यूरोपीय संघ के बैन से नाराज़ चीन ने कहा, ''मानवाधिकार पर लेक्चर देना बंद करें"

यूरोपीय यूनियन

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    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
    • पदनाम, दिल्ली

चीन के सरकारी मीडिया ने चीन की ओर से 10 यूरोपीय लोगों और चार संस्थाओं पर प्रतिबंध की ख़बर को विस्तार से रिपोर्ट किया है.

चीन ने यह क़दम यूरोपीय संघ के उस फ़ैसले के बाद उठाया है, जिसमें ईयू ने शिन्ज़ियांग प्रांत में हो रहे कथित मानवाधिकार हनन को लेकर चीन पर प्रतिबंध लगाए हैं.

चीन के प्रमुख मीडिया संस्थानों जैसे शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी और अख़बार ग्लोबल टाइम्स और सरकारी रेफ़रेंस न्यूज़ ने 22 मार्च को विदेश मंत्रालय के बयान को प्राथमिकता दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि यूरोपियन ब्लॉक ने, "चीन की संप्रभुता और हित को झूठ और ग़लत जानकारियाँ फैला कर नुक़सान पहुँचाया है."

कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपल्स डेली ने 23 मार्च को लिखा, "इस बयान ने यूरोपीय संघ को अपनी ग़लती का अहसास कराया है और उसे सही करने के लिए क़दम उठाने को मजबूर किया है. वो दूसरों को मानवाधिकार के बारे में लेक्चर देना और उनके अंदरूनी मामलों में दख़लअंदाज़ी बंद करें."

द पेपर नाम की सरकार समर्थित वेबसाइट ने 22 तारीख़ को लिखा, "यह कहा जा रहा है कि यूरोपीय पक्ष की तरफ़ से तथ्यों को नज़रअंदाज़ किया गया और खुलकर अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन किया गया, जिससे चीन और यूरोपीय संघ के रिश्ते ख़राब हुए."

चीन और यूरोपीय संघ

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'ईयू का चीन पर प्रतिबंध नैतिक अहंकार दिखाता है'

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ बयान में बताया गया है कि चीन की ओर से प्रतिबंधित लोगों और उनके परिवारों को देश में घुसने की इजाज़त नहीं होगी. इसके अलावा वो हॉन्ग कॉन्ग और मकाऊ में भी प्रवेश नहीं कर पाएँगे.

जिन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनमें यूरोपीय संसद के लोग, शोधकर्ता और यूरोपीय संसद की मानवाधिकार की सब कमेटी के लोग शामिल हैं.

चीन के एक सरकारी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, बयान में कहा गया कि 'चीन का राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और विकास के लिए दृढ़ संकल्प अटूट है.'

22 मार्च को सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स में लिखा गया, "इस तेज़ पलटवार के माध्यम से चीन ने एक बार फिर बता दिया है कि कोई भी अगर चीन के हितों के ख़िलाफ़ जाता है या चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है तो उसे पूरी तरह जवाब दिया जाएगा. चाहे कोई भी हो, बिना किसी अपवाद के."

चीनी भाषा के उस लेख में लिखा गया है, "90 के दशक के बाद ये पहली बार है कि यूरोपीय पक्ष ने चीन के कर्मचारियों और संस्थानों पर प्रतिबंध लगाए हैं. प्रतिबंध स्पष्ट रूप से प्रतीकात्मक हैं लेकिन वे यूरोपीय संघ के नैतिक अहंकार और चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास दिखाते हैं."

टिप्पणी में कहा गया है कि 'चीन उम्मीद करता है कि यूरोपीय संघ अमेरिका की साज़िशों और चीन को रोकने की महत्वाकांक्षाओं से दूर रहेगा.'

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सोशल मीडिया पर समर्थन

चीन के क़दम को वहाँ की सोशल मीडिया वेबसाइट साइना वीबो पर काफ़ी समर्थन मिला है. कई लोगों ने इसे 'सही क़दम' बताया है.

एक यूज़र ने लिखा, "ऐसा ही होना चाहिए- आँख के बदले आँख, दाँत के बदले दाँत."

एक दूसरे यूज़र ने लिखा, "यूरोपीय संघ के विदेशी चीन के प्रतिबंध को देखकर नाराज़ होंगे. वो चीन को नीचे गिरता हुए देखना चाहते हैं और चाहते हैं कि वो वापस लड़ाई नहीं कर सके."

एक यूज़र ने लिखा कि सभी तरह की अफ़वाहें पश्चिमी देश फैलाते हैं.

उन्होंने लिखा, "पूरी मीडिया के लिए, ख़ासतौर पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के लिए, अब लोगों की राय के अनुसार जवाब देने का समय आ गया है."

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एक कमेंट में लिखा गया है, "इस बार चीन-अमेरीका के बीच बातचीत से ईयू परेशान है. वो चीन-अमेरिका के बीच किसी तरह का तालमेल नहीं चाहते हैं. लेकिन वो अमेरिका के खिलाफ़ आक्रमक नहीं हो सकते, इसलिए उन्होंने चीन के ख़िलाफ़ एक उच्च स्तरीय राजनीतिक क़दम उठाया है ताकि अमेरिका भी ऐसा ही करे. ईयू चाहता है कि अमेरिका और चीन एक दूसरे से लड़ते रहें और ईयू को इसका फ़ायदा मिले."

एक और यूज़र ने लिखा, "संप्रभुता बनाए रखना साथ को मज़बूत करने से ज़्यादा ज़रूरी है."

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