ताइवान ने किससे मुक़ाबले के लिए बनाई है स्वदेशी पनडुब्बी 'हाईकुन'

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- Author, टेसा वॉन्ग
- पदनाम, एशिया डिजिटल संवाददाता, बीबीसी न्यूज़
ताइवान ने स्वदेशी पनडुब्बी विकसित की है. चीन के साथ जारी तनाव के बीच किसी संभावित हमले से सुरक्षा के लिए उसने यह पनडुब्बी बनाई है.
ताइवान ने गुरुवार को बंदरगाह शहर काऊशुंग में इस पनडुब्बी का अनावरण किया. इस समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने की.
अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि चीन अगले कुछ सालों में सैन्य हमला करने में सक्षम हो सकता है.
ताइवान एक स्वशासित द्वीप है, जिसे चीन एक विद्रोही प्रांत मानता है. चीन का कहना है कि वो एक न एक दिन ताइवान को फिर से हासिल कर लेगा.
हालांकि कई पर्यवेक्षकों का मानना है कि चीन तत्काल ताइवान पर हमला नहीं करेगा.
वहीं चीन भी कहता रहा है कि वो शांतिपूर्ण तरीक़े से ताइवान को चीन की मुख्यभूमि में "मिलाना" चाहता है. साथ ही चीन ने ताइवान को औपचारिक रूप से स्वतंत्रता की घोषणा करने और किसी विदेशी समर्थन लेने के ख़िलाफ़ चेतावनी भी दी है.
चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में अपने सैन्य अभ्यासों के ज़रिए उस पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है. इसमें इसी महीने किए गए कई युद्धाभ्यास भी शामिल हैं.

ताइवान की राष्ट्रपति ने क्या कहा है
ताइवान के झंडे के प्रतीक में लिपटी इस विशाल पनडुब्बी के सामने खड़ी राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने कहा, "इतिहास इस दिन को हमेशा याद रखेगा."
उन्होंने कहा "घरेलू स्तर पर पनडुब्बी बनाने के काम को पहले असंभव माना जाता था... लेकिन हमने यह कर दिखाया है."
ताइवान के नेताओं के लिए ताइवान में ही पनडुब्बियां बनाना अहम प्राथमिकता रही है, लेकिन साई इंग-वेन के कार्यकाल में इस परियोजना में तेज़ी आई. उन्होंने अपने कार्यकाल में सैन्य खर्च को क़रीब दोगुना कर दिया है.
इस पनडुब्बी का नाम 'हाईकुन' रखा गया है. यह नाम एक विशाल मछली से लिया गया है, जो उड़ भी सकती थी. इस नाम का उल्लेख प्राचीन चीनी साहित्य में भी मिलता है.
इस पनडुब्बी के निर्माण पर 1.54 अरब डॉलर की लागत आई है. बिजली और डीज़ल से चलने वाली इस पनडुब्बी के कुछ परीक्षण होने अभी बाक़ी हैं. सैन्य अधिकारियों के मुताबिक़ इसे 2024 के अंत तक नौसेना में शामिल किया जाएगा.
कितनी पनडुब्बियां बनाना चाहता है ताइवान

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हाईकुन के अलावा ताइवान एक और पनडुब्बी के निर्माण का काम कर रहा है. ताइवान की योजना इस तरह की क़रीब 10 पनडुब्बियों का बेड़ा तैयार करने की है. इसमें नीदरलैंड में बनी दो नावें भी शामिल हैं, जिन पर मिसाइलें तैनात किए जाने की योजना है.
पनडुब्बी निर्माण परियोजना के प्रमुख एडमिरल हुआंग शू कुआंग ने पिछले हफ्ते पत्रकारों से बात की थी. उनका कहना था कि इसका लक्ष्य हमले के लिए ताइवान की घेराबंदी या नौसैनिक नाकेबंदी की चीनी की किसी भी कोशिश को रोकना था.
उन्होंने कहा था कि अगर ज़रूरत पड़ी तो इससे ताइवान की सहायता के लिए अमेरिका और जापान की सेनाओं के आने तक समय भी मिलेगा.
वहीं गुरुवार को पत्रकारों ने ताइवान की पनडुब्बी को लेकर चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता से सवाल किया था. उनका कहना था कि प्रशांत क्षेत्र में उनकी सेना की गतिविधियों को रोकने की कोशिश करना "मूर्खतापूर्ण" है और "बकवास" है.
उन्होंने कहा था, "ताइवान के सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी द्वारा खरीदे या बनाए गए किसी भी हथियार के बल पर चीन की मुख्यभूमि के साथ उसके फिर से मिलने को रोका नहीं जा सकता."
चीन का आकलन क्या कहता है?

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इसी हफ्ते चीन के सरकारी मीडिया संस्थान 'ग्लोबल टाइम्स' में प्रकाशित एक लेख में कहा गया था कि ताइवान दिन में सपने देख रहा है. लेख में कहा गया था कि यह योजना केवल एक भ्रम है. इसमें कहा गया था कि चीनी सेना ने पहले ही द्वीप के चारो तरफ एक बहुआयामी पनडुब्बी रोधी नेटवर्क का निर्माण कर लिया है.
वहीं पर्यवेक्षक इस बात पर सहमत हैं कि नई पनडुब्बियां ताइवान की सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकती हैं.
हालांकि ताइवान का 10-पनडुब्बियों वाला बेड़ा चीन की तुलना में कमज़ोर होगा. कहा जाता है कि चीन के बेड़े में इस समय परमाणु हमले में सक्षम पनडुब्बियों सहित 60 से अधिक जहाज शामिल है और अभी वो और भी पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है.
लेकिन ताइवान ने लंबे समय से एक विषम युद्ध रणनीति अपनाई है, जिसका लक्ष्य एक बड़े और अपने से बड़े दुश्मन का सामना करने के लिए अधिक चुस्त-दुरुस्त रक्षा बल तैयार करना है.
कितनी शक्तिशाली है ताइवान की पनडुब्बी?
विलियम चुंग ताइवान के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल डिफेंस एंड सिक्योरिटी रिसर्च में सैन्य शोधकर्ता हैं. वो कहते हैं, "ताइवान की ये पनडुब्बियां अपनी चालबाज़ी, घातक आक्रमण क्षमता और आश्चर्यजनक क्षमताओं के साथ गुरिल्ला युद्ध में सझम हैं. ये पनडुब्बियां चीन की शक्तिशाली नौसेना के ख़िलाफ़ पहल करने में ताइवान की अपेक्षाकृत छोटी नौसेना की सहायता कर सकती हैं."
उनका कहना है कि ये ताइवान, फिलिपीन्स और जापान समेत इस इलाक़े में पड़ने वाले अन्य द्वीपों के नेटवर्क के समुद्री रास्तों और जलडमरूमध्य की निगरानी करने में मदद कर सकता है.
उन्होंने कहा कि अभी भी पनडुब्बी रोधी युद्ध चीनी नौसेना का सबसे कमज़ोर पक्ष है. इसका फायदा उठाने ताइवान के पास यही मौक़ा है.
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के पूर्व अधिकारी ड्रू थॉम्पसन आजकल सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के विजिटिंग सीनियर रिसर्च फेलो हैं. वो कहते हैं चीन-ताइवान नौसैनिक संघर्ष का केंद्र शायद इस द्वीप के पूर्वी तट का हिस्सा नहीं होगा जहां समंदर गहरा है और जहां पनडुब्बियां सबसे प्रभावी हो सकती हैं. इसकी जगह युद्ध का मुख्य क्षेत्र मुख्यभूमि चीन के सामने पश्चिमी तट के उथले पानी में होगा.
वो कहते हैं कि "पनडुब्बी जवाबी आक्रमण की भूमिका के लिए नहीं है... चीनी सैन्य अभियानों को जटिल बनाने में इस बढ़ी हुई क्षमता काम आ सकती है, लेकिन यह निर्णायक नहीं है."
यह पनडुब्बिया असल में कितनी प्रभावी होंगी, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ताइवान उन्हें कैसे तैनात करता है.
ची चुंग ताइवानी थिंक टैंक नेशनल पॉलिसी फाउंडेशन में रक्षा शोधकर्ता हैं. वो कहते है कि डराने-धमकाने के अलावा इन पनडुब्बियों का इस्तेमाल चीनी जहाजों पर हमले में भी किया जा सकता है. इसके अलावा इनको चीनी बंदरगाहों में बम बिछाने, तेल आपूर्ति बाधित करने और चीनी समुद्रतट पर सुविधाओं को नष्ट करने में भी किया जा सकता है.
वो कहते हैं कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि ताइवान पनडुब्बी का डिज़ाइन बनाने और उसका निर्माण करने में कामयाब रहा है.
पुनडुब्बी बनाने के लिए ताइवान ने किन देशों से मांगी थी मदद

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हाईकुन में अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन की युद्ध प्रणाली का इस्तेमाल हुआ है. इसमें अमेरिका में बनी टॉरपिडो तैनात होंगी.
अमेरिका ताइवान का मुख्य सहयोगी है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ब्रिटेन समेत कम से कम छह अन्य देशों ने इसके उपकरणों, तकनीकी और प्रतिभा की आपूर्ति में ताइवान की मदद की है.
एडमिरल हुआंग ने निक्केई एशिया को बताया कि उन्होंने मदद के लिए व्यक्तिगत रूप से अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत में सैन्य अधिकारियों से संपर्क किया था. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उनकी मदद के लिए आख़िरकार कौन-कौन देश सहमत हुए.
यह भी एक तथ्य है कि कई देश और कंपनियां ताइवान के प्रमुख रक्षा कार्यक्रम में "उपकरण सप्लाई करने से नहीं डरती हैं". ड्रू थॉम्पसन कहते हैं कि यह भू-राजनीति में आए महत्वपूर्ण बदलाव का सूचक है.
वहीं ची चुंग कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कुछ सदस्य ये मानते हैं कि "ये चीन पर भरोसा न करने और उससे नाराज़ होने" का सूचक है और इससे चीन को परेशानी होनी चाहिए.
ताइवान और चीन की तैयारी

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ताइवान के घरेलू पनडुब्बी के अनावरण का ये समारोह चीन की ओर से सैन्य अभ्यास की घोषणा के एक दिन बाद हुआ है. चीन का कहना है कि उसका सैन्य अभ्यास ताइवान की स्वतंत्रता की मांग करने वाले अलगाववादी ताकतों के अहंकार का दृढ़ता से मुकाबला करने के लिए है.
उसने हाल के हफ्तों में ताइवान जलडमरूमध्य में एक बार फिर अपने युद्धपोतों की उपस्थिति बढ़ा दी है. साथ ही ताइवान का कहना है कि चीन के सैन्य विमानों ने द्वीप के चारों ओर के ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ भी की है.
अमेरिकी सेना और ख़ुफ़िया अधिकारियों ने चीन के संभावित हमले की अलग-अलग समयसीमा दी है.
हाल ही में सामने आई एक तारीख 2027 की है. माना जा रहा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपनी सेना को 2027 तक हमला करने में सक्षम होने का आदेश दिया है.
हालांकि सीआईए के निदेशक विलियम बर्न्स ने यह भी कहा है कि इसका मतलब यह नहीं है कि चीनी राष्ट्रपति तब आक्रमण करने का फ़ैसला करेंगे क्योंकि उन्हें संदेह है कि चीन सफल होगा या नहीं.
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