सीरिया में विद्रोहियों का दो शहरों पर क़ब्ज़ा, बशर अल-असद की सत्ता क्या बच पाएगी?

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- Author, बारबरा प्लेट-अशर और माइया डेवियस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बेरूत और लंदन से
सीरिया में इस्लामी विद्रोहियों के राजधानी दमिश्क पहुँचने का ख़तरा बढ़ गया है.
इस आशंका को देखते हुए देश के तीसरे बड़े शहर होम्स से हज़ारों लोगों का पलायन शुरू हो चुका है.
विद्रोहियों ने गुरुवार को हमा पर क़ब्ज़ा कर लिया था. पिछले सप्ताह एक और अहम शहर एलेप्पो पर भी उनका क़ब्ज़ा हो चुका है.
हमा पर नियंत्रण राष्ट्रपति बशर अल-असद के लिए दूसरा बड़ा झटका है.
2011 से सीरिया में एक दशक के युद्ध के बाद भी राष्ट्रपति बशर अल-असद का शासन कायम रहा था क्योंकि उन्होंने इसकी तैयारी की थी और अपने पिता से बहुत कुछ सीखा था.
बशर अल-असद को अपनी सत्ता बचाने में कामयाबी इसलिए भी मिली थी क्योंकि उन्हें ताक़तवर सहयोगी ईरान, रूस और लेबनानी हिज़्बुल्लाह से मदद मिली थी.
इन सहयोगियों ने सीरिया में विद्रोही समूहों के ख़िलाफ़ बशर अल-असद की मदद की थी. सीरिया में विद्रोही समूह जिहादी अतिवादी इस्लामिक स्टेट से लेकर कई अन्य हथियारबंद समूह थे, जिन्हें अमेरिका और खाड़ी के अमीर शाही सरकारों से मदद मिल रही थी.
अभी इसराइल से तनातनी के कारण ईरान की हालत कमज़ोर है. ज़ाहिर है कि इसराइल के साथ अमेरिका भी खड़ा है. ईरान का सहयोगी हिज़्बुल्लाह भी बशर अल-असद को बचाने के लिए अपने लड़ाकों को भेजता था लेकिन इसराइली हमले में हिज़्बुल्लाह भी ताक़त खो चुका है.
रूस ने पिछले कुछ दिनों में बशर अल-असद के समर्थन में सीरिया में विद्रोही गुटों के ख़िलाफ़ हवाई हमला किया है लेकिन रूस की भी यूक्रेन से जंग के कारण सैन्य क्षमता पहले की तरह नहीं है.

इस्लामी चरमपंथी समूह हयात तहरीर अल- शम (एचटीएस) के नेता अबू मोहम्मद जवलानी ने होम्स के लोगों से कहा, ''अब आपका वक़्त आ चुका है.''
एक वीडियो में जवलानी ये कहते देखे जा रहे हैं कि उनके लड़ाके हमा में घुस चुके हैं.
जवलानी कह रहे हैं, उनके लड़ाके सीरिया के 40 साल के नासूर को समाप्त कर देंगे.
जवलानी वीडियो में कह रहे हैं, ''मैं अल्लाह से कह रहा हूँ कि ये एक ऐसी जीत होगी, जिसमें कोई बदला नहीं लिया जाएगा.''
जवलानी 1982 में इस शहर में हुई, उस घटना का ज़िक्र कर रहे थे, जब सीरिया के राष्ट्रपति रहे हफ़ीज़ अल-असद ने इस्लामी विद्रोहियों को काबू में करने के लिए टैंक और तोप भेजे थे.
इस अभियान में बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई थी.
पिछले 13 सालों में उनके बेटे और सीरिया के मौजूदा राष्ट्रपति बशर अल-असद ने भी विद्रोहियों को दबाने में बल प्रयोग से परहेज़ नहीं किया है.
एलेप्पो और हमा के बाद होम्स पर क़ब्ज़े की तैयारी

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पिछले सप्ताह सीरिया में विद्रोहियों ने सरकार के ख़िलाफ़ अचानक हमला शुरू कर दिया था और अब तक उन्होंने दो अहम बड़े शहरों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
विद्रोही अब दक्षिण की ओर से बढ़ रहे हैं. एल्लेपो से दमिश्क की ओर जाने की राह में होम्स अगला ही शहर है.
विद्रोहियों के हमले के डर से अल्पसंख्यक समुदाय अलावित के लोगों ने घर छोड़ना शुरू कर दिया है. राष्ट्रपति असद इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.
वीडियो फुटेज में इस समुदाय के लोग तेज़ी से घर छोड़ते नज़र आ रहे हैं. अफ़रातफ़री में घर से निकले लोगों की गाड़ियों से सड़कें जाम हो गई हैं. सड़कों पर कारों का काफ़िला दिख रहा है.
ब्रिटेन स्थित मॉनिटरिंग समूह सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने बताया है कि विद्रोहियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लड़ाकू विमानों ने हमा और होम्स के बीच सड़क पर मौजूद एक पुल को निशाना बनाया है.
हमा पर सीरियाई सैनिकों का नियंत्रण ख़त्म हो जाने के बाद ये पक्का नहीं कहा जा सकता कि वो होम्स को बचाने में कितना कामयाब हो पाएंगे.
हमा एक रणनीतिक शहर है. भूमध्यसागर तट पर बसा ये शहर दमिश्क को अलावित समुदाय के वर्चस्व वाले इलाक़े से जोड़ता है.
ताज़ा लड़ाई में अब तक 800 से ज़्यादा लोगों की मौत

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सीरिया में 2011 में गृह युद्ध छिड़ने के बाद पाँच लाख से भी ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
देश में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को निर्ममता से कुचलने के क़दम उठाए जाने के बाद गृह युद्ध भड़क उठा था.
विद्रोहियों का मौजूदा हमला नौ दिन पहले शुरू हुआ था और इसे गृह युद्ध के बाद उनकी सबसे तेज़ बढ़त में से एक माना जा रहा है.
ब्रिटेन स्थित मॉनिटरिंग समूह सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने कहा है कि अब तक इस हमले के दौरान पूरे देश में 111 नागरिकों समेत 820 लोग मारे जा चुके हैं.
इससे पहले एचटीएस के लड़ाके और उसके सहयोगियों ने हमा सेंट्रल जेल को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. लेकिन भारी लड़ाई के बीच उन्होंने क़ैदियों को छुड़वा लिया. हालांकि सेना ने कहा है कि उसने शहर के बाहर दोबारा सैनिकों की तैनाती की है.
विद्रोहियों ने कई दिनों की भीषण लड़ाई के बाद सीरियाई सेना की रक्षा पंक्ति तोड़ दी थी. दरअसल एलेप्पो पर विद्रोहियों के क़ब्ज़े के बाद सीरियाई सेना ने हमा में बड़ी तादाद में सैनिक भेजे थे.
उन्हें रूसी हवाई हमलों और ईरान समर्थित मिलिशिया की मदद मिल रही थी लेकिन वो हमा को विद्रोहियों के हाथ में जाने से नहीं बचा पाए.
हमा 10 लाख आबादी वाला शहर है और एलेप्पो से दक्षिण में 110 किलोमीटर की दूरी पर है. पिछले सप्ताह विद्रोहियों ने उत्तर-पूर्व में अपने गढ़ से हमला कर एलेप्पो पर क़ब्ज़ा जमा लिया था.
बशर अल-असद को रूस और ईरान की मदद कितनी कारगर

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राष्ट्रपति बशर अल असद ने विद्रोहियों को 'कुचल' डालने की कसम खाई है. लेकिन उन्होंने कहा है कि पश्चिमी ताक़तें इस क्षेत्र का नक्शा बदल देना चाहती हैं. दूसरी ओर सीरिया के सहयोगी रूस और ईरान ने उसे 'बिना शर्त' मदद देने की पेशकश की है.
पहले भी असद अपने विरोधियों को दबाने के लिए रूस और ईरान की मदद लेते रहे हैं.
इस बार भी रूस और ईरान की सेना राष्ट्रपति असद की सेना की मदद के लिए पहुँच चुकी है.
रूसी लड़ाकू विमानों ने विद्रोहियों के क़ब्जे़ वाले इलाक़ों में हमले तेज़ कर दिए हैं.
हालांकि रूस और ईरान दोनों अपने-अपने मोर्चे पर व्यस्त है. एक तरफ़ यूक्रेन और रूस की जंग चल रही है तो दूसरी ओर ईरान इसराइल से उलझा हुआ है.
ऐसे में ये कहना मुश्किल है कि सीरिया के राष्ट्रपति असद विद्रोहियों को और अपने सरकार के पतन को कब तक रोक पाएंगे.

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इस बीच, संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस लड़ाई की वजह से पहले ही देश के उत्तर में बदतर हालात में रह रहे लोगों की स्थिति और ख़राब कर दी है.
मौजूदा लड़ाई की वजह से अब तक दो लाख 80 हज़ार लोग विस्थापित हो चुके हैं.
इनमें से ज़्यादातर महिलाएं और बच्चे हैं. कुछ नागरिक अग्रिम मोर्चों वाले इलाक़ों में फंस गए गए हैं और उनका सुरक्षित जगहों तक पहुँचना मुश्किल हो रहा है.
एल्लेपो पर विद्रोहियों का पहले ही क़ब्ज़ा हो चुका है. 20 लाख की आबादी वाले इस शहर में फ़िलहाल सार्वजनिक सेवाओं पर असर पड़ा है.
अस्पताल, बेकरी, बिजली, बिजली स्टेशन, पानी, इंटरनेट और दूसरी सेवाएं भी बाधित हो रही हैं. सप्लाई और इन सेवाओं को चलाने वाले लोगों की कमी की वजह से हालात नाजुक बने हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि सीरिया में गृह युद्ध ख़त्म कराने के लिए असर रखने वाले लोग, देश और संगठन अपनी क्षमता का इस्तेमाल करें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












