सीरिया में संघर्ष को लेकर रूस और ईरान की मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

सीरिया में हमा शहर की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, यह तस्वीर 5 दिसंबर 2024 की है, जब सीरिया के प्रमुख शहर हमा में विद्रोहियों ने सेना की एक गाड़ी पर कब्ज़ा कर लिया था.

सीरिया में विद्रोही समूहों ने उत्तर और दक्षिण की तरफ से बढ़ कर राजधानी दमिश्क में प्रवेश कर लिया है. उन्होंने सीरिया को बशर-अल-असद के शासन से "आज़ाद" घोषित कर दिया है.

ख़बर है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने सरकारी सेना के आखिरी बचे गढ़ राजधानी दमिश्क को छोड़ दिया है. हालांकि अभी सरकारी सूत्रों ने इसकी पुष्टि नहीं की है.

एक हफ़्ते पहले शुरू हुए अप्रत्याशित हमलों में इस्लामी चरमपंथी गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएएस) और विद्रोही गठबंधन ने प्रमुख शहर अलेप्पो और हमा कब्ज़ा कर लिया है. इसके बाद उन्होंने होम्स पर कब्ज़े का दावा किया और दमिश्क की तरफ बढ़ने लगे.

राष्ट्रपति बशर अल-असद के प्रमुख सहयोगियों में रूस और ईरान शामिल हैं. इसलिए सीरिया में तेज़ी से बदलते घटनाक्रम पर रूस और ईरान में हलचल बढ़ी है. इसकी झलक वहां के मीडिया में भी दिखती है.

बीबीसी हिंदी का व्हॉट्सऐप चैनल.
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

ईरानी मीडिया में क्या कहा जा रहा है?

ये भी पढ़ें

ईरान इंटरनेशनल में राजनीतिक विश्लेषक मोरद वेसी ने अपने विश्लेषण में लिखा कि सीरिया में हुए घटनाक्रम ने ईरान के क्षेत्रीय गठबंधनों को अस्थिर कर दिया है.

उन्होंने लिखा कि इसराइल के ख़िलाफ़ हमास और हिज़्बुल्लाह को बहुत नुक़सान हुआ है. इन समूहों के प्रमुख नेताओं के मारे जाने के बाद दोनों समूह कमज़ोर हो गए हैं.

इस बीच, अब सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना को विद्रोहियों के सामने शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिका के नए निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, विश्लेषक मानते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी ईरान के लिए चुनौती होगी

इस घटनाक्रम ने अमेरिका और इसराइल के ख़िलाफ़ ईरान की उस क्षमता को कमज़ोर किया है, जिसमें वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के भरोसे था.

दरअसल, जानकार मानते हैं कि ईरान के प्रमुख सहयोगियों में हमास, हिज़्बुल्लाह और सीरिया शामिल रहे हैं. पिछले कुछ समय में इन तीनों को बड़ा नुक़सान हुआ है. ताज़ा मामला सीरिया से जुड़ा है.

ऐसे में ईरान की चिंता बढ़ सकती है क्योंकि, अमेरिका में सत्ता परिवर्तन होना भी इसकी एक वजह बनेगा.

विश्लेषक मोरद वेसी यह तर्क देते हैं कि अमेरिका में राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी इस्लामिक गणराज्य के लिए बड़ी चुनौती होगी.

क्योंकि, बाइडन प्रशासन की तरह, डोनाल्ड ट्रंप की टीम की इच्छा ईरान के साथ कूटनीति के स्तर पर तुरंत आगे बढ़ने की नहीं दिखाई दे रही है.

बल्कि ट्रंप और उनकी टीम की इच्छा "अधिकतम दबाव" वाले रणनीति की ओर लौटने की दिखती है.

ट्रंप की टीम में मार्को रूबियो और माइक वाल्ट्ज जैसी शख़्सियतें ईरान पर अपने आक्रामक रुख़ के लिए जानी जाती हैं. ऐसी संभावना है कि ऐसी रणनीति में ये लोग अहम भूमिका निभा सकते हैं.

ये भी पढ़ें

दूतावासों में हलचल

इससे पहले, शुक्रवार को आई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि सीरिया में सरकारी बलों और विद्रोहियों के बीच शुरू हुई लड़ाई के बाद ईरान ने अपने राजनयिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को वहां से निकालना शुरू कर दिया है.

हालांकि, ईरानी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि शनिवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने इन रिपोर्ट्स को ख़ारिज कर दिया है.

बघई ने कहा कि सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरानी दूतावास खाली करने की ख़बरें झूठी हैं. राजनयिक मिशन की गतिविधियाँ पहले की तरह जारी हैं.

वहीं, रूसी मीडिया द मॉस्को टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, दमिश्क में स्थित रूसी दूतावास ने शुक्रवार को कहा कि सीरिया में जो भी रूसी नागरिक रह रहे हैं, उनको कॉमर्शियल पैसेंजर फ्लाइट्स के ज़रिए सीरिया छोड़ देना चाहिए.

इस बयान में कहा गया है, "दमिश्क में रूसी दूतावास, सीरियन अरब रिपब्लिक में रहने वाले अपने रूसी नागरिकों को एयरपोर्ट्स पर उपलब्ध कॉमर्शियल फ्लाइट्स का इस्तेमाल करके देश छोड़ने की सलाह दे रहा है."

ये भी पढ़ें

ईरानी मंत्री ने जताया अंदेशा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने यह अंदेशा जताया है कि सीरिया में जो कुछ भी हुआ है, वो केवल सीरिया तक सीमित नहीं रहेगा

ईरानी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने एक चैनल इराकी अल-शरकिया को एक इंटरव्यू दिया है.

इसमें उन्होंने कहा कि सीरिया में हुआ हालिया घटनाक्रम केवल वहीं तक सीमित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद और सीरिया में हो रही घटनाएं इराक़ की सुरक्षा के लिए भी ख़तरा है.

अराग्ची ने कहा कि हालात तेज़ी से बदल रहे हैं. इससे कई सवाल उठ रहे हैं. वो ये कि इसके पीछे एक सोच है, जो अमेरिका और इसराइल से उठती हुई दिखती है.

उन्होंने कहा, "ग़ज़ा के बाद वो लेबनान आए, और उसके बाद सीरिया आए. मेरे विचार से यह केवल सीरिया तक नहीं रुकने वाला है. पूरा क्षेत्र ख़तरों का सामना कर रहा है."

सीरिया में सरकारी बलों और विद्रोहियों के बीच शुरू हुई लड़ाई के बीच रूस ने अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी कर दी है.

ये भी पढ़ें

रूस ने तुर्की से बात की थी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन से सीरिया में बढ़ रहे संघर्ष को लेकर बातचीत की थी.
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

रूसी मीडिया द मॉस्को टाइम्स ने 4 दिसंबर 2024 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसके मुताबिक, रूस ने बुधवार को कहा था कि सीरिया में जारी विवाद को लेकर रूस, ईरान और तुर्की "क़रीबी संपर्क" में हैं.

इस दौरान रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने रिपोर्टर्स से कहा था कि "तीनों गारंटर देश (रूस, ईरान और तुर्की) के विदेश मंत्री एकदूसरे से संपर्क में हैं."

दरअसल, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद का प्रमुख सहयोगी है रूस. वो विद्रोहियों के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति अल-असद द्वारा किए जा रहे हवाई हमलों में लगातार मदद कर रहा है.

रूस और तुर्की ने साल 2016 में विद्रोहियों और सीरियाई सेनाओं के बीच युद्धविराम करवाया था. इस दौरान ईरान इसमें गारंटर देश के तौर पर शामिल हुआ था.

ज़खारोवा ने कहा कि सीरिया में पैदा हुई स्थिति को स्थिर करने के लिए रूस सक्रिय तौर पर अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ काम कर रहा था.

इससे पहले, मंगलवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन से बातचीत की थी.

इसमें उन्होंने कहा था कि इस विवाद को जल्द से जल्द ख़त्म किए जाने की ज़रूरत है. इस दौरान पुतिन ने 'सीरिया के ख़िलाफ़ की गई आतंकी कार्रवाई' की कड़ी निंदा भी की थी.

ये भी पढ़ें

अबू मोहम्मद अल-जु़लानी कौन हैं?

अबू मोहम्मद अल-जु़लानी

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, एचटीएस के प्रमुख अबू मोहम्मद अल-जु़लानी पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं.

सीरिया के शहरों पर कब्ज़ा करने वाले विद्रोही गुट के प्रमुख अबू मोहम्मद अल-ज़ुलानी हैं. वैसे यह उनका एक उपनाम है. उनका असली नाम और उम्र विवादित है.

अमेरिकी ब्रॉडकास्टर पीबीएस ने फ़रवरी 2021 में अल-ज़ुलानी का इंटरव्यू किया था.

उस वक्त ज़ुलानी ने बताया था कि जन्म के समय उनका नाम अहमद अल-शारा था और वो सीरियाई हैं. उनका परिवार गोलान इलाक़े से आया था.

उन्होंने कहा था कि उनका जन्म सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुआ था, जहां उनके पिता काम करते थे. लेकिन वो खुद सीरिया की राजधानी दमिश्क में पले बढ़े हैं.

हालांकि, ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि उनका जन्म पूर्वी सीरिया के दैर एज़-ज़ोर में हुआ था और ऐसी भी अफ़वाहें हैं कि इस्लामी चरमपंथी बनने से पहले उन्होंने मेडिसिन की पढ़ाई की थी.

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ की रिपोर्टों के अनुसार, उनका जन्म 1975 से 1979 के बीच हुआ था.

इंटरपोल का कहना है कि उनका जन्म 1979 में हुआ था. जबकि अस-सफ़ीर की रिपोर्ट में उनका जन्म 1981 बताया गया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)