दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के जहाज़ों के बीच 'चूहे-बिल्ली का खेल': आँखों देखा हाल

- Author, जोनाथन हेड
- पदनाम, दक्षिण पूर्वी एशिया संवाददाता
हम बड़े चीनी समुद्री जहाज़ों को नज़दीक आते देख पा रहे थे. उस जहाज़ पर सवार क्रू के चेहरे साफ़ दिख रहे थे. उनमें से दो लोग हमारा वीडियो बना रहे थे. हम भी वही कर रहे थे.
बीबीसी की टीम मंगलवार को फ़िलीपींस के कोस्ट गार्ड के जहाज़ बीआरपी बागाके पर सवार थी. उसी समय एक चीनी जहाज़ हम से रूबरू हुआ.
फ़िलीपींस के जहाज़ के क्रू सदस्यों ने दोनों जहाज़ों के टकराने का अंदेशा देखते हुए एक पीला बैरियर भी पानी में लटका दिया था.
लेकिन तभी चीनी जहाज़ पलटा और कोस्ट गार्ड के जहाज़ के सामने आ गया. इस वजह से फ़िलीपींस के जहाज़ के धीमा होना पड़ा. दोनों जहाज़ एक दूसरे से महज़ पांच मीटर की दूरी पर थे.
फ़िलीपींस के जहाज़ पर सवार बीबीसी की टीम स्कारबोरो पर जा रही थी जो एक मूंगे का द्वीप है. ये जगह फ़िलीपींस के तट से 220 किलोमीटर दूर है. चीन दावा करता है कि ये उसका द्वीप है.
चीन के जहाज़ हमारे जहाज़ को रोकने के लिए दृढ़ संकल्प लग रहे थे. और वहां कोई अकेला चीनी जहाज़ नहीं था बल्कि एक वक्त उनकी संख्या दस हो चुकी थी. इनमें चीनी कोस्ट गार्ड और नेवी के जहाज़ तक शामिल थे.
जापान में निर्मित फ़िलीपींस के जहाज़ के कैप्टन ने चीनी जहाज़ों को पीछे छोड़ा और तेज़ गति से स्कारबोरो द्वीप की ओर निकल पड़ा. ये जहाज़ द्वीप के 600 मीटर दूरी तक पहुँच गया था.
'साउथ चाइना सी में चूहे-बिल्ली का खेल'

फ़िलीपींस के जहाज़ के कैप्टन ने चीनी जहाज़ को मात देने के लिए अपनी शिप की रफ़्तार का सहारा लिया. एक वक़्त में फ़िलीपींस के जहाज़ और चीनी जहाज़ों के बीच महज 600 मीटर की दूरी रह गई थी. कप्तान ने बताया कि चीनी जहाज़ इससे पहले कभी उनके जहाज़ों के इतने नज़दीक नहीं आए थे.
लेकिन इसके आगे चीन ने पानी के भीतर बैरियर गाड़ रखे थे. और उनके जहाज़ हमारे शिप के ठीक पीछे थे. फ़िलीपींस कोस्ट के जहाज़ के अगल-बगल में एक-एक चीनी जहाज़ था.
और फिर चीनी जहाज़ से पाइपों के ज़रिए भारी मात्रा पानी की बौछार शुरू कर दी गई.
हम तुरंत अंदर भागे. अंदर भी हम पानी के तेज़ आवाज़ सुन पा रहे थे. पानी के आवेग ने जहाज़ की रेलिंग को तोड़-मरोड़ कर रख दिया था.
हमारे बेड़े में फ़िलीपींस का एक और जहाज़ था जो मछुआरों के लिए सामान ले जा रहा था. उसे भारी नुकसान हुआ.
साउथ चाइना सी में चूहे-बिल्ली का ये खेल कोई बात नहीं है. लेकिन फ़िलीपींस में बोंगबोंग मार्कोस के विवादित समुद्री इलाके में चीन को चुनौती देने के आदेश के बाद ऐसी मुठभेड़ें बहुत जल्दी-जल्दी होने लगी हैं.

फ़िलीपींस कोस्ट गार्ड के प्रवक्ता जय टेरियेला कहते हैं, "चीन की सरकार हमेशा कहती रही है कि वेस्ट फ़िलीपींस सी में एक लक्ष्मण रेखा है."
फ़िलीपींस साउथ चाइना सी को वेस्ट फ़िलीपींस सी ही बोलता है.
वे कहते हैं, "चीन का कहना है कि हम उस टापू से 12 नॉटिकल मील की सीमा पार नहीं कर सकते. लेकिन ये साबित करने के लिए की चीन अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान नहीं करता, हम ये लक्ष्मण रेखा लांघ चुके हैं."
बीबीसी की टीम जिस जहाज़ पर थी उसका आधिकारिक मकसद मछुआरों को ईंधन और भोजन पहुँचाना था. ये मछुआरे दशकों से स्कारबोरो में मछलियां पकड़ते रहे हैं लेकिन वे साल 2012 के चीनी कोस्ट गार्ड द्वारा तंग किए जाने की शिकायतें करते रहे हैं.
इस मिशन का मक़सद ये भी था कि फ़िलीपींस इस मूंगे से बने टापू पर अपना दावा बरक़रार रखे. ये इलाका फ़िलीपींस के इक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन के अंतर्गत आता है और चीन के बजाय ये फ़िलीपींस के अधिक नज़दीक है.
साल 2016 में एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा था कि साउथ चाइना सी के इन इलाक़ों पर चीन का दावा अवैध है. लेकिन चीन का कहना है कि वो इस आदेश का स्वीकार नहीं करता है.
'हम दीया हैं और वे तूफ़ान'

स्कारबोरो द्वीप के चारों और मौजूद चीनी जहाज़ों की संख्या बहुत डराने वाली थी. ये जहाज़ हर दिशा में दिख रहे थे. फ़िलीपींस जितने भी जहाज़ ले आए, चीन के पास उससे कहीं अधिक समुद्री जहाज़ दिख रहे थे.
कोमोडोर टेरियाला कहते हैं, "हम दीया हैं और वे तूफ़ान."
ये कहना मुश्किल है कि फ़िलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस के नई नीति क्या गुल खिलाएगी लेकिन उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का पूरा सहयोग मिल रहा है.
चीन के जहाज़ अपनी कारगुजारियों में काफ़ी दक्ष दिख रहे थे. ऐसा लग रहा है कि वो आराम से फ़िलीपींस के जहाज़ों को स्कारबोरो पर आने से अनिश्चितकाल तक रोक सकते हैं.
फ़िलीपींस के जहाज़ के साथ मुठभेड़ के बाद चीन ने एक बयान जारी कर कहा है कि उसने फ़िलीपींस के जहाज़ों को अपने इलाके में प्रवेश से सफलतापूर्वक रोक दिया है.
चीन की लक्ष्मण रेखा
ये सही है कि बीआरपी बागाके (जिस जहाज़ पर हम सवार थे) पानी की बौछार के कारण स्कारबोरो से पीछे हट गया था.
हमारे साथ फ़िलीपींस का ही एक दूसरा जहाज़ भी जिस मछुआरों के लिए सामान और इलेक्ट्रोनिक उपकरण थे. ये जहाज़ हमसे 20 किलोमीटर दूर था और उस पर अब भी चीनी जहाज़ जमकर पानी की बौछारे छोड़ रहे थे.
और इसलिए हम उसकी मदद से पीछे घूमे.
लेकिन फ़िलीपींस के दोनों ही जहाज़ चीन की लक्ष्मण रेखा से दूर तो थे पर इतने दूर भी नहीं थे.
सुबह मछुआरों की दर्जनों नौकाएं हमारे जहाज़ों के आस-पास जमा हो गई थीं. इन्हीं के लिए सारा सामान यहां लाया गया था. थोड़ी ही दूरी पर चीनी कोस्ट गार्ड इस पूरी घटना पर पैनी नज़र रखे हुए था.
लेकिन फ़िलीपींस का कोस्ट गार्ड चीन की धमकियों के बावजूद अपने मिशन का सफल बता रहा है.
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