हूती विद्रोहियों में कितना है दम, क्या अमेरिकी अभियान से रुकेंगे जहाज़ों पर हो रहे हमले

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- Author, अमीरा महाधबी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अरबी सेवा
यमन दुनिया के सबसे ग़रीब मुल्कों में से एक है. 2014 में हूती विद्रोहियों के एक समूह ने यहां की राजधानी सना पर कब्ज़ा करने की मुहिम छेड़ दी थी, जिसके बाद से ये मुल्क गृहयुद्ध की चपेट में है. बीते सालों में गृह युद्ध के कारण इस देश में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है.
सऊदी अरब के नेतृत्व में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लंबे वक्त तक अभियान चलाया गया जिसने यहां तबाही और बढ़ा दी, नतीजा ये हुआ कि यहां ग़रीबी भी बढ़ गई.
लेकिन इसके बावजूद बीते साल नवंबर से हूती विद्रोही लाल सागर से होकर सामान ले जा रहे जहाज़ों पर हमले कर रहे हैं. उनके हमलों ने इस रास्ते से होने वाले व्यापार को प्रभावित किया है.
अब कई और मुल्कों की मदद लेकर अमेरिका और ब्रिटेन की सेना ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं.
वहीं हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और ब्रिटेन का ये "सोचना ग़लत" है कि उनके हमलों से "डर कर यमन फ़लस्तीन और ग़ज़ा का समर्थन करना छोड़ देगा."
हूती विद्रोहियों का कहना है कि वो लाल सागर में हमास के समर्थन में हमले कर रहे हैं और वो उन जहाज़ों को निशाना बना रहे हैं जो इसराइल के हैं या फिर कब्ज़े वाले फ़लस्तीन की तरफ जा रहे हैं.
लेकिन इन हमलों के साथ इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष के अब और अधिक बड़े पैमाने पर फैलने की आशंका जताई जा रही है. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है.

यमन कहां है और क्यों अहम है?
यमन दो तरफ से दो मुल्कों से घिरा है जबकि बाकी दो तरफ इसकी सीमा समुद्र से सटी हुई है.
इसकी उत्तरी सीमा सऊदी अरब से सटी है, जबकि पूर्वी सीमा ओमान से जुड़ी है. दक्षिण में इस मुल्क की सीमा अदन की खाड़ी से सटी है जबकि पश्चिम में लाल सागर से.
लाल सागर पर यमन के निचले छोर पर मुराद नाम की जगह है, जहां से लाल सागर की दूसरी तरफ बसा जिबूती का तट है.
लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाली बाब अल-मन्दाब की खाड़ी यमन और जिबूती के बीच में है.
समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार को प्रभावित करने की हूती विद्रोहियों की ताकत यमन की भौगोलिक स्थिति से आती है.
2014 से यमन के बड़े हिस्से पर ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों का कब्ज़ा है. इनमें राजधानी सना, देश के उत्तरी हिस्से और लाल सागर के तट से सटी सीमा शामिल है.

यूरोप को एशिया से जोड़ने वाला सबसे छोटा समुद्री रास्ता अरब सागर से होते हुए, अदन की खाड़ी और फिर बाब अल-मन्दाब से होते हुए लाल लागर और फिर स्वेज़ नहर को जोड़ता है.
इस कारण उनके लिए बाब अल-मन्दाब की खाड़ी के आसपास से गुज़रने वाले जहाज़ों पर हमले करना आसान है.

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जहाज़ों पर हमले क्यों कर रहे हैं हूती विद्रोही?
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के अनुसार, यमन के हूती विद्रोहियों ने 19 नवंबर 2023 से लाल सागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों पर कम से कम 26 अलग-अलग हमले किए हैं.
हूती विद्रोहियों का दावा है कि हमले ग़ज़ा में इसराइल की कार्रवाई के जवाब में हैं और वो इसराइल आने-जाने वाले जहाजों को निशाना बनाते हैं.
हालांकि आलोचक कहते हैं कि हाल के दिनों में हुई कई हमले ऐसे जहाजों पर हुए हैं जिनका इसराइल से कोई नाता नहीं है.
उनका कहना है कि अपनी लोकप्रियता बढ़ाने और क्षमता दिखाने के लिए वो ग़ज़ा के ख़िलाफ़ कार्रवाई को बहाना बना रहे हैं. उनका तर्क है कि हूती विद्रोही ईरान को दिखाना चाहते हैं कि वो प्रभावी सहयोगी हो सकते हैं.

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हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता
हाल में लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने हमलों में जिन हथियारों का इसतेमाल किया है उनमें क्रूज़ मिसाइलें, बैलिस्टिक मिसाइलें, ड्रोन (मानवरहित एरियल व्हीकल) और अनक्रूड सर्फेस वेसल्स (छोटे मानवरहित जहाज़ जो पानी में चलते हैं और दुश्मन से टकरा जाते हैं) शामिल हैं.
अपने शुरुआती हमलों में हूती विद्रोहियों ने छोटे जहाज़ों और हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर बड़े जहाज़ों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की है.
ये माना जा रहा है कि हूती विद्रोहियों ने जिन ड्रोन का इस्तेमाल किया है वो कासिफ़ ड्रोन हैं. (कथित कामिकाज़ी ड्रोन जो दुश्मन से टकरा कर खुद को नष्ट करते हैं.)
इसके अलावा वो लंबी दूरी तक मार करने वाले समद ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, जो अपने वी-आकार की पूंछ के लिए जाने जाते हैं. हूती विद्रोहियों ने सबसे पहले सऊदी अरब के साथ संघर्ष में इस्तेमाल करने के लिए समद ड्रोन खरीदा था.
द वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट ऑफ़ नियर ईस्ट पॉलिसी नाम के थिंकटैंक के अनुसार हूती विद्रोहियों के पास कई तरह की एंटी शिप क्रूज़ मिसाइलें हैं जिनकी क्षमता 80 से लेकर 300 किलोमीटर तक मार करने की है. इनमें सैय्यद और सेज्जिल मिसाइलें शामिल हैं.
इंस्टीट्यूट के अनुसार इस विद्रोही संगठन के पास एंटी शिप बैलिस्टिक मिसाइलें भी हैं जो 300 किलोमीटर की दूरी तक किसी भी ठिकाने को निशाना बना सकती हैं.
इंस्टीट्यूट के मुताबिक़ ये मिसाइलें सतह से काफी ऊपर उड़ती हैं और तेज़ी से मार करती हैं, इसलिए इनका पता लगा पाना मुश्किल है.
लेकिन "इन्हें काम करने के लिए ड्रोन, जहाज़ों और दूसरे सहयोगियों से मिलने वाली खु़फ़िया जानकारी की ज़रूरत होती है और निशाना साधने के लिए इस जानकारी सटीक होना ज़रूरी है."

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मैरीटाइम हिस्टोरियन सैल मर्कोग्लियानो ने बीबीसी को बताया "ड्रोन के मुक़ाबले बैलिस्टिक और क्रूज़ दोनों तरह की मिसाइलों से अधिक डर लगता है क्योंकि ये बड़ी मात्रा में विस्फोटक ले जा सकती हैं और बेहद तेज़ गति चलती हैं."
मर्कोग्लियानो कहते हैं कामिकाज़ी ड्रोन अधिक संख्या में इस्तेमाल किए जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ये सस्ते होते हैं और इन्हें बनाना आसान होता है. हालांकि वो ये भी कहते हैं कि मिसाइलों की तुलना में ये बेहद धीमे होते हैं.
ये ड्रोन जब किसी जहाज़ पर हमला करते हैं तो उसके पानी के ऊपर वाले हिस्से पर हमला करते हैं, जो चिंता का कारण हो सकता है.
मर्कोग्लियानो कहते हैं,''लेकिन यूएएसवी बहुत ही ज्यादा चिंता पैदा करने वाली है. चिंता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि ये वे समुद्री मार्ग पर चलने वाले जहाजों पर वार करती हैं. इसका मतलब ये कि इससे शिप की दीवार भेद दी जाती है और इसमें पानी घुस जाता है. इससे जहाज डूब जाता है.
अमेरिकी सेना के मुताबिक़ मौजूदा संघर्ष में हूतियों ने सबसे पहले 4 जनवरी को विस्फोटकों से लदे एक जहाज का इस्तेमाल किया था. इस जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर विस्फोट किए थे.
अमेरिकी नौसेना के कमांडर वाइस एडमिरल ब्राड कूपर ने उस हमले को याद करते हुए कहा,''राहत की बात ये रही कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ. किसी जहाज को निशाना नहीं बनाया जा सका था. लेकिन हमले में एकतरफा यूएसवी का इस्तेमाल चिंता पैदा करने वाला है.
हालांकि हूती विद्रोहियों ने जनवरी 2017 में सऊदी अरब के जंगी बेड़े अल-मदीना पर हमला किया था. इसके बाद मार्च 2020 में अदन की ओर जा रहे एक ऑयल टैंकर पर हमला किया गया था. सऊदी अरब के मुताबिक़ ये हमला नाकाम रहा था.

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हूती विद्रोहियों को कहां से मिलता है समर्थन
हूतियों को ईरान का समर्थन हासिल है. हूती विद्रोही खुद को 'प्रतिरोध की धुरी' का हिस्सा मानते हैं. इस धुरी में लेबनान का हिजबुल्लाह भी शामिल है.
सीरिया में असद की सरकार, ग़ज़ा में हमास और ईरान समर्थित दूसरे कुछ समूह भी इस धुरी का हिस्सा हैं. इन संगठनों ने इसराइल और अमेरिका को अपना दुश्मन घोषित कर रखा है.
फरवरी, 2023 में ब्रिटेन सरकार ने संयुक्त राष्ट्र में सुबूत देकर यह बताने की कोशिश की कि ईरान और हूतियों की ओर से तस्करी के जरिये लाई गई मिसाइलों का आपस में रिश्ता रहा है.
इन मिसाइलों को सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमले के लिए इस्तेमाल किया जाना था.
ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि उसकी रॉयल नेवी शिप एचएमएस मोंटरोज ने 2022 की शुरुआत में दो मौकों पर ईरानी हथियार जब्त किए थे.
ये हथियार एक स्पीडबोट से लाए जा रहे थे. ये हथियार दक्षिण ईरान में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तस्करों की ओर से लाए जा रहे थे.

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क्या अमेरिकी हमलों से रूकेंगे हूती विद्रोही?
अमेरिका ने बीते साल दिसंबर में प्रॉसपेरिटी गार्डियन नाम का एक बहुपक्षीय अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य लाल सागर और अदन की खाड़ी में पैदा हो रही सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटना था.
इसके लिए अमेरिका, यूके समेत दर्जनों और मुल्क साथ आए थे और उन्होंने हूती विद्रोहियों को व्यापारी जहाज़ों पर हमले रोकने की चेतावनी दी थी.
11 जनवरी की रात को अमेरिका के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक मुल्कों ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए.
अमेरिका एयर फोर्स ने कहा, "यूके, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा और हॉलैंड ने यमन में हूती विद्रोहियों के कब्ज़े वाली 16 अलग-अलग जगहों में उनके 60 से अधिक ठिकानों पर हमले किए हैं."
हालांकि विश्लेषक कहते हैं कि सालों तक सऊदी अरब के नेतृत्व में गठबंधन मुल्कों की सेना ने हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हवाई हमले किए, लेकिन वो इस संगठन को व्यापक रूप से हरा नहीं पाए.
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