चीन के दबाव में दम तोड़ रहा है हांगकांग का लोकतंत्र समर्थक मीडिया

लंदन में एप्पल डेली बंद होने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

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    • Author, आंद्रेज़ इल्मर
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

हांगकांग में लोकतंत्र के लिए आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों और अख़बारों के ख़िलाफ़ लगातार उठाए जा रहे क़दमों का असर अब देखने को मिल रहा है. जानकारों ने चेतावनी दी है कि मीडिया की स्वतंत्रता पर बहुत बुरा असर होने वाला है.

रविवार की रात पुलिस ने एक पूर्व वरिष्ठ पत्रकार की गिरफ़्तारी की घोषणा की. वो अब बंद हो चुके अख़बार एप्पल डेली के साथ काम करते थे. उन्हें एयर पोर्ट पर पकड़ा गया, जब वो शहर छोड़कर जाने की कोशिश में थे.

कंपनी के वरिष्ठ कर्मचारियों की गिरफ़्तारी के बाद एप्पल डेली को बंद करना पड़ा था. उन्हें विवादित नेशनल सिक्योरिटी क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया और उनकी संपत्तियों को सील कर दिया गया था. अख़बार के मालिक जिमी लाई पहले से ही गंभीर आरोपों के कारण जेल में हैं.

स्टैंड न्यूज़, जो लोकतंत्र समर्थकों के बीच लोकप्रिय है, उसने कहा कि वो अपना लोकतंत्र समर्थक संपादकीय कार्रवाई के डर से बंद कर रहा है.

इसके कुछ ही देर बाद गिरफ़्तारी की ख़बरें आईं. स्टैंड न्यूज़ लोकतंत्र के पक्ष में बोलने वाले आख़िरी बचे हुए न्यूज़ पोर्टल में से एक है. ये एक नया पोर्टल है, जिसे 2019 में लोकतंत्र के लिए शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद पहचान मिली थी.

ब्रिटेन की ओर से शहर को चीन को सौंपने की डील के तहत हांगकांग में प्रेस की आज़ादी थी. लेकिन जानकारों का कहना है कि जून 2020 में लाए गए नेशनल सिक्योरिटी एक्ट का ग़लत इस्तेमाल कर इसे दबाने की कोशिश की जा रही है.

इस विवादास्पद क़ानून के तहत विदेशी ताक़तों के साथ मिलकर किसी तरह की गतिविधि में शामिल होना ग़ैर क़ानूनी है. दोषी पाए जाने पर उम्र क़ैद तक की सज़ा हो सकती है.

एप्पल डेली के समर्थन में कई लोग उतरे

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'पत्रकार डरे हुए हैं'

वरिष्ठ पत्रकार और हांगकांग जर्नलिस्टिक एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष क्रिस यूंग ने बीबीसी को बताया, "प्रेस की आज़ादी ख़त्म हो रही है और ये अनिश्चितता के दौर से ग़ुज़र रही है."

"इस क़ानून के आने बाद हुई गिरफ़्तारियों के कारण पत्रकारों में डर बढ़ा है. एप्पल डेली के बंद होने से मीडियावालों के बीच एक डरावना संदेश गया है "

शुरुआत में इस क़ानून का इस्तेमाल आंदोलनकारियों और नेताओं के ख़िलाफ़ हो रहा था, लेकिन हाल के दिनों में अधिकारियों ने मीडिया को टार्गेट किया है, एप्पल डेली का बंद होना पहली बड़ी घटना है.

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टैबलॉयड की गॉसिप के साथ लोकतंत्र के समर्थन में होने वाली बातों का मिश्रण, शहर के लिए ये एक बड़ी आवाज़ बनकर सामने आया था.

पुलिस का कहना है कि अख़बार की कई ख़बरों ने नए क़ानून का उल्लंघन किया था, जैसे कि हांगकांग और चायना मेनलैंड पर प्रतिबंध लगाने की बातें.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ एप्पल डेली के संपादक और मालिक जिमी लाई की तरह ही रविवार को गिरफ़्तार किए गए पत्रकार पर भी नेशनल सिक्योरिटी क़ानून की धाराएँ लगाई जाएँगी.

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'अपमानजनक और अस्वीकार्य क़दम'

ह्यूमन राइट्स वॉच के फ़िल रॉबर्टसन ने बीबीसी को बताया, "हांगकांग के अधिकारियों का एप्पल डेली के ख़िलाफ़ उठाया गया क़दम अपमानजनक और अस्वीकार्य है. क्योंकि वो खुले तौर पर मीडिया की स्वतंत्रता को दबा रहे हैं और पत्रकारों को अपराधी बता रहे हैं."

"चीनी नेताओं का दूसरे छोटे मीडिया संस्थाओं को ये इशारा है कि सवाल उठाए गए, तो सज़ा मिलेगी."

हांगकांग जर्नलिस्टिक एसोसिएशन ने हाल की गिरफ़्तारियों की निंदा की है और इस पर पुलिस से जवाब मांगा है.

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स्टैंड न्यूज़ का ये बयान कि वो संपादकीय लेख बंद कर देगा और पाठकों से स्पॉन्सरशिप नहीं लेगा, जो उसका एक प्रमुख वित्तीय स्रोत है, शहर के बिगड़ते हालात की तस्वीर पेश करता है.

अपने फ़ैसले पर स्टैंड न्यूज़ ने कहा है कि वो समर्थकों, लेखकों और संपादकों की सुरक्षा चाहता है, क्योंकि 'लिटररी इंक्यूज़िशन' शहर में आ गया है. 'लिटररी इंक्यूज़िशन' चीन में एक जाना माना शब्द है. इसका इस्तेमाल चीन के इतिहास में कई बार आए उस दौर के लिए किया जाता है, जब चीन में बुद्धिजीवियों को सज़ा दी जाती थी.

येउंग कहते हैं, "स्टैंड न्यूज़ की दुविधा समझी जा सकती है. उन्हें चीन समर्थक मीडिया ने लोकतंत्र समर्थक बता पर पेश किया है क्योंकि वो सरकार के ख़िलाफ़ बोलते हैं."

"ये एक और उदाहरण है जिससे ज़ाहिर होता है कि नेशनल सिक्योरिटी क़ानून का पत्रकारिता पर कितना बुरा असर हो रहा है. एप्पल डेली के बाद अब अगला टार्गेट ऑनलाइन मीडिया होगा."

हांगकांग विश्वविद्यालय में मीडिया के जानकार चॉर-यूंग-च्युंग इस बात से सहमत हैं. वो कहते हैं, "गिरफ़्तारियों के कारण लोगों में मीडिया की स्वतंत्रता को लेकर भरोसा गिरा है. मुझे स्टैंड न्यूज़ के फ़ैसले से आश्चर्य नहीं हुआ है. मुझे लगता है कि आने वाले समय में कई उदारवादी मीडिया ऐसा ही करेंगे."

हालांकि हांगकांग और चीन के अधिकारी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि मीडिया आज़ादी से और खुले तौर पर काम कर सकता है. शहर की प्रमुख अधिकारी कैरी लैम ने एप्पल डेली के बंद होने के बाद कहा कि अगर वो "सामान्य पत्रकारिता" कर रहे होते, तो उन पर कोई असर नहीं होता.

हांगकांग की चीफ़ एग्जे़क्यूचिव कैरी लैम के मुताबित वहां मीडिया स्वतंत्र है

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प्रेस फ़्रीडम में ऐतिहासिक गिरावट

चीनी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि हांगकांग में मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन ये स्वतंत्रता संपूर्ण नहीं है.

पिछले सप्ताहांत में, हांगकांग के पुलिस प्रमुख रेमंड सिउ ने एक नए क़ानून का सुझाव दिया, जिसका मीडिया पर प्रभाव पड़ेगा. अधिकारियों के प्रति लोगों के अविश्वास के लिए मीडिया को स्पष्ट रूप से दोषी ठहराते हुए उन्होंने कहा कि वो एक फ़ेक न्यूज़ क़ानून का स्वागत करेंगे, जो पुलिस को "इन लोगों को न्याय दिलाने" में मदद करे.

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मई में, हांगकांग जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए कहा था कि इलाक़े का प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुँच गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, "प्रतिक्रिया देने वाले 367 पत्रकारों में से 91% ने कहा कि हांगकांग में प्रेस की स्वतंत्रता एक साल पहले की तुलना में कम हुई है."

"प्रतिक्रिया देने वाले 85% पत्रकार इस बात से सहमत हैं कि हांगकांग में सरकार प्रेस की स्वतंत्रता को दबाने का स्रोत है"

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यह रिपोर्ट एप्पल डेली पर कार्रवाई से पहले आई थी.

हांगकांग के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ने कहा कि अख़बार को बंद करना "हांगकांग में पत्रकारिता समुदाय के लिए एक झटका है और शहर में प्रेस की स्वतंत्रता के भविष्य को लेकर चिंताएँ पैदा करता है."

यूंग का मानना है कि इस क़ानून से इतना नुक़सान होगा, एक साल पहले तक लोगों को अंदाज़ा भी नहीं था.

उन्हें उम्मीद है कि निंदा करने वाले लोग पहले से अधिक सावधान रहेंगे, लेकिन "स्वतंत्र और आज़ाद पत्रकारिता के लिए सुरक्षित तरीक़े" खोजते रहेंगे.

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ये सुरक्षित तरीक़े क्या होंगे, कहना अभी मुश्किल है. उदाहरण के लिए, एप्पल डेली के बंद होने के बाद से कई कार्यकर्ता सेंसरशिप-प्रूफ़ ब्लॉकचैन प्लेटफ़ॉर्म पर पेपर के ऑनलाइन लेखों का बैकअप लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे इंटरनेट से ग़ायब न हो जाएँ.

इससे पहले, साइबर एक्सपर्ट्स ने शहर के सरकारी प्रसारक आरटीएचके की पुरानी डॉक्यूमेंट्री को इसी तरह से सुरक्षित किया था, जब उन्होंने कुछ पुरानी सामग्री को हटाने की बात कही थी.

आरटीएचके पहले सरकार की आलोचना करता था, लेकिन नए प्रबंधन के आने के बाद स्थिति बदल गई.

ह्यूमन राइट्स वॉच के फ़िल रॉबर्टसन कहते हैं, "अगर शी ज़िनपिंग और चीन के शासक अपने तरीक़े से काम करने लगे, तो हांगकांग में मीडिया की स्वतंत्रता ख़त्म हो जाएगी."

"उनका हर क़दम इसी ओर इशारा करता है."

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