यूक्रेन अब कर सकेगा रूस के भीतर अमेरिकी बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला, युद्ध पर क्या होगा असर?

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- Author, इडो वॉक
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिका ने पहली बार यूक्रेन को रूस के अंदर हमला करने के लिए लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है.
बीबीसी के अमेरिकी सहयोगी सीबीएस के मुताबिक़ मौजूदा बाइडन प्रशासन ने यूक्रेन को बताया है कि वह रूस के अंदर सीमित हमलों के लिए अमेरिका के आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल कर सकता है.
आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम (एटीएसीएमएस) एक सुपरसॉनिक बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम है जिसका निर्माण अमेरिकी डिफ़ेंस कंपनी करती है.
अमेरिकी ने पहले ऐसे हमलों की अनुमति देने से मना कर दिया था क्योंकि उसे डर था कि इससे रूस-यूक्रेन युद्ध ज़्यादा बड़ा हो जाएगा.अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यह प्रमुख नीतिगत बदलाव डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता सौंपने से दो महीने पहले किया है.

अमेरिका ने इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी?
यूक्रेन एक साल से अधिक समय से यूक्रेन के अंदर रूसी कब्ज़े वाले ठिकानों पर आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम यानि एटीएसीएमएस का इस्तेमाल कर रहा है.
यूक्रेन ने एटीएसीएमएस का इस्तेमाल क्राइमिया प्रायद्वीप में हवाई अड्डों और ज़ापोरीज्जिया में रूसी सैन्य ठिकानों पर हमला करने के लिए किया है.
लेकिन अमेरिका ने अब तक यूक्रेन को रूस के अंदर लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी.
लॉकहीड मार्टिन बैलिस्टिक मिसाइलें यूक्रेन को दी गई अब तक की सबसे ताक़तवर मिसाइलों में से एक हैं, जो 300 किमी की दूरी तक हमला करने में सक्षम है.
यूक्रेन ने दलील दी थी कि रूस के अंदर ऐसे हथियारों का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देना, 'एक हाथ पीछे बांधकर लड़ने के लिए कहने' के समान है.
अमेरिकी नीति में यह बदलाव कथित तौर पर कुर्स्क सीमा क्षेत्र में रूस की मदद के लिए उत्तर कोरियाई सैनिकों की हाल ही में की गई तैनाती की प्रतिक्रिया में आया है.
कुर्स्क रूस की सीमा में है और यहां यूक्रेन ने अगस्त महीने से ही क़रीब एक हज़ार वर्ग किलोमीटर इलाक़े पर कब्जा कर रखा है.
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने अभी तक अमेरिका के इस कदम की पुष्टि नहीं की है. लेकिन उन्होंने रविवार को कहा, "हमले बातों से नहीं किए जाते... मिसाइलें ख़ुद ही बोलेंगी."
मिसाइलों का क्या असर होगा?

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इस नई मंज़ूरी के साथ ही यूक्रेन अब संभवतः रूस की सीमा के अंदर कुर्स्क क्षेत्र के आसपास मौजूद ठिकानों पर हमला करने में सक्षम हो जाएगा.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन अब रूसी और उत्तरी कोरियाई सैनिकों के जवाबी हमले से बचाव के लिए इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकेगा.
यह हमला रूसी क्षेत्र कुर्स्क को फिर से हासिल करने के मक़सद से कुछ ही दिनों में शुरू हो सकता है.
यूक्रेनी सेना कुर्स्क में रूसी ठिकानों पर हमला करने में सक्षम होगी, जिसमें सैनिक, रसद और बुनियादी ढांचे और गोला-बारूद के भंडार शामिल हैं.
हालाँकि ये सुपरसॉनिक मिसाइलें शायद युद्ध के हालात को बदलने के लिए पर्याप्त नहीं होंगी.
पहले से ही इस तरह के फ़ैसले का अनुमान लगाकर रूस ने अपनी तैयारी कर ली है और अपने हवाई अड्डों पर सैन्य उपकरण पहुँचा दिए हैं.
लेकिन ये अमेरिकी मिसाइलें यूक्रेन को ऐसे समय में कुछ लाभ पहुंचा सकती हैं जब रूस पूर्वी हिस्से में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी है और उसका मनोबल गिरा हुआ है.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूक्रेन में पश्चिमी देश के एक राजनयिक ने नाम न बताने का अनुरोध पर बीबीसी से कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह निर्णायक होगा."
"हालांकि यह अमेरिकी मदद बढ़ाने और यूक्रेन को सैन्य समर्थन प्रदर्शित करने का एक सांकेतिक फ़ैसला है, जिसका लंबे समय से इंतज़ार था और इससे रूस का युद्ध खर्च बढ़ सकता है."

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बराक ओबामा के कार्यकाल में एवलिन फ़ार्कस अमेरिका की सहायक रक्षा उप मंत्री के तौर पर काम कर चुकीं हैं. उनका मानना है कि इस बात पर भी सवाल हैं कि यूक्रेन को कितना गोला-बारूद उपलब्ध कराया जाएगा.
उनका कहना है, "सवाल यह है कि उनके पास कितनी मिसाइलें हैं? हमने सुना है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने चेतावनी दी है कि ऐसी मिसाइलें इतनी नहीं हैं कि वे यूक्रेन को उपलब्ध करा सकें."
फ़ार्कस ने कहा कि यदि एटीएसीएमएस का इस्तेमाल क्राइमिया को मुख्य ज़मीन से जोड़ने वाले केर्च ब्रिज जैसे लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया जाता है तो इसका यूक्रेन में "सकारात्मक मनोवैज्ञानिक असर" हो सकता है.
इसका एक अन्य असर यह होगा कि इससे ब्रिटेन और फ्रांस को रूस के अंदर यूक्रेन को स्टॉर्म शैडो मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति देने में मदद मिलेगी.
स्टॉर्म शैडो एक फ्रेंको-ब्रिटिश लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है जिसमें अमेरिकी एटीएसीएमएस जैसी कई क्षमताएँ हैं.
क्या इससे युद्ध का दायरा बढ़ सकता है?

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रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष बढ़ने के डर से बाइडन प्रशासन ने महीनों तक यूक्रेन को रूस पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूस पर हमला करने के लिए पश्चिमी हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि रूस इसे यूक्रेन के युद्ध में नेटो देशों की “प्रत्यक्ष तौर पर शामिल होने” के रूप में देखेगा.
पुतिन ने कहा, "इससे संघर्ष का सार और स्वरूप ही बदल जाएगा. इसका मतलब यह होगा कि रूस के ख़िलाफ़ नेटो देश, अमेरिका और यूरोपीय देश लड़ रहे हैं."
रूस ने इससे पहले भी "रेड लाइन्स" यानी युद्ध से जुड़ी कुछ सीमा तय की हैं.
हलाँकि रूस और नेटो के बीच सीधे जंग शुरू किए बिना ही, यूक्रेन को आधुनिक युद्धक टैंक और लड़ाकू विमान मुहैया कराने सहित कुछ अन्य मामलों में इस 'रेड लाइन' को पार किया गया है.
नेटो में अमेरिका के पूर्व राजदूत कर्ट वोल्कर का कहना था, "यूक्रेन के अमेरिकी हथियारों के इस्तेमाल की सीमा को सीमित करके, अमेरिका ग़लत तरीके से यूक्रेन की आत्मरक्षा पर एकतरफा पाबंदी लगा रहा है."
उन्होंने कहा कि एटीएसीएमएस के इस्तेमाल को सीमित करने का फ़ैसला "पूरी तरह से मनमाना था और रूस के 'भड़कने' के डर से लिया गया था."
"हालांकि, इस तरह के बदलाव को सार्वजनिक करना एक ग़लती होगी, क्योंकि इससे रूस को संभावित यूक्रेनी हमलों की सूचना पहले से ही मिल जाएगी."
डोनाल्ड ट्रंप की क्या प्रतिक्रिया होगी?

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इस मामले में एक मुद्दा यह है कि जो बाइडन ऐसे राष्ट्रपति जिनका कार्यकाल अब समाप्त हो रहा है.
उनके पास नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सत्ता सौंपने से पहले महज़ दो महीने का कार्यकाल बचा है.
यह अभी मालूम नहीं है कि ट्रंप इस नीति को जारी रखेंगे या नहीं. लेकिन उनके कुछ क़रीबी सहयोगियों ने बाइडन के इस फ़ैसले की आलोचना की है.
ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर ने एक्स पर लिखा है कि ऐसा लगता है कि सेना और रक्षा विभाग मेरे पिता को शांति स्थापित करने और लोगों की जान बचाने का मौक़ा मिलने से पहले ही तीसरा विश्व युद्ध शुरू करना चाहते हैं.
ट्रंप ने यूक्रेन में युद्ध पर अपनी नीति के बारे में कुछ नहीं बताया है. उन्होंने एक दिन के अंदर इस संघर्ष को ख़त्म करने की कसम खाई है.
हालांकि उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि वो ऐसा किस तरह से करेंगे.

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अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के उनके विरोधियों ने उन पर पुतिन के साथ नज़दीकी बढ़ाने का भी आरोप लगाया है. ट्रंप ने कई बार पुतिन की प्रशंसा की है.
नव-निर्वाचित उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जैसे ट्रंप के क़रीबियों का कहना है कि अमेरिका को यूक्रेन को और अधिक सैन्य सहायता नहीं देनी चाहिए.
लेकिन अगले ट्रंप प्रशासन में कुछ लोगों का अलग नज़रिया है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज ने तर्क दिया है कि रूस को बातचीत के लिए मजबूर करने के लिए अमेरिका यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति बढ़ा सकता है.
फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप राष्ट्रपति के तौर पर पदभार संभालने के बाद किस दिशा में जाएंगे. लेकिन यूक्रेन में कई लोगों को डर है कि वह एटीएसीएमएस के लिए गोला-बारूद सहित हथियारों की आपूर्ति बंद कर देंगे.
यूक्रेनी सांसद ओलेक्सी गोंचारेंको ने बीबीसी से कहा, "हम चिंतित हैं, हमें उम्मीद है कि ट्रंप इस फ़ैसले को वापस नहीं लेंगे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















