आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के रास्ते क्या जुदा हुए?

राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल

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इमेज कैप्शन, इंडिया गठबंधन की एक बैठक में मंच साझा करते राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल. ये तस्वीर दिसंबर 2023 की है.

लोकसभा चुनाव के लिए साथ आए इंडिया गठबंधन के दो दल नई लोकसभा के शुरुआती सत्र से पहले ही रास्ते अलग करते नज़र आ रहे हैं.

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था मगर अब दोनों के नेता अलग-अलग रास्ते पर जाने की वकालत कर रहे हैं.

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अलका लांबा ने बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम द लेंस में एक सवाल के जवाब में कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के साथ गठबंधन फ़ेल हुआ है इसलिए राज्यों के स्तर पर इस गठबंधन को लेकर विचार करना होगा.

वीडियो कैप्शन, संसद में राहुल गांधी-अखिलेश यादव की जोड़ी पीएम मोदी के सामने कितनी बड़ी चुनौती- द लेंस

अलका लांबा ने कहा, "इस गठबंधन से कांग्रेस को भारी नुक़सान हुआ है. दिल्ली में हमने चार सीटें दीं, हमने हरियाणा में कुरुक्षेत्र सीट दी और गुजरात में भी आम आदमी पार्टी हारी. तो आम आदमी पार्टी कहीं पर भी अच्छा नहीं कर पाई और दिल्ली में ऐंटी-इनकंबेंसी का भी नुक़सान हुआ."

उन्होंने दिल्ली के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि उनकी निजी राय में दिल्ली में कांग्रेस का आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन ठीक नहीं रहेगा.

दिल्ली, हरियाणा और गुजरात में था गठबंधन

राहुल गांधी

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अलका लांबा इससे पहले आम आदमी पार्टी के टिकट पर विधायक रह चुकी हैं मगर 2019 में वह वापस कांग्रेस में चली गईं थीं.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच दिल्ली, गुजरात और हरियाणा में सीटों का बँटवारा हुआ था. इसके तहत दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने नई दिल्ली, पूर्वी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और पश्चिम दिल्ली में प्रत्याशी उतारे थे जबकि कांग्रेस को तीन सीटें- उत्तर दिल्ली, उत्तर-पश्चिम दिल्ली और चाँदनी चौक की सीटें मिली थीं.

हरियाणा की 10 में से नौ सीटों पर कांग्रेस लड़ी थी जबकि कुरुक्षेत्र की सीट आम आदमी पार्टी के खाते में गई थीं और गुजरात की 26 में से भरूच और भावनगर की दो सीटें आदमी पार्टी को दी गई थीं. आम आदमी पार्टी इनमें से कोई भी सीट नहीं जीत सकी.

आप भी कह चुकी है अलग होने की बात

केजरीवाल और भगवंत मान

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इमेज कैप्शन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की फ़ाइल फोटो

पंजाब में दोनों पार्टियों ने अलग चुनाव लड़ा था. अलका लांबा ने कहा, "हमारा आम आदमी पार्टी को लेकर पंजाब में फ़ैसला था कि हम गठबंधन नहीं करेंगे क्योंकि वहाँ उनकी सरकार है और वहाँ उनकी नाराज़गी का ख़ामियाज़ा हमको भुगतना पड़ सकता है. हमने पंजाब में आप की चार के मुक़ाबले सात सीटें जीतीं."

वैसे चार जून को लोकसभा के नतीजे आने के बाद छह जून को आप के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा था कि कांग्रेस और आप का गठबंधन लोकसभा चुनाव के लिए था और दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए कोई गठबंधन किसी पार्टी से नहीं होगा.

इसके अलावा इन दिनों दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी दिल्ली में जल संकट को लेकर अनशन कर रही हैं मगर कांग्रेस उसे लेकर भी आप पर हमलावर है.

कांग्रेस नेता अलका लांबा

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता अलका लांबा

अलका लांबा ने शनिवार को 'पानी सत्याग्रह' नाम से हो रहे अनिश्चितकालीन अनशन के मंच की तस्वीर सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मंच ख़ाली है और मंत्री ग़ायब हैं, जो पिछले कमरे में सत्याग्रह के नाम पर आराम फ़रमा रहे हैं. जो सत्ता में हैं उन्हें धरना देने के बजाय समस्या का निराकरण करना चाहिए और यदि यह उनके बूते की बात नहीं है तो तत्काल इस्तीफ़ा दें."

द लेंस कार्यक्रम में अलका लांबा ने अन्य क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन में हुए फ़ायदे गिनाए और कहा कि पार्टी उत्तर प्रदेश या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गठबंधन की पार्टियों के साथ ही विधानसभा चुनाव में जाना चाहेगी.

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