अमेरिकी प्रतिबंधों से यूं तबाह हो रहा है चीनी कंपनी ख़्वावे का कारोबार

ख्वावे

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    • Author, क्रिस्टीना जे ओर्गाज़
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

क्या आपके पास ख्वावे का मोबाइल फोन है? इसे संभालकर रखना चाहिए. अगले कुछ वर्षों में यह चीन के बाहर एक दुर्लभ चीज हो सकता है.

कभी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्मार्टफोन कंपनी रही ख्वावे को 2021 में बड़े पैमाने पर उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

फाइनेंशियल टाइम्स का अनुमान है कि यह कटौती करीब 60 फीसद होगी.

रिसर्ट फर्म गार्टनर के मुताबिक, 2019 के अंत में ख़्वावे की रैंकिंग सैमसंग और ऐपल के बाद तीसरे नंबर पर थी.

लेकिन, एक साल बाद ही कंपनी दो पायदान लुढ़कर पांचवें नंबर पर पहुंच गई. दूसरी तरफ, ऐपल पहले नंबर पर आ गई.

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प्रतिबंधों के चलते ख़्वावे को नुकसान

चीन की दिग्गज कंपनी ख़्वावे को पिछले साल की आखिरी तिमाही में स्मार्टफोन बिक्री में 41 फीसदी की भारी गिरावट का सामना करना पड़ा.

चीन के साथ अमेरिका के ट्रेड वॉर और अन्य वजहों से अमेरिकी सरकार के कंपनी पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते ख़्वावे को यह नुकसान उठाना पड़ा है.

2019 में अमरीका की लगाई गई व्यापार पाबंदियों के चलते इस चाइनीज ब्रैंड के फोन्स से एप्स और गूगल ऑपरेटिंग सिस्टम दोनों ही वापस ले लिए गए.

मार्केट में जारी तगड़ी प्रतिस्पर्धा और कस्टमर्स के गूगल ऑपरेटिंग सिस्टम- एंड्रॉयड के आदी होने को देखते हुए ख़्वावे के लिए ये प्रतिबंध एक बड़ा झटका साबित हुए हैं.

इसके चलते गूगल मैप्स, यूट्यूब और प्ले स्टोर जैसे अहम एप्स इन फोन पर चलने बंद हो गए.

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अहम पुर्जे मिलना बंद हुए

अमेरिका की सरकार के बैन ने अमेरिका से मिलने वाली टेक्नॉलॉजी तक पहुंच को भी रोक दिया.

इससे कंपनी के लिए अपनी चिप्स डिजाइन करने और पुर्जे हासिल करना मुश्किल हो गया.

एएमडी, इंटेल, मीडियाटेक, माइक्रोन टेक्नॉलॉजी, माइक्रोसॉफ्ट, क्वालकॉम, सैमसंग, एसके हायनिक्स या सोनी जैसी कंपनियों के बनाए जाने वाले अहम पुर्जे ख़्वावे को मिलना बंद हो गए और इससे कंपनी की स्मार्टफोन डिवीजन को तगड़ा झटका लगा.

जेके कैपिटल मैनेजमेंट के सीईओ फैब्रिस जैकब कहते हैं, "दुनिया की कोई भी कंपनी जो कि ख़्वावे के लिए चिप बनाती है और अमेरिका के पुर्जे और सॉफ्टवेयर्स का इस्तेमाल इस काम के लिए करती है, उसे अमेरिकी सरकार से लाइसेंस लेना ज़रूरी कर दिया गया."

अमेरिका के इस क़दम से चीनी दिग्गज ख़्वावे को अपनी सप्लाई चेन को फिर से तैयार करना पड़ा. इसका मतलब यह है कि कंपनी को अपने कई मॉडल्स के लिए उत्पादन की योजनाओं में बदलाव करना पड़ा.

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कारोबारी रिश्ते

अपने पास कंपोनेंट्स के स्टॉक के चलते ख़्वावे 2020 की दूसरी तिमाही में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बनी रही, लेकिन, इसके बाद से कंपनी की जमीन खिसकनी शुरू हो गई.

जैकब कहते हैं, "टीएसएमसी जैसी ताइवानी मूल की सबसे बड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी समेत सभी कंपनियां अमरीकी उपकरणों का इस्तेमाल करती हैं."

इस तरह के माहौल में ख़्वावे ने नवंबर 2020 में तय किया कि वह अपने सबसे सस्ते सेल फोन ब्रैंड ऑनर को 30 से ज्यादा कंपनियों के कंसॉर्शियम को बेचेगी ताकि कंपनी फिर से अहम कंपोनेंट्स और पार्ट्स को हासिल कर पाए.

जापानी अख़बार निक्केई के मुताबिक, ऑनर के जरिए कंपनी अहम कंपोनेंट्स सप्लाई करने वाली अमरीकी कंपनियों के साथ फिर से कारोबारी रिश्ते बनाना चाहती थी.

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5जी इक्विपमेंट का मसला

जेके कैपिटल के एनालिस्ट जैकब कहते हैं कि अमरीकी बैन का असर ख़्वावे की एक दूसरी डिवीजन पर भी पड़ा. ये डिवीजन टेलीकम्युनिकेशंस इक्विपमेंट बनाती है.

4जी और 5जी नेटवर्क इक्विपमेंट्स के क्षेत्र में इसका मुकाबला नोकिया, एरिक्सन और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों के साथ है.

जैकब कहते हैं, "इन 5जी उपकरणों के लिए भी चिप की जरूरत पड़ती है और ये अमरीका में बनती हैं."

एडमंड डे रॉथ्सचाइल्ड एएम के एक फंड मैनेजर शियाडॉन्ग बाओ कहते हैं कि अमरीका के प्रतिबंध के चलते ख़्वावे के टेलीकम्युनिकेशंस इक्विपमेंट कारोबार पर भी बुरा असर पड़ रहा है.

वे कहते हैं, "कंपनी के इस डिवीजन को ज्यादा लागत और कम परफॉर्मेंस का सामना करना पड़ रहा है. ख़्वावे का बाकी हार्डवेयर बिजनेस, जिसमें पीसी, राउटर और लैपटॉप आते हैं, भी इसी तरह के मुश्किल दौर से गुजर रहा है. कंपनी का स्मार्टफोन कारोबार अब कारोबारी तौर पर मुनाफे लायक नहीं रह गया है."

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बराबरी का मौका

हालांकि, वे मानते हैं कि इसकी वजह से ख़्वावे ने अपने कारोबारी मॉडल में बदलाव किया है और इसे सॉफ्टवेयर, वीडियो सर्विलांस, ऑटोनोमस ड्राइविंग जैसे क्षेत्रों में बढ़ाया है. साथ ही कंपनी अब चीन के मार्केट पर ज्यादा फोकस कर रही है.

भले ही कंपनी उम्मीद कर रही है कि अमरीका में नए राष्ट्रपति के आने के बाद उसे राहत मिलेगी, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि उनका इन प्रतिबंधों को हटाने का फिलहाल कोई इरादा नहीं दिख रहा है.

फरवरी की शुरुआत में बाइडन की कॉमर्स सेक्रेटरी के लिए उम्मीदवार गीना रायमोंडो ने कहा था कि उन्हें ख़्वावे से प्रतिबंध हटाने की कोई वजह नजर नहीं आती.

कंपनी के एक प्रवक्ता ने पिछले साल फरवरी में बीबीसी को बताया था, "यहां समस्या यह नहीं है कि हमारी क्वॉलिटी खराब है या लोगों का ख़्वावे के उत्पादों के साथ बुरे अनुभव हैं. यह कारोबार करने के लिए बराबरी का मौका दिए जाने का मामला है. ख़्वावे भूराजनैतिक तनावों में फंस गई है."

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सेमीकंडक्टर चिप की कमी

इन तमाम दिक्कतों के साथ ही सेमीकंडक्टरों की कमी का भी उसे सामना करना पड़ रहा है. सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक अहम चिप होते हैं.

इनसे ख़्वावे के दूसरे वर्टिकल्स पर असर पड़ रहा है. सेमीकंटक्टरों की कमी का बुरा असर पूरे सेक्टर पर पड़ रहा है.

कोविड-19 महामारी के चलते सेमीकंडक्टरों की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है.

जैकब कहते हैं, "ऐसी जानकारी है कि टीएसएमसी और दूसरी प्रमुख यूएस चिप कंपनियां हुवावे को 2021 तक के लिए सप्लाई दे चुकी हैं."

वे कहते हैं कि इसके बाद से ही ख़्वावे पर इसका असर दिखाई देना शुरू होगा.

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