्रीय संपादक सेबेस्टियन उशर के रिपोर्ट के मुताबिक़, "सऊदी अरब के एक अधिकारी ने कहा है कि वह सीरिया में अराजकता को रोकने के लिए सभी क्षेत्रीय संबंधित साझेदारों के साथ बातचीत कर रहा है.''

वो कहते हैं, "सीरिया के पड़ोसी जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह ने भी इसी तरह का संदेश जारी किया है, जिसमें आगे के संघर्ष से बचने का अपील की गई है. एहतियात के तौर पर जॉर्डन ने सीरिया के साथ अपनी सीमा को सील कर दिया है.''

उन्होंने कहा, "यूएई में एक वरिष्ठ राजनयिक अधिकारी अनवर गरगाश ने कहा है कि उनके देश की मुख्य चिंता चरमपंथ और आतंकवाद है. उन्होंने असद पर अलग-अलग अरब देशों द्वारा उन्हें दिए गए मौक़ों का इस्तेमाल नहीं करने का आरोप लगाया."

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