पीएम मोदी के चीन पर दिए बयान के क्या हैं मायने?- प्रेस रिव्यू

पीएम मोदी

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चीन से सीमा विवाद सुलझाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के मायने समझाते हुए द हिंदू अखबार ने एक रिपोर्ट की है.

अखबार का कहना है कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव के बारे में पीएम मोदी ने जो कुछ कहा है, वह बहुत महत्वपूर्ण है.

चीन के विदेश मंत्रालय ने भी गुरुवार को पीएम मोदी की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत के साथ काम करने की बात कही है.

हाल ही में अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू दिया था.

इस इंटरव्यू में उन्होंने चीन के साथ संबंधों और एलएसी पर अप्रैल 2020 से चल रहे गतिरोध पर अपनी चुप्पी तोड़ी थी.

उन्होंने कहा था, “मेरा मानना ​​है कि अपनी सीमाओं पर लंबे समय से चल रही स्थिति को हमें तुरंत सुलझाने की ज़रूरत है ताकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय चर्चा में मुश्किल स्थिति को पीछे छोड़ा जा सके.”

उन्होंने कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर होने वाली बातचीत का ज़िक्र किया.

पीएम मोदी ने कहा, "दोनों मुल्कों के बीच स्थायी और शांतिपूर्ण रिश्ते ना केवल हम दोनों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं. मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक द्विपक्षीय बातचीत से हम सीमा पर शांति बहाल करने में सक्षम होंगे."

गुरुवार को चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि उन्होंने पीएम मोदी के बयान को सुना है.

निंग ने कहा कि मजबूत और स्थिर संबंध दोनों देशों के हित में हैं और इससे क्षेत्र, उससे बाहर भी विकास में मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि सीमा का सवाल ही सिर्फ दोनों देशों के बीच संबंधों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है.

साल 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे.

पीएम की टिप्पणी में छिपा संदेश क्या?

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अखबार के मुताबिक़, 2018 से 2021 के बीच डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर रहे पंकज सरन ने पीएम मोदी की इन टिप्पणियों को बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण बताया है.

पंकज सरन अब नेटस्ट्रैट नामक थिंक टैंक के संयोजक हैं. वो कहते हैं कि पीएम की टिप्पणियाँ "अत्यधिक महत्वपूर्ण" थीं.

उन्होंने कहा, “यह चीन, अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है.”

अखबार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक तरह से यह संकेत दिया है कि अगर वे लोकसभा चुनाव में फिर से जीत कर आते हैं, तो वे प्राथमिकता से चीन के साथ मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेंगे.

अखबार के मुताबिक़, उन्होंने दूसरे ग्लोबल प्लेयर्स के साथ चीन के संबंधों में बदलाव की तरफ भी इशारा किया है, जिसमें अमेरिका और यूरोप के साथ नए सिरे से बातचीत और रूस के साथ करीबी जुड़ाव भी शामिल है.

ख़बर के मुताबिक, अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाल ही में चीन का दौरा किया था. इसके अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग फ्रांस की यात्रा करने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने 2019 में यूरोप की यात्रा की थी.

पीएम मोदी अब तक चीन का सीधे तौर पर जिक्र करने और पिछले चार सालों में संबंधों की स्थिति के बारे में सार्वजनिक तौर पर या संसद में कोई टिप्पणी करने से बचते रहे हैं.

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर

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भारतीयों मंत्रियों के निशाने पर चीन

इसके अलावा पीएम मोदी का बयान एक ऐसा समय में आया है, जब विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन को लेकर कई बार सख्त बयान दे चुके हैं.

जयशंकर ने चीन पर बार-बार लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर अपने सैनिकों को जमा कर भारत के साथ अपने समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.

अखबार के मुताबिक़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने के लिए चीन की आलोचना की थी और कहा था कि ऐसी स्थिति में भारत भी इसी तरह पलटवार करेगा.

दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों के लिए रक्षा मंत्री ने चीन को जिम्मेदार बताया था.

एक सार्वजनिक रैली में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि भारत की सतर्कता के कारण चीन के सैनिक भारत की एक इंच जमीन भी नहीं ले पाएंगे.

चीन के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी

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'बयान में सावधानी'

अखबार के मुताबिक़, पूर्व विदेश सचिव और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के चेयरपर्सन श्याम सरन ने कहा कि गलवान घटना के बाद से पीएम मोदी की टिप्पणियों में सतर्कता और सावधानी झलकती है.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की टिप्पणियां चीन के लिए एक संबंधों को जोड़ने और बहाल करने की तैयारी का एक संकेत हो सकती हैं.

द हिंदू अखबार से बात करते हुए चीन में भारत के पूर्व राजदूत अशोक कंठ ने कहा कि यह भी महत्वपूर्ण है कि पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार सीमा पर स्थिति की बहाली पर निर्भर करेंगे.

उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी वही पुरानी स्थिति को दोहराया है, जो उसने 2020 में अपनाई थी.

वहीं अन्य राजनयिकों ने कहा कि पीएम मोदी की टिप्पणियां भारत के रुख में नरमी को दर्शाती हैं, जिसमें क्वाड में दिए पीएम मोदी के बयान भी शामिल हैं.

पीएम मोदी ने न्यूजवीक पत्रिका को कहा, “अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और चीन- ये सभी देश कई समूहों के सदस्य हैं. हम अलग-अलग समूहों में अलग-अलग तरह से मौजूद हैं. क्वाड का उद्देश्य किसी देश के खिलाफ नहीं है. एससीओ, ब्रिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय समूहों की तरह ही क्वाड भी एक जैसे विचारधारा वाले देशों का एक समूह है, जो मिल जुलकर सकारात्मक एजेंडे पर काम कर रहा है.”

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता निंग ने यह भी कहा कि चीन और भारत ने लगातार बातचीत को बनाए रखा है और सीमा की स्थिति को को लेकर सकारात्मक बढ़त हासिल की है.

एप्पल की चेतावनी

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एप्पल ने अपने यूजर्स को चेतावनी दी

एप्पल ने 91 अन्य देशों के साथ-साथ भारत में अपने कुछ यूजर्स को चेतावनी मैसेज भेजा है.

इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस ने अपने पहले पन्ने पर जगह दी है.

कंपनी का कहना है कि उनके यूजर्स किसी ''मर्सिनरी स्पाइवेयर हमले" का निशाना बन सकते हैं, जिसमें इसराइल के एनएसओ ग्रुप का विवादास्पद पेगासस भी शामिल है.

हाल में कंपनी को पता चला कि उनके कई यूजर्स को स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर टारगेट किया जा रहा है.

अखबार के मुताबिक़, भारत में यह चेतावनी भरा मैसेज एप्पल ने 11 अप्रैल, गुरुवार को करीब 12.30 (आईएसटी) बजे भेजा है.

हालांकि कंपनी ने ये नहीं बताया है कि वो देश कौन से हैं जहां इसका ख़तरा है, लेकिन रिपोर्टों के हवाले से माना जा रहा है कि इन देशों में भारत भी एक है.

पिछले साल अक्टूबर में भारत के कई नेताओं और पत्रकारों ने कहा था कि एप्पल ने उन्हें चेतावनी दी थी कि उन्हें राज्य प्रायोजित हमलावरों की तरफ़ से निशाना बनाया जा रहा है.

सरकार ने ऐसे किसी भी मामले में संलिप्तता से इनकार किया है

ट्रूडो ने उठाया निज्जर की हत्या का मुद्दा

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ट्रूडो ने फिर उठाया निज्जर की हत्या का मुद्दा

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक बार फिर खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मामला उठाया है.

इस खबर को जनसत्ता अखबार ने अपने पहले पन्ने पर जगह दी है.

अखबार के मुताबिक़, पीएम जस्टिन ट्रूडो ने पिछले साल अपने देश में खालिस्तानी सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि उनकी सरकार कनाडा के सभी लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए खड़ी है.

ट्रडो ने कनाडा की चुनावी प्रक्रिया में विदेशी हस्तक्षेप के संबंध में की जा रही जांच में बुधवार को एक समिति के समक्ष गवाही दी.

उन्होंने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया और कहा कि कनाडा की पिछली सरकार की भारत सरकार से निकटता थी.

साल 2019 के चुनाव के तीन महीने बाद मिली एक खुफिया रिपोर्ट के बारे में भी ट्रूडो ने बात की है.

अखबार के मुताबिक उन्होंने कहा, “हम कनाडा के लोगों के लिए हमेशा खड़े हैं, जिसमें निज्जर की हत्या का बेहद गंभीर मामला भी शामिल है. मैंने संसद में यह मुद्दा उठाया था.”

“यह कनाडा के लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमारी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.”

पिछले साल 18 जून को कनाडा के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई थी.

(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)

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