खालिस्तान को लेकर किसी समझौते के सवाल पर गुरपतवंत सिंह पन्नू ने क्या कहा

पन्नू

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा है कि उन्होंने हिंसा के लिए कभी नहीं उकसाया और न ही हिंसा का प्रचार किया. उन्होंने दावा किया कि वे भविष्य में भी ऐसा नहीं करेंगे.

हालाँकि, पिछले दिनों पन्नू ने सिखों को चेतावनी दी थी कि वे एयर इंडिया के विमानों से यात्रा न करें. इसे लेकर भारत में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पन्नू के ख़िलाफ़ एफ़आईआर भी दर्ज की है.

पन्नू पहले भी कई बार ऐसी धमकी दे चुके हैं. भारत की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एनआईए ने उनका नाम 'आतंकवादियों' की सूची में रखा है.

बीबीसी एशियन नेटवर्क से गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि "खालिस्तान रेफ़रेंडम कराने की नियति अगर मौत है, तो वे इसके लिए तैयार हैं."

हाल ही में अमेरिका ने ये दावा किया है कि भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने न्यूयॉर्क में अलगाववादी नेता की हत्या के लिए एक व्यक्ति को एक लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये) की सुपारी दी गई थी. अमेरिकी कोर्ट में पेश दस्तावेजों में दावा किया गया है कि "निखिल गुप्ता को भारत सरकार के एक कर्मचारी से निर्देश मिले थे."

'समझौते की गुंज़ाइश' के सवाल पर...

गुरपतवंत सिंह पन्नू

इमेज स्रोत, SOCIALMEDIA

मीडिया रिपोर्ट्स में निखिल गुप्ता की उम्र 52 साल बताई जा रही है.

कथित साज़िश के तहत किस अलगाववादी नेता की हत्या की जानी थी, उसकी जानकारी अमेरिकी अभियोजन पक्ष ने नहीं दी है, लेकिन भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, निशाने पर वकील और सिख अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू थे.

अमेरिका ने इस मामले को शीर्ष स्तर पर भारत के सामने उठाया है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान जारी कर कहा है कि "भारत इन आरोपों को गंभीरता से ले रहा है."

अरिंदम बागची
ANI
अमेरिकी पक्ष ने संगठित अपराधियों, आतंकवादियों, हथियारों के कारोबारियों और अन्य के नेक्सस के बारे में कुछ इनपुट साझा किए थे. भारत ने इनकी जांच के लिए विशेष जांच समिति गठित की है.
अरिंदम बागची
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

बागची ने कहा है, "हम पहले ही बता चुके हैं कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर वार्ता के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने कुछ इनपुट साझा किए थे जो संगठित अपराधियों, आतंकवादियों, हथियारों के कारोबारियों और अन्य के नेक्सस के बारे में थे. भारत ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच समिति गठित की है."

पन्नू ने बीबीसी एशियन नेटवर्क से बातचीत में कहा, "अमेरिकी और कनाडाई क़ानून लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हैं. मुझे यक़ीन है कि शहीद निज्जर की हत्या में जो कोई शामिल है या फिर जो मुझे मारने की कोशिश कर रहा है, चाहे वो भारतीय राजनयिक हैं या फिर रॉ के एजेंट हैं, उन्हें क़ानून का सामना करना होगा."

भारत के साथ क्या किसी तरह के समझौते की गुंज़ाइश है, इस सवाल पर पन्नू ने कहा, "हम सिर्फ़ एक सवाल पर काम कर रहे हैं. वह सवाल बैलेट के ज़रिए पूछा जाएगा और पंजाब के मूलनिवासियों को उसका जवाब देने दीजिए. इसके अलावा और कोई समझौता नहीं होगा."

पन्नू पर आतंकवाद के आरोप

खालिस्तान के समर्थन में जनमतसंग्रह की मांग वाली टीशर्ट

इमेज स्रोत, GETTYIMAGES

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अमेरिका में रहने वाले गुरपतवंत सिंह पन्नू 'सिख फ़ॉर जस्टिस' के संस्थापक और वकील हैं.

भारतीय पंजाब को ‘आज़ाद’ कराने और खालिस्तान के बैनर तले पंजाबियों को आत्मनिर्णय का अधिकार दिलाने के लिए पन्नू ने 'सिख फॉर जस्टिस' ने ‘रेफरेंडम-2020’ अभियान शुरू किया था.

इसके तहत पंजाब और दुनियाभर में रहने वाले सिखों को ऑनलाइन वोट करने के लिए कहा गया था, लेकिन वोटिंग से पहले ही भारत सरकार ने 40 वेबसाइटों को सिख फ़ॉर जस्टिस और खालिस्तान समर्थक बताकर बैन कर दिया था.

यह संगठन ख़ुद को मानवाधिकार संगठन बनाता है, लेकिन भारत इसे ‘आतंकवादी’ संगठन घोषित कर चुका है.

पन्नू की ओर से आए धमकी वाले वीडियो और फ़ोन कॉल्स को लेकर भारत की अलग-अलग क़ानूनी एजेंसियों के पास मामले दर्ज हैं. उन्हें जुलाई 2020 में भारत ने आतंकवादी घोषित किया था.

भारत के गृह मंत्रालय का कहना है कि पन्नू सीमा पार और विदेशी धरती से आतंकवाद की विभिन्न घटनाओं में शामिल हैं.

गृह मंत्रालय के मुताबिक़, पन्नू राष्ट्र विरोधी गतिविधियों और खालिस्तान मूवमेंट में शामिल हैं और पंजाब में आतंकवाद को पुनर्जीवित करने की कोशिश करते हुए देश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं.

इससे पहले गृह मंत्रालय ने 10 जुलाई 2019 को आतंकवाद रोधी क़ानून, यूएपीए के तहत 'सिख फ़ॉर जस्टिस' संगठन पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.

कनाडा में निज्जर की हत्या

पन्नू की धमकियां

इससे पहले कनाडा ने सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप लगाया था.

इस साल जून में कनाडा के वैंकूवर में सिख अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

सितंबर में कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा था कि निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के ‘विश्वसनीय आरोप’ हैं.

निज्जर

इमेज स्रोत, FB/VIRSA SINGH VALTOHA

इमेज कैप्शन, ख़ालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की जून में कनाडा में हत्या कर दी गई थी.

भारत ने इन आरोपों को बेबुनियाद और बेतुका बताया था. कुछ ऐसे क़दम भी उठाए थे जिनसे स्पष्ट हो रहा था कि दोनों देशों के रिश्ते बेहद ख़राब स्तर पर पहुंच गए हैं.

भारत ने दिल्ली में कनाडा के उच्चायोग में मौजूद राजनयिकों की संख्या को लेकर आपत्ति जताई थी. भारत का कहना था कि इनकी संख्या कनाडा स्थित भारतीय उच्चायोग में मौजूद भारतीय राजनयिकों से कम है.

कनाडा ने भारत के रुख़ को अंतरराष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन बताया था और अपने 41 राजनयिक वापस बुला लिए थे.

भारत ने कनाडा के लोगों के लिए ई-वीज़ा सर्विस भी रोक दी थी, जिसे हाल ही में दो महीने बाद बहाल किया गया है.

वीडियो कैप्शन, कनाडा,अमेरिका और ब्रिटेन से कैसे जुड़े थे खालिस्तान आंदोलन के तार

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)