भारतीय उच्चायुक्त को रोकने का मामला: गुरुद्वारा समिति ने की निंदा, पुलिस ने कहा जांच जारी

भारतीय उच्चायुक्त

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ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी को स्कॉटलैंड के एक गुरुद्वारे में प्रवेश से रोके जाने का मामला तूल पकड़ रहा है.

स्कॉटलैंड में ग्लास्गो के गुरुद्वारा गुरुग्रंथ साहिब सिख सभा ने भारतीय उच्चायुक्त दोरईस्वामी के साथ हुए व्यवहार की 'कड़ी निंदा' की है और कहा है कि पुलिस इस मामले की जांच कर रही है.

रिपोर्टों के मुताबिक विक्रम दोरईस्वामी को ग्लासगो के गुरु ग्रंथ साहिब गुरुद्वारा में प्रवेश करने से कुछ लोगों ने रोका जिसके बाद भारतीय उच्चायोग ने इसकी शिकायत ब्रितानी सरकार से की है.

भारतीय उच्चायोग ने इस घटना को 'अपमानजनक' और 'शर्मनाक' कहा है.

'सिख यूथ यूके' के सदस्यों ने गुरुद्वारा के अधिकारियों के साथ हुई अपनी बहस का वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट किया है जिसमें उनमें से कुछ लोग उच्चायुक्त की कार की तरफ़ बढ़ते और उन्हें वहां से जाने के लिए कहते हुए दिखाई दे रहे हैं.

ग्रुप ने बाद में कहा कि लंबे वक्त से भारतीय अधिकारियों के गुरुद्वारा आने पर रोक लगी हुई है.

विक्रम दुराईस्वामी की कार
इमेज कैप्शन, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही विक्रम दोरईस्वामी की कार गुरुद्वारे के सामने रुकी, कुछ लोग उनकी कार तक पहुंचे.

भारतीय उच्चायोग ने क्या कहा?

शनिवार को भारतीय उच्चायोग ने इस घटना को लेकर एक बयान जारी किया. इसे सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है.

इसमें कहा गया कि 29 सितंबर (शुक्रवार) को गुरुद्वारा कमिटी ने उच्चायोग, भारत के कॉन्सुल जनरल और समुदाय के लोगों के बीच चर्चा के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. इस कार्यक्रम में समुदाय के मुद्दों पर चर्चा होनी थी.

विक्रम दोरईस्वामी इसी कार्यक्रम में हिस्सा लेने गुरुद्वारा पहुंचे थे. लेकिन गुरुद्वारे के बाहर तीन लोगों ने उनका रास्ता रोका. बयान में कहा गया है कि ये तीनों स्कॉटलैंड से बाहर के थे.

बयान में इन्हें 'ग़ैर-स्थानीय अलगाववादी तत्व' कहा गया है. बयान में आगे कहा गया है कि उन्होंने आयोजकों के साथ बुरा व्यवहार किया और उन्हें धमकी दी. हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में इन्हें 'खालिस्तान समर्थक' कहा जा रहा है.

इसके बाद उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी और कॉन्सुल जनरल ने वहां से लौटने का फ़ैसला किया.

बयान के अनुसार उन्होंने जबरन विक्रम दोरईस्वामी की कार का दरवाज़ा खोलने की कोशिश की जिसके बाद आयोजकों को हस्तक्षेप करना पड़ा.

भारतीय उच्चायोग ने कहा है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में पुलिस के अलावा फ़ॉरेन एंड कॉमनवेल्थ डेवेलपमेन्ट ऑफ़िस को जानकारी दी गई है.

भारतीय उच्चायोग का बयान

घटना की निंदा

इंडो-पैसिफ़िक के लिए फ़ॉरेन एंड कॉमनवेल्थ डेवेलपमेन्ट ऑफ़िस की मंत्री एनी-मारी त्रिवेलान ने इस घटना की कड़ी निंदा की.

उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि "भारतीय उच्चायुक्त को गुरुद्वारा समिति के साथ बैठक करने से रोका गया, ये देखकर चिंतित हूं. विदेशी राजनयिकों की सुरक्षा हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण मामला है और यूके में हमारे पूजास्थल सभी के लिए खुले होने चाहिए."

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गुरुद्वारा समिति का बयान

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार ग्लासगो गुरुद्वारा समिति ने एक बयान जारी कर इस घटना की निंदा की है.

अपने बयान में समिति ने कहा, "स्कॉटलैंड संसद के एक सदस्य की गुज़ारिश पर 29 सितंबर को भारतीय उच्चायुक्त एक निजी यात्रा पर ग्लासगो गुरुद्वारे आए थे. इस दौरान कुछ अनजान लोगों ने उन्हें रोका जिसके बाद उन्हें लौट जाना पड़ा."

"उनके जाने के बाद भी इन उपद्रवी लोगों ने गुरुद्वारा समिति को परेशान करना जारी रखा. स्कॉटलैंड पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और हालात देखते हुए वो गुरुद्वारे में मौजूद रही."

"सिख पूजास्थल के शांतिपूर्ण कार्यक्रम में बाधा उत्पन्न करने के लिए ग्लासगो गुरुद्वारा इस घटना की कड़ी निंदा करता है. गुरुद्वारा हर समुदाय और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला है. वो अपने धार्मिक विश्वास के आधार पर हर किसी का खुले मन से स्वागत करता है."

ग्लासगो गुरुद्वारा का बयान

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गुरुद्वारा समिति के अलावा सामुदायिक नेताओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से अपील की है कि मामले में दोषियों को पकड़ कर सज़ा दी जाए.

वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि पूजास्थल में तनाव बढ़ने की वजह से उन्हें दोपहर क़रीब एक बजे बुलाया गया था. पुलिस ने कहा है कि अभी मामले की जांच चल रही है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार स्कॉटलैंड पुलिस के प्रवक्ता कहा है कि "मामले में किसी के घायल होने की कोई रिपोर्ट नहीं है. स्थिति का पूरा आकलन करने के लिए फिलहाल पूछताछ जारी है."

ग्लासगो गुरुद्वारा के सामने

कनाडा के आरोपों को लेकर पहले ही तनाव

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ये मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब कनाडा के साथ भारत के राजनयिक संबंध बुरे दौर से गुज़र रहे हैं.

कुछ दिन पहले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टन ट्रूडो ने भारत पर आरोप लगाया कि कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारतीय एजेंटों का हाथ हो सकता है.

भारत सरकार ने इन आरोपों को 'बेतुका और प्रेरित' बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि अगर कनाडा के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं तो वे इन्हें भारत के साथ साझा करे.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार यूके में सिख समुदाय के क़रीब पांच लाख लोग रहते हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा स्कॉटलैंड में है.

इसी साल सेंट्रल लंदन में खलिस्तानी समर्थकों ने भारतीय उच्चायोग में लगे तिरंगे को उतारने की कोशिश की थी जिसके बाद भारत ने औपचारिक तौर पर ब्रिटेन से इसकी शिकायत की थी और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा उठाया था.

हाल के दिनों में स्कॉटलैंड के एक सिख ब्लॉगर जगतार सिंह जोहाल की रिहाई की मुहिम चलाई जा रही है.

जगतार बीते पांच साल से भारत में जेल में बंद हैं. उन पर 'दक्षिणपंथी हिंदू नेताओं के ख़िलाफ़ आतंकी साजिश करने का और हत्या की साजिश रचने का आरोप है.'

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