जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री के आगे रूस को लेकर भारत को क्यों बताया 'स्मार्ट'

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि रूस पर लगे पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस से तेल ख़रीदना जारी रखेगा.
भारत के इस फ़ैसले के पक्ष में उन्होंने कहा कि अगर भारत 'स्मार्ट' है और अपने हाथ में कई विकल्प रखता है इसके लिए भारत की आलोचना नहीं की जानी चाहिए.
म्यूनिख़ सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए एक पैनल डिस्कशन में जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक माहौल में भारत की विदेश नीति के साथ-साथ इसराइल-हमास युद्ध, यूक्रेन युद्ध जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की.
इस दौरान मंच पर उनके साथ अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेरबॉक भी थीं.
रूस-यूक्रेन युद्ध और इसके बाद भी भारत का रूस से तेल खरीदना जारी रखने को लेकर किए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "इसमें मुश्किल क्या है, इसमें मुश्किल क्यों होनी चाहिए? अगर मैं स्मार्ट हूं और अपने पास कई विकल्प रखता हूं तो आपको मेरी तारीफ़ करनी चाहिए. दूसरों के लिए ये समस्या कैसे है? मुझे ऐसा नहीं लगता, ख़ासकर इस मामले में. हमने ये बताने की कोशिश की है कि हर मुल्क की अपनी ज़रूरतें अपनी मुश्किलें होती हैं."
रूस से तेल ख़रीदने को लेकर क्या कहा?

जयशंकर ने कहा, "बहुआयामी रिश्ते रख पाना मुश्किल होता है और अलग-अलग मुल्कों और अलग-अलग रिश्तों का अपना इतिहास होता है. अमेरिका और जर्मनी के रिश्तों का भी अपना एक इतिहास है जिसकी ज़मीन पर ही रिश्ते बने हैं."
"हमारे मामले में ये अलग है. मैं नहीं चाहूंगा कि आप अनजाने में ऐसी धारणा बनाएं कि हम पूरी तरह से और बिना भावनात्मक रिश्ते से व्यापार करते हैं. ऐसा नहीं है. हम लोगों के साथ रिश्ते बनाते हैं, चीज़ों पर यक़ीन करते हैं, चीज़ें साझा करते हैं. लेकिन ऐसा भी है कि मुल्क अलग-अलग जगहों पर हैं, विकास के अलग-अलग स्तरों पर हैं, उनके अपने अलग-अलग अनुभव हैं, से सभी बातें रिश्तों में मायने रखती हैं."
"ज़िंदगी जटिल है और सबकी स्थिति एक-दूसरे से अलग है. मैं एंटनी ब्लिंकन की बात से सहमत हूं कि अच्छे मित्र आपको विकल्प देते हैं और स्मार्ट पार्टनर इनमें से कुछ विकल्पों का इस्तेमाल करते हैं और कुछ छोड़ देते हैं. हम दुनिया की सभी जटिलताओं को एक ही चश्मे से नहीं देख सकते. मुझे लगता है कि वो दौर अब ख़त्म हो चुका है."
जयशंकर से सीधे ये सवाल किया गया था कि आप अब तक रूस से तेल खरीदते हैं, क्या आपके अच्छे मित्र अमेरिका की नज़र में ये सही होगा कि आप जो चाहें जब चाहें कर सकते हैं.
जिस वक्त जयशंकर ये कह रहे थे अमेरिकी विदेश मंत्री उनकी तरफ देखकर मुस्कुरा रहे थे.
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर कहा था कि वो "भारत पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाने वाले क्योंकि भारत के साथ अमेरिका का रिश्ते काफी महत्वपूर्ण हैं और भारत ने युद्ध बंद करने की अपील भी की है."
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख़

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दो साल पहले रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था जिसके बाद पश्चिमी मुल्कों ने रूस पर कई तरह की पाबंदियां लगा दीं. यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने भी 2022 दिसंबर में रूसी कच्चे तेल पर लगभग प्रतिबंध लगा दिया था.
भारत ने युद्ध बंद करने और दोनों पक्षों में बातचीत करने की बात तो की, लेकिन उसके रूस के साथ अपने संबंधों पर इसकी परछाई नहीं पड़ने दी. वो लगातार रूस से तेल खरीदता रहा और हाल के वक्त में रुपया-रूबल में भी व्यापार कर रहा है.
भारत के इस रुख़ को लेकर कई बार सवाल उठाए गए हैं और कहा जाता रहा है कि भारत "गुटनिरपेक्ष की जगह सभी के साथ निरपेक्ष" होने का रवैया अपना रहा है.
इससे पहले दिसंबर 2022 में अपने भारत दौरे के वक्त बेरबॉक ने इसे लेकर भारत से शिकायत की थी. उस वक्त जयशंकर ने कहा था कि पिछले नौ महीने में यूरोपियन यूनियन ने जितना तेल खरीदा है, भारत ने उसका छठा हिस्सा ही खरीदा है.
जयशंकर ने ब्रिक्स पर क्या कहा?

क्या चीन और अमेरिका के बीच बढ़ रहे तनाव के मद्देनज़र ब्रिक्स देशों का उभार पश्चिम के लिए एक चुनौती है?
इस सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि ये ज़रूरी है कि ये देखा जाए कि ये सब शुरू कैसे हुआ.
उन्होंने समझाया, "ये ऐसे दौर में शुरू हुआ जब पश्चिम का दबदबा बेहद मज़बूत था. जी7 दुनिया की सात बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह था और कई ऐसे मुल्क थे जो ये अनुभव कर रहे थे कि वो जी7 का हिस्सा नहीं हैं लेकिन वो चर्चा में काफी कुछ सहयोग कर सकते हैं."
"ब्रिक्स ऐसे ही देशों का समूह है, क्योंकि इसमें शामिल देश भौगोलिक स्तर पर एक-दूसरे से काफी दूर-दूर हैं. लेकिन यहां होने वाली चर्चा के मुद्दों ने इन देशों को बांध रखा है."
उन्होंने कहा, "ये ज़रूरी है हम नॉन-वेस्ट और एंटी वेस्ट (पश्चिमी मुल्क न होना और पश्चिम का विरोधी होना) के बीच का फर्क समझें. भारत नॉन-वेस्ट है लेकिन पश्चिम के साथ उसके बेहद मज़बूत संबंध हैं जो वक्त के साथ मज़बूत होते जा रहे हैं. ज़रूरी नहीं है इस गुट के सभी सदस्यों पर ये लागू हो."
"रही ब्रिक्स की बात तो हमें जी7 के विकसित होकर जी20 बनने की प्रक्रिया को भी देखना होगा, मुझे लगता है कि एक तरह से अतिरिक्त 13 सदस्यों में से पांच ब्रिक्स सदस्य हैं. इन सदस्यों का मिलना, बात करना कहीं न कहीं जी20 के विकास में इससे मदद मिली है."
जयशंकर की बात पर ब्लिंकन का जवाब
ब्रिक्स दुनिया की पांच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों का एक समूह है. ये देश हैं ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका.
ये वो देश हैं जिनके बारे में कुछ जानकारों का मानना है कि साल 2050 तक वे विनिर्माण उद्योग, सेवाओं और कच्चे माल के प्रमुख सप्लायर यानी आपूर्तिकर्ता हो जाएंगे.
माना जाता है कि ब्रिक्स के ज़रिए रूस और चीन पश्चिम देशों के दबदबे को चुनौती देना चाहते हैं.
एंटनी ब्लिंकन ने जयशंकर की बात को नकारते हुए कहा कि हम ऐसी दुनिया नहीं चाहते जहां मुल्क अलग-अलग गुटों में बंटे हुए हों.
उन्होंने कहा, "सबके सामने अलग-अलग चुनौतियां हैं जो उनके अलग-अलग अनुभवों का स्रोत बनती हैं. ज़रूरी है कि हम मिलकर काम करें. "
जी-20, ऑकस और दूसरे गुटों में भारत और अमेरिका के साथ होने की बात का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "स्थिति की जटिलता को देखते हुए अलग-अलग उद्देश्यों को लेकर अलग-अलग गुटों में रहना ज़रूरी है. "
इसराइल-हमास मुद्दे पर क्या कहा?

चर्चा के दौरान एक मुद्दा मानवाधिकारों का भी उठा और सवाल किया गया कि पश्चिमी मुल्क ग़ज़ा में हो रही तबाही को देख रहे हैं, और मानवाधिकारों की बात कर रहे हैं. इस स्थिति में पश्चिमी मूल्य कहां हैं?
बेरबॉक ने कहा, "ये दोहरे मानदंड वाला सवाल है. ग़ज़ा में जो हो रहा है वो देखें, तो सच्चाई ये है हमें तुरंत युद्धविराम की ज़रूरत है ताकि वहां फंसे बच्चों को निकाला जा सके."
"इसका एक दूसरा पक्ष भी है. सात अक्तूबर के हमले में कई लोगों को अगवा किया गया, महिलाओं का बलात्कार कर उनकी हत्या कर दी गई. ऐसे में आपको समझना होता है कि जो लोग हमास के कब्ज़े में हैं उन्हें बचाना है."
"हम ये कह नहीं सकते कि इसराइल की सुरक्षा चिंताएं जस की तस बनी रहें और युद्धविराम को लेकर दबाव बनाया जाए. हम नहीं चाहेंगे कि एक बार फिर हमास खुद को संगठित करे और आम नागरिकों का इस्तेमाल मानव ढाल के रूप में करे."
वहीं एंटनी ब्लिंकन ने स्थिति की जटिलता की बात की और कहा कि हमें अमानवीय घटनाओं का भी विरोध करना चाहिए.
उन्होंने कहा, "हमारे लिए इसराइल की सुरक्षा अहम है, हम इसका समर्थन करते हैं. लेकिन हम ये भी चाहते हैं कि जिन लोगों को ज़रूरत है उन तक मदद पहुंचे और लोगों की जान बचाई जा सके."
जयशंकर ने इस मुद्दे पर भारत का रुख़ साफ करते हुए कहा, "इसे लेकर कोई संदेह नहीं है सात अक्तूबर को जो हुआ वो आतंकी हमला था. दूसरा, इसराइल की जवाबी कार्रवाई की बात करें तो उसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों को मानने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए."
उन्होंने कहा, "बंधकों को छुड़ाना बेहद अहम है, मानवीय कॉरिडोर की ज़रूरत है लेकिन इस मुद्दे का स्थायी हल निकाला जाना चाहिए."
उन्होंने टू स्टेट समाधान की बात की कहा कि ये विकल्प नहीं बल्कि ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, "कई और मुल्क भी इस बात से सहमत हैं और आज के दौर में ये जितनी जल्द हो सके उतना अच्छा."
रूस-यूक्रेन युद्ध का मुद्दा

बहुध्रुवीय विश्व के मुद्दे पर एनालेना बेरबॉक ने रूस-यूक्रेन युद्ध का ज़िक्र करते हुए कहा कि "हम जानते हैं कि दुनिया में ऐसे देश हैं जो खुद को मिले हिस्से से खुश नहीं हैं बल्कि उन्हें दूसरों का हिस्सा भी चाहिए."
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जो लोग बातचीत की मेज़ तक पहुंचे हैं वो सम्मान के साथ चर्चा करें और खुद के भीतर भी झांकें. इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानूनों का सभी को सम्मान करना चाहिए."
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि "इस तरह के कई सवाल उठे हैं कि जब हम मुश्किल में थे तो आप कहां थे" जिसके बाद यूरोप ने अपने रुख़ में बदलाव किया और ये समझा कि "सभी आपके साथ सहमत हों ये ज़रूरी नहीं. लेकिन ये ज़रूरी है कि इतिहास में जो हुआ उसे भूलकर हमें साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए."
अमेरिका-चीन संबंध
चीन के साथ जारी व्यापार विवाद और इस कारण बढ़े तनाव को लेकर हुए सवाल पर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने माना कि चीन के साथ अमेरिकी की प्रतिद्वंद्विता है.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा, "कई मुद्दे हैं जिन्हें लेकर हम चीन के साथ काम करने के इच्छुक हैं. मसलन फेटानिल का मामला, जिस पर हम चीन के साथ मिलकर काम कर रहे हैं."
उन्होंने कहा हम इस रिश्ते को ज़िम्मेदारी से निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. "बीते छह-सात महीनों में चीन के साथ हमारी लगातार बातचीत चल रही है. मुझे लगता है कि हमारे संबंधों में अब अधिक स्थिरता है."
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