दिल्ली में क्या है मुख्यमंत्री आतिशी को 'आवास से निकालने' का विवाद और क्यों चर्चा में रहा है ये मकान?

आतिशी

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इमेज कैप्शन, दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी ने उन्हें सरकारी आवास से निकाल दिया है. आतिशी इस विभाग की मंत्री भी हैं.
    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का निवास रहा 6 फ़्लैगस्टाफ़ रोड एक बार फिर चर्चा में है.

अरविंद केजरीवाल ने चार अक्टूबर को इस आवास को खाली किया था जिसके बाद आतिशी वहां रहने गईं थीं.

अब दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री आतिशी को सीएम आवास- 6 फ्लैगस्टाफ़ रोड से ज़बरदस्ती बाहर निकालने के आरोप लगाए हैं.

गुरुवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय ने आतिशी की एक तस्वीर जारी की जिसमें वो अपने निजी आवास में फ़ाइलों पर दस्तख़त करती दिख रही हैं. उनके इर्द-गिर्द पैक किया हुआ सामान रखा है.

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि दिल्ली की निर्वाचित मुख्यमंत्री को उपराज्यपाल के इशारों पर उनके अधिकारिक आवास से बाहर निकाल दिया गया है.

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उपराज्यपाल कार्यालय की तरफ़ से इस घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने गुरुवार को कहा, "नवरात्र के मौक़े पर एक महिला मुख्यमंत्री का सामान फेंक उसे घर से निकाल दिया गया है. दिल्ली की सत्ता से 27 सालों से बाहर बीजेपी बिना चुनाव जीते ही मुख्यमंत्री निवास पर क़ब्ज़ा करना चाहती है."

वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि ऐसा कोई नियम नहीं है जिसके तहत ये आवास मुख्यमंत्री आवास के रूप में निर्धारित हो.

दिल्ली में भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "आम आदमी पार्टी नियमों की अनदेखी कर इस शीशमहल को अपने पास रखना चाहती है."

चल रही है विजीलेंस की जांच

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बुधवार को दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने 6 फ़्लैग स्टाफ़ रोड को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. आतिशी इस विभाग की मंत्री भी हैं.

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 4 अक्तूबर को इस घर को खाली कर दिया था और इसकी चाबी पीडब्ल्यूडी को सौंप दी थी.

केजरीवाल की तरफ़ से एक नोट भी पीडब्ल्यूडी विभाग को लिखा गया था जिसमें मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी को ये घर आवंटित करने की इच्छा ज़ाहिर की गई थी.

पीडब्ल्यूडी यानी लोक निर्माण विभाग ही दिल्ली में सरकारी घरों के निर्माण और देखभाल का काम करता है. विभाग ही मंत्रियों को बंगले आवंटित करता है.

पीडब्ल्यूडी की तरफ़ से एक बयान में कहा गया है कि यह आवास अधिकारिक रूप से आतिशी को आवंटित नहीं किया गया है.

हालांकि, जब संजय सिंह से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "हम शुरू से कह रहे हैं कि यह मुख्यमंत्री आवास है. सबने देखा कि आतिशी का सामान दो छोटे-छोटे टेंपो में लाकर घर में रखा गया. सवाल ये है कि पीडब्ल्यूडी विभाग के चाबी दिए बिना आतिशी का ये सामान सीएम आवास में कैसे रखा गया था?"

संजय सिंह ने कहा, "दरअसल, दिल्ली की चुनी हुई सरकार को ये लोग मानना ही नहीं चाहते हैं, चुनी हुई सरकार के नेताओं को अपमानित करने के हथकंडे हर समय अपनाए जाते हैं. एक महिला मुख्यमंत्री का सामान आवास से बाहर निकालकर उन्हें अपमानित किया गया है."

हालांकि, इस विवाद पर पीडब्ल्यूडी की तरफ़ से कहा गया है, "6 फ्लैगस्टाफ़ पर निवास के निर्माण को लेकर विजिलेंस के भी कुछ मामले चल रहे हैं. ऐसे में पीडब्ल्यूडी के लिए ये ज़रूरी है कि वह आवास को फिर से आवंटित करने से पहले इसकी गहन जांच करे और वहां मौजूद सामान की सूची तैयार करे."

पीडब्ल्यूडी का ये भी कहना है कि इस आवास की जो चाबी पीडब्ल्यूडी को वापस की गई थी उसे कुछ समय बाद वापस ले लिया गया था जबकि मकान को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी.

पीडब्ल्यूडी ने 6 अक्तूबर को मुख्यमंत्री के विशेष सचिव परवेश रंजन को लिखे एक पत्र में इस घर की चाबी भी मांगी थी.

बीजेपी ने एलजी के ज़रिए घर खाली करवाया- आप

घर पर ताला लगाती सुनीता केजरीवाल

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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री आवास छोड़ते वक्त अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल

आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने गुरुवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, "अगर पीडब्ल्यूडी विभाग ने रविवार को आतिशी को चाबी दे दी थी, घर में उनका सामान रखा हुआ था तो किस अधिकार से दिल्ली के उपराज्यपाल ने उनका सामान बाहर निकलवाया."

आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ने भाजपा के साथ मिलकर दिल्ली के सीएम को आवास से बाहर निकलवाया है.

संजय सिंह ने कहा, "बीजेपी मुख्यमंत्री आवास पर एलजी की मदद से क़ब्ज़ा करना चाहती है. एलजी ने उस सीएम का सामान आवास से निकलवाया है जो 62 विधायकों के समर्थन से सीएम बनीं हैं."

संजय सिंह ने एक पत्र दिखाते हुए दावा किया कि अरविंद केजरीवाल ने इस आवास को पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया था.

संजय सिंह ने कहा, "इस पत्र में स्पष्ट लिखा है कि केजरीवाल ने चार अक्तूबर को घर खाली कर दिया था और उन पर कोई बकाया नहीं था."

बीजेपी का सवाल- यही घर क्यों चाहिए?

घर खाली करते अरविंद केजरीवाल

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इमेज कैप्शन, चार अक्टूबर को अरविंद केजरीवाल ने इस आवास को खाली कर दिया था

अरविंद केजरीवाल के इस घर को खाली करने के बाद दिल्ली की मौजूदा मुख्यमंत्री आतिशी इसमें रहने आईं थीं. छह अक्तूबर को आतिशी ने यहां रहना शुरू कर दिया था और यहां बैठकें भी की गईं थीं.

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी के आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि संबंधित आवास मुख्यमंत्री आवास के रूप में निर्धारित नहीं है.

दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, "कोई भी एक सरकारी काग़ज़ सरकार दिखा दे जिसमें ये निर्धारित हो कि 6 फ्लैगस्टाफ़ रोड मुख्यमंत्री आवास के लिए तय है. उसे खाली करने की बाध्यता है क्योंकि क़ानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं."

सचदेवा ने कहा, "आतिशी उस मकान में रहना चाहती हैं, इससे किसी को कोई दिक़्क़त नहीं है, लेकिन क़ानूनी बाध्यताएं तो उन्हें पूरी करनी होगी. इस मकान का मालिक पीडब्ल्यूडी है, मकान खाली करते वक़्त अरविंद केजरीवाल को सामान की लिस्ट बनवानी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, जब तक इन्वेंटरी नहीं बनेगी, वो क़ाग़ज़ नहीं बनेगा, पीडब्ल्यूडी उसे किसी और को आवंटित कैसे कर सकता है?”

सचदेवा ने कहा, "आख़िर उस भ्रष्टाचारी शीशमहल में ऐसा क्या है जिसे अरविंद केजरीवाल छुपाना चाहते हैं. वो भ्रष्टाचारी शीशमहल जनता ना देख पाए, इसलिए क़ानूनों को तोड़कर आतिशी उसमें घुसना चाहती हैं."

बुधवार को बंद किया गया घर

सुनीता केजरीवाल

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इमेज कैप्शन, घर की चाबी देते हुए अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनिता केजरीवाल की ये तस्वीर आम आदमी पार्टी ने जारी की थी

इस ताज़ा घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री आवास को लेकर छिड़े विवाद को और हवा दे दी है.

आतिशी को घर से बाहर निकाले जाने को अप्रत्याशित घटनाक्रम बताते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ़ से जारी एक बयान में कहा गया, "भारत के इतिहास में पहली बार एक मुख्यमंत्री को उनके आवास को खाली करने के लिए कहा गया है."

इस बयान में कहा गया, "इस मकान को किसी बड़े बीजेपी नेता को देने की तैयारी चल रही है. 27 साल से दिल्ली की सत्ता से बाहर बीजेपी अब मुख्यमंत्री आवास पर क़ब्ज़ा करना चाहती है."

हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय के इन आरोपों पर दिल्ली के उप-राज्यपाल वीके सक्सेना के कार्यालय ने कोई जवाब नहीं दिया है.

क्या ये घर आधिकारिक रूप से आतिशी को आवंटित किया गया था, इस सवाल के जवाब में संजय सिंह ने कहा, "अगर ये आवास आतिशी के लिए आवंटित नहीं हुआ था तो फिर उन्हें चाबी क्यों दी गई थी?"

वहीं दिल्ली की मंत्री के रूप में आतिशी को एक और मकान पहले से आवंटित है. क्या एक मकान के होते हुए उन्हें दूसरा मकान आवंटित किया जा सकता है?

इस सवाल पर संजय सिंह ने कहा, "वो मकान उन्हें मंत्री के रूप में आवंटित हुआ था, अब वो मुख्यमंत्री हैं और मुख्यमंत्री आवास में रहेंगी."

हालांकि, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस से कहा है कि आतिशी के पास घर की चाबी तो थी लेकिन उन्हें मकान अधिकारिक रूप से आवंटित नहीं हुआ है.

बीबीसी ने इस संबंध में पीडब्ल्यूडी अधिकारियों से सवाल किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिल सका.

ये मकान फिलहाल बंद है लेकिन क्या इसे किसी और को आवंटित किया गया है, इस सवाल का जवाब भी पीडब्ल्यूडी ने नहीं दिया है.

रिपोर्टों के मुताबिक़, बुधवार को पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने आवास का दौरा किया था और इसकी चाबी वापस ले ली थी.

निर्माण को लेकर उठे थे सवाल

संजय सिंह

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इमेज कैप्शन, आप सांसद संजय सिंह

ये आवास साल 2015 में केजरीवाल को आवंटित हुआ था और तब से ही यह मुख्यमंत्री का आवास रहा है.

इस आवास को साल 2020-21 में फिर से निर्मित भी किया गया था. मकान में विकसित की गई सुविधाओं और इसके निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी पर निशाना भी साधा था.

मीडिया रिपोर्टों में इस मकान के निर्माण में ज़रूरत से अधिक ख़र्च किए जाने का दावा किया गया था. भाजपा ने पिछले साल इसे मुद्दा बनाने का प्रयास भी किया था.

कथित अनियमितताएं और ज़रूरत से अधिक ख़र्च के आरोप सामने आने के बाद, पीडब्ल्यूडी के विजिलेंस विभाग ने इसकी जांच शुरू की थी. इस जांच के दायरे में आए पीडब्ल्यूडी के कई अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई थी.

फिलहाल, पीडब्ल्यूडी की विजिलेंस जांच के अलावा सीबीआई भी इस आवास के निर्माण में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है.

पीडब्ल्यूडी विभाग ने कहा था कि ये नई इमारत पीडब्ल्यूडी या किसी और प्राधिकरण से मंज़ूरी लिए बिना बनाई गई थी और इसका पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हुआ था.

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