सीरियाः रूस के जहाज़ों ने सैन्य अड्डे से हटना शुरू किया, क्या है वजह?

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- Author, मैट मर्फ़ी और जोशुआ चीथम
- पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई
ऐसा लगता है कि रूस की नौसेना के जहाज़ों ने सीरिया में मुख्य बंदरगाह टार्टस को अस्थायी तौर पर छोड़ दिया है. यह बात उन सैटेलाइट तस्वीरों में सामने आई, जिनकी जाँच बीबीसी वेरिफ़ाई ने की.
दरअसल, रूस ने यह फ़ैसला सीरिया में रूस के प्रमुख सहयोगी रहे राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के अंत के बाद वहां अपनी सेना के भविष्य पर जारी अनिश्चितता के बीच लिया है.
10 दिसंबर को मैक्सार (सैटेलाइट) से ली गई तस्वीरों में नज़र आया कि कुछ जहाज़ रविवार को टार्टस नौसैनिक अड्डे को छोड़ चुके हैं और फिलहाल ये जहाज़ भूमध्य सागर में तट से दूर खड़े हैं.
इस बीच, उसी दिन ली गई कुछ तस्वीरों में यह दिखा कि सीरिया में रूसी सेना के प्रमुख अड्डे ह्मीमिम पर कुछ गतिविधियाँ जारी हैं. इसमें साफ़ तौर पर कुछ विमान दिख रहे हैं.

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सोमवार को रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि सीरिया में भविष्य में रूस की सैन्य उपस्थिति को लेकर वो वहां आने वाले शासन से बातचीत करेंगे.
उन्होंने मॉस्को में संवाददाताओं से कहा, "जो लोग भी सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटे हैं, उनके साथ संपर्क स्थापित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं. हमारी सेना सभी ज़रूरी सावधानी अपना रही है."
इसके पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि सैन्य अड्डे के भविष्य को लेकर अभी से कोई कयास लगाना "जल्दबाज़ी" होगी.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "हमने उन लोगों से संपर्क बनाए रखा है, जिन्होंने सीरिया में स्थिति पर नियंत्रण किया है. यह ज़रूरी है, क्योंकि वहां हमारे अड्डे हैं और राजनयिक कार्यालय हैं."
"हमारी सैन्य सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी हमारे लिए सबसे ज़्यादा अहम बात है."
अमेरिकी नौसेना संस्थान ने क्या बताया?

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रूस के ब्लैक सी नौसेना बेड़े के जहाज़ों के लिए टार्टस नौसैनिक सैन्य अड्डा बेहद अहम है. भूमध्यसागर में ये रूस का एकमात्र नौसैनिक अड्डा है जहां जहाज़ों की मरम्मत और ईंधन के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है.
1970 में सोवियत दौर में इसकी स्थापना की गई थी. इसके बाद साल 2012 में रूस ने इसे विस्तार दिया और इसका आधुनिकीकरण किया. यह वो समय था, जब रूस ने राष्ट्रपति असद के शासन को समर्थन देना शुरू किया था.
इसके ज़रिए रूसी नौसेना के जहाज़ों को यह सुविधा मिलती है कि वो तुर्की जलडमरूमध्य से गुज़र कर काला सागर स्थित बंदरगाह की ओर बिना लौटे ही भूमध्यसागर में बनी रह सकती हैं.
अमेरिकी नेवल इंस्टीट्यूट के मुताबिक़, यह गहरे पानी वाला बंदरगाह है, जिसका मतलब यह है कि रूस के परमाणु बेड़े की पनडुब्बियाँ भी यहां रह सकती हैं.
नई सैटेलाइट तस्वीरों में क्या दिखा?

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नई सैटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि रूस ने कम से कम अस्थायी तौर पर अपने जहाज़ों को बंदरगाह से बाहर किया है. यहां साथ में दो गाइडेड मिसाइल बेड़े भी हैं, जो सीरियाई तट से 13 किलोमीटर की दूरी पर हैं.
हालांकि, यह साफ़ नहीं है कि जहाज़ों के बेड़े का बचा हुआ भाग, फिलहाल कहां है? पहले की तस्वीरों में ये बेड़ा बड़ा था, लेकिन ताज़ा तस्वीरों में संख्या सीमित नज़र आई.
यह बात भी अस्पष्ट है कि क्या रूस का टार्टस से जाना स्थायी कदम है या फिर ये कुछ दिनों की ही बात है. हाल हफ्तों में, सैटेलाइट तस्वीरों में लगातार यह नज़र आया है कि नौसेना के जहाज़ बंदरगाह पर आ रहे हैं और जा रहे हैं.
जेन्स ऑर्गनाइज़ेशन में ओपन सोर्स डिफ़ेंस इंटेलिजेंस के विश्लेषक माइक प्लंकेट ने कहा कि ऐसा लगता है कि रूस की गतिविधियाँ, "यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थीं कि उनके जहाज़ों को हमले का जोखिम न हो."
उन्होंने कहा, "या तो वो सीरियाई विद्रोहियों के हमले को लेकर चिंतित हैं या उनको टार्टस में सीरियाई संपत्ति पर इसराइल के हमले से होने वाले नुक़सान की चिंता है. हालांकि इस बारे में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता.''
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

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बेल्जियम नौसेना में भूतपूर्व कप्तान और विश्लेषक फ्रेडरिक फ़ॉन लोकेरेन ने बीबीसी वेरिफ़ाई को बताया कि ऐसा लगता है कि रूसी नौसेना इंतज़ार कर रही है और इस बीच रूस अपने अगले कदम के बारे में सोच रहा है.
उन्होंने कहा, "वो फिलहाल असमंजस में हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है."
लोकेरेन ने कहा, "ज़ाहिर तौर पर फिलहाल वो लोग वहां रुके हुए हैं. ऐसा लगता है कि रूस उस इलाक़े से अपने जहाज़ों को हटाने के लिए तैयार नहीं है."
उन्होंने कहा, "यह एक संकेत हो सकता है कि वो क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ समझौता करने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि उनके जहाज़ों को फिर से उस इलाक़े में तैनात किया जा सके."
विश्लेषकों ने यह अनुमान लगाया है कि यदि रूस पर टार्टस नौसैनिक अड्डे को बंद किए जाने को लेकर दबाव बनाया जाता है, तो वो लिबिया के टोब्रुक में अपनी मौजूदगी फिर बना सकता है.
इस इलाक़े पर रूस के समर्थन प्राप्त फ़ील्ड मार्शल ख़लीफ़ा हफ्तार का नियंत्रण है और वहां पहले से कुछ रूसी हवाई अड्डे भी बने हुए हैं.
मगर, टार्टस से हटना रूस को बहुत महंगा पड़ सकता है. फ़ॉन लोकेरेन कहते हैं कि यह कदम रूसी नौसेना के जहाज़ो को नेटो के सैन्य अड्डों के और भी ज़्यादा पास ले जाएगा.
उन्होंने कहा कि इससे रूसी जहाज़ों को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा. हालांकि फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि रूस टार्टस सैन्य अड्डे से अपनी नौसैनिक संपत्तियों को हटा रहा है.
रूस के अभियान का प्रमुख हिस्सा
इस बीच, साल 2015 से ह्मीमिम हवाई अड्डा अफ़्रीका और मध्यपूर्व में रूस के अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा है.
रूस इसका इस्तेमाल सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद का सहयोग करने के लिए और सीरिया के शहरों पर हवाई हमले करने के लिए करता रहा है.
इसके अलावा इनका इस्तेमाल सैन्य ठेकेदारों को अफ़्रीका भेजने के लिए भी किया जाता रहा है.
बीबीसी वेरिफ़ाई ने सैटेलाइट तस्वीरों की जाँच की है, इसमें कम से कम दो बड़े विमान नज़र आए हैं.
जेन्स ने इनकी पहचान आईएल-76 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के तौर पर की है. ये 10 दिसंबर तक सैन्य अड्डे के पास ही हवाई पट्टी पर मौजूद थे. इन तस्वीरों में हेलिकॉप्टर भी नज़र आ रहे हैं.
जेन्स ने यह भी बताया कि इस जगह पर एयर डिफ़ेंस सिस्टम भी तैनात है.
रूस के लिए बड़ा झटका
कार्नेगी एंडोमेंट फ़ॉर इंटरनेशनल पीस में विश्लेषक दारा मैसिकोट ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''ऐसा लगता है कि रूस की योजना जल्दी से सैन्य अड्डा खाली करने की नहीं है. क्योंकि, एयरबेस को खाली करने के लिए बड़े पैमाने पर एयरलिफ्ट करने की ज़रूरत होगी.''
उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता है तो रूस को बेस खाली करने के लिए तस्वीरों में दिख रहे विमानों की तुलना में और भी ज़्यादा विमानों की ज़रूरत होती.
उन्होंने लिखा, "जब रूसी सेनाओं को साल 2015 में सीरिया में तैनात किया गया था, तब वो दो सप्ताह में लगभग 300 उड़ानें भरा करते थे. यह अड्डे के विस्तार से पहले की बात है. लेकिन सीरिया में असद के शासन का अंत इस क्षेत्र में रूस की महत्वकांक्षाओं के लिए बड़ा झटका है.''
साल 2017 में ह्मीमिम हवाई अड्डे की यात्रा के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ किया था कि उनकी इच्छा उस क्षेत्र में रूस की मौजूदगी को लंबे समय तक बनाए रखने की है.
इस स्थिति को लेकर रूस के समर्थक माने जाने वाले एक सैन्य ब्लॉगर रेबर ने टेलीग्राम पर चेतावनी देते हुए लिखा, "मध्यपूर्व के इलाक़े में रूसी सेना की मौजूदगी ख़तरे में है."
अतिरिक्त रिपोर्टिंग : पॉल कुस्याक
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















