यूक्रेन को लंबी दूरी मिसाइलों के इस्तेमाल की इजाज़त से रूस में नाराज़गी

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- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, रशिया एडिटर, बीबीसी न्यूज़, मास्को
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने यूक्रेन को युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी. ये मिसाइलें अमेरिका ही यूक्रेन को भेजता रहा है.
इस कदम के बाद से रूस में आक्रोश है. रूस ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है.
रूस के सरकारी अख़बार रोज़ियस्काया गेज़ेटा की वेबसाइट पर सोमवार सुबह इस मामले को लेकर एक टिप्पणी भी की गई.
इसमें लिखा गया, “जाते-जाते अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक ऐसा निर्णय ले लिया है, जो उनके शासनकाल में लिए गए निर्णयों में न सिर्फ़ सबसे ज़्यादा उकसाने वाला है, बल्कि बिना किसी विचार-विमर्श के लिया गया है, जिसके परिणाम बहुत ज़्यादा ख़तरनाक हो सकते हैं.”

रूसी सांसद लियोनिड स्लट्स्की प्रो-क्रेमलिन लिबरल-डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रमुख हैं.
उन्हें लगता है, “निश्चित तौर पर तनाव को बढ़ाएगा, जिसके परिणाम भुगतने की धमकी भी दी जाएगी.”
रूसी सीनेटर व्लादिमीर दज़बारोव ने इसे 'तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ाया गया कदम बताया.'
अमेरिकी के इस निर्णय के बारे में रूस में गुस्सा तो है लेकिन वास्तव में कोई हैरानी नहीं है.
क्या होगा रूस का अगला क़दम

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सबसे ज़्यादा मायने यह रखता है कि अब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसे लेकर क्या कहते हैं. वो क्या सोचते हैं.
अब तक वे इस मामले पर ख़ामोश है.
सोमवार को राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमीत्रि पेस्कोव ने पत्रकारों से कहा, “अगर इस तरह का निर्णय लिया गया है तो मतलब तनाव का नया चक्र शुरू होगा और अमेरिका के इस विवाद में उतरने से नई स्थिति पैदा हो जाएगी.”
पेस्कोव ने बाइडन प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा, “वो आग में घी डालने का काम कर रहे हैं और इस विवाद में लगातार तनाव को बढ़ा रहे हैं.”
पश्चिमी नेता यह तर्क दे सकते हैं कि रूस ‘आग में घी डालने’ का काम कर रहा है.
क्योंकि हाल ही में रूस ने उत्तर कोरिया के सैनिकों को युद्ध क्षेत्र में तैनात किया है, ताकि वो रूसी सैनिकों के साथ मिलकर यूक्रेन पर हमला कर सकें.
राष्ट्रपति पुतिन ने अब तक इस मामले पर टिप्पणी नहीं की है, मगर रूसी राष्ट्रपति पहले इस बारे में बयान दे चुके हैं.
रूस ने पहले क्या कहा था?

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हाल ही के महीनों में, क्रेमलिन ने अपना संदेश पश्चिमी देशों को स्पष्ट तरीके से दिया है.
क्रेमलिन ने दोहराया है, ''ऐसा मत कीजिए. लंबी दूरी वाले हथियारों के इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंधों को मत हटाइए. यूक्रेन को यह अनुमति मत दीजिए कि वो रूस के अंदरूनी इलाक़ों में मिसाइलों से हमला कर सके.''
सितंबर में राष्ट्रपति पुतिन ने यह चेतावनी दी थी कि अगर ऐसा करने की अनुमति दी जाती है, तो मास्को इस पूरे घटनाक्रम को नेटो देशों के यूक्रेन के साथ जारी रूस की जंग में ‘सीधी भागीदारी’ के तौर पर देखेगा.
उन्होंने कहा था, “इसका मतलब यह होगा कि नेटो देश रूस के साथ लड़ रहे हैं.”
इसी महीने में रूस ने देश के परमाणु सिद्धांतों में संशोधन की घोषणा की थी.
यह दस्तावेज़ उन सिद्धांतों के बारे में है, जिसके तहत मास्को परमाणु हमले को लेकर निर्णय ले सकता है.
इस बयान को भी उसी चेतावनी के संदर्भ में देखा गया था जिसमें पुतिन ने अमेरिका और यूरोप को संकेत दिया था कि यूक्रेन को रूस के अंदरूनी इलाक़ों में लंबी दूरी वाली मिसाइलों से हमला करने की अनुमति न दे.
पुतिन के जवाब का इंतज़ार?

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व्लादिमीर पुतिन का अगला कदम क्या होगा, इसका अनुमान लगाना कभी भी आसान नहीं होता है. लेकिन, उन्होंने संकेत तो दिया है.
बीते जून में एक सभा में अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के प्रमुख मौजूद थे.
पुतिन से पूछा गया था कि अगर यूक्रेन को यह मौका दिया गया कि यूरोप के द्वारा भेजे गए हथियारों के ज़रिए वो रूस के इलाक़ों को निशाना बना सकता है तो इस पर रूस की प्रतिक्रिया क्या होगी?
इस सवाल के जवाब में राष्ट्रपति पुतिन ने कहा था, “सबसे पहले तो हम अपने एयर डिफ़ेंस सिस्टम को और बेहतर बनाएंगे. हम उनकी मिसाइलों को नष्ट कर देंगे.”
उन्होंने कहा था, "अगर कोई उन्हें हमारे इलाके को निशाना बनाने के लिए हथियार देता है तो हम भी दुनिया में ऐसे देशों को हथियार दे सकते हैं जो उनके संवेदनशील ठिकानों को टार्गेट कर सकें."
दूसरे शब्दों में, मास्को भी उन देशों को हथियार भेजने के बारे में सोच रहा है, जो रूसी हथियारों से यूरोपीय देशों को निशाना बना सकते हैं.
पुतिन के क़रीबी क्या कहते हैं?

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बेलारुस के नेता एलेक्ज़ेडर लुकाशेंको ने हाल ही में कहा था कि क्रेमलिन इसी दिशा में सोच रहा है.
लुकाशेंको को पुतिन का क़रीबी माना जाता है. उन्होंने मुझे बताया था कि इस बारे में उन्होंने पश्चिमी अधिकारियों से मिलकर बातचीत की थी.
लुकाशेंको ने मुझे बताया था, “मैंने उनको चेतावनी दी थी कि दोस्तो, लंबी दूरी की मिसाइलों के बारे में ज़रा सावधानी से काम लें. हूथी विद्रोही पुतिन के पास आकर कोस्टल हथियारों की मांग कर सकते हैं, जो जहाजों पर भयानक हमला कर सकते हैं.”
“और यदि आपके राष्ट्रपति जेंलेस्की को हथियार भेजने के कदम का बदला लेने के इरादे से रूस भी हूथी विद्रोहियों को बैस्टियन मिसाइल सिस्टम भेज दे तो? क्या होगा जब ऐसी किसी मिसाइल से एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया? अगर किसी ब्रिटिश या अमेरिकन एयरक्राफ्ट पर मिसाइल चली तो क्या होगा?”
मगर ऐसा भी लगा कि रूस में मीडिया की कुछ प्रतिक्रियाएं ऐसी थी, जिसने मामले को कमतर दिखाने की कोशिश की.
क्या कहते हैं जानकार?
एक सैन्य विशेषज्ञ ने इज़्वेस्टिया समाचार पत्र से कहा, “रूसी सेनाएं क्राइमिया तट पर एटीएसीएमएस मिसाइलों को रोक चुकी हैं.”
उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका में चुनकर आए नए राष्ट्रपति ट्रंप इस निर्णय को ‘पलट’ भी सकते हैं.
दो महीनों में राष्ट्रपति बाइडन व्हाइट हाउस से बाहर होंगे और डोनाल्ड ट्रंप उनकी जगह लेंगे.
क्रेमलिन यह बात जानता है कि चुने गए राष्ट्रपति ट्रंप, मौजूदा राष्ट्रपति बाइडन की तुलना में यूक्रेन को दी जा रही अमेरिकी सैन्य सहायता को लेकर ज़्यादा संशय में रहे हैं.
क्या व्लादिमीर पुतिन निर्णय लेते समय इस बात को ध्यान में रखेंगे?
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















