चीन को आँखें दिखाने वाला मीडिया मालिक, जिनकी गिरफ़्तारी पर मचा बवाल

इमेज स्रोत, Reuters
हॉन्ग कॉन्ग में एक मीडिया उद्योगपति की गिरफ़्तारी पर हंगामा खड़ा हो गया है. उनकी ज़िंदगी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं - गाँव से भागे एक लड़के ने कैसे करोड़ों डॉलर का साम्राज्य खड़ा कर दिया.
जिमी लाइ को हॉन्ग कॉन्ग में लागू नए सुरक्षा क़ानून के तहत कथित रूप से विदेशी ताक़तों के साथ सांठ-गांठ करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
जिमी का जन्म दक्षिणी चीन के ग्वांग्ज़ो प्रांत में एक गाँव में एक अमीर घर में हुआ था. लेकिन 1949 में हुई साम्यवादी क्रांति में उनकी सारी संपत्ति छीन ली गई.
वो केवल 12 साल के थे जब वो घर से भाग गए. वो मछली पकड़ने वाली एक नाव में छिपकर लटक गए और हॉन्ग कॉन्ग पहुँच गए.
उन्होंने वहाँ छोटे-मोटे काम करना शुरू किया. ऐसा ही एक काम उन्हें एक कपड़े की दुकान में मिला. वहाँ उन्होंने अंग्रेज़ी पढ़ना शुरू किया और फिर कपड़े का कारोबार शुरू किया.
जियोर्डानो नाम की उनकी कपड़े की कंपनी देखते-देखते एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बन गई.
लेकिन 1989 में जब चीन ने लोकतंत्र समर्थक आंदोलन को कुचलना शुरू किया, तो जिमी ने एक नई यात्रा शुरू की.
पत्रकारिता में रखा क़दम
वो कारोबारी तो थे ही, अब वो एक लोकतंत्र समर्थक आंदोलनकारी बन गए.
उन्होंने अख़बारों में लिखना शुरू किया और कुछ समय बाद अपना पब्लिशिंग हाउस खोल डाला. वो देखते-देखते हॉन्ग कॉन्ग के सबसे प्रभावशाली मीडिया हाउसों में गिना जाने लगा.

इमेज स्रोत, Reuters
चीन को ये सब पसंद नहीं आ रहा था, उसने उनका स्टोर बंद करवाने की धमकी दी, और आख़िर जिमी को कंपनी बेचनी पड़ी.
पर इसके बाद जिमी ने कई और लोकतंत्र समर्थक प्रकाशन शुरू किए जिनमें दो नाम काफ़ी चर्चित हो गए. नेक्स्ट - ये एक डिजिटल पत्रिका है और एप्पल डेली - एक बहुत ज़्यादा पढ़ा जाने वाला अख़बार.
हॉन्ग कॉन्ग में मीडिया आम तौर पर चीन के ख़िलाफ़ कुछ कहने से डरता है मगर जिमी अपने प्रकाशनों और अपने लेखों से लगातार चीन के नेताओं पर निशाना साधते रहे.
इस वजह से हॉन्ग कॉन्ग में उन्हें एक नायक की तरह देखा जाने लगा. हालाँकि, चीन में उन्हें एक ग़द्दार समझा जाता है जो चीन की सुरक्षा के लिए एक ख़तरा हैं.
हाल के कुछ वर्षों में नक़ाबपोश हमलावरों ने जिमी लाइ के घर और कंपनी के मुख्यालय पर बम भी फेंके.
71 वर्षीय जिमी लाइ की हत्या की साज़िश भी रची गई थी.
लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने विचारों को ज़ाहिर करना बंद नहीं किया.

पहले भी किया गया गिरफ़्तार
वो बड़े ज़ोर-शोर से लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों में हिस्सा लेते रहे. इस साल इससे पहले भी उन्हें दो बार अवैध सभा करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
इस साल जून में उन्होंने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा - "मैं परेशान करने वाला शख़्स हूँ. मैं यहाँ कुछ भी लेकर नहीं आया था, इस जगह की आज़ादी ने मुझे सबकुछ दिया है. शायद अब समय आ गया है कि मैं उस आज़ादी की क़ीमत अदा करने के लिए लड़ूँ."
जून में जब चीन ने हॉन्ग कॉन्ग के लिए नया सुरक्षा क़ानून लागू किया तो जिमी लाइ ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में चेतावनी दी थी कि हॉन्ग कॉन्ग भी चीन की तरह भ्रष्ट हो जाएगा.
उस समय उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति से मदद करने का आग्रह किया था और कहा था कि वही एक अकेले शख़्स हैं जो हॉन्ग कॉन्ग को चीन से बचा सकते हैं.
उनके अख़बार ऐप्पल डेली ने तब अपने पहले पन्ने पर एक चिट्ठी छापी थी जिसमें लिखा था - "मिस्टर प्रेसिडेंट, प्लीज़ हेल्प अस."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















