'अब आप साँस ले सकते हैं' असद के रूस जाने के बाद क्या है दमिश्क की गलियों का हाल?

- Author, बारबरा प्लेट अशर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
जब हम पहुंचे तो कारों से सड़क पर जाम लगा हुआ था. वहां हो रही नारेबाज़ी हम सुन सकते थे. वहां कोई विद्रोहियों का झंडा लहरा रहा था.
रातों रात जब यह ख़बर पहुंची कि दमिश्क में सत्ता बदल गई है और सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद देश छोड़कर भाग गए हैं तो लेबनान में रह रहे सीरियाई सबसे पास की बॉर्डर क्रासिंग मासना की ओर दौड़ पड़े.
हम वहां से पूरे दिन रिपोर्टिंग करने की योजना बना रहे थे, लेकिन इस ख़बर के बाद हमने दमिश्क जाने की ठानी.
चारों ओर उत्साह के माहौल के बीच एक लंबा और घुंघराले बालों वाला शख़्स था, जो दूसरी ओर जाने की कोशिश कर रहा था. वह रो रहा था.


उसने अपना नाम हुसैन बताया और ये भी कि वह राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थक था. वह डरा हुआ था.
उसने कहा, "हमें कुछ भी पता नहीं कि वहां क्या होने जा रहा है. वे हमें मार सकते हैं, पूरी अराजकता फैली हुई है."
"हर कोई जो सरकार या सेना के लिए काम कर रहा था, उनके बारे में कहा जा रहा है कि उन्हें सुरक्षित जाने दिया जाएगा. लेकिन कोई नहीं जानता कि क्या होगा. अगर ये सच नहीं है तो उन्हें इसकी क़ीमत चुकानी पड़ेगी."
वो अपने साथ अपना पूरा परिवार लेकर आया था, लेकिन उसके पास लेबनान को पार करने के दस्तावेज नहीं थे.
दमिश्क को जाने वाली सड़क

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एक घंटे बाद हम सीरिया में थे. दमिश्क को जाने वाली सड़क खुली हुई थी. जब राजधानी के क़रीब पहुंचे तो यह साफ़ दिख रहा था कि सेना पीछे हट रही है- सेना की जीप और टैंक ऐसे ही छोड़ दिए गए थे.
सड़क के किनारे सेना की वर्दियां बिखरी पड़ी थीं, जहां सैनिकों ने अपनी वर्दी उतार कर फेंक दे थी.
सड़कें गाड़ियों से भरी थीं, लेकिन दुकानें बंद थीं. बड़ी संख्या में लोग उम्मेद स्क्वायर पर इकट्ठा थे और बाप और बेटे के पांच दशक पुराने शासन के आश्चर्यजनक अंत का जश्न मना रहे थे.
जश्न के दौरान हथियारबंद पुरुष लगातार हवाई फ़ायरिंग कर रहे थे और इस दौरान हमने देखा कि एक छोटा सा बच्चा घायल था जिसे इलाज के लिए ले जाया जा रहा था.
लोग अपनी कारों में घूम रहे थे और शांति का चिह्न बना रहे थे और कह रहे थे कि असद के जाने के बाद स्थितियां बेहतर होंगी. एक बुज़ुर्ग महिला रो रही थी.
प्रार्थना के लहज़े में वो कह रही थी, "शुक्रिया, शुक्रिया. अत्याचारी के शासन का अंत हो गया है!" उसने यह बात दुहराई.
उस महिला ने बताया कि उनके परिवार के कई लोग असद के शासन में मारे गए थे और कुछ जेलों में बंद थे.
हमें एक दंपत्ति अपने चार बच्चों के साथ मिला. यह परिवार खुशियां मना रहा था.
परिवार के पुरुष सदस्य ने कहा, "इस अहसास को बयां नहीं किया जा सकता. हम बहुत ख़ुश हैं. हम इतने सालों तक तानाशाही के दौर में रह रहे थे. 2014 में हम जेल में थे और अब हम ख़ुदा के शुक्रगुज़ार हैं. हम अपने लोगों, अपने लड़ाकों की बदौलत जीते और अब हम उस पल में आ गए हैं, जब हम एक महान सीरिया का निर्माण करेंगे."
उन्होंने आगे कहा, "हम अपने उन भाइयों और बहनों से वापस देश लौटने की अपील करते हैं. हमारे दिल और घर आपके लिए खुले हैं."
असद के आवास में क्या था माहौल

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इस बीच रूसी ख़बरों में असद के मॉस्को पहुंचने की सूचना से पहले उनके बारे में रहस्य बना हुआ था.
हम दमिश्क में असद के आवास पर पहुंचे, जो अब एक टूरिस्ट दिलचस्पी का केंद्र बन चुका है. वहां कोई भी क़ीमती सामान नहीं बचा था.
हमने देखा कि लोग फ़र्नीचर ले जा रहे हैं और कोई भी उन्हें नहीं रोक रहा है. विद्रोही आज़ादी तो ले आए, लेकिन सुरक्षा नहीं.
लूटने वालों की भीड़ आस पास की इमारतों पर भी धावा बोल रही थी और सरकार की ग़ैरमैजूदगी की वजह से चारों ओर बेचैनी और अफ़रा तफ़री का माहौल था.
अपने पड़ोसियों के साथ खड़े तीन बच्चों के पिता, 36 वर्षीय आला दादूच ने कहा, "सत्ता का हस्तानांतरण व्यस्थित और सही तरीके से होना चाहिए. और जबकि आप जानते हैं कि वो चले गए हैं..."
मैंने टोकते हुए कहा, "बशर अल-असद?"
दादूच ने कहा, "हां, आप देख रहे हैं कि मैं उनका नाम लेने में अभी डरा हुआ हूं. लेकिन तथ्य ये है कि वो चले गए हैं, यह स्वार्थी जैसा रवैया है. सेना या पुलिस नियंत्रण का ठीक तरह से हस्तानांतरण करने के लिए हमारे राष्ट्रपति को ठीक से इंतज़ाम करना चाहिए था जबतक नया राष्ट्रपति सत्ता नहीं संभाल लेता."
इसके बाद वो रुके और फिर कहा, "दो दिन पहले, मैं उन्हें स्वार्थी कहने की हिम्मत नहीं कर सकता था, इससे बड़ी समस्या पैदा हो जाती. अब बहुत सारी चीज़ें बदल गई हैं."
"असल में अब आप आज़ादी की सांस ले सकते हैं, घूम सकते हैं. और असल में अब आप अपना मत ज़ाहिर कर सकते हैं. अप बिना डरे कह सकते हैं कि आपको कौन सी चीज़ परेशान कर रही है. तो, एक बदलाव हुआ है. मैं उम्मीद करता हूं कि यह बदलाव अच्छा होगा. लेकिन हम लोग झूठी उम्मीद में 13 साल जीते रहे (गृह युद्ध के दौरान)."
इस समय सीरिया में खुशी और डर का मिला जुला भाव है और शांति की उम्मीद के साथ अराजकता की चिंता भी सता रही है.
सड़कों पर जश्न का माहौल

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रविवार को जब सीरिया की राजधानी दमिश्क में विद्रोही लड़ाके घुसे और यह ख़बर जैसे ही फैली, कई लोग सड़कों पर आकर जश्न मनाने लगे.
बीते सप्ताह हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) नाम के विद्रोही गुट के नेतृत्व में सीरिया में विद्रोहियों ने बशर अल-असद सरकार के ख़िलाफ़ बिजली की गति से अभियान शुरू किया था.
और बहुत कम समय में एक के बाद एक कई शहरों पर विद्रोहियों ने कब्ज़ा कर लिया.
रविवार को विद्रोही दमिश्क पहुंचे जिसके बाद वहां कई जगहों पर लोगों को जश्न मनाते देखा गया.
विद्रोहियों ने एलान किया कि राष्ट्रपति असद देश छोड़ कर भाग गए हैं और सीरिया 'आज़ाद' हो गया है.
दमिश्क के उपनगरीय जरामाना इलाक़े में लोग घरों से बाहर निकलकर खुशियां मनाने लगे.
विद्रोहियों ने कहा है कि सार्वजनिक संस्थानों की बागडोर अब प्रधानमंत्री संभालेंगे.
सीरिया के प्रधानमंत्री मोहम्मद गाज़ी अल-जलाली ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में कहा, "सीरिया एक ऐसा आम देश बन सकता है जिसके पड़ोसियों और दुनिया के दूसरे मुल्कों के साथ अच्छे संबंध हों."
रविवार को विद्रोही गुटों ने दमिश्क में सरकारी टेलीविज़न चैनल और रेडियो पर संदेश जारी कर दावा किया की उन्होंने 'राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन का अंत' कर दिया है.
विद्रोही गुटों ने राजनीतिक बंदियों को जेलों से मुक्त करने की भी बात कही है.
रूसी मीडिया एजेंसियों ने क्रेमलिन सूत्रों का हवाला देते हुए बताया है कि सीरिया के हटाए गए राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनका परिवार मॉस्को पहुंच गए हैं.
अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों ने असद सरकार के पतन का स्वागत किया है.
जॉर्डन और लेबनान से लौट रहे सीरियाई नागरिक

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बशर अल-असद की सत्ता जाने के कुछ घंटों बाद ही सीरियाई नागरिक पड़ोसी मुल्क लेबनान और जॉर्डन से लौटने लगे.
रविवार को ऐसी कई तस्वीरें सामने आईं जिनमें सीरियाई नागरिक इन दोनों मुल्कों से सीरिया की सीमा में प्रवेश करते दिख रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएफ़पी के संवाददाता ने लेबनान-सीरिया सीमा पर देखा कि दर्जनों कारें मसना क्रॉसिंग पर कतार में खड़ी हैं और भीड़ बशर अल-असद के ख़िलाफ़ नारे लगा रही थी.
उधर, जॉर्डन की तरफ से जबेर क्रॉसिंग पर समाचार एजेंसी रॉयटर्स से एक व्यक्ति ने कहा, "मैं जॉर्डन में 12 सालों से हूं. जब हमने यह ख़बर सुनी की बशर अल-असद की सरकार गिर गई है तो हम भावुक हो गए. हम अपने देश सुरक्षा के साथ लौट सकते हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















