कनाडा के चुनावों में विदेशी दखल के आरोपों पर सुनवाई, भारत और चीन भी सवालों के घेरे में

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- Author, नदीन यूसुफ़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''लिबरल पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालने के लिए कई चीनी हाई स्कूल छात्रों को बाध्य किया गया. चीन की तरफ से हज़ारों डॉलर नकद चुनावों में झोंके गए, लेकिन ये राशि कितनी थी इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है. भारत सरकार का एक प्रॉक्सी एजेंट कनाडा में भारत के समर्थन वाले राजनेताओं की अवैध तरीके से आर्थिक मदद कर रहा है.''
कनाडा चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की पब्लिक जांच के दौरान हुई गवाही में ऐसे ही कई और आरोप सामने आए. कनाडा में बीते दो सप्ताह से इस मामले में सुनवाई चल रही है.
अधिकारियों के अनुसार कनाडा की ख़ुफ़िया एजेंसी ने जांच समिति के सामने कई संशोधित दस्तावेज़ पेश किए हैं जिनमें ये आरोप लगाए गए हैं और इन दस्तावेज़ों को सावधानी से देखा जा रहा है.
कनाडाई सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस यानी सीएसआईएस ने चेतावनी दी है कि इस रिपोर्ट में अपुष्ट जानकारी हो सकती है जो या तो एक सूत्र के हवाले से हो या फिर पूरी न हो, या फिर जिसकी पूरी तरह से जांच ना की गई हो.
बीते कुछ वक्त में चीन और भारत पर कनाडा के मामलों में दखल देने के आरोप लगाए गए थे. हाल ही में भारत ने इन आरोपों को "बेबुनियाद" बताते हुए ख़ारिज किया.
लेकिन कुछ राजनेताओं का कहना है कि संभव है कि इस हस्तक्षेप का असर उनके राजनीतिक करियर पर पड़ा हो.

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रिपोर्ट कब पेश होगी?
जांच के दौरान कनाडा में रहने वाले अलग-अलग समुदायों के सदस्यों की गवाही हुई, जिसमें इन लोगों के खुद के देशों में सरकार से नाता रखने वाले एजेंटों से कथित तौर पर ख़तरा होने की जानकारी सामने आई.
जांच की अध्यक्षता कर रही क्यूबेक की जज मारी-जोसी हॉग ने सुनवाई के दौरान समुदाय के 40 सदस्यों, राजनेताओं और चुनाव अधिकारियों के बयान सुने.
अगले महीने ये जांच समिति अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.
बुधवार को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो समिति के समक्ष पेश होंगे. उन्होंने कहा है कि वो जांच समिति के सभी सवालों के जवाब देने के लिए "तैयार हैं."
हस्तक्षेप से कथित तौर पर प्रभावित लोगों ने अधिकारियों और सीएसआईएस अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि या तो वो इससे निपटने के लिए ज़रूरी कोशिश नहीं कर रहे हैं, या फिर वो उन्हें इस मामले में अंधेरे में रख रहे हैं.
कनाडा की अपनी ख़ुफ़िया एजेंसी ने कहा है कि सरकार इस मामले से निपटने के लिए जो कर रही है वो पर्याप्त नहीं है और वो "फ़ाइव आईज़" के अपने दूसरे सहयोगियों के मुक़ाबले पीछे रह गई है.
फ़ाइव आईज़- अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और कनाडा का गठबंधन है जो ख़ुफ़िया मामलों में जानकारी आपस में साझा करते हैं.

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जांच में अब तक किसने क्या कहा?
अब तक हुई गवाहियों और आंशिक तौर पर सार्वजनिक किए गए गोपनीय दस्तावेज़ों के अनुसार, कनाडा को उन कुछ तरीकों का पता चला है जिनके ज़रिए चीन या विदेशी सरकारों ने साल 2019 और 2022 के चुनावों में हस्तक्षेप करने की कोशिश शामिल हो सकती है.
अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि विदेशी हस्तक्षेप का असर चुनाव के नतीजों पर पड़ा था.
सीएसआईएस ने आरोप लगाया है कि चीनी सरकार ने "गुप्त रूप से और धोखा देकर" 2019 और 2022 के चुनावों में हस्तक्षेप किया था.
एजेंसी ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ये "व्यवहारिक हस्तक्षेप था जिसमें प्राथमिक तौर पर पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना के हितों को ध्यान में रखते हुए 'चीन समर्थक' या फिर चीन की तरफ 'न्यूट्रल' रुख़ रखने वालों को समर्थन देने की कोशिश की गई."
एजेंसी ने ये भी कहा, "ऑनलाइन और मीडिया में हमने ये पाया कि चीनी मूल के कनाडाई नागरिकों को कंज़र्वेटिव पार्टी के (पूर्व) नेता एरिन ओ'टूले का समर्थन ना करने के लिए कहा गया."
बीते सप्ताह एरिन ओ'टूले जांच समिति के सामने पेश हुए थे. उनका आरोप था कि फैलाई गई भ्रामक जानकारियों का उनके चुनाव अभियान पर असर पड़ा और इस कारण 2021 के चुनाव में उनकी पार्टी ने क़रीब नौ सीटें गंवा दीं.
उन्होंने कहा कि चुनाव के अंतिम नतीजों पर इसका असर नहीं हुआ लेकिन वो मानते हैं कि इस कारण उन्हें पार्टी के नेता के तौर पर अपना पद छोड़ना पड़ा.
इन चुनावों में पीएम जस्टिन ट्रूडो की लिबरल पार्टी को बहुमत मिला था.

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चीन पर क्या लगे हैं आरोप?
सीएसआईए की रिपोर्ट के अनुसार 2019 के चुनावों में चीन की तरफ से संभावित क़रीब दो लाख पचास हज़ार कनाडाई डॉलर (एक लाख 84 हज़ार अमेरिकी डॉलर) एक अज्ञात उम्मीदवार के कार्यकर्ता को दिए गए. इसके अलावा हस्तक्षेप की कोशिश में पैसे दूसरों को भी दिए गए.
एजेंसी का कहना है कि चीन ने 2019 में एक चार्टर्ड बस के लिए भी पैसों की व्यवस्था की. इस बस में चीनी निजी हाई स्कूल के छात्रों को लिबरल पार्टी के एक उम्मीदवार हान दोंग की मदद के लिए लाया गया था, ताकि वो अपनी पार्टी से उम्मीदवारी हासिल कर सकें.
सीएसआईएस का कहना है कि इन छात्रों को बाध्य किया गया कि अगर उन्होंने हान दोंग का समर्थन नहीं किया तो "उनका छात्र वीज़ा मुश्किल में पड़ सकता है और चीन में रहने वाले उनके परिजनों को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है."
हान दोंग अब एक निर्दलीय नेता हैं. उन्होंने अपने बयान में कहा कि उन्होंने चीनी छात्रों से मुलाक़ात की और उन्हें उत्साहित किया कि वो चुनाव अभियान के दौरान लिबरल पार्टी के सदस्यों के रूप में अपना नाम लिखवाएं.
हालांकि वो इस मामले में किसी तरह की साजिश से इनकार करते हैं.
वो कहते हैं कि कनाडा में पढ़ाई कर रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को लिबरल पर्टी के नामांकन में वोट देने की इजाज़त है, बशर्ते वो ये साबित करें कि वो उस चुनाव क्षेत्र में रहते हैं.

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भारत, पाकिस्तान पर आरोप
सीएसआईएस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान ने कनाडा के चुनावों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है.
भारत के मामले में एजेंसी ने कहा कि भारत सरकार के एक प्रॉक्सी एजेंट ने हरकतों को अंजाम दिया. उन्होंने "कुछ चुनाव क्षेत्रों में" भारत समर्थक उम्मीदवारों का समर्थन किया.
एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार- इस प्रॉक्सी एजेंट का मानना था, "भारतीय मूल के कुछ कनाडाई वोटर्स खालिस्तानी मूवमेंट या पाकिस्तान के प्रति झुकाव रखने वाले हैं."
इससे पहले कनाडाई पीएम ट्रूडो भारत सरकार पर भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल होने का आरोप लगा चुके हैं. निज्जर खालिस्तानी अलगाववादी नेता थे जिनकी हत्या जून 2023 में कनाडा में हुई थी. भारत ने ट्रूडो के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए ख़ारिज किया था.
वहीं सीएसआईएस की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप की कोशिशें "भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को कम करने का लिए था" और सीमित था.
जांच समिति के सामने दिए गए बयानों के अनुसार सीएसआईएस और दूसरे अधिकारियों को इन आरोपों की ख़बर थी लेकिन उन्होंने न तो आम लोगों को इसकी जानकारी दी गई और न ही निशाना बनाए गए नेताओं को इस बारे में चेतावनी दी गई.
एरिन ओ'टूले ने कहा कि उन्होंने 2021 के चुनावों में हस्तक्षेप को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी लेकिन उस वक्त इसे गंभीरता से नहीं लिया गया.
ट्रूडो की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नैटली ड्रोइन उस वक्त चुनावों में कथित हस्तक्षेप की समीक्षा कर रहे पैनल के आला अधिकारियों में शामिल थीं.
वो कहती हैं कि उस वक्त इस आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे कि चीन की हरकत कंज़र्वेटिव पार्टी के ख़िलाफ़ थी.
वो बोलीं, "इस बात का जोखिम था कि पैनल के किसी तरह के हस्तक्षेप से अच्छा होने की बजाय ज़्यादा बुरा हो जाता और असमंजस की स्थिति बढ़ती."
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
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