क्या ग्लोबल बिज़नेस हब हॉन्गकॉन्ग का अंत नजदीक है?

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    • Author, जॉयस ली
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

इन दिनों हॉन्गकॉन्ग में रहने वाले लोग अपने शहर के गिरते रुतबे का मजाक उड़ा रहे हैं.

वे कह रहे हैं एक दौर में वैश्विक पूंजी के लिए सबसे मुफीद जगह माना जाने वाला उनका शहर यूनेस्को की नयी वर्ल्ड हेरिटेज़ साइट बन गया है.

इसकी वजह एक कड़ा सुरक्षा कानून है जिसे आर्टिकल 23 का नाम दिया गया है. ये कानून इस हफ़्ते के अंत में लागू हो गया है. इसने हॉन्गकॉन्ग को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं.

अधिकारियों का कहना है कि ये क़ानून शहर को सुरक्षा के साथ-साथ स्थिरता प्रदान करेगा. जबकि आलोचकों का कहना है कि ये असहमतियों को दबाने का काम करेगा.

क्योंकि इसके लागू होने के बाद मुकदमे बंद कमरों में चलेंगे...बगावत और देशद्रोह जैसे कई अपराधों के लिए मौत की सज़ा मिल सकती है.

ये कानून ऐसे वक़्त लाया गया है जब हॉन्गकॉन्ग पर चीन की पकड़ मजबूत होती जा रही है. साथ ही अमेरिका और चीन के बीच तनाव भी बढ़ रहा है.

इन हालात की वजह से चीन से निवेश बाहर होता जा रहा है. रियल एस्टेट सर्वेयर चान (बदला हुआ नाम) कहते हैं कि अब उद्योगपति ‘चीन को छोड़ कर कहीं भी’ निवेश करने के लिए तैयार हैं.

वो कहते हैं, ''हॉन्गकॉन्ग को चीन से अलग करके देखा जाता था और निवेशक यहां निवेश करना चाहते थे लेकिन अब नहीं.''

आर्टिकल 23 और उसके बाद

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इमेज कैप्शन, 2020 में हॉन्गकॉन्ग में लागू की गई चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करते लोग
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चीन की हालिया नीतियों में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी ताकतों से देश के ख़तरों की आशंका को काफ़ी अहमियत दी जा रही है.

इससे हॉन्गकॉन्ग में विदेशी पूंजी और कारोबारों के लिए जोखिम बढ़ गए हैं.

चीन के एक सरकारी बैंक में काम करने वाले मिस्टर से कहते हैं, "पिछले दो साल के दौरान यहां कारोबार का बुरा हाल रहा है.’’

से के मुताबिक़, उनकी कंपनी ने जून में अपने दस फीसदी कर्मचारियों को हटा दिया. पिछले सप्ताह पांच फीसदी कर्मचारी हटा दिए गए. कोई नहीं जानता बचे हुए कर्मचारियों की बारी कब आ जाएगी.

जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसिडेंट जोनेस हैक का कहना है कि यहां के बिज़नेस पर आर्टिकल 23 कितना असर डालेगा इसका आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी.

लेकिन इसके मजमून को देखने और इसके उल्लंघन के लिए तय की गई सज़ा पर गौर करें तो लगता है कि इससे कारोबार करना पेचीदा हो जाएगा.

उद्योगपतियों को लगता है कि उनके बिज़नेस की लागत काफ़ी बढ़ जाएगी.

हॉन्गकॉन्ग सरकार ने बीबीसी को एक बयान में कहा कि आर्टिकल 23 शहर को स्थिरता से समृद्धि की ओर ले जाएगा और इससे ‘सामान्य’ बिजनेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

इसने कहा है कि सिर्फ हॉन्गकॉन्ग को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता. दुनिया के तमाम देशों में उनके सुरक्षा कानून हैं.

हॉन्गकॉन्ग का आर्टिकल 23 का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा नीति तक है. राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को चीन ने 2020 में लागू किया था. आर्टिकल 23 ऐसे वक्त पर आया है जब शहर का प्रशासन दुनिया को ये भरोसा देने में जुटा है कि ये अभी भी एक ताकतवर वित्तीय केंद्र है.

हॉन्गकॉन्ग के जनरल चैंबर ऑफ कॉमर्स की दलील है कि ये आर्टिकल हॉन्गकॉन्ग को स्थानीय और विदेशी कारोबारों और यहां काम कर रहे पेशेवरों के लिए सुरक्षित जगह बनाएगा.

वहीं, हॉन्गकॉन्ग के चीफ़ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने उन तर्कों को खारिज किया है कि शहर का प्रशासन सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में सोचता है.

उन्होंने कहा कि जो लोग आर्टिकल 23 को लेकर चिंता जता रहे हैं वो एक तरह से ‘नरम प्रतिरोध’ का रवैया अपना रहे हैं.

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हॉन्गकॉन्ग में 2019 को लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों और जीरो-कोविड पॉलिसी को लेकर चीन की सख्ती के बाद अर्थव्यवस्था में गिरावट का दौर है.

कारोबारी जगहों और रिटेल दुकानों के किराये घट गए हैं. दफ्तर और दुकानों की जगहें खाली हैं. हॉन्गकॉन्ग आने वाले पर्यटकों की संख्या भी घट गई है.

पिछले साल आने वाले पर्यटकों की संख्या कोविड से पहले आने वाले पर्यटकों की संख्या की सिर्फ 60 फीसदी रह गई थी.

हॉन्गकॉन्ग की शान समझे जाने वाले हेंग-सेंग इंडेक्स की वैल्यू 2019 से लेकर अब तक 40 फीसदी से ज्यादा घट चुकी है. भारत का शेयर बाजार जनवरी में इससे आगे निकल कर दुनिया का चौथा बड़ा मार्केट बन गया.

हॉन्गकॉन्ग के मुकाबले सिंगापुर एक मजबूत वित्तीय केंद्र के तौर पर उभरा है. अंतरराष्ट्रीय बैंक हॉन्गकॉन्ग और चीन में कर्मचारियों को निकाल रहे हैं.

इन बैंकों का कहना है कि यहां ग्रोथ में गिरावट आ रही है और निवेशकों का भरोसा भी कम हो गया है.

हॉन्गकॉन्ग से पूंजी और लोगों का पलायन हो रहा है. हाल में मॉर्गन स्टेनली के एशिया हेड ने एक अख़बार के कॉलम में लिखा, 'हॉन्गकॉन्ग खत्म हो चुका है.’

दिग्गज निवेशक लाम यात-मिंग ने एक आर्थिक पत्रिका में लिखा, ''निवेशकों को अपनी जिंदगी का आनंद उठाना चाहिए. वो खुद को हॉन्गकॉग बाजार के शेयरों से दूर रखें.''

एक और पेशेवर शख्स हैक का कहना है कि हॉन्गकॉन्ग से बाहर इसके प्रति धारणा बदल गई है.

वो कहते हैं कि ये शहर अब भी मैनलैंड (चीन) से अलग दिखता है लेकिन सुरक्षा नीति पर बहुत अधिक जोर हॉन्गकॉन्ग की खासियत को मिटा सकता है.

एक देश, दो व्यवस्था

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इमेज कैप्शन, मीडिया मुगल जिमी लाई, जिन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है.

हॉन्गकॉन्ग को 1997 में चीन को सौंपे जाने के बाद से इस पूर्व ब्रिटिश उपनिवेश का प्रशासन 'एक देश, दो व्यवस्था' के तहत चलाया जा रहा था.

चीन ने वादा किया था कि हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकार सुरक्षित रहेंगे.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि चीन अपने वादे से मुकरने लगा है. वो लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को दबाने में लगा है. चीन ने 2020 में यहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा दिए.

इसके तहत पूर्व सांसदों समेत 260 लोग गिरफ़्तार कर लिए गए थे. अधिकारियों ने इस कदम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि यह ‘अराजकता से गवर्नेंस’ की ओर बदलाव का मामला है.

एक स्थानीय कानून शहर के मिनी संविधान में है और हमेशा से इसे लागू करने की योजना था. पहली कोशिश 2003 में की गई थी लेकिन ये नाकाम हो गई थी.

तब लगभग पांच लाख लोगों ने सड़कों पर निकल कर इसका विरोध किया था. लेकिन इस बार आर्टिकल 23 पेश करने के दो सप्ताह के अंदर ही पारित हो गया.

हॉन्गकॉन्ग बेपटिस्ट यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञानी केनेथ चान का कहना है कि शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ज्यादा अहमियत दे रहा है.

चीन के लिए एक मुक्त समाज के तौर पर हॉन्गकॉन्ग का दर्जा और उसका इंटरनेशनल गेटवे होना, राष्ट्रीय सुरक्षा के बाद ही आता है.

वो कहते हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के तहत पूर्व मीडिया मुगल जिमी लाई की गिरफ़्तारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जगाने के लिए काफी थी.

डॉ चान कहते हैं, ''राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की कोई सीमा नहीं है. इसमें निजी सुरक्षा, निजी संपत्ति का अधिकार और व्यक्तिगत संपत्ति की कोई गारंटी नहीं है.''

साल 2021 में लाई के डेली न्यूज़पेपर एपल पर छापा मारा गया . इसके बाद उनकी कंपनी का कारोबार बंद करा दिया गया. इसके साथ ही उनकी कंपनी को अगले साल शेयर बाजार से हटा (डीलिस्ट) दिया गया.

अब 76 साल के मीडिया टाइकून पर मुकदमा चल रहा है, वो पिछले तीन साल से जेल में हैं. उनकी 50 करोड़ डॉलर (हॉन्गकॉन्ग) की संपत्ति फ्रीज कर दी गई है.

हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के बाद यहां की सामान्य कानून व्यवस्था से जुड़े नियमों पर दुनिया भर के लोगों का ध्यान गया.

लेकिन शहर की ज्यूडीशियरी को स्वतंत्र तौर पर देखा जाता रहा. खास कर कारोबारी मामलों में.

लेकिन माना जा रहा है जॉन ली राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लेकर चलने वाले केस में अपने पसंदीदा जज नियुक्त कर सकते हैं.

निवेश करें या नहीं

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रिसर्च फर्म ओरिएंटिंस के चीफ इकोनॉमिस्ट केविन सुई का कहना है कि इस शहर की अहमियत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

हॉन्गकॉन्ग को अपनी खासियतों का फायदा उठाना चाहिए. यहां एक सरल, कम टैक्स दर वाला सिस्टम है. यह एक मात्र चीनी शहर है जहां विदेशी मुद्रा पर कोई नियंत्रण नहीं है. हॉन्गकॉन्ग का डॉलर अमेरिकी डॉलर से जुड़ा हुआ है. जिससे एक वित्तीय स्थिरता आती है.

वो कहते हैं, "ये ठीक है कि हॉन्गकॉन्ग चीनी शहर है. लेकिन ये भी सच है कि विदेशी चीन के साथ कारोबार करना चाहते हैं.''

हॉन्गकॉन्ग में कारोबार लेकर जो विश्वास था वो कम हुआ है. लेकिन ये इसलिए भी है क्योंकि चीनी अर्थव्यवस्था गिरावट का असर झेल रही है. चीन इस समय कर्ज और प्रॉपर्टी मार्केट के संकट से जूझ रहा है.

चीन (मैनलैंड) हॉन्गकॉन्ग शहर का सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार है और दूसरा बड़ा निवेश स्रोत भी हैं. हॉन्गकॉन्ग के शेयर बाजार में सूचीबद्ध 2600 कंपनियां चीन की हैं.

लेकिन एक बैंकर ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पिछले साल से लागू किए जा रहे एक नियम के मुताबिक़ चीनी कंपनियों को यहां से बाहर के शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए सरकार से इजाजत लेनी होगी. इसने इस प्रक्रिया को जटिल कर दिया है.

वो कहते हैं कि हम सिर्फ इसका इंतजार कर सकते हैं. हमें पता नहीं कि ये कानून किस चरण में है. अगर कंपनी संवेदनशील उद्योग मसलन डेटा सिक्योरिटी या जेनेटिक टेक्नोलॉजी से जुड़ी होगी तो लिस्टिंग की प्रक्रिया बेहद धीमी हो जाएगी.

हॉन्गकॉन्ग पिछले पंद्रह साल में से सात साल तक आईपीओ के लिए पसंदीदा जगह के तौर पर शीर्ष पर रहा है. लेकिन अब ये आठवीं रैंक पर है.

इस बैंकर ने कहा, ''चीन चाहता है कि निजी कंपनियां विदेश से निवेश जुटाकर देश की अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकाले. लेकिन उसे इस बात की भी चिंता है लिस्टिंग के बाद ये कंपनियां उसके नियंत्रण में नहीं होगी.''

वो कहते हैं, ''वो हर चीज को नियंत्रित करना चाहते हैं लेकिन इससे आखिरकार एक वित्तीय बाजार की हत्या हो जाएगी.''

(हॉन्गकॉन्ग से ग्रेस सोई की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)

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