दमिश्क पहुंचे विद्रोही, सीरिया को घोषित किया 'आज़ाद', जानिए बीते 12 घंटों में क्या-क्या हुआ

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- Author, एलेक्स फ़िलिप्स
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
सीरिया में विद्रोही समूहों ने अलेप्पो, हमा और होम्स शहरों पर कब्ज़े के बाद अब राजधानी दमिश्क में प्रवेश कर लिया है.
इसके बाद विद्रोहियों ने सीरिया की आज़ादी की घोषणा कर दी है. उनका कहना है कि "तानाशाह" राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़ कर भाग गए हैं और सीरिया अब "आज़ाद" है.
कहा जा रहा है कि बशर अल-असद सीरिया छोड़ चुके हैं. हालांकि अब तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
विद्रोहियों ने कहा है कि सार्वजनिक संस्थानों की बागडोर अब प्रधानमंत्री संभालेंगे.

रविवार को सीरिया की राजधानी दमिश्क पर कब्ज़े के बाद, विद्रोही गुटों ने सरकारी टेलीविज़न चैनल और रेडियो पर संदेश जारी कर कहा है, "हमने राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का अंत कर दिया है."
इधर सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाज़ी अल-जलाली ने कहा है कि वो दमिश्क में ही मौजूद हैं और लोगों के हित में काम करने के लिए तैयार हैं.
सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में उन्होंने कहा, "सीरिया एक आम देश की तरह बन सकता है जिसके अपने पड़ोसियों और दुनिया के दूसरे मुल्कों के साथ अच्छे संबंध हों."
इस बीच विपक्षी नेता हादी अल-बहरा ने कहा कि दमिश्क सुरक्षित है.
बहरा ने अरबी न्यूज़ चैनल अल-अरबिया से कहा कि असद की सरकार गिर गई है और "सीरिया के इतिहास का काला युग बीत चुका है."
दमिश्क का हाल
दमिश्क में रहने वाली 42 साल की पत्रकार ज़ैना शाहला ने बीबीसी को बताया कि शनिवार की रात राजधानी की सड़कें सुनसान थीं.
उन्होंने कहा जैसे-जैसे विद्रोहियों के साथ लड़ाई की ख़बरें सामने आईं दमिश्क में बड़ी संख्या में लोग ज़रूरी सामान इकट्ठा करने के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े.
ज़ैना शाहला ने कहा, "हम डरे हुए हैं क्योंकि हमें नहीं पता कि क्या होने वाला है. कोई भी दमिश्क में लड़ाई नहीं चाहता. यहां हर ओर असमंजस की स्थिति है और किसी को कुछ भी पता नहीं चल पा रहा."
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में सीरिया कॉनफ़्लिक्ट रिसर्च प्रोग्राम की डायरेक्टर रिम तुर्कमानी ने भी दमिश्क के बारे में कुछ ऐसी ही बातें बताईं.
उनकी बहन दमिश्क में रहती हैं और उन्होंने रिम को बताया कि यहां दुकानें बंद हो रही हैं, ज़रूरी सामान की किल्लत बढ़ रही है और एटीएम खाली पड़े हैं.
तुर्कमानी ने बीबीसी को बताया कि "किसी को भी पता नहीं चल पा रहा कि क्या हो रहा है."
विद्रोहियों का दमिश्क की ओर कूच

क़रीब एक दशक से चल रहे गृह युद्ध में दमिश्क में कभी उस तरह की हिंसा नहीं देखने को मिली जैसी अन्य शहरों में हुई है.
शाहला ने कहा कि यही वजह है कि यहां के निवासियों में एक तरह की स्थिरता की भावना है. वो कहती हैं, "अगर किसी तरह का बदलाव होता है तो वह बहुत आसान नहीं होगा."
लेकिन ऐसी ख़बरें हैं कि जैसे जैसे हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएएस) के नेतृत्व में विद्रोही देश के उत्तर में एक के बाद एक इलाक़ों पर कब्ज़ा कर रहे हैं, दमिश्क के उपनगरों में हालात तेज़ी से बदल रहे है.
एक अनाम अमेरिकी अधिकारी ने बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी चैनल सीबीएस न्यूज़ को बताया कि दमिश्क का "एक के बाद एक इलाक़ा विद्रोहियों के हाथों में जाता" दिख रहा है.
विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने दमिश्क को घेर लिया है.
वीडियो फ़ुटेज में दमिश्क के एक उपनगर जरामाना में कुछ प्रदर्शनकारी बशर अल-असद के पिता हाफ़िज़ अल-असद की मूर्ति तोड़ते हुए दिख रहे हैं.
सीरिया की सरकारी न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया है कि जनता में अफ़वाह पैदा करने के लिए, 'स्लीपर सेल्स' दमिश्क की सार्वजनिक जगहों के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि उन्होंने वहां कब्ज़ा कर लिया है.

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इस बीच सीरियाई सरकार ने राष्ट्रपति बशर अल-असद के देश छोड़कर जाने की अफ़वाह का खंडन किया है.
इसके अलावा गृह मंत्रालय ने कहा है कि राजधानी के चारों ओर "बहुत मज़बूत सैन्य घेराबंदी" की गई है.
हालांकि सरकारी बल विद्रोहियों के हाथों में जाने वाले शहरों, कस्बों और गांवों को कोई ख़ास सुरक्षा मुहैया कराने में असफल रहे हैं.
पिछले एक हफ्ते में एचटीएएस ने आश्चर्यजनक हमले में देश के उत्तर पश्चिमी शहरों अलेप्पो और हमा पर कब्ज़ा कर लिया है और बहुत तेज़ गति से बढ़त बनाई है.
तीसरे सबसे बड़े शहर होम्स पर कब्ज़े का दावा

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शनिवार की रात, एचटीएएस ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर होम्स पर पूरी तरह कब्ज़ा करने का दावा किया है. ग्रुप ने कहा है कि शहर में मौजूद सेना की जेल से उन्होंने 3,500 क़ैदियों को रिहा कर दिया है.
होम्स सीरिया का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और तटीय इलाक़ों से राजधानी दमिश्क को जोड़ता है.
विद्रोही कमांडर हसन अब्दुल ग़नी ने दावा किया है कि सरकारी सुरक्षा बल शहर को खाली कर रहे हैं और 'वरिष्ठ अधिकारियों का एक ग्रुप सुरक्षित पाला बदलने के लिए हमारे साथ तालमेल' कर रहा है.
सोशल मीडिया पर डाले गए फ़ुटेज में कथित रूप से दिखाया गया है कि सरकारी बलों का काफ़िला होम्स शहर को छोड़ कर बाहर जा रहा है.
लेकिन सीरिया के रक्षा मंत्रालय ने ज़ोर देकर कहा है कि 'होम्स में आतंकियों के प्रवेश करने की ख़बरें आधारहीन' हैं और कहा है कि सरकारी बलों ने शहर में 'मज़बूत रक्षात्मक मोर्चा' ले रखा है.
दक्षिणी इलाक़े में स्थित डेरा में विद्रोहियों के गठबंधन का कब्ज़ा हो गया है जबकि इसके कुछ इलाक़ों में एचटीएएस की बढ़त है. अब वे दक्षिण से दमिश्क की ओर बढ़ रहे हैं.
एचटीएएस के प्रमुख अबू मोहम्मद अल-ज़ुलानी ने होम्स पर कब्ज़े को 'ऐतिहासिक जीत' बताई है और अपने लड़ाकों से आत्मसमर्पण करने वालों को नुक़सान न पहुंचाने की अपील की है. बीबीसी इन दावों को पुष्टि नहीं करता है.

असद के लिए बड़ा झटका

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कैथरिन आर्मस्ट्रॉन्ग, बीबीसी न्यूज़
ब्रिटेन स्थित सीरियाई ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स (एसओएचआर) के अनुसार, बशर अल-असद का विरोध कर रहे विद्रोही लड़ाके होम्स शहर में घुस गए और कई इलाक़ों पर कब्ज़ा कर लिया.
होम्स के विद्रोहियों के हाथों में जाना सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि इससे दमिश्क अलग-थलग पड़ गया है और असद के परिवार का गढ़ माने जाने वाले तटीय इलाक़ों से कट गया है.
असद का परिवार अल्पसंख्यक अलावाइत संप्रदाय से आता है. सीरिया के तटीय इलाक़ों में इसका दबदबा है.
होम्स की जीत विद्रोहियों के लिए एक प्रतीकात्मक जीत है क्योंकि 2011 में जब गृहयुद्ध शुरू हुआ था तो शुरुआती समय में यह विद्रोहियों का गढ़ बन गया था.
विद्रोही कमांडर हसन अब्दुल ग़नी ने कहा, "दमिश्क के बाहरी इलाक़ों को मुक्त कराने की कोशिशें जारी हैं और हमारी नज़रें राजधानी दमिश्क पर हैं."
दक्षिण में बढ़त बनाने वाले विद्रोही ग्रुपों का कहना है कि उन्होंने डेरा और सुवैदा पर कब्ज़ा कर लिया है, जो कि जॉर्डन की सीमा के क़रीब हैं.
सीरियाई ऑब्ज़र्वेटरी फ़ॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, इस लड़ाई में अब तक 800 लोग मारे जा चुके हैं.
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अभी तक 3.7 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, इनमें अलावाइत भी हैं, जो विद्रोहियों से बचकर कर इलाक़े से दूर जा रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लड़ाई के कारण देश के उत्तर में नागरिकों के लिए पहले से ही भयानक हालात और बिगड़ गए हैं.
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सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गेर पेडर्सन ने शनिवार को बीबीसी से बताया कि उनका मानना है कि सीरिया में बिगड़ते हालात को सुलझाने का रास्ता अभी भी है. हालांकि उन्होंने ये भी चेताया कि सीरिया में हालात एक बार फिर बहुत ख़राब हो सकते हैं.
पेडर्सन ने कहा कि बहुत सारे देश विद्रोहियों से संपर्क में हैं और उन्होंने अराजकता और खून खराबे से बचने पर ज़ोर दिया है.
क़तर में पांच अरब देशों और सीरिया के मामलों में शामिल तीन बाहरी शक्तियों- ईरान, तुर्की और रूस के प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान पेडर्सन ने ये बात कही.
इस बैठक में एक संयुक्त बयान कर कहा गया है कि मौजूदा संकट ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा कर दिया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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