अवध ओझा ने बीच में इंटरव्यू रोकने पर सफ़ाई देते हुए क्या कहा?

- Author, अंशुल सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी करने वाले छात्रों को प्राइवेट कोचिंग देने वाले टीचर अवध ओझा दो दिसंबर को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए.
इस दौरान आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे. इसके बाद अवध ओझा के कई पुराने वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे.
सवाल है कि कुछ दिन पहले तक बीजेपी और कांग्रेस से टिकट मांगने वाले अवध ओझा आम आदमी पार्टी में शामिल क्यों हुए?
पुराने वीडियो में अवध ओझा, केजरीवाल की आलोचना करते दिखे थे. अब वो इस तरह के वीडियो पर क्या सोचते हैं? ऐसे सवालों का जवाब जानने के लिए बीबीसी ने उनसे ख़ास बातचीत की, जो पूरी नहीं हो पाई. लेकिन शुक्रवार सुबह ओझा ने एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए इंटरव्यू रोके जाने पर सफ़ाई दी है.

क्या हुआ इंटरव्यू के दौरान?

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गुरुवार को बीबीसी के इंटरव्यू के दौरान जब अतीत में नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तारीफ़ के बारे में उनसे सवाल पूछा गया तो आप के पदाधिकारियों ने बातचीत रोकने को कहा.
इस वजह पूरी बातचीत नहीं हो पाई.
शुक्रवार सुबह अवध ओझा ने एक्स पर विस्तार से बीबीसी के साथ हुए इंटरव्यू के बारे में लिखा है.
उन्होंने माना कि ये इंटरव्यू एक वालंटियर ने अनजाने में रोका जो कि बिल्कुल सही नहीं था.
ओझा ने एक्स पर लिखा-
"वो शिक्षक ही क्या जो सवाल का जवाब ना दे. कल बीबीसी के साथ बढ़िया इंटरव्यू हुआ. उसे अवश्य देखें. unfortunately साक्षात्कार के दौरान हमारे एक वालंटियर ने अनजान वश पत्रकार महोदय को रोक दिया जो कि बिल्कुल सही नहीं था."
"लोग कह रहे उसे दंड दो, बर्खास्त करो. उसे दंड देना उचित नहीं है क्योंकि भाववश गलती हो गई. बाक़ी मैं किसी भी प्रश्न के लिए हमेशा तैयार हूँ. शिक्षक हूँ, प्रश्नों से ही मुझे ऊर्जा मिलती है और यह मत भूलना, हमेशा दोस्ती बनी रहे."
अवध ओझा आम आदमी पार्टी से ही क्यों जुड़े?

लगभग 9 मिनट तक चले इस इंटरव्यू में पहला सवाल था कि अवध ओझा यूपीएससी के छात्रों को कोचिंग देते थे, फिर उनकी गाड़ी राजनीति की पाठशाला की तरफ़ क्यों मुड़ गई?
इस सवाल के जवाब में अवध ओझा कहते हैं, "हर व्यक्ति के जीवन में एक फेज़ आता है. जैसे- फुटबॉल या क्रिकेट में कई बड़े खिलाड़ी खेल करियर पूरा करने के बाद कोच बन जाते हैं."
"पिछले 25 साल से मैं कोचिंग के फ़ील्ड में हूं और मैंने छात्रों, शिक्षा की समस्या देखी है. जो बच्चे तैयारी करने आते हैं, उन्हें पता ही नहीं है कि जीवन में शिक्षा का महत्व क्या है."
"तो मुझे लगा कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करना है और सबसे ज़्यादा आप अपने उद्देश्य को तब पूरा कर सकते हैं, जब आप एक विचारधारा, एक पार्टी और सरकार में हों. यह मुख्य उद्देश्य था राजनीति में आने का."
विचारधारा के सवाल पर अवध ओझा का कहना था कि उनकी विचारधारा का सारा केंद्र शिक्षा है.
इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में अवध ओझा ने दावा किया था कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए उन्होंने बीजेपी से प्रयागराज से और कांग्रेस से अमेठी सीट से टिकट मांगा था.
उनका कहना था कि बहुजन समाज पार्टी ने उन्हें टिकट दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
फिर अवध ओझा उत्तर प्रदेश छोड़कर दिल्ली क्यों आ गए और आम आदमी पार्टी को ही क्यों चुना?
इस पर अवध ओझा कहते हैं, "कोई आदमी आपको जब सम्मान दे रहा है और शिक्षा पर काम करने के लिए बुला रहा है तो आप क्या करेंगे. आम आदमी पार्टी ने कहा कि आप हमारे सहयोगी बनिए तो हमें बड़ा अच्छा लगेगा. इसके बाद मैं आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया."
कथित शराब घोटाले पर क्या बोले?

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दिल्ली में बीते कुछ सालों में कथित शराब घोटाले को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत पार्टी से जुड़े कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.
दोनों अब अपने पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे हैं.
कथित शराब घोटाले को लेकर अवध ओझा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आलोचना करते हुए दिख रहे थे.
तब अवध ओझा ने कहा था, "अरविंद केजरीवाल की पार्टी बन गई और बोले हम सत्ता में जाकर करप्शन ठीक करेंगे. लोगों ने कहा ठीक है और केजरीवाल जी सीएम बन गए. उनके डिप्टी सीएम करप्शन के चार्ज में अंदर चले गए."
इस पर जब अवध ओझा से पूछा गया तो उनका कहना था, "आपने मेरा पूरा वीडियो नहीं देखा. जब उस पत्रकार ने मुझसे पूछा कि ऐसा-ऐसा हुआ. तो मैंने कहा कि आरोप तो सिद्ध नहीं हुए हैं."
"जनता देख रही है और आप की हैट्रिक होने जा रही है. लोग कह रहे हैं कि दिल्ली तो हम केजरीवाल को ही देंगे."
पूरा नहीं हो पाया इंटरव्यू

अरविंद केजरीवाल एक दशक से पहले तक कहते थे कि अगर नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो उन्हें पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
हालांकि, अपनी गिरफ़्तारी के बाद भी केजरीवाल मुख्यमंत्री बने रहे और सितंबर में उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया था.
इस पर अवध ओझा कहते हैं, "आपने राम-रावण युद्ध देखा? आपने महाभारत युद्ध भी देखा होगा. दोनों में फ़र्क़ है. दोनों भगवान लड़ रहे हैं."
"एक तरफ़ भगवान राम लड़ रहे हैं और एक तरफ़ भगवान कृष्ण लड़ रहे हैं. भगवान कृष्ण सुदामा को गले लगा ले रहे हैं, लेकिन शिखंडी को खड़ा करवा दे रहे हैं."
"केजरीवाल जी श्रीकृष्ण हैं. जो भी व्यक्ति सिर्फ़ सिद्धांत पर चलेगा और व्यावहारिक नहीं होगा, फिर उसके लिए समस्याएं खड़ी हो जाएंगी."
आगे अवध ओझा कहते हैं, "मैंने दो दिन पहले कहा था कि आरोप तो नेल्सन मंडेला पर भी लगे. राजद्रोह के चार्ज लगाए गए. उसी नेल्सन मंडेला को यूरोपीय समुदाय ने नोबेल पुरस्कार दिया."
लेकिन क्या नेल्सन मंडेला पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे? इस पर ओझा ने कहा कि आरोप तो लगे.
अवध ओझा के कुछ ऐसे वीडियो भी हैं, जिनमें वो नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तारीफ़ करते हुए दिखाई दे रहे हैं. जब उनसे मैंने पूछा कि क्या अब अवध ओझा आम आदमी पार्टी में रहते हुए भी दोनों नेताओं की तारीफ़ कर पाएंगे?
इस पर उन्होंने कहा, "आज के लोग तारीफ़ करने को इतना बुरा क्यों मानते हैं? तारीफ़ एक पॉजिटिव माइंडसेट का काम है. लोकतंत्र और राजनीति में किसी की किसी से दुश्मनी थोड़ी है."
"ब्रायन लारा ने जब 400 रन बनाए तो सचिन ने तारीफ़ की. तारीफ़ करना कोई बुरी चीज़ है क्या? बहुत लोग हैं. शेन वॉर्न..."
इसके बाद इंटरव्यू को आम आदमी पार्टी के पदाधिकारियों की ओर से बीच में रुकवा दिया गया.
मैंने इस बारे में अवध ओझा से पूछा तो उनका कहना था, "ये लोग डिसाइड करेंगे कि पार्टी लाइन क्या होगी."
हालांकि शुक्रवार सुबह अवध ओझा ने एक्स पर माना है कि 'एक वालंटियर ने अनजाने में ऐसा किया जो बिल्कुल सही नहीं था.'
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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