क्या पुजारियों और ग्रंथियों को सम्मान राशि की घोषणा का केजरीवाल को फ़ायदा होगा?

अरविंद केजरीवाल

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इमेज कैप्शन, अरविंद केजरीवाल ने चुनाव जीतने के बाद पुजारियों-ग्रंथियों को सम्मान राशि देने की बात कही है, लेकिन इससे जुड़े लोग उन पर सवाल उठा रहे हैं.
    • Author, हिमांशु दुबे
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के चुनाव जीतने पर मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18 हज़ार रुपए प्रति माह की सम्मान राशि दी जाएगी.

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर 'पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना' से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बीजेपी पर भी निशाना साधा.

केजरीवाल ने कहा, "बीजेपी ने जैसे 'महिला सम्मान' और 'संजीवनी योजना' को पुलिस भेजकर रोकने की कोशिश की, वैसे इसको रोकने की कोशिश न करे, पाप लगेगा."

दिल्ली बीजेपी ने केजरीवाल की घोषणा की आलोचना करते हुए कहा है कि 'चुनावी हिंदू केजरीवाल' ने मंदिर और गुरुद्वारों के बाहर शराब के ठेके खोले और उनकी पूरी राजनीति हिंदू विरोधी रही है.

बीजेपी के रोहिणी से विधायक विजेंद्र गुप्ता ने एक्स पर लिखा, "पिछले 10 वर्षों से इमामों को खुश करने के लिए हर महीने ₹18,000 वेतन देने वाली AAP सरकार को चुनावी मौसम में अब पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों की याद आई है. 10 साल तक मौलवियों को वेतन देने की बात कही, तब पुजारी और ग्रंथियों की याद नहीं आई."

आलोचना के बावजूद केजरीवाल के इस फ़ैसले की वजह क्या है? इस योजना से जुड़े पक्ष इसके बारे में क्या सोचते हैं? यह जानने के लिए हमने कुछ विशेषज्ञों से बातचीत की.

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क्या कहते हैं जानकार?

अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे कुछ पुजारी.

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इमेज कैप्शन, अरविंद केजरीवाल के पुजारियों को सम्मान राशि दिए जाने की घोषणा करने के बाद कुछ पुजारी उनसे मिलने भी पहुंचे. हालांकि, जानकार इसे चुनावी स्टंट बता रहे हैं.

आमतौर पर नेताओं और राजनीतिक दलों की घोषणाएँ आने वाले चुनाव की दस्तक होती है. इस घोषणा को भी इसी नज़रिए से देखा जा रहा है.

सीनियर जर्नलिस्ट शरद गुप्ता ने कहा कि इस घोषणा का मतलब सीधा है कि जनवरी-फ़रवरी में चुनाव है, तो पुजारियों को भी ख़ुश कर लो.

शरद गुप्ता ने कहा, "इतने सालों से उनको पुजारियों की याद नहीं आई. उनकी सरकार 2013 में पहली बार बनी थी. अब 2024 के दिसंबर, वो भी 30 दिसंबर को उनको पुजारियों की याद आ रही है."

उन्होंने कहा, "इससे पहले क्या पुजारी नहीं थे. यह सब आखिर में क्यों हो रहा है. उनकी सरकार बने तो दस साल हो गए हैं. अब सिर्फ़ इसलिए हो रहा है कि चुनाव है."

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इन्होंने भी उठाए सवाल

अरविंद केजरीवाल से मिलने पहुंचे कुछ ग्रंथी.

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इमेज कैप्शन, अरविंद केजरीवाल से मिलने कुछ गुरुद्वारों के ग्रंथी भी पहुंचे. हालांकि, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने इस घोषणा को लेकर शंका ज़ाहिर की.
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने अरविंद केजरीवाल की घोषणा को लेकर शंका जाहिर की.

उन्होंने कहा, "इससे पहले भी अरविंद केजरीवाल चुनावी वादे कर चुके हैं. लेकिन, वो किसी घोषणा पर पूरे नहीं उतरते हैं. यह भी एक तरह से उनका चुनावी स्टंट है."

हरमीत सिंह कालका ने कहा, "सभी गुरुद्वारे में सैलरी जाती है. सभी गुरुद्वारों की अलग-अलग कमेटियां बनी है. वहां जो भी ग्रंथी होते हैं, सेवादार होते हैं, सभी को सैलरी जाती है. मगर, इनसे (केजरीवाल) उम्मीद नहीं की जा सकती."

कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर के महंत प्रमोद शर्मा ने भी अरविंद केजरीवाल की घोषणा की टाइमिंग पर सवाल उठाए.

प्रमोद शर्मा ने कहा, "केजरीवाल जी को अभी याद आई है, ग्रंथियों और पुजारियों की. दस साल से यह क्या कर रहे थे हमारे लिए. इनको यदि यह योजना लागू करनी है तो अभी से लागू कर दें, चुनाव के बाद क्यों, दिल्ली में आपकी सरकार है, सबकुछ आप ही हैं, तो आप अभी कर सकते हैं ये तो."

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को इसी हनुमान मंदिर से अरविंद केजरीवाल अपनी योजना के लिए पंजीकरण शुरू करने वाले हैं.

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मौलवी क्यों हैं नाराज़?

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इमेज कैप्शन, कुछ मौलवियों ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने ढाई साल से उनको सैलरी नहीं दी है.

दिल्ली में वक़्फ़ बोर्ड के तहत आने वाली मस्जिदों में कार्यरत मौलवियों-इमामों को 18 हज़ार रुपए महीने के हिसाब से सैलरी मिलती रही है.

मगर, हाल ही में कुछ मौलवियों ने भी दिल्ली की आम आदमी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था. इसकी वजह बताते हुए जमात उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बीजेपी नेता मौलाना सुहैब कासमी ने भी अरविंद केजरीवाल पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा, "दिल्ली में वक़्फ़ बोर्ड के तहत आने वाली मस्ज़िदों में जो इमाम पाँच बार नमाज़ पढ़ाते हैं और तालीम देते हैं, उनको 18 हज़ार रुपए महीना सैलरी मिलती है, जो दिल्ली सरकार ने पिछले तीन सालों से नहीं दी है. वो विश्वासघात कर रही है. यह हमेशा मिलता आया. भाजपा सरकार में मिलता आया. कांग्रेस सरकार में मिलता आया."

मौलाना कासमी ने कहा, "केजरीवाल सरकार ऐसे तो इमामों और मौलानाओं से बहुत काम लेती है. जब तनख़्वाह देने का टाइम आता है, तो केजरीवाल साहब उनका फ़ोन उठाना बंद कर देते हैं."

"पिछले ढाई साल से हमें सैलरी नहीं दे पा रहे हैं, तो पुजारियों-ग्रंथियों को सम्मान राशि कहां से दे पाएंगे?"

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क्या पार्टी के प्रदर्शन पर असर पड़ेगा?

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इमेज कैप्शन, कुछ जानकार मानते हैं कि पार्टी को इस घोषणा से फ़ायदा नहीं होगा.

मगर, सवाल यह है कि अरविंद केजरीवाल की इस ताज़ा घोषणा से दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन पर क्या असर पड़ेगा?

इस पर सीनियर जर्नलिस्ट शरद गुप्ता कहते हैं कि उनके हिसाब से कोई बहुत बड़ा फ़ायदा नहीं होगा.

उन्होंने कहा, "वैसे तो आजकल कुछ पता नहीं चलता है. कभी-कभी ऐसी बात का भी फ़ायदा हो जाता है, जो आप सोचते भी नहीं हैं. उन्होंने भी इसलिए किया है कि फ़ायदा हो."

"लेकिन मुझे नहीं लगता है कि आख़िरी मिनट में आप कोई घोषणा करें और उसका आपको फ़ायदा हो जाए."

सीनियर जर्नलिस्ट गुप्ता अपनी इस बात को लेकर यह तर्क देते हैं, "यदि आम आदमी पार्टी अपने आपको हिंदू पार्टी सोचकर ऐसा कर रही है तो बीजेपी के सामने आम आदमी पार्टी कभी भी हिंदू पार्टी नहीं हो सकती है. इसलिए, मैं नहीं कह सकता हूं कि इससे बहुत ज़्यादा फ़ायदा होगा."

दिल्ली विधानसभा चुनाव कब होंगे?

केजरीवाल की घोषणा पर सीनियर जर्नलिस्ट की राय.

2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव होने है. अभी तारीख़ों का एलान होना बाकी है.

जहां तक सवाल इससे पहले हुए चुनावों का है, तो 2015 और 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 70 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी.

और फ़िर उसके वोट प्रतिशत में लगातार गिरावट आती गई. 2020 में आम आदमी पार्टी को 62 सीटें 53 प्रतिशत से ज़्यादा वोट के साथ मिली.

वहीं, बीजेपी को 2020 में 35 फ़ीसदी से अधिक मत मिले, लेकिन इसमें कांग्रेस पाँच प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाई.

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बीजेपी पर क्यों साधा निशाना?

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रसिदी

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इमेज कैप्शन, ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रसिदी ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मांग की थी कि इमामों की सैलरी दी जाए, जो 17 महीने से नहीं दी गई है.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बीते दिनों दो योजनाओं की घोषणा की थी. पहली है, 'महिला सम्मान योजना', जिसके तहत महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये देने का वादा है.

दूसरी है, ''संजीवनी योजना', जिसके तहत दिल्ली के सभी (निजी और सरकारी ) अस्पतालों में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों का मुफ़्त इलाज किया जाएगा.

मगर, दिल्ली के स्वास्थ्य और परिवार-कल्याण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन योजनाओं से ख़ुद को अलग कर लिया.

दोनों विभागों ने अख़बारों में नोटिस जारी किए. इसमें कहा गया कि लोग किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति की बातों में आकर किसी तरह के फॉर्म पर दस्तख़त न करें.

इस बीच, दिल्ली के उपराज्यपाल ने इस योजना के नाम पर महिलाओं की निजी जानकारी इकट्ठा करने वाले व्यक्तियों के ख़िलाफ़ जांच के आदेश दिए.

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि उपराज्यपाल ने बीजेपी के दबाव में जांच के आदेश दिए हैं.

अरविंद केजरीवाल ने कहा, "बीजेपी, उपराज्यपाल और अमित शाह इन योजनाओं के लिए रजिस्ट्रेशन रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसका जवाब जनता देगी."

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