सीरिया में हलचल पर भारत सतर्क, नेहरू से लेकर मोदी तक कैसे रहे हैं संबंध

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सीरिया के दक्षिण के हिस्से में इस्लामी विद्रोहियों ने डेरा इलाक़े पर कब्ज़ा कर लिया है और अब वो राजधानी दमिश्क की तरफ बढ़ रहे हैं.
डेरा वही इलाक़ा है जहां से साल 2011 में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ विद्रोह की शुरुआत हुई थी. विद्रोही तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स के भी नज़दीक पहुंच गए हैं और उन्होंने सेना से पाला बदलने की अपील की है.
वहीं दूसरी तरफ़ कुर्द लड़ाके भी आगे बढ़ रहे हैं और सीरिया के पूर्वी रेगिस्तान पर उन्होंने कब्ज़ा कर लिया हैं.
इस बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने सीरिया में स्थिति को देखते हुए ट्रैवल एडवाइज़री जारी की है. अमेरिका, रूस, तुर्की, जॉर्डन समेत कई और मुल्कों ने भी स्थिति को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि वो सीरिया में हो रही हलचल पर नज़र बनाए हुए हैं.

ताज़ा हालात
ब्रिटेन स्थित सीरियन ऑब्ज़र्वेटरी ने कहा है कि सीरियाई सरकारी सेना के साथ 'हिंसक संघर्ष' के बाद 'स्थानीय विद्रोही गुट' सेना के कई ठिकानों पर कब्ज़ा करने में कामयाब रहे हैं.
ऑब्ज़र्वेटरी का कहना है कि दक्षिण की तरफ़ डेरा के 90 फ़ीसदी इलाक़े पर अब विद्रोहियों का कब्ज़ा है, और केवल सनाम्यन इलाक़ा ही सरकारी सेना के कब्ज़े में रह गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि विद्रोहियों और सेना के बीच समझौता हो गया है जिसके तहत डेरा से सेना पीछे हटेगी और सेनाधिकारियों को दमिश्क तक जाने के लिए सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा.
बीबीसी स्वतंत्र रूप से इन ख़बरों की पुष्टि नहीं कर सकता. लेकिन इस तरह की ख़बर ऐसे वक्त आई है जब उत्तरी सीरिया में विद्रोही होम्स शहर के क़रीब पहुंच गए हैं.
रणनीतिक और सांकेतिक तौर पर इस क्षेत्र की काफ़ी अहमियत है. ये इलाक़ा जॉर्डन की सीमा से लगे मुख्य क्रॉसिंग के क़रीब है.
पिछले हफ़्ते इस्लामी विद्रोहियों ने चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए बहुत तेज़ी से अलेप्पो शहर पर कब्ज़ा कर लिया था.
अलेप्पो से 110 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हमा में 10 लाख लोग रहते हैं. विद्रोही हमा पर भी कब्ज़ा कर चुके हैं और सीरिया के तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स तक पहुंच गए हैं.

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बेरूत से बीबीसी मध्य पूर्व मामलों के संवाददाता ह्यूगो बशेगा के अनुसार, "दक्षिण में भी स्थानीय विद्रोही गुट पनप गए हैं. राष्ट्रपति बशर अल-असद उन गुटों को रोकने में असमर्थ दिख रहे हैं जो उन्हें सत्ता से बेदख़ल करना चाहते हैं."
बशेगा बताते हैं, "अपने प्रमुख सहयोगियों रूस और ईरान की मदद के बिना, असद का शासन तेज़ी से ख़तरे की ओर बढ़ रहा है."
विद्रोही लड़ाके राजधानी दश्मिक की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं और कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि वे राजधानी से महज़ 100 किलोमीटर दूर रह गए हैं.
सीरिया से आ रही ख़बरों में कहा गया है कि गुरुवार को हमा शहर पर कब्ज़ा करने के बाद इस्लामी विद्रोही तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स के बाहरी इलाक़े तक पहुंच गए और शहर से वे महज पांच किलोमीटर दूर रह गए हैं.
इसकी वजह से शहर से दसियों हज़ार लोग पलायन कर गए हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि पिछले हफ़्ते शुरू हुए गृह युद्ध के दौरान अब तक कुल तीन लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं.
अगर होम्स पर विद्रोहियों का कब्ज़ा हो जाता है तो यह दमिश्क और सीरियाई समुद्र तट के बीच संपर्क बनाए रखने वाले रास्ते को काट देगा.
सीरिया का तटीय इलाक़ा बशर अल-असद का गढ़ माना जाता है.
नॉर्वे के शरणार्थी काउंसिल के प्रमुख जान एगीलैंड ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि प्रभावित इलाकों में मानवीय हालात काफ़ी कठिन हैं.
उन्होंने कहा, "इन इलाक़ों तक पहुंच बहुत मुश्किल है."
भारत ने जारी की एडवाइज़री

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सीरिया में स्थिति को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात एक ट्रैवल एडवाइज़री जारी कर सीरिया में रह रहे भारतीय नागरिकों से तत्काल देश छोड़ देने की सलाह दी है.
इसके अलावा भारतीय नागरिकों से सीरिया जाने से भी मना किया गया है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, "सीरिया में रह रहे भारतीय दमिश्क में स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें."
विदेश मंत्रालय ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर (+963 993385973) जारी किया है. इसके अलावा मंत्रालय ने ईमेल आईडी [email protected] भी जारी किया है.
शुक्रवार को की गई प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि सारिया में लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं, जो वहां कुछ परियोजनाओं से जुड़े हुए हैं.
रणधीर जायसवाल ने कहा, "पिछले कुछ समय के दौरान उत्तरी सीरिया में लड़ाई बढ़ गई है. हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं. वहां लगभग 90 भारतीय नागरिक हैं. वहां पर मौजूद भारतीय कई संस्थानों के साथ जुड़े हुए हैं और काम कर रहे हैं. हमारा दूतावास उनकी सुरक्षा के लिए नियमित रूप से उन भारतीय नागरिकों के संपर्क में है."
सीरिया के साथ भारत के रिश्ते

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भारत और सीरिया के रिश्ते ऐतिहासिक रहे हैं और वर्तमान में कुछ परियोजनाओं पर दोनों मुल्क साथ काम कर रहे हैं.
साल 2022 में सीरिया के विदेश मंत्री फ़ैसल मकदाद ने भारत का दौरा किया था. उस दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि "एक पावर प्लांट और एक स्टील प्लांट बनाने के लिए भारत सीरिया को 28 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद देगा."
आज़ादी के बाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दायरे से बाहर जाकर अरब देशों से अच्छे संबंध बनाए थे.
नेहरू ने 1957 और 1960 में सीरिया का दौरा किया था. उन्होंने सीरिया की बाथ पार्टी और उसके नेताओं से अच्छे संबंध बनाए थे.
इसराइल की बार इलान यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉक्टर रामी गिनात ने अपने शोध में लिखा है कि स्थानीय प्रेस में नेहरू के दौरे को लेकर काफ़ी गहमागहमी थी.
उनके अनुसार "लोगों में काफ़ी उत्साह था. नेहरू के स्वागत में 10 हज़ार से ज़्यादा लोग एयरपोर्ट पर खड़े थे. नेहरू को देखकर लोग एक आवाज़ में बोल रहे थे- विश्व शांति के नायक का स्वागत है. एशिया के नेता ज़िंदाबाद के नारे लग रहे थे."
1978 और 1983 में तत्कालीन सीरियाई राष्ट्रपति हाफ़िज़ अल-असद ने भारत का दौरा किया था. 2003 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सीरिया के दौरे पर गए थे.
2003 में अटल बिहारी वाजपेयी के सीरिया दौरे पर भारतीय विदेश मंत्रालय के तत्कालीन प्रवक्ता नवतेज सरना ने सीरिया टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत का अरब वर्ल्ड से बहुत मज़बूत संबंध है और ख़ास कर सीरिया से.
उन्होंने कहा था कि वाजपेयी के सीरिया दौरे से पता चलता है कि भारत के लिए यह मुल्क कितनी अहमियत रखता है.
सरना से पूछा गया कि क्या भारत के इसराइल से बढ़ते सुरक्षा संबंधों के कारण सीरिया को लेकर रुख़ स्पष्ट नहीं है? इसके जवाब में सरना ने कहा था कि इस तरह की बातें प्रेस में चलती हैं, लेकिन हक़ीक़त में सीरिया को लेकर कोई भी कन्फ़्यूजन नहीं है.
इसके बाद 2008 में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद भारत के दौरे पर आए. फिर दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आना-जाना लगा रहा.
2010 में भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने सीरिया का दौरा किया था. कहा जाता है कि भारत ने असद के परिवार से हमेशा अच्छे संबंध रखे.
बशर अल-असद के पिता हाफ़िज़ अल-असद 1971 से 2000 तक सीरिया की सत्ता में रहे. 2000 के बाद देश की कमान अब बशर अल-असद के पास है.

2011 में शुरू हुए अरब स्प्रिंग के बाद बशर अल-असद के लिए मुश्किलें बढ़ीं. उन पर सत्ता छोड़ने का दबाव था. अमेरिका इसका खुलकर समर्थन भी कर रहा था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
इस दौरान भारत ने सेना के इस्तेमाल के बिना संघर्ष के समाधान की बात की. भारत ने कहा कि सीरिया के सभी पक्षों को शामिल कर बातचीत के माध्यम से रास्ता निकाला जाए. इस दौरान भारत ने दमिश्क में अपना दूतावास भी बनाए रखा.
2013 में सीरिया में जारी टकराव के समाधान के लिए जिनेवा- II कॉन्फ़्रेंस हुई थी. रूस ने इसमें भारत की भूमिका की भी बात कही थी.
इस कॉन्फ़्रेंस में भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री सलमान ख़ुर्शीद शामिल हुए थे. सलमान ख़ुर्शीद ने इस सम्मेलन में भारत का रुख़ रूस और चीन की लाइन पर ही रखा था.
जिनेवा में ख़ुर्शीद ने कहा था, ''सीरिया में जारी टकराव के कारण भारत के हित दांव पर लगे हैं. भारत का पश्चिम एशिया और खाड़ी के इलाक़ों से ऐतिहासिक संबंध रहा है. सीरिया और इस इलाक़े से हमारा जुड़ाव व्यापार, इन इलाक़ों में रह रहे भारतीयों की कमाई, ऊर्जा और सुरक्षा से सीधा है. यहाँ किसी भी तरह के टकराव से हमारा हित व्यापक पैमाने पर प्रभावित होता है.''
दो साल पहले 2022 में जब सीरियाई विदेश मंत्री भारत आए थे तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था, "दमिश्क से दिल्ली आने में चार घंटे का वक़्त लगता है. इसलिए आप दोनों देशों में समय और जगह के लिहाज से क़रीबी को समझ सकते हैं. जो सीरिया के लिए ख़तरनाक है, वह भारत के लिए भी है. हम दोनों धर्मनिरपेक्ष देश हैं. हम दोनों के लोकतांत्रिक सिद्धांतों में भरोसा करते हैं.''
सीरिया भले मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन संविधान में उसका कोई राजकीय धर्म नहीं है. सीरिया एक गणतंत्र है और संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष भी है.
नए हालात को लेकर चिंता

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नए हालात को लेकर, सीरिया में शामिल बाहरी शक्तियों- तुर्की, ईरान और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच शनिवार को चर्चा होनी है.
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि राष्ट्रपति बशर अल-असद की मदद के लिए ईरान सैन्य सलाहकारों समेत मिसाइलें और ड्रोन भेजेगा.
जबकि तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्देआन ने विद्रोहियों पर नज़र रखने की बात कही है.
अर्देआन ने कहा, "इदलिब, हमा, होम्स और अब अगला टार्गेट है दमिश्क. विद्रोहियों की बढ़त जारी है और हम अपने इंटेलिजेंस और मीडिया के माध्यम से इस पर नज़र बनाए हुए हैं. इस मार्च के बिना परेशानी के जारी रहने की मैं उम्मीद करता हूं."
शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में अमेरिकी व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरीन जॉन पियरे ने कहा कि सीरिया में बदल रही स्थिति पर अमेरिका की नज़र है.
उन्होंने कहा, "सीरिया में हो रही घटनाओं पर हमारी नज़र है और इसे लेकर हम इस इलाक़े के दूसरे देशों के साथ संपर्क में हैं. अमेरिका और उसके सहयोगियों की अपील है कि इलाक़े में तनाव कम हो और वहां आम लोगों और अल्पसंख्यक समूहों की सुरक्षा की जाए."
इस बीच जॉर्डन ने कहा है कि उसने सीरिया से सटी सीमा को बंद कर दिया है.
जॉर्डन के गृह मंत्री ने कहा कि "सीरिया के दक्षिण में सुरक्षा स्थिति को देखते हुए इस इलाक़े से सटी सीमा को बंद कर दिया गया है."
सीरियाई सेना के सूत्रों ने कहा है कि हथियारबंद समूहों ने बॉर्डर क्रॉसिंग पर फ़ायर किए थे. जबकि इसराइल ने सीरिया के कब्ज़े वाले हिस्से गोलान हाइट्स पर और सैनिक तैनाती की है जो वहां किसी भी ख़तरे का जवाब देने को तैयार हैं.
सीरिया ने पश्चिम पर लगाए आरोप

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राष्ट्रपति बशर अल-असद ने पश्चिमी देशों पर विद्रोहियों को मदद देने के आरोप लगाए हैं.
इसी सप्ताह ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात में उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका और पश्चिमी देशों को ज़िम्मेदार ठहराया था.
बशर अल-असद ने विद्रोहियों को 'आंतकवादी' क़रार दिया था, साथ ही उन्होंने विद्रोहियों को ख़त्म करने की बात की.
अपनी बातचीत में बशर अल-असद ने कहा था कि अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देश इस क्षेत्र के नक्शे को एक नया स्वरूप देना चाहते हैं.
वहीं ईरान के राष्ट्रपति ने कहा था कि सीरिया की संप्रभुता बनाए रखने और स्थिरता के लिए वो बशर सरकार की मदद करेंगे.
असद सरकार को अपने सहयोगियों की मदद का ही भरोसा है. सीरिया में इस्लामी चरमपंथियों के ख़िलाफ़ पहले लड़ चुके लेबनान के हथियारबंद ग्रुप हिज़्बुल्लाह ने भी बशर सरकार की मदद करने की पेशकश की है.
हिज़्बुल्लाह के नए नेता नईम कासिम ने इसी सप्ताह कहा था कि सीरिया में जो हो रहा है उसके लिए इसराइल और अमेरिका ज़िम्मेदार हैं.
उन्होंने कहा था, "वो आतंकी समूहों का सहारा लेकर सीरिया में बशर अल-असद की सरकार की सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहते हैं."
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