अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव किस हद तक करेगा यूक्रेन की क़िस्मत का फै़सला

- Author, इवजिनिया शिदलोवस्का, मिरोस्लावा और पीटर बॉल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका में वॉशिंगटन डीसी के बीचों बीच यूक्रेन के पूर्व सैनिकों का एक समूह जुटा हुआ है.
वो ये पक्का करना चाहते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के इस दौर में उनके देश में चल रहे युद्ध को भुला तो नहीं दिया जाएगा. अमेरिका में 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग होनी है.
इनमें से कुछ यहां नेशनल मॉल की घास पर बैठे दिख रहे हैं. कुछ लोग नकली पैरों के सहारे हैं और प्रोस्थेटिक रनिंग ब्लेड के फीते बांध रहे थे. इन लोगों को अमेरिकी राजधानी के बीचों बीच दस किलोमीटर की एक रेस में हिस्सा लेना था. ये लोग यूक्रेन के झंडे के रंग की पोशाक पहने हुए थे.
यहां जितने लोग जमा थे वो रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान घायल हुए हैं. इनमें से कइयों को अपने शरीर के अंग गंवाने पड़े हैं.

दमित्रो कमेनस्चिक अपनी रनिंग शर्ट संभाल रहे हैं. शर्ट में सामने की तरफ उनके पिता विक्टर की ब्लैक एंड व्हाइट फ़ोटो छपी है. रूसी हमले के दौरान अग्रिम चौकी पर लड़ते हुए उनके पिता की मौत हो गई थी.
26 साल के कमेनस्चिक भी अपना बाएं हाथ और दाएं हाथ की कुछ उंगलियां गंवा चुके हैं. वह बखमूत शहर के नज़दीक ड्रोन ऑपरेटर के तौर पर घायल हो गए थे.
वो कहते हैं, ''मैं यहां अपने मृत पिता को सम्मान देने के लिए आया हूं. मैं इसलिए यहां आया हूं ताकि वो देख सकेंगे कि उनकी कोशिशें बेकार नहीं गईं.''
वो कहते हैं, ''हमारे लिए अमेरिका के लोगों और यहां की सरकार का समर्थन काफ़ी अहम है.''
अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जो जीतेगा उसका यूक्रेन युद्ध का भविष्य तय करने में अहम भूमिका होगी. लेकिन ये युद्ध व्हाइट हाउस की रेस में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
बैटलग्राउंड स्टेट

वॉशिंगटन से 190 किलोमीटर उत्तर पूर्व में फिलाडेल्फिया में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार करने वालों का एक दल सिटी सेंटर के नज़दीक पत्थर की सीढ़ियों पर जमा हुआ है.
सिटी सेंटर फ़िल्म 'रॉकी' से दुनिया भर में मशहूर हो गया है.
हाथ में पीले और नीले रंग का यूक्रेन का झंडा लिए मैरी काल्याना कहती हैं, ''यहां हमें यूक्रेन से जुड़े मुद्दे दिख रहे हैं.''
ये शहर प्रमुख स्विंग स्टेट पेन्सिल्वेनिया में है. यहां कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप में कड़ी टक्कर है. यहां की जंग के बगैर दोनों के लिए व्हाइट हाउस तक का रास्ता तय करना कठिन होगा.
चुनाव प्रचार में शामिल मैरी दूसरी पीढ़ी की यूक्रेनी हैं. वो चाहती हैं कि 5 नवंबर को होने वाले चुनाव में कमला हैरिस ही जीतें क्योंकि अगर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जीतता है तो यूक्रेन को मिल रही अहम वित्तीय और सैन्य मदद जारी रह सकती है.
कमला हैरिस ने कहा है कि वो 'ये सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगी कि यूक्रेन ये युद्ध जीते.'
अमेरिका का डेमोक्रेटिक प्रशासन रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद यूक्रेन को मदद देने में सबसे आगे रहा है.
इन गर्मियों में अमेरिका ने यूक्रेन को 61.1 अरब डॉलर की सैन्य सहायता मुहैया कराई है. ये यूक्रेन को उसके सभी यूरोपीय समर्थक देशों की ओर से दी गई मदद से थोड़ा ज़्यादा है.
वो कहती हैं, ''इस राज्य में एक लाख बीस हज़ार यूक्रेनी अमेरिकी लोग हैं. ये संख्या पिछले दो चुनावों के दौरान यहां वोट देने वाले अमेरिकी यूक्रेनी लोगों से ज़्यादा है. यहां हम काफ़ी असरदार साबित हो सकते हैं.’’
कई यूक्रेनी-अमेरिकी परंपरागत तौर पर कंज़र्वेटिव यानी रिपब्लिकन पार्टी को वोट देते आ रहे हैं. काफ़ी साल पहले यूक्रेनी समुदाय के लोग सोवियत संघ के प्रभाव वाले पूर्वी यूरोप से भागकर यहां आए थे.
पेन्सिल्वेनिया में पोलिश मूल के सात लाख लोग रहते हैं. ये लोग पारंपरिक तौर पर अमेरिका में दक्षिणपंथी पार्टी को वोट देते रहे हैं. लेकिन इनमें से कई अब रूस के विस्तारवाद को लेकर चिंतित हैं.
पेन्सिल्वेनिया में इतनी कड़ी टक्कर है कि थोड़े वोटरों का किसी भी पक्ष में झुकाव निर्णायक साबित हो सकता है.
प्रचार रैली में शामिल डेटा एनालिस्ट रोमन स्त्राकोवस्की कहते हैं, ''मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो पूरी ज़िंदगी रिपब्लिकन पार्टी को वोट देते आए हैं लेकिन आज वो हैरिस के समर्थन में हैं.''
वो कहते हैं, ''मुझे लगता है कि अगर ट्रंप जीतते हैं तो जोखिम हो सकता है. उनकी सरकार में यूक्रेन की मदद या तो बिल्कुल ख़त्म हो जाएगी या काफ़ी घट जाएगी.''
ट्रंप की योजना

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रोमन ये चिंता यूं ही नहीं जता रहे हैं. ट्रंप की योजना है कि रूस और यूक्रेन का समझौता करा दिया जाए. लेकिन इसके लिए बातचीत के दौरान यूक्रेन पर ये दबाव डाला जा सकता है कि वो अपने इलाक़े रूस को सौंप दे.
न्यूयॉर्क में सितंबर महीने में ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, ''मुझे लगता है कि मैं पुतिन और ज़ेलेंस्की के बीच काफ़ी जल्दी समझौता करा सकता हूं.''
ट्रंप अक्सर अपनी इस योजना का ज़िक्र करते हैं लेकिन ऐसा वो कैसे कराएंगे ये नहीं बताते.
ट्रंप ने रूस और यूक्रेन युद्ध से पैदा हालात का ज़िक्र करते हुए कहा था, ''यूक्रेन में जो हो रहा है वो शर्म की बात है. वहां इतनी मौतें हुई हैं. इतना विध्वंस हुआ है. यह भयावह है.''
''ये बेहद डराने वाली चीज़ है और आप देख रहे हैं इसके लिए अमेरिका को पैसे गंवाने पड़ रहे हैं.''
हालांकि पूर्वी यूरोपीय मूल के सभी यूक्रेनी लोग डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं हैं.
पोलिश-यूरोपियन समुदाय से जुड़े एक समूह के सदस्य टिमोथी कुज़मा कहते हैं, ''कई पोलिश लोगों ने पहले ट्रंप का समर्थन किया था और भविष्य में वो भी उन्हीं का समर्थन करेंगे.''
''मुझे नहीं लगता कि बहुत सारे पोलिश लोग ये सोच रहे हैं कि ट्रंप यूक्रेन को उसके हाल पर छोड़ देंगे.''
पेन्सिल्वेनिया के बाहरी इलाके में मौजूद बक्स काउंटी के मेडिकल ऑफिस में मैनेजर जोलांटा गोरा ने कहा, ''मुझे लगता है कि पुतिन ट्रंप से थोड़ा डरे हुए हैं. ट्रंप को पता है कि पुतिन से कैसे निपटा जाए.''
क्या युद्ध का अंत होगा

अमेरिका में कई लोगों का मानना है कि रूस और यूक्रेन के युद्ध पर काफी धन खर्च हो रहा है और इसका कोई अंत नहीं दिख रहा.
जब तक नीतियों में कोई बदलाव नहीं होता तब तक ऐसा होना संभव नहीं दिखता.
कंसर्न्ड वेटरन्स ऑफ़ अमेरिका के स्ट्रेटजिक डायरेक्टर जॉन बार्यन्स कहते हैं, ''युद्ध में सैकड़ों-हज़ारों लोग मर रहे हैं. इसे खत्म करने का एक ही तरीका है कि बातचीत हो और एक समझौते तक पहुंचा जाए.’’
''इसका मतलब ये कि दोनों को सबकुछ नहीं मिल सकता. दोनों को कुछ न कुछ छोड़ना पड़ेगा.''
उनका कहना है सेना में वर्षों तक काम करने का उनका अनुभव विदेशी हस्तक्षेप को लेकर उन्हें ज़्यादा सशंकित करता है.
वो कहते हैं, ''कोई भी राष्ट्रपति बन सकता है. लेकिन हम चाहते हैं ऐसा समझौता हो जिससे यूक्रेन को युद्ध के लिए दी जाने वाली वित्तीय मदद ख़त्म हो. युद्ध में यूक्रेन को हथियारों और गोला-बारूद से जो मदद की जा रही है वो भी बंद हो.''
हालांकि यूक्रेन को ये उम्मीद है कि वो अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस को इतना दबाव डलवाने में समर्थ हो जाएगा कि वो रूस को उसके इलाक़े से हटने को मजबूर कर दे.
लेकिन कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस नीति से बात बनने वाली नहीं है. इससे युद्ध नहीं रुकेगा.
थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल की मेलिंगा हेरिंग कहती हैं, ''रूस और यूक्रेन में से कोई भी समझौता नहीं चाहता.''
उन्होंने कहा, ''रूस समझौते के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है. रूस समझ रहा है कि वो लड़ाई जीत रहा है. युद्ध भूमि में उसे बढ़त हासिल हो रही है.''
''दूसरी ओर यूक्रेन भी युद्ध के इस बिंदु पर समझौता नहीं करना चाहता. उसे जिस तरह की सुरक्षा गारंटी चाहिए वो भी नहीं दिखती.''
''इस समय उसके पास सिर्फ एक मात्र सिक्योरिटी गारंटी है और वो है नेटो की सदस्यता.''
व्हाइट हाउस के लिए कांटे की टक्कर में यूक्रेन भी एक भूमिका निभा रहा है. इसलिए अमेरिकी चुनाव के नतीजे रूस-यूक्रेन युद्ध के नतीजों पर अहम असर डालेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















