पीएम मोदी, केजरीवाल और लोकसभा चुनाव की पाकिस्तानी मीडिया में कैसी चर्चा?

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भारत के लोकसभा चुनाव 2024 की पाकिस्तान के मीडिया में चर्चा हो रही है.
इस चर्चा के केंद्र में भारत और पाकिस्तान के नेताओं के बयान हैं.
कुछ वक़्त पहले ही पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार के दौर में मंत्री रहे चौधरी फ़वाद हुसैन ने भारत पर टिप्पणी की थी.
25 मई को दिल्ली में सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने परिवार के साथ वोट डालने जाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी.
फ़वाद चौधरी ने इन तस्वीरों को री-ट्वीट करते हुए लिखा था, ''शांति और सद्भाव... नफ़रत और अतिवाद की ताक़तों को हरा दे.''
फ़वाद के इस ट्वीट पर जवाब देते हुए अरविंद केजरीवाल ने लिखा था, ''चौधरी साहब, मैं और मेरे देश के लोग अपने मसलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं. आपके ट्वीट्स की ज़रूरत नहीं है. इस वक़्त पाकिस्तान के हालात बहुत ख़राब हैं. आप अपने देश को संभालिए.''

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फ़वाद ने केजरीवाल से क्या कहा
फ़वाद चौधरी ने इस पर जवाब दिया, ''सीएम साहब, चुनाव आपका ही मुद्दा है. भारत हो या पाकिस्तान, अतिवाद की कोई सीमा नहीं होती. जिसकी भी अंतरात्मा होगी, वो इसे सही नहीं कहेगा. पाकिस्तान में स्थिति आदर्श नहीं है पर हर किसी को बेहतर होने की कोशिश करनी चाहिए.''
केजरीवाल और फ़वाद के बीच हुए इस संवाद को दिल्ली बीजेपी ने मुद्दा बनाने की कोशिश की.
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा था कि केजरीवाल के लिए वोट करने की अपील पाकिस्तान से की जा रही है.
बयानबाज़ी का ये इकलौता मामला नहीं है.
फ़वाद चौधरी हों, पीएम नरेंद्र मोदी या फिर पूर्व नौकरशाह, भारतीय चुनाव में पाकिस्तान और पाकिस्तान में भारतीय चुनाव की चर्चा हो रही है. पाकिस्तान का मीडिया भी इस पर ख़बरें कर रहा है.
इस रिपोर्ट में हम आपको इसी बारें में बताने की कोशिश करेंगे.

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पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर क्या कहा
पीएम नरेंद्र मोदी समेत बीजेपी के कई शीर्ष नेता चुनावी रैलियों में पाकिस्तान का ज़िक्र इन चुनावों में भी करते रहे हैं.
19 अप्रैल को मध्य प्रदेश के दामोह में पीएम मोदी ने कहा था, ''एक पड़ोसी देश जो आतंक का सप्लायर था, आज आटे के लिए संघर्ष कर रहा है.''
एक दूसरी चुनावी सभा में पीएम मोदी ने कहा था- विपक्ष को पाकिस्तान का एटम बम सपने में आता है.
गृह मंत्री अमित शाह ने भी बिहार के काराकाट में 26 मई को एक चुनावी सभा में कहा, ''कांग्रेस पाकिस्तान के एटम बम से डरती है. हम मोदी के कार्यकर्ता हैं, हम किसी से नहीं डरते हैं.''
दरअसल मणिशंकर अय्यर का एक इंटरव्यू बीते दिनों वायरल रहा था. इस इंटरव्यू में अय्यर पाकिस्तान के पास एटम बम होने की बात कहते सुने जा सकते हैं.
अय्यर के इसी बयान पर बीजेपी नेता आक्रामक रहे थे और कांग्रेस को घेरा था.
हाल ही में एक इंटरव्यू में पीएम मोदी ने पाकिस्तान की ताक़त पर पूछे सवाल का जवाब दिया था, ''ऐसा है वो ताक़त मैं लाहौर जाकर ख़ुद चेक करके आया हूँ. बिना कोई सुरक्षा जांच के मैं सीधा चला गया था. वहां पर एक रिपोर्टर रिपोर्ट कर रहा था कि हाय अल्लाह तौबा... ये बिना वीज़ा कैसे आ गए. अरे वो तो मेरा ही देश था यार किसी ज़माने में.''
मोदी ने इसी इंटरव्यू में कहा था- ''पाकिस्तान के लोग परेशान हैं, मैं जानता हूं. उनकी परेशानी का कारण भी मैं हूं, ये भी मैं जानता हूं.''

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पाकिस्तान के नेता, पूर्व नौकरशाह क्या बोले
पीएम मोदी के इस इंटरव्यू को शेयर करते हुए फ़वाद चौधरी ने 26 मई को सोशल मीडिया पर लिखा, ''बड़े दफ़्तर में छोटा आदमी. नवाज़ शरीफ़ ने मोदी को भारत का प्रधानमंत्री मानकर सम्मान दिया था.''
10 मई को एक दूसरे इंटरव्यू में भी पीएम मोदी ने पाकिस्तान का ज़िक्र किया था.
पीएम मोदी ने कहा था, ''हमें पाकिस्तान की अप्रोच में अपना दिमाग़ नहीं खपाना चाहिए. हमें अपना लक्ष्य लेकर आगे बढ़ते रहना चाहिए. मैंने पाकिस्तान, हिंदुस्तान को चलाने के तरीकों पर 10 साल से ताला लगा दिया है. मैं वो करना ही नहीं चाहता था.''
पीएम मोदी ने कहा था- ''पाकिस्तान ने 1947 में अपना देश हम से ले लिया, अब वो करें अपना अच्छा. वो अपना दो वक़्त की रोटी खा लें, बस. हम बहुत आगे निकल चुके हैं.''
पीएम मोदी के इस इंटरव्यू को भारत में पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने शेयर किया.
अब्दुल बासित ने 11 मई को लिखा, ''इसमें पाकिस्तान का भला ही छिपा है. सब्र रखिए. भारत को पाकिस्तान की ज़्यादा ज़रूरत है. अगर मोदी दोबारा चुने जाते हैं, तो वो अपने ही बयान वापस ले लेंगे. सब्र कीजिए और देखिए.''

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पाकिस्तान का मीडिया क्या कह रहा है?
पाकिस्तान के कुछ मीडिया समूहों में भारतीय चुनावों में पाकिस्तान की चर्चा पर रिपोर्ट्स की गई हैं.
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन में काम कर चुके शोधकर्ता नोमान माजिद ने डॉन न्यूज़ के लिए एक लंबा लेख लिखा है.
इस लेख का शीर्षक है- भारत के चुनाव में मुसलमानों से जुड़े सवाल.
इस लेख में कहा गया है कि मुसलमान भारत के चुनावों के केंद्र में फिर आ गए हैं. 2019 के चुनावों में भारत से बाहर के दुश्मन पर चुनावी अभियान केंद्रित था.
लेख के मुताबिक़, 2019 में बीजेपी-आरएसएस कह रहे थे कि हम घुसके मारेंगे. 2024 में वो भारतीय मुसलमानों को घुसपैठिया करार दे रहे हैं.
डॉन की रिपोर्ट में पीएम मोदी के उन बयानों का भी ज़िक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मुसलमानों को आपकी संपत्ति दे देगी.
हालांकि कांग्रेस ने ऐसा कोई वादा अपने घोषणापत्र में नहीं किया है और न ही ऐसा कोई बयान कांग्रेस के किसी नेता ने दिया है.
डॉन के लेख में लिखा गया है कि बीजेपी-आरएसएस मुसलमानों को बाहरी मानते हैं और वो शुद्धीकरण की सोच रखते हैं.
हालांकि पीएम मोदी और बीजेपी किसी धर्म के साथ पक्षपात करने के आरोपों को नकारते रहे हैं. बीजेपी का कहना है कि सरकार सबका साथ, सबका विकास की सोच के साथ काम करती है.

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मलीहा लोधी क्या कह रही हैं?
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि रह चुकीं मलीहा लोधी ने भी एक विश्लेषण लिखा है.
डॉन न्यूज़ में लिखे इस लेख में वो कहती हैं- नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने की बातें बड़े स्तर पर कही जा रही हैं. हालांकि 400 पार वाली बात सच होने पर कुछ को संदेह है.
इस लेख में मलीहा पीएम मोदी के उन बयानों का ज़िक्र करती हैं, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से भारत के ख़िलाफ़ जेहाद छेड़ने की धमकी और वोट जेहाद जैसी बातें कही थीं.
पीएम मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा था- ''पहले आतंकवादी हमले होते थे तो कांग्रेस डोजियर भेजती थी लेकिन हमने आतंकियों को घर में घुसकर मारा.''
इस लेख में मोदी के उन बयानों का ज़िक्र भी किया गया है, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान को आटे के लिए तरसने जैसी बात कही थी.
बीते दिनों पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आटे की कीमतों को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए थे.
मलीहा लोधी लिखती हैं, ''अगर मोदी सत्ता में लौटते हैं तो ये नज़रिया भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को ज़्यादा ख़राब कर सकता है. कुछ कह सकते हैं कि मोदी के पाकिस्तान पर की बयानबाज़ी चुनावी राजनीति का हिस्सा है. मगर कही गई बातों के अंजाम होते हैं.''
वो कहती हैं, ''एंटी पाकिस्तान, एंटी मुस्लिम थीम बीजेपी की सोच का हिस्सा है. ऐसे में अगली सरकार में भारत, पाकिस्तान के संबंध सुधरने की गुंजाइश कम है.''

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भारतीय चुनाव और पाकिस्तान
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून में एक लेख इसी शीर्षक से छपा है.
इस शीर्षक के साथ पीएम मोदी के उस बयान को जगह दी गई है, जिसमें उन्होंने कहा था- ''ये इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता है कि जब भारत में कांग्रेस ख़त्म हो रही है, तब पाकिस्तान रो रहा है.''
इस लेख में कहा गया है कि भारत में चुनाव शुरू होने से पहले कुछ पाकिस्तानी राजनयिकों को दोनों मुल्कों में तनाव बढ़ने की आशंका थी.
2019 चुनाव से पहले पुलवामा में हुए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करने की बात कही थी.
इस स्ट्राइक को लेकर जम्मू कश्मीर के पूर्व गवर्नर सत्यपाल मलिक के किए दावों को भी इस लेख में जगह दी गई है.
लेख के मुताबिक़, ये बीजेपी का तरीका है कि वो पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ाकर घरेलू स्तर पर फ़ायदा उठाता है.
इसी लेख में फ़वाद चौधरी के राहुल गांधी का वीडियो शेयर करते हुए तारीफ़ करने और फिर इसे बीजेपी की ओर से घेरने का भी ज़िक्र किया गया है.
इस लेख में कामरान युसूफ़ लिखते हैं, ''ये सब देखकर लगता है कि नेता किस तरह से भारत या पाकिस्तान में लोगों को बेवकूफ बनाते हैं. फ़वाद चौधरी के ट्वीट्स को पाकिस्तान में कोई पूछता भी नहीं. लेकिन सरहद पार बीजेपी उसे कांग्रेस और पाकिस्तान की मिलीभगत की तरह दिखाती है. ये ऐसा तरीका है जो पाकिस्तान में भी अपनाया जाता है.''
इस लेख में पाकिस्तान के 2019 में पीएम रहे इमरान ख़ान के बयान का ज़िक्र किया गया है.
अप्रैल 2019 में एक इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा था- "शायद अगर बीजेपी, जो कि एक दक्षिणपंथी पार्टी है, जीतती है तो कश्मीर में किसी प्रकार का समझौता हो सकता है."
ट्रिब्यून के लेख में कहा गया है, ''अगर एक-दूसरे को लेकर कही किसी बात के सहारे किसी के राष्ट्रवाद पर उंगली उठाई जा सकती है तो ये पाकिस्तान था जिसने 2019 चुनाव को जीतने में बीजेपी की मदद की थी.''
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