उत्तर कोरिया के सैनिक यूक्रेन में क्या रूस के लिए जंग लड़ रहे हैं?

प्रशिक्षण के दौरान उत्तर कोरिया के सैनिक

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, उच्च स्तर पर जारी उत्तर कोरियाई सेना की तैयारी राष्ट्र के एजेंडे का हिस्सा है
    • Author, इल्या एबिशेव
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ रशिया

ऐसी रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं कि उत्तर कोरिया के सैनिकों को यूक्रेन में रूस की सेना की मदद के लिए तैनात किया गया है.

पिछले सप्ताह, यूक्रेनियन न्यूज़ एजेंसी इंटरफैक्स-यूक्रेन और कीएव पोस्ट ने यूक्रेन के ख़ुफ़िया विभाग के सूत्रों के हवाले से एक रिपोर्ट जारी की थी.

इसमें बताया गया था कि 3 अक्तूबर को डोनबास में रूस के कब्ज़े वाले इलाके पर यूक्रेन ने एक मिसाइल हमला किया था. इस हमले में उत्तर कोरिया की सेना के 6 अधिकारी मारे गए थे और 3 घायल हो गए थे.

सूत्रों के मुताबिक़, उत्तर कोरिया की सेना के अधिकारियों का एक समूह उनके रूसी सहयोगियों से मिलने और उनके साथ "अनुभव साझा करने" के इरादे से वहां गया था. क्या इन दावों में कोई सच्चाई है?

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

यूक्रेन के ख़ुफ़िया विभाग ने पिछले साल एक रिपोर्ट दी थी. इसके मुताबिक़, उत्तर कोरिया के सैन्य अधिकारियों का एक छोटा सा समूह यूक्रेन में रूस के कब्ज़े वाले इलाके में गया था.

ये अधिकारी इंजीनियरिंग यूनिट के थे. हालांकि, रूस ने इस बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की थी.

इस साल 8 अक्तूबर को दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री किम योंग युन ने कहा था, ‘‘ऐसा होने की संभावना ज़्यादा है कि यूक्रेन में रूस की मदद के लिए उत्तर कोरिया सैनिकों को तैनात कर सकता है.’’

वहीं, उत्तर कोरिया के सैन्य अधिकारियों की डोनबास में रूस के कब्ज़े वाले इलाके में हुई मौत के आरोपों पर दक्षिण कोरिया के मंत्री युन का कहना है कि इसके सच होने की “संभावना बहुत है.”

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

दरअसल, इस साल जून में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच विस्तृत रणनीतिक साझेदारी को लेकर एक संधि पर हस्ताक्षर हुए थे.

मंत्री युन ने इस बारे में योनहेप समाचार एजेंसी के दक्षिण कोरियाई संस्करण से कहा, ‘‘रूस और उत्तर कोरिया के बीच एक समझौता हुआ है, जो सैन्य गठबंधन के समान है. ऐसे में सेना को वहां भेजने की संभावना ज़्यादा है.”

वैसे पहले भी ऐसी रिपोर्ट्स आ चुकी हैं, जिनमें कथित तौर पर उत्तर कोरिया के सैनिकों के यूक्रेन में रूस की मदद के लिए तैनात होने की बात कही जा चुकी है.

सितंबर 2023 में व्लादिमीर पुतिन ने ऐसी रिपोर्ट्स को "पूरी तरह से बकवास" बताया था. यह वो समय था, जब राष्ट्रपति पुतिन रूस के वास्तोचन स्पेस सेंटर में किम जोंग उन से मुलाक़ात कर रहे थे.

जून 2024 में, जब पुतिन ने किम जोंग उन के साथ संधि पर हस्ताक्षर किए थे, तो उसमें आपसी रक्षा सहयोग की बात शामिल थी.

तब उनसे (पुतिन) यूक्रेन में उत्तर कोरिया के सैनिकों को तैनात किए जाने को लेकर सवाल पूछा गया था.

इस पर उन्होंने (पुतिन) कहा था, ‘‘हम इस बारे में किसी से भी नहीं पूछ रहे हैं, और किसी ने हमें ऐसा प्रस्ताव भी नहीं दिया है’’.

ये भी पढ़ें

बढ़ रहा है आपसी सहयोग

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और व्लादिमीर पुतिन

इमेज स्रोत, KCNA via Reuters

इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गाड़ी से एक यात्रा पर भी गए

दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को मज़बूत किए जाने की बात न तो रूस और न ही उत्तर कोरिया किसी से छिपा रहे हैं.

रूस के सरकारी मीडिया के मुताबिक़, जुलाई 2023 में, तब रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने उत्तर कोरिया की यात्रा की थी. इसका मक़सद "सैन्य संधि को मज़बूत" करना था.

और सितंबर में किम जोंग उन ने रूस के पूर्वी क्षेत्र का दौरा किया था.

फिर सितंबर 2023 में, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यूं सुक येओल ने संयुक्त राष्ट्र में आम सभा की सालाना बैठक को संबोधित किया था.

इस दौरान उन्होंने रूस की सैन्य तकनीक के बदले उत्तर कोरिया के रूस को हथियार भेजने की संभावनाओं की ओर इशारा किया था.

16 अक्टूबर 2023, को ब्रिटिश रॉयल इंस्टीट्यूट फ़ॉर डिफेंस स्टडीज़ (रूसी) ने एक रिपोर्ट जारी की थी. यह रिपोर्ट उत्तर कोरिया के बड़ी मात्रा में रूस को हथियारों की आपूर्ति किए जाने के बारे में थी.

इस रिपोर्ट में कुछ सैटेलाइट तस्वीरें प्रकाशित की गई थीं, इसमें हथियारों के ठिकाने दिखाए गए थे.

हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन रिपोर्ट्स को ख़ारिज कर दिया था.

पेस्कोव ने कहा था, ‘‘यह केवल ब्रिटिश ख़ुफ़िया विभाग ही नहीं है, यह अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग भी है. वे हर समय ऐसी रिपोर्ट देते हैं, मगर वे कोई सबूत नहीं देते.’’

मगर 2023 के ख़त्म होते-होते यह बात सामने आई कि रूसी ईकाइयों ने यूक्रेन में ऐसे विस्फोटकों का इस्तेमाल किया था, जिनकी तकनीकी विशेषताएं उत्तर कोरिया से मिलती-जुलती थीं.

रूस के सैनिकों के बीच इनकी चर्चा भी हुई थी (ज़्यादातर ने इसको लेकर ख़राब रिव्यू दिया था).

प्रशिक्षण लेते हुए उत्तर कोरिया की सेना

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया सेना पर बहुत ज़्यादा ख़र्च कर रहा है

जनवरी 2024 में, यूएस नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा था कि रूस को उत्तर कोरिया से बैलिस्टिक मिसाइल मिली थी और रूस ने इनका इस्तेमाल यूक्रेन के ख़िलाफ़ किया भी था.

व्लादिमीर पुतिन की उत्तर कोरिया यात्रा के कुछ समय बाद, जून 2024 में रूसी प्रेस में ऐसी रिपोर्ट्स आई कि उत्तर कोरिया की योजना सैन्य इंजीनियरों और बिल्डरों की ईकाइयों को यूक्रेन भेजने की थी.

दक्षिण कोरियाई टेलीविज़न कंपनी टीवी चोसन और अमेरिकन इंस्टीट्यूट फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ वॉर ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि, ‘‘उत्तर कोरिया की सेना के पास 10 इंजीनियरिंग ब्रिगेड हैं, इनमें से तीन या चार को वो रूस भेज सकता है’’.

टीवी चोसन ने दावा किया था कि इसके लिए उत्तर कोरिया को रूस से हर साल 115 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) मिल सकते हैं.

पेस्कोव ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, ‘‘मैं नहीं जानता कि यह किस बारे में है.’’

और जुलाई के पहले, उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने रिपोर्ट दी थी कि उत्तर कोरिया की सेना का एक विशेष दल रूस की यात्रा पर गया है.

किम इल सुंग मिलिट्री यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष किम जिम चोल इस दल का नेतृत्व कर रहे थे.

केसीएनए के मुताबिक़, दोनों देशों के बीच पहली बार सैनिकों का आदान-प्रदान हुआ था. ऐसा गुप्त सैन्य सहयोग संधि पर हस्ताक्षर के बाद हुआ था.

जब पत्रकारों ने पेस्कोव से उत्तर कोरिया के सैन्य दल के रूस आने की वजह को स्पष्ट किए जाने का आग्रह किया तो उन्होंने इसके जवाब में रूस के रक्षा मंत्रालय से संपर्क करने को कहा था.

उत्तर कोरिया की सेना के बारे में जानें

प्रशिक्षण के दौरान उत्तर कोरियाई सेना के टैंक

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया के पास रूस और चीन के पुराने हथियारों के अलावा उसकी खुद की तकनीक वाले हथियार भी हैं

उत्तर कोरिया और उसकी सेना की जानकारी बेहद गोपनीय है, जिसकी वजह से सेना की संरचना और लड़ने की क्षमता विवादित है.

एक मुख्य बात जो इसे सबसे अलग दिखाती है, वो है सैनिकों के संख्या.

उत्तर कोरिया के पास यूनिवर्सल मिलिट्री सर्विस है, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं. यहां के लोगों के लिए यह एक अनिवार्य सेवा है. इसमें 3 से 10 साल तक की सेवा की बात कही गई है. हालांकि, यह यूनिट पर निर्भर करता है.

2018 में, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ ने बताया था कि उत्तर कोरिया की सेना दुनिया में चौथी सबसे बड़ी सेना थी, जिसमें करीब 12 लाख लोगों ने अपनी सेवाएं दीं.

ऑन्ड्रे गुबीन, रशियन इंस्टीट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एक विशेषज्ञ हैं. उन्होंने इस बात को रेखांकित किया था कि ये नंबर ज़्यादा भी हो सकता है.

उन्होंने उत्तर कोरिया की सैन्य क्षमता पर लिखे गए एक लेख में लिखा था, ‘‘फिलहाल कोरियाई पीपल्स आर्मी में 8 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल नहीं हैं, और क़रीब साढ़े छह लाख सैनिक लड़ाकू ईकाइयों में हो सकते हैं’’.

उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उत्तर कोरिया की सेना बड़ी संख्या में आम लोगों को जुटा सकती है.

उन्होंने लिखा, ‘‘लगभग 40 लाख लोग रिज़र्व में हैं और संसाधनों के तौर पर कुल 62 लाख लोग जुटाए जा सकते हैं.’’

उत्तर कोरिया में कई अर्द्धसैनिक समूह भी हैं, जिन्हें तथाकथित पीपल्स आर्मी कहा जाता है.

गुबीन ने बताया, ‘‘उत्तर कोरिया के अर्द्धसैनिक बलों में पीजंट रेड गार्ड (सीनियर रिज़र्विस्ट) के लगभग 15 लाख लोग, यूथ रेड गार्ड (सेकेंडरी स्कूल स्टूडेंट्स) के 7 लाख लोग और पब्लिक और स्टेट सिक्योरिटी के मंत्रालय के 30 हज़ार लोग शामिल हैं.’’

ऐसा लगता है कि उत्तर कोरिया, जो प्रतिबंधों के अधीन है, उसे बजट बढ़ाने की बहुत ज़रूरत है. उसके पास ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है, जो सैनिक के तौर पर प्रशिक्षण ले चुके हैं.

ऐसे में इन लोगों को अपने सहयोगियों की मदद के लिए भेजने में उत्तर कोरिया को कोई दिक्कत नहीं होगी. मगर, यह इतना साधारण नहीं है.

इसे छिपाना असंभव होगा

उत्तर कोरियाई सेना की अपराजेय रहने वाली इमेज है

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, उत्तर कोरियाई सेना की अपराजेय रहने वाली इमेज है

उत्तर कोरिया की सेना सोवियत मॉडल पर आधारित थी और सोवियत सैन्य तकनीक का इस्तेमाल करती थी. लेकिन, रूसी सेना के समान इसके पास वास्तविक लड़ाई का कोई अनुभव नहीं है.

इसकी मुख्य सेना के बगैर यंत्रों को इस्तेमाल करने वाली इन्फेंट्री यूनिट्स के पास इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है कि वो यूक्रेन में रूस की लड़ाई में क्या भूमिका निभा सकती हैं या फिर ये कहां से संचालित हो सकती हैं.

क्योंकि उनके सैनिकों को बड़ी और मशीनीकृत (मैकेनाइज़्ड) ईकाइयों का स्वतंत्र रूप से हिस्सा होना सिखाया जाता है.

लेकिन यह रणनीति यूक्रेन में काम नहीं करती है. रूसी सेना के पास यह मौका एक से ज़्यादा बार आ चुका है, जब उन्होंने एक साथ टैंक से हमला करके देखा है.

तो क्या वे छोटे समूहों में कार्य कर सकते हैं? इसके लिए ज़रूरी होगा कि कम से कम उनका बाकी स्तरों पर बेहतर तालमेल और बातचीत हो, जिसमें भाषा कोई रुकावट न हो.

इन दोनों मामलों में नुक़सान होना तय है और इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं.

ऐसे में रूस के सैन्य अभियान में उत्तर कोरिया की सहभागिता को छिपाना असंभव होगा.

और उत्तर कोरिया के सैनिक बड़ी संख्या में मारे जा सकते हैं या पकड़े जा सकते हैं, जिनको यूक्रेन दुनिया के सामने दिखा सकता है.

ऐसा होने पर उत्तर कोरियाई सेना की अपराजेय रहने वाली इमेज कमज़ोर पड़ सकती है, जिसका उत्तर कोरिया प्रचार करता आया है.

ऑन्ड्रे गुबीन ने लिखा, ‘‘शांति के बीच लड़ाई के लिए जोश को जाँचना और ख़ुद को बलिदान के लिए तैयार रखना थोड़ा कठिन है. उदाहरण के लिए 1950-1953 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में शामिल सैनिकों की वीरता के शायद ही पर्याप्त सबूत हैं.’’

अगर उत्तर कोरिया की सेना रूसी सेना के साथ मिलकर काम करती है, तो ऐसे में सैन्य कर्मियों पर नियंत्रण खोना उत्तर कोरियाई लीडरशिप के लिए ख़तरनाक भी हो सकता है.

इसके अलावा दोनों देशों के गठबंधन के बावजूद रूस और उत्तर कोरियाई नेतृत्व की विचारधारा में काफी अंतर है.

सस्ता श्रम बल

उत्तर कोरिया के सैनिकों से मिलते किम योंग उन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, उत्तर कोरिया की सेना सोवियत मॉडल पर आधारित है, उत्तर कोरिया के सैनिकों से मिलते किम जोंग उन

इन सभी कारकों का मतलब यह नहीं है कि यूक्रेन में रूस की लड़ाई में उत्तर कोरिया की सेना की सहभागिता की संभावनाओं को नकारा जाना चाहिए.

उत्तर कोरिया को पैसे और तकनीक की ज़रूरत है, जबकि रूस को सैनिक और हथियारों की ज़रूरत है. और दोनों देश आपसी सैन्य सहयोग बढ़ाने में रुचि रखते हैं.

कई सालों तक उत्तर कोरियाई सेना ने सस्ते श्रम बल के तौर पर काम किया है. इसकी कई ईकाइयां सोवियत निर्माण बटालियन के समान थीं.

सैन्य विशेषज्ञों ने उत्तर कोरिया के इंजीनियरों और निर्माण ईकाइयों द्वारा बनाए गए रक्षात्मक ढांचों की गुणवत्ता को अक्सर बेहतर बताया है.

उत्तर कोरिया की सेना की ऐसी ईकाइयां रूसी सेना के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं.

ये सबसे पीछे रहते हुए सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर सकती हैं. जैसे अंडरग्राउंड वेयरहाउस, किलेबंदी, सड़क और पुल.

इन ईकाइयों को उत्तर कोरिया की सेना की ईकाइयों से बदलने के बाद रूस के पास अतिरिक्त जन बल खड़ा हो सकता है, जिसका इस्तेमाल रूस युद्ध के मोर्चे पर कर सकता है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)