कनाडा ने कहा- भारत से अभी कोई बातचीत नहीं होगी, जयशंकर ने पूछा- सबूत कहाँ है?

मेरी एनजी

इमेज स्रोत, JACK TAYLOR/AFP via Getty Images

कनाडा की वाणिज्य मंत्री मेरी एनजी ने बुधवार को कहा है कि जब तक भारत की मोदी सरकार हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले की जांच में सहयोग नहीं करता, तब तक व्यापार को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी.

सेन फ्रांसिस्को में हो रहे एशिया पैसिफ़िक आर्थिक सहयोग सम्मेलन के दौरान संवाददाताओं से बात करते हुए मेरी एनजी ने ये बात कही है.

इस दौरान एक पत्रकार से उनसे पूछा था कि क्या भारत और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर जो बातचीत रुक गई थी वो एक बार फिर शुरू हो रही है.

इस सवाल के उत्तर में कनाडाई वाणिज्य मंत्री ने कहा, "फ़िलहाल कनाडा का फोकस ये है कि वो निज्जर हत्या मामले की जांच को आगे बढ़ाए. आपने मुझे सुना और सरकार को भी सुना होगा कि ये जांच कितनी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक कनाडाई नागरिक को कनाडा की ज़मीन पर मारा गया है. हम जांच पूरी करेंगे."

मेरी एनजी ने कहा कि कनाडाई व्यापारी भारत के साथ व्यापार जारी रखेंगे और वाणिज्य मंत्री के रूप में उनका दायित्व है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके लिए ऐसा करने के ज़रूरी साधन आसानी से उपलब्ध हों.

इसी साल जून की 18 तारीख को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में हरदीप सिंह निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

45 साल के निज्जर दो एक गुरुद्वारे के पार्किंग स्पेस के नज़दीक दो नकाबपोश बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी.

ब्रिटिश कोलंबिया में रहने वाले प्रमुख सिख नेता निज्जर अलग खालिस्तान देश के मुखर समर्थक थे.

भारत निज्जर को चरमपंथी मानता है जो अलग खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादी समूह का नेतृत्व कर रहे थे.

हरदीप सिंह निज्जर

इमेज स्रोत, FB/VIRSA SINGH VALTOHA

इमेज कैप्शन, हरदीप सिंह निज्जर

कनाडा की वाणिज्य मंत्री ने और क्या कहा?

कनाडा की सीबीसी न्यूज़ वेबसाइट में छपी एक ख़बर के अनुसार, मेरी एनजी से एक सवाल ये पूछा गया कि क्या वो व्यापार को लेकर बातचीत शुरू करने के मामले को सीधे हरदीप सिंह निज्जर मामले की जांच से जोड़ रही हैं.

जवाब में मेरी एनजी से इससे इनकार किया और कहा कि उनका ध्यान जांच की तरफ़ है.

उन्होंने कहा, "ज़ाहिर बात है कि हमारा फोकस इस मामले की जांच है और ये काम पूरा होना ही चाहिए."

"कनाडा के व्यापारियों की बात करें तो हम उन्हें आश्वस्त करना चाहते हैं क्योंकि वो अपनी सरकार से कुछ उम्मीद करते हैं. वो उम्मीद करते हैं कि बिज़नेस चालू रखने, निवेश करने और निवेश आकर्षित करने के लिए उनके पास ज़रूरी साधन और व्यवस्थाएं हों, और कनाडा सरकार उनका साथ देने के लिए तैयार है."

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.

पोस्ट X समाप्त

भारत की प्रतिक्रिया

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

बुधवार को ही लंदन में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसका जवाब दिया और एक बार फिर कहा कि कनाडा भारत के साथ सबूत साझा करे.

लंदन के विल्सन पार्क में आयोजिक एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "हमने उन्हें पहले भी कहा है, अगर आपके पास इस तरह का आरोप लगाने का आधार है तो हमारे साथ सबूत साझा करें."

"हम जांच की बात से इनकार नहीं कर रहे हैं लेकिन हम देखना चाहते हैं कि उनके पास अपने आरोप के समर्थन में क्या सबूत हैं. उन्होंने अब तक हमारे साथ सबूत साझा नहीं किए हैं."

इस दौरान उनसे एक सवाल ये किया गया कि क्या निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के कोई सबूत प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर उनकी नज़र में आए हैं. इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं है.

उन्होंने कहा, "हमें लगता है कि कनाडा की राजनीति में हिंसक और ऐसी कट्टर राजनीतिक विचारधाराओं को जगह दी गई है जो भारत में अलगाववादी मांगों से जुड़े हैं."

उन्होंने कनाडा में भारतीय हाई कमिशन के सामने हिंसा की घटना और खालिस्तानी समर्थकों के 1985 में एयर इंडिया की उड़ान को बम धमाके से उड़ाने के मामले का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि "ये एक ऐसे देश की बात है जिसका पहले ऐसा इतिहास रहा है."

जस्टिन ट्रूडो

इमेज स्रोत, ANDREJ IVANOV/AFP via Getty Images

भारत-कनाडा व्यापार वार्ता रुकी

साल 2010 से कनाडा और भारत के बीच कंप्रिहेन्सिव इकॉनोमी पार्टरनशिप अग्रीमेन्ट को लेकर बातचीत चल रही है. रॉयटर्स के अनुसार बीते साल ये बातचीत औपचारिक तौर पर शुरू हुई.

लेकिन इसी साल सितंबर में कनाडा के लिए भारतीय हाई कमिश्नर ने कनाडाई मीडिया को बताया था कि कनाडा और भारत के बीच व्यापार को लेकर चल रही बातचीत रोक दी गई.

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के इसी साल सितंबर में हाउस ऑफ़ कॉमन्स में निज्जर का हत्या का मामला उठाने से पहले भारत और कनाडा के बीच मुफ़्त व्यापार समझौते को लेकर चल रही बातचीत को रोक दिया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, दो सितंबर को कनाडा ने बातचीत पर रोक के बारे में कहा था कि "कनाडा में हो रहे कुछ राजनीतिक हलचल पर भारत ने आपत्ति जताई है. इसलिए फ़िलहाल बातचीत को रोका जा रहा है, जब तक ये राजनीतिक मामले सुलझा नहीं लिए जाते बातचीत बंद रहेगी."

शुक्रवार को कनाडा के लिए भारतीय राजदूत संजय कुमार वर्मा ने कहा था कि "जब भी इस रोक को हटाकर बातचीत आगे बढ़ाने का फ़ैसला होगा, कुछ महीनों में बातचीत निष्कर्ष तक पहुंच जाएगी."

अब तक बातचीत के दस दौर हो चुके हैं. संजय कुमार वर्मा का कहना है कि उन्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि इस पर रुकी बातचीत कब तक शुरू हो सकती है.

इसके बाद अक्तूबर में बातचीत आगे बढ़ाने के लिए मेरी एनजी के नेतृत्व में भारत आने वाले प्रतिनिधिमंडल का दौरा रद्द कर दिया गया था.

जी 20 देशों के सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे जस्टिन ट्रूडो

इमेज स्रोत, ANDREJ IVANOV/AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, जी 20 देशों के सम्मेलन के लिए भारत पहुंचे जस्टिन ट्रूडो

बाद में ख़बर आई कि प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भारत जाकर भारतीय अधिकारियों से मुलाक़ात की है और उन्हें फ़ाइव आइज़ अलायंस पार्टनर के जुटाए सबूत सौंपे है.

कनाडा का दावा है कि इन दस्तावेज़ों में निज्जर ही हत्या से जुड़े सबूत हैं. कनाडा का आरोप है कि निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों का हाथ है.

फ़ाइव आइज़ अलायंस पांच देशों के बीच ख़ुफ़िया जानकारी साझा करने का एक समझौता है. ये पांच देश हैं- अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड.

भारत और कनाडा के बीच में साल 2022-23 में 8.16 अरब डॉलर का व्यापार हुआ था. अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार की तुलना में ये काफी कम है, 2022-23 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार 128.7 अरब डॉलर का था.

भारत कनाडा से पोटैश खरीदता है. कनाडा दुनिया में पौटैश का सबसे बड़ा निर्यातक है.

वहीं कनाडा भारत से दवाएं, कीमती धातु और पत्थर, कपड़े, दालें, लकड़ी, कागज़ और खनिज खरीदता है.

एस जयशंकर

इमेज स्रोत, ANI

भारत पर जांच में सहयोग न करने का आरोप

कनाडा का आरोप है कि भारत की मोदी सरकार निज्जर हत्या मामले की जांच में सहयोग नहीं कर रहा है

सेन फ्रांसिस्को में संवाददाताओं से बात करते हुए गुरुवार को जापान के लिए कनाडा के राजदूत इयान मैकके ने भी यही इशारा किया कि निज्जर हत्या मामले की जांच ख़त्म होने के बाद भारत और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर बातचीत शुरू होगी.

उन्होंने कहा, "एक बार ये प्रक्रिया पूरी हो जाए, उसके बाद हम उम्मीद करते हैं कि हम अधिक आश्वस्त और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ सकेंगे."

"मुझे लगता है कि जब हम इस मुद्दे से निपट रहे हैं हमें दूसरे मुद्दों पर काम को थाम लेना चाहिए, हमें ये पूरा करना चाहिए और इसके बाद हमें अपनी पूरी ऊर्जा कनाडा के साथ बड़ा व्यापार कर रहे सहयोगी के साथ मुफ़्त व्यापार समझौते को अंजाम देने की की तरफ लगाना चाहिए."

बीते दिनों कनाडा के सहयोगी और भारत के साथ बेहतर रिश्ते रखने वाले अमेरिका और यूके और भारत पर दबाव बनाते हुए कहा कि भारत को कनाडाई अधिकारियों की जांच में सहयोग करना चाहिए.

बीते शुक्रवार अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि कनाडा में हुई हत्या के मामले में चल रही आपराधिक जांच में भारत को सहयोग करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि उन्होंने भारत के अपने समकक्ष एस जयशंकर के साथ बातचीत में इस पर बात की है. उन्होंने कहा, "दोनों हमारे क़रीबी दोस्त हैं और हम चाहते हैं कि दोनों अपने सभी आपसी मतभेद और विवाद सुलझाएं."

भारत कनाडा

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

इससे पहले क्या-क्या हुआ

इससे पहले कनाडाई प्रधानमंत्री ने सितंबर में हाउस ऑफ़ कॉमन्स में निज्जर की हत्या का मामला उठाया और कहा कि उनकी हत्या के पीछे भारत सरकार का हाथ हो सकता है.

इसके बाद जी20 देशों के शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे जहां उन्होंने निज्जर की हत्या के मामले को निजी तौर पर उठाया था.

हालांकि भारत ने उनके इस आरोपों को "बेतुका" बताते हुए इन्हें सिरे से ख़ारिज कर दिया था.

लेकिन इन आरोपों का असर दोनों देशों के कूटनीतिक रिशतों पर पड़ा और भारत ने कहा कि वो भारत में मौजूद कुछ कनाडाई राजनयिकों को मिली सुरक्षा हटाएगा. नतीजनत कनाडा के 41 राजनयिकों को भारत छोड़ना पड़ा.

कनाडा के अधिकारियों ने भारत की इस चेतावनी को ‘अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन’ बताया था. लेकिन बारत का कहना था कि कनाडा में भारत के जितने राजनयिक हैं, कनाडा ने भारत में उससे कहीं ज़्यादा राजनयिक तैनात किए थे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

वीडियो कैप्शन, कनाडा की संसद में हंगामा, जस्टिन ट्रूडो को मांगनी पड़ी माफ़ी
वीडियो कैप्शन, छात्रों को वहां अब अपने भविष्य की चिंता सता रही है