जिमी लाई: चीन की आँख में आँख डालकर बात करने वाला विद्रोही अरबपति

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चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की हिम्मत करने वाले लोगों को हाथ की उंगलियों पर गिना जा सकता है.
इन्हीं लोगों में एक नाम है जिमी लाई. 12 साल की उम्र में एक डॉलर जेब में लिए,चीन से हॉन्ग कॉन्ग पहुँचे जिमी बेबाक, निडर और कभी न हार मानने वाले विद्रोही हैं.
इसके अलावा वे एक अरबपति हैं जो हॉन्ग कॉन्ग के प्रभावशाली समाचार पत्र एप्पल डेली के मालिक हैं. दुनिया में अमीर लोगों के सरकार का विरोध करने की मिसालें न के बराबर हैं.
जिमी लाई एक तरह से अपवाद ही हैं क्योंकि आमतौर पर व्यवसायी सरकारों के साथ ही खड़े दिखना चाहते हैं.
अरबपति जिमी लाई हॉन्ग कॉन्ग के लोकतंत्र हिमायती आंदोलन के सबसे बड़े समर्थकों में से एक हैं. चीन ने उन्हें कई गंभीर आरोपों के बाद जेल में बंद रखा है. अब उनके विरुद्ध विदशी ताक़तों से मिलीभगत के मुकदमे की शुरूआत हो गई है.
उन पर धोखाधड़ी और हॉन्ग कॉन्ग के प्रदर्शनों में शामिल होने का अभियोग तो पहले से ही था. 76 वर्षीय जिमी लाई पर विदेशी ताक़तों से मिलीभगत का अभियोग भी लगाया गया है. उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को ख़ारिज किया है.
दुनिया भर में उनके मुकदमे की चर्चा है. लाई दरअसल ब्रिटिश नागरिक हैं. ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने उनकी रिहाई की मांग की है.
आलोचकों का कहना है कि हॉन्ग कॉन्ग की न्याय व्यवस्था अपने राजनीतिक विरोधियों को ख़ामोश रखने का हथियार बन गई है. तीन साल से बंद लाई को अब उम्र क़ैद की सज़ा हो सकती है.
चीन को क्यों चुभते हैं लाई?
जिमी लाई चीन की आँखों में अरसे से चुभते रहे हैं. हॉन्ग कॉन्ग के बाक़ी अरबपतियों से अलग लाई चीनी सरकार के कट्टर आलोचक रहे हैं. वे इस पूर्व ब्रितानी टेरिटरी में लोकतंत्र की दुहाई देने वालों के बीच प्रमुख चेहरा रहे हैं.
इसकी वजह से उनपर कई केस चलाए गए हैं. उन्हें साल 2021 में ‘बिना अनुमति के जमा होने’ पर सज़ा दी गई थी. पिछले साल उन्हें धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी बताते हुए पाँच साल की सज़ा दी गई थी.
हॉन्ग कॉन्ग के विवादित नेशनल सिक्यूरिटी लॉ के तहत गिरफ़्तार होने वाले लोगो में लाई सबसे प्रमुख हैं.
साल 2020 में अपनी गिरफ़्तारी से चंद घंटे पहले बीबीसी को दिए अपने एक इंटरव्यू लाई ने कहा था कि वे जन्म से विद्रोही हैं
एक डॉलर से अरबपति तक

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जिमी लाई का जन्म दक्षिणी चीन के गुआंगज़ू के एक धनी परिवार में हुआ था. लेकिन 1949 में चीन में कम्युनिस्ट राज आने के बाद परिवार ने सबकुछ खो दिया था.
12 साल की उम्र में वे मछुआरों की नाव में छिपकर चीन से हॉन्ग कॉन्ग पहुँचे थे.
उस दौर के बारे में साल 2021 में जिमी लाई ने बीबीसी को बताया था, “मैं यहाँ एक डॉलर जेब में डालकर एक फ़िशिंग बोट पर सवार होकर पहुँचा था. मैं जो कुछ भी हूँ इस शहर की वजह से हूँ. अगर ये इस शहर के अहसान उतारने का वक़्त है तो मैं इसके लिए तैयार हूँ.”
12 साल की उम्र में उन्होंने दुकानों पर छोटा मोटा काम करना शुरू किया और अंग्रेज़ी सीखने पर ज़ोर दिया. धीरे-धीरे दिहाड़ी-मज़दूरी की ज़िंदगी से वे व्यापार की ओर मुड़ने लगे.
उनको पहली सफलता एक कपड़ों का एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाने में मिली थी. ये ब्रांड है गियोरडानो.
दुनिया भर में इस ब्रांड की दुकानें खुलीं और चल निकलीं.
लेकिन जब 1989 में चीन ने बीजिंग के तियानमेन चौराहे पर टैंक भेजे तो जिमी लाई एक दूसरे अवतार में सामने आए.
वे एक उद्योपति होने के साथ-साथ लोकतंत्र की आवाज़ भी बुलंद करने लगे. वे तियानमेन में हुए कत्लेआम पर आलोचनात्मक लेख लिखने लगे. बाद में उन्होंने एक पब्लिशिंग हाउस स्थापित किया. धीरे-धीरे वे हॉन्ग कॉन्ग की सबसे प्रभावशाली शख़्सयित बनते गए.
उनका विरोध चीन को पसंद नहीं आया. चीन में उनके ब्रांड की दुकान बंद करने की धमकी दी गई. जिसके बाद लाई ने अपनी कंपनी ही बेच दी.
कपड़ों के ब्रांड के बाद उन्होंने अपने प्रकाशन से कई लोकतंत्र हिमायती अख़बार और पत्रिकाएं निकालना शुरू किया. इनमें नेक्स्ट भी शामिल है जो एक डिजिटल मैगज़ीन है.
लेकिन इनमें सबसे ताक़तवर साबित हुआ उनका अख़बार एप्पल डेली. जिस दौर में हॉन्ग कॉन्ग का हर अख़बार चीन के ख़ौफ़ में रहता था तब लाई ने खुलकर चीन की नीतियों का विरोध किया.
जानलेवा हमले

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इस वजह से वे हॉन्ग कॉन्ग में कई लोगों के लिए हीरो बन गए. लेकिन चीन उन्हें अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक ‘गद्दार’ के रूप में देखता है. उनपर कई बार जानलेवा हमला हो चुका है.
लेकिन तमाम धमकियों के बावजूद लाई टस से मस नहीं हुए. वे सार्वजनिक तौर पर अपने विचार व्यक्त करते रहे. जिमी लाई हॉन्ग कॉन्ग के लोकतंत्र हिमायती प्रदर्शनों का प्रमुख चेहरा बन गए और वर्ष 2021 में उन्हें दो बार गिरफ़्तार किया गया.
जब जून 2020 में चीन ने हॉन्ग कॉन्ग के लिए एक नया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पास किया था तो लाई ने बीबीसी को बताया था कि ये लोकतंत्र के ताबूत में एक कील है.
प्रभावशाली उद्योगपति ने चेतावनी दी थी कि हॉन्ग कॉन्ग चीन की ही तरह से भ्रष्ट हो जाएगा. उनका कहना था कि कानून के राज के बिना दुनिया के वित्तीय केंद्र वाला हॉन्ग कॉन्ग का स्टेटस धूमिल हो जाएगा.
खुलकर अपने विचार रखने के लिए विख्यात लाई ने साल 2021 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था.
उनका कहना था, “डोनाल्ड ट्रंप एकमात्र व्यक्ति हैं जो हमें चीन से बचा सकते हैं.”
उनके अख़बार एप्पल डेली ने फ्रंट पेज उनका एक लेख प्रकाशित किया था. इस लेख के अंत में लिखा था - “मिस्टर प्रेसिडेंट, प्लीज़ हेल्प अस.”
साल 2021 में बीबीसी से मुलाक़ात में जिमी ने अपनी सोच की झलक भी दी थी.
उन्होंने कहा था कि, “मैं जेल से बाहर हूँ तो जीवन शांति से गुज़र रहा है लेकिन जेल के भीतर मैं एक सार्थक जीवन व्यतीत कर सकता हूँ.”
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