केजरीवाल ज़मानत पर हुए रिहा, पार्टी बोली- अरविंद ना झुकेंगे और ना रुकेंगे

जेल से रिहाई के बाद अरविंद केजरीवाल समर्थकों के बीच

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सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल से बाहर आ गए हैं.

दिल्ली की तिहाड़ जेल से बाहर आकर अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी को बिना नाम लिए निशाने पर लिया.

उन्होंने कहा कि इन लोगों को लगा कि मुझे जेल में डालकर मेरा हौसला तोड़ देंगे. आज मैं जेल से बाहर आ गया हूं और मेरे हौसले 100 गुना ज़्यादा बढ़ गये हैं. उन्होंने कहा कि जेल की सलाखे केजरीवाल के हौसले को कम नहीं कर सके.

वहीं केजरीवाल की रिहाई के बाद पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय ने कहा कि बीजेपी सोचती थी कि अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद आम आदमी पार्टी खत्म हो जाएगा लेकिन आज अरविंद केजरीवाल टूटे नहीं, बल्कि वह छूट गए. अरविंद केजरीवाल ना टूटेंगे, ना झुकेंगे और ना ही रुकेंगे.

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जेल से घर पहुंचते हुए अपने समर्थकों के बीच अरविंद केजरीवाल ने ये भी कहा कि आज देश के अंदर चुनाव आयोग को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है. ईडी-सीबीआई पर कब्ज़ा किया जा रहा है और देश नाज़ुक स्थिति में है.

अरविंद केजरीवाल जेल से रिहा होकर अपने आवास पर पहुंचे

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार सुबह मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने 10 लाख रुपये के मुचलके पर केजरीवाल की ज़मानत के आदेश दिए. हालांकि कोर्ट ने सीबीआई की गिरफ़्तारी को सही बताया.

दिल्ली की आबकारी नीति में कथित घोटाले के लिए केजरीवाल को ईडी ने इसी साल 21 मार्च को गिरफ़्तार किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में ज़मानत दे दी थी.

लेकिन हिरासत में रहते हुए अरविंद केजरीवाल को 26 जून को सीबीआई ने फिर से गिरफ़्तार कर लिया था, इसलिए वह जेल में ही रहे.

सीबीआई की ओर से हुई गिरफ़्तारी को चुनौती देने और ज़मानत के लिए सीएम केजरीवाल की ओर से दो याचिकाएं दायर की गई थीं.

पांच सितंबर को इस पर सुनवाई हुई थी और सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रख लिया गया था.

अरविंद केजरीवाल

किन शर्तों पर मिली ज़मानत

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ज़मानत कुछ शर्तों पर दी गई हैं. ये शर्तें कुछ इस तरह से हैं

  • दिल्ली के मुख्यमंत्री को 10 लाख के बॉन्ड भरने और दो ज़मानतदारों के आधार पर ज़मानत दी गई है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को निर्देश दिए हैं कि वो इस मामले पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं करेंगे.
  • साथ ही कोर्ट ने केजरीवाल के दफ़्तर संभालने और किसी भी आधिकारिक फ़ाइल पर हस्ताक्षर करने पर रोक लगाई है.
  • कोर्ट ने केजरीवाल को इस मामले से जुड़े गवाहों या इससे जुड़ी किसी भी फ़ाइल तक पहुंच बनाने पर रोक लगा दी है.
  • केजरीवाल से कहा गया है कि जब तक छूट न मिले तब तक इस मामले के ट्रायल की सभी सुनवाइयों में उन्हें उपस्थित रहना होगा.

अरविंद केजरीवाल ने क्या-क्या कहा?

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जेल से रिहा होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने कहा, "सबसे पहले मैं ऊपरवाले का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं, जिनकी कृपा से आज मैं आप लोगों के बीच में हूं. लाखों-करोड़ों लोगों की दुआओं का शुक्रिया करना चाहता हूं. लोगों ने मंदिर, मस्जिद गुरुद्वारों में दुआएं की. मैं सबका शुक्रिया कहना चाहता हूं."

उन्होंने भारी बरसात में तिहाड़ पहुंचे समर्थकों का भी अभिवादन किया.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी ज़िंदगी का एक-एक पल, उनके शरीर का एक-एक कतरा देश को समर्पित है.

उन्होंने कहा, " ज़िंदगी में बहुत संघर्ष किया है, बहुत मुसीबतें झेली हैं लेकिन हर कदम पर भगवान ने मेरा साथ दिया. ऊपरवाले ने मेरा साथ दिया क्योंकि मैं सच्चा था."

अपने समर्थकों को संबोधित करते समय अरविंद केजरीवाल भावुक दिखे.

उन्होंने कहा, "इन लोगों ने मुझे जेल में डाल दिया. इन लोगों को लगा कि केजरीवाल को जेल में डाल देंगे तो हौसले टूट जाएंगे. आज मैं आपको कहना चाहता हूं, मैं जेल से बाहर आया हूं. मेरे हौसले सौ गुना ज़्यादा बढ़ गए हैं. मेरी ताकत सौ गुना ज़्यादा बढ़ गई है. इनकी जेल की मोटी-मोटी दीवारें, जेल की सलाखें केजरीवाल के हौसले को कम नहीं कर सकती."

केजरीवाल ने कहा, "मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि जैसे आज तक ऊपरवाले ने मुझे रास्ता दिखाया, ताकत दी. ऐसे ही मुझे भगवान रास्ता दिखाते रहें. मैं देश की सेवा करता रहूं. और ये जितनी राष्ट्र विरोधी ताकतें हैं, जो देश के विकास को रोक रही हैं, देश को बांटने का काम कर रही हैं, जो देश को अंदर से कमज़ोर करने का काम कर रही हैं. ज़िंदगी भर मैं इनके ख़िलाफ़ लड़ा हूं, आगे भी ऐसे ही लड़ता रहूंगा."

अरविंद केजरीवाल की रिहाई का जश्न मनाते हुए आम आदमी पार्टी के नेता

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तिहाड़ जेल से निकलकर अरविंद केजरीवाल ने रोड शो भी किया.

इस दौरान उन्होंने अपने समर्थन के लिए जुटे लोगों से कहा, "दोस्तो, आज देश बहुत नाज़ुक स्थिति से गुज़र रहा है. केजरीवाल बहुत छोटी चीज़ है. केजरीवाल इम्पॉर्टेंट नहीं है. देश इम्पॉर्टेंट है. आज देश के अंदर कुछ लोग, कुछ राष्ट्र विरोधी ताक़तें देश को अंदर से कमज़ोर करने की कोशिश कर रही हैं.

देश को बांटने की कोशिश कर रही हैं. भाई को भाई से लड़ाने की कोशिश कर रही हैं. न्यायपालिका को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है. न्याय व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है. जजों को डराया-धमकाया जा रहा है."

केजरीवाल ने कहा, "आज देश के अंदर चुनाव आयोग को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है. ईडी-सीबीआई पर कब्ज़ा किया जा रहा है. हमें इसका मुकाबला करना है दोस्तो. मेरा कसूर ये नहीं है कि मैंने कोई भ्रष्टाचार किया था. मेरा कसूर ये है कि मैंने उन राष्ट्रविरोधी ताकतों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की थी. इसलिए मुझे जेल जाना पड़ा. लेकिन मैं हमेशा इन ताकतों के ख़िलाफ़ लड़ा हूं और आगे भी लड़ता रहूंगा."

जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल

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क्या है मामला?

दिल्ली सरकार के 2021-22 की आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. हालांकि अब इस नीति को रद्द किया जा चुका है.

कथित शराब घोटाले में संलिप्तता के आरोपों में मनीष सिसोदिया, राज्य सभा सांसद संजय सिंह को भी गिरफ़्तार किया गया था.

पिछले महीने ही आम आदमी पार्टी में दूसरे सबसे बड़े नेता मनीष सिसोदिया ज़मानत पर बाहर आ गए. वो 530 दिनों तक जेल में बंद रहे.

सिसोदिया के अलावा इस मामले में अभियुक्त रहे संजय सिंह, के कविता को ज़मानत मिल चुकी है.

दिल्ली सरकार ने नई आबकारी नीति को मार्च 2021 में मंज़ूरी दी थी. इसमें शराब की सरकारी दुकानें बंद करने से लेकर शराब पीने की न्यूनतम उम्र 25 साल से घटाकर 21 साल करने तक के फै़सला शामिल था.

नई आबकारी नीति लागू करने के बाद दिल्ली का शराब कारोबार निजी हाथों में आ गया था.

शराब की सभी दुकानें निजी हाथों में चली गई थीं.

दिल्ली सरकार ने इसका तर्क दिया था कि इससे इस कारोबार से प्राप्त होने वाले राजस्व में बढ़ोतरी होगी.

दिल्ली सरकार की यह नीति शुरू से ही विवादों में रही. आरोप लगे कि आयात शुल्क हटाकर लाइसेंस धारकों को अनुचित फ़ायदा पहुंचाया गया. साथ ही दिल्ली सरकार पर कमीशन लेने का भी आरोप लगा. कहा गया इन पैसों का इस्तेमाल पंजाब विधानसभा चुनाव में हुआ.

लेकिन जब यह विवाद बहुत बढ़ गया तो नई नीति को ख़ारिज करते हुए सरकार ने जुलाई 2022 में एक बार फिर पुरानी नीति को ही लागू कर दिया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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