रूस के लिए लड़ रहे इन सैनिकों को क्यों मनाना चाहते हैं उत्तर कोरिया के कुछ लोग?

किम जोंग उन की तस्वीरें.

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इमेज कैप्शन, ऐसी रिपोर्ट्स सामने आई हैं जिसमें बताया गया है कि उत्तर कोरिया के सैनिक यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ने के लिए रूस गए हैं
    • Author, यूना कू और रिचर्ड किम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ कोरियन

उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया जाकर बस चुके लोगों के समूह चर्चा में हैं. दरअसल, ये एक अनोखे मिशन की वकालत कर रहे हैं.

समूह का कहना है कि हमें यूक्रेन में फ्रंटलाइन पर जाना चाहिए और वहां तैनात कोरियाई सैनिकों को वहां से भागने में मदद करनी चाहिए.

समूह के सदस्य ऐसा करने के पीछे यह तर्क देते हैं कि वो उत्तर कोरियाई सेना की सोच और ढांचे को भली-भांति जानते हैं.

इसलिए वो उत्तर कोरियाई सैनिकों को वहां से भागने के लिए तैयार कर सकते हैं, जो यह मानकर चल रहे हैं कि रूस-यूक्रेन बॉर्डर पर उनकी मौत "गौरवशाली" होगी.

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क्यों भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिक?

दरअसल, उत्तर कोरिया ने लगभग दस हज़ार सैनिकों को रूस में तैनात किया है, ताकि वे यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ सकें.

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया में बस चुके लोगों की चिंता बढ़ गई है.

एक अनुमान के मुताबिक, जब 70 साल पहले कोरियाई प्रायद्वीप का विभाजन हुआ था, तब 34 हज़ार उत्तर कोरियाई नागरिक भाग कर दक्षिण कोरिया जाकर बस गए थे.

इन्हीं लोगों के समूह का यह मानना है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन का अपने सैनिकों को रूस-यूक्रेन युद्ध में भेजने का मक़सद देश के लिए धन जुटाना और उत्तर कोरिया की सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाना है.

दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा सेवा का अनुमान है कि रूस और यूक्रेन युद्ध में तैनात उत्तर कोरिया के हर सैनिक को हर महीने 2 हज़ार डॉलर मिल रहे होंगे. इससे उत्तर कोरिया को फायदा ही होगा.

वैसे साल 1970 में वियतनाम युद्ध के दौरान उत्तर कोरियाई सैनिकों को भेजा गया था. आधुनिक समय में यह पहली बार है, जब उत्तर कोरियाई सैनिकों को यूक्रेन में भेजा गया है.

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क्या चाहते हैं ये समूह

उत्तर कोरिया के सैनिक

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इमेज कैप्शन, दक्षिण कोरिया में बसे उत्तर कोरियाई नागरिकों का समूह चाहता है कि उत्तर कोरियाई सैनिकों को रूस-यूक्रेन जंग से अलग किया जा सके.
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दरअसल, उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया जाकर बस चुके नागरिकों के दो समूह हैं. एक है नॉर्थ कोरियन क्रिश्चियन सोल्जर्स एसोसिएशन और दूसरा है नॉर्थ कोरियन डिफ़ेक्टर सीनियर आर्मी.

इन दोनों समूहों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. इसमें उत्तर कोरियाई सरकार के ''अमानवीय व्यवहार'' की कड़ी निंदा की गई है.

इस बयान में अपील की गई है कि उत्तर कोरिया से निकाले गए नागरिकों के समूहों के सदस्यों को यूक्रेन की यात्रा करने की अनुमति दी जाए.

उन्होंने कहा, "हम किम जोंग उन के शासन के इस अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं, जो खुद के लिए धन जुटाने और सैन्य संसाधनों को आधुनिक बनाने के लिए लोगों के बेटों का इस्तेमाल किसी अन्य देश की सेना के विस्तार के लिए कर रहे हैं."

नॉर्थ कोरियन क्रिश्चियन सोल्जर्स एसोसिएशन के नेता सिम जू-ली, एक भूतपूर्व ऑफिसर हैं. उनका कहना है कि इस मिशन को शुरू करने की तत्काल ज़रूरत है.

उन्होंने युद्ध के मोर्चे पर भेजे गए उत्तर कोरियाई सैनिकों के बारे में कहा, "जैसा कि सैनिकों को सिखाया जाता है, उस आधार पर कहा जा सकता है कि उत्तर कोरियाई सैनिक भी इस भ्रम में होंगे कि रूस-यूक्रेन युद्ध में उनकी मौत भी 'गौरवशाली' होगी. हमें उन लोगों को यह बताना होगा कि ऐसा नहीं होगा."

उन्होंने कहा, "अगर मैं युद्ध में फ्रंटलाइन पर जाता हूं, तो मैं उत्तर कोरियाई सैनिकों के साथ मिलकर गोलियों और बंदूकों का सामना करूंगा. लेकिन, मेरा ध्यान उन सैनिकों को इस युद्ध की वास्तविकता के बारे में बताने पर होगा."

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समूहों ने क्या प्रस्ताव रखा?

उत्तर कोरियाई सेना के विशेष सुरक्षा बल के सदस्य.

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इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने 11 सितंबर की एक तस्वीर साझा की थी. इसमें विशेष सुरक्षा बलों के सदस्य प्रशिक्षण लेते हुए दिख रहे हैं.

वैसे दक्षिण कोरिया में रह रहे इन उत्तर कोरियाई नागरिकों के समूहों ने कई प्रस्ताव दिए हैं, जिनके ज़रिए रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान फ्रंटलाइन पर तैनात उत्तर कोरियाई सैनिकों तक पहुंचने की बात की गई है.

इनमें ड्रोन के ज़रिए पैम्फलेट फेंकने, सोशल मीडिया पर अभियान चलाने या मेगाफोन का इस्तेमाल करने के विकल्पों के बारे में बताया गया है.

डॉक्टर एह्न चान-ली वर्ल्ड इंस्टीट्यूट फ़ॉर नार्थ कोरिया स्टडीज़ के निदेशक और नॉर्थ कोरियन डिफ़ेक्टर सीनियर आर्मी के नेता हैं.

उन्होंने कहा, "हम पैम्फलेट डलवाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल करेंगे और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे यूट्यूब का इस्तेमाल करेंगे."

"अगर हम फ्रंटलाइन के नज़दीक जा पाते हैं, तो हम मेगाफ़ोन का इस्तेमाल करके मनोवैज्ञानिक युद्ध शुरू कर सकते हैं."

डॉक्टर चान-ली भी उत्तर कोरिया में सिविल डिफ़ेंस बटालियन का हिस्सा रह चुके हैं. फिलहाल उनकी चिंता खासतौर पर यूक्रेन में उत्तर कोरियाई सेना के विशेष सुरक्षा बलों की संभावित भूमिका को लेकर है.

इनमें एक नाम स्टॉर्म कोर की एक ईकाई का भी है, जो हत्याएं करने, इंफ्रास्ट्रक्चर नष्ट करने और घुसपैठ करने में बेहतर प्रशिक्षित होती हैं.

उन्होंने कहा, "अगर उत्तर कोरियाई सेना के दो या तीन डिवीज़न को वहां भेजा जा चुका है, तो हमारे पास करने के लिए बहुत काम होगा. इस बयान को जारी करने के पीछे यही वजह है."

कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन लोगों ने हाल ही में एक और संगठन बनाया है.

इसका मक़सद यूक्रेन में युद्ध की अग्रिम पंक्ति में तैनात सैनिकों तक पहुंचना और उनको वहां से भागने के लिए राज़ी करना है.

उनकी रणनीति में वहां पैम्फलेट फेंकना, ऑडियो और वीडियो फाइल्स को सैनिकों तक भेजना शामिल है, ताकि सैनिकों को मार्गदर्शन दिया जा सके कि उन लोगों को फ्रंटलाइन छोड़कर भाग जाना चाहिए.

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समूह के सामने चुनौतियां क्या हैं?

उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का बॉर्डर.

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इमेज कैप्शन, 70 साल पहले हुए विभाजन के वक़्त उत्तर कोरिया से हज़ारों लोग भागकर दक्षिण कोरिया आ गए थे.

कुछ व्यवहारिक और कूटनीतिक दिक्कतें इस योजना को कठिन बनाती हैं.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसका उल्लंघन करने पर एक साल तक की जेल या 7 हज़ार डॉलर तक का जुर्माना हो सकता है.

दक्षिण कोरिया को यह भी डर है कि अगर वो इन नेताओं को यूक्रेन जाने देता है, तो इस बात से उत्तर कोरिया और रूस नाराज़ हो सकते हैं. इससे क्षेत्रीय सुरक्षा अस्थिर हो सकती है.

उत्तर कोरिया से भाग कर दक्षिण कोरिया जाकर बसने वाले लोगों का एक और समूह है बैलून ग्रुप, जिसके प्रमुख हैं ली मिन-बोक.

उन्होंने कहा, "यह घोषणा करना अच्छा है. 'हम जाएंगे और लड़ेंगे'. लेकिन, वास्तव में सैनिकों को भेजना विदेशी संबंधों के मामले में एक नाज़ुक मामला है."

अन्य लोग इस बात की व्यवहारिकता पर सवाल भी उठाते हैं, जिसमें उत्तर कोरियाई सैनिकों को देश छोड़ने के लिए राज़ी करने की बात कही गई.

ली वूंग गिल, नॉर्थ कोरिया के स्टॉर्म कोर के एक भूतपूर्व सदस्य रह चुके हैं. वो चेतावनी देते हुए कहते हैं कि इस तरह के प्रयासों का विपरीत असर भी हो सकता है.

उन्होंने कहा, "अगर आप उनसे दल बदलने के लिए राज़ी होने के मामले में बात करते हैं, तो वो आपके सिर में गोली भी मार सकते हैं."

वो यह भी कहते हैं कि कुछ नेता कई साल से दक्षिण कोरिया में रह रहे हैं. ऐसे में उनके पास उत्तर कोरिया की सेना के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है.

सैनिकों का अनुशासन और वफ़ादारी

किम जोंग उन

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इमेज कैप्शन, अपनी सेना को रूस भेजने के पीछे किम जोंग उन का मक़सद सेना को आधुनिक बनाना और पैसे जुटाना भी बताया जाता है

नॉर्थ कोरियन क्रिश्चियन सोल्जर्स एसोसिएशन के सदस्य सिम जानते हैं कि उत्तर कोरियाई सैनिकों में अनुशासन और उनकी वफ़ादारी को तोड़ना एक चुनौती है.

उन्होंने कहा, "किम जोंग उन चाहते हैं कि जब उनके सैनिक युद्ध के मैदान में जाएं और लड़ें तो लोग कहें कि उत्तर कोरिया की सेना कोई मज़ाक नहीं है."

उन्होंने कहा, "क्या उत्तर कोरियाई सैनिकों को वहां भेजने की तैयारी केवल एक या दो दिन पहले की गई होगी?"

"उन्होंने इसकी तैयारी रूस के साथ मिलकर की होगी. और उसी के हिसाब से सैनिकों को प्रशिक्षित भी किया गया होगा."

उन्होंने कहा, "उत्तर कोरियाई सैनिकों को इस तरह से प्रशिक्षित किया जाता है कि वो बहादुरी से लड़ें. अपने नेता और अपनी पार्टी के लिए जान दे दें."

"यह ऐसा नहीं है कि हम ऐसे लोगों को इकट्ठा कर लेते हैं, जिनके पास पैसे या खाना नहीं है, और उनको जंग में भेज देते हैं."

कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर डिफ़ेंस एनालिसिस के डॉक्टर डू जिन-हो कहते हैं कि सीधे लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है.

उन्होंने कहा, "जैसे ही वो उन लाउड स्पीकर का प्रसारण शुरू करेंगे, जिसमें उत्तर कोरिया के खिलाफ बातें की जा रही होंगी, तो वो ड्रोन का निशाना बन जाएगा."

स्टॉर्म कोर के भूतपूर्व सदस्य हैं ली वूंग गिल, वो सीधे संवाद के ऐसे तरीकों के बजाए विकल्पों के बारे में बात करते हैं.

वो कहते हैं कि सीधे संपर्क करने के बजाए वीडियो और ऑडियो के ज़रिए भेजे गए संदेश बेहतर विकल्प हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, "जैसे जो लोग उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया आ चुके हैं तो उनको शॉर्ट वीडियो बनाकर सैनिकों को भेजना चाहिए और बताना चाहिए कि वो कितनी खुशी से वहां रह रहे हैं."

हालांकि, उत्तर कोरियाई सैनिकों को ऐसे सामान रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

इसलिए, ली ने प्रस्ताव दिया कि उनको एमपी 3 प्लेयर या पुराने सेलफोन के ज़रिए ऐसे संदेश भेजे जा सकते हैं.

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यूक्रेन ने क्या कदम उठाया?

उत्तर कोरियाई सैनिक.

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इमेज कैप्शन, यूक्रेन की सरकार ने सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज़ शेयर किए, जिसका मक़सद उत्तर कोरिया के सैनिकों को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करना था.

सिम ने कहा, "हम वो लोग हैं, जो वही करते हैं, जो हम मानते हैं कि ये सही है. हमारे लिए अपने जीवन के अंतिम दिन इस तरह का योगदान करते हुए बिताना कितना सार्थक हो सकता है."

हालांकि, दक्षिण कोरिया में रह रहे उत्तर कोरिया के नेता तो अभी अपनी योजना पर विचार ही कर रहे हैं, लेकिन यूक्रेन की सरकार ने अपनी ओर से इस दिशा में कदम भी उठा लिया है.

यूक्रेन की सरकार ने उत्तर कोरियाई सैनिकों पर केंद्रित एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे; यूट्यूब और टेलीग्राम पर साझा किया है. इसका उद्देश्य इन सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित करना है.

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने यह स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया के नेताओं का यूक्रेन जाने के मामले में हमारा कोई रुख़ नहीं है.

यूक्रेन विदेश मंत्रालय के प्रेस प्रवक्ता हैं हेरोही टखाई. उन्होंने बीबीसी से कहा कि उत्तर कोरिया के नेताओं का स्वागत है, उनको हमारी इस अंतरराष्ट्रीय सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया है.

उन्होंने कहा, "उनको यूक्रेन में पाकर हमें खुशी होगी. हमें उनके साथ जुड़कर अच्छा लगेगा."

"उत्तर कोरियाई सेना, उनकी भाषा और उनके काम करने के तौर-तरीकों को लेकर उनकी जो समझ है, वो हमारे लिए उपयोगी साबित हो सकती है."

उन्होंने कहा, "रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों को उतारना एक वैश्विक ख़तरा है और इसे लेकर वैश्विक प्रतिक्रिया आनी चाहिए."

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